Attitude Shayari on Betrayal
धोखे ने मेरी मासूमियत कम की,
लेकिन मेरी समझ बढ़ा दी।
मैंने उस दर्द को दिल में नहीं बसाया,
उसे अनुभव बनाकर आगे बढ़ गया।
धोखा मिला तो एहसास हुआ,
कि आत्मसम्मान सबसे भरोसेमंद साथी है।
मैं टूटा ज़रूर था,
मगर बिखरना मैंने नहीं चुना।
धोखे ने रिश्तों की भीड़ से निकालकर,
मुझे सच्चाई की पहचान कराई।
मैंने हर सवाल का जवाब नहीं माँगा,
कुछ जवाब दूरी ने दे दिए।
धोखा एक घाव था,
लेकिन वही मेरे भीतर की ताक़त भी बना।
मैंने भरोसा करना नहीं छोड़ा,
बस उसे समझदारी से बाँटना सीख लिया।
धोखे के बाद मैंने ख़ुद को दोष नहीं दिया,
मैंने ख़ुद को और बेहतर समझा।
मैंने दर्द को अपने व्यक्तित्व पर हावी नहीं होने दिया।
धोखा देने वाला मेरी कहानी का हिस्सा था,
मेरी पूरी कहानी नहीं।
मैंने कड़वाहट को पकड़कर नहीं रखा,
क्योंकि मुझे आगे बढ़ना था।
धोखे ने मुझे यह सिखाया,
कि हर रिश्ता निभाने के लिए नहीं आता।
मैं पहले जैसा सरल हूँ,
बस अब सीमाएँ स्पष्ट हैं।
धोखा मिलने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह था,
कि मैंने ख़ुद की क़ीमत और गहराई से समझी।
मैंने टूटे भरोसे पर रोना बंद किया,
और अपने भविष्य पर काम करना शुरू किया।
धोखा एक कठिन मोड़ था,
मगर उसने मेरी दिशा नहीं बदली।
मैंने अतीत से लड़ाई नहीं की,
बस उससे सीख लेकर आगे निकल गया।
धोखे ने मेरा दिल कठोर नहीं किया,
बस उसे समझदार बना दिया।
मेरी सबसे बड़ी जीत यह है,
कि दर्द के बाद भी मैंने अपने भीतर की अच्छाई बचाकर रखी।
धोखे ने मुझे लोगों से दूर नहीं किया,
बस ख़ुद के और क़रीब ला दिया।
मैंने टूटे हुए भरोसे को बोझ नहीं बनाया,
उसे समझदारी में बदल लिया।
धोखा दर्द देकर गया था,
मगर जाते-जाते पहचान भी दे गया।
मैंने शिकायतों को लंबा नहीं चलने दिया,
आत्मसम्मान को आगे कर दिया।
धोखा मिलने के बाद समझ आया,
कि हर मुस्कान अपनापन नहीं होती।
मैंने उस दर्द को छुपाया नहीं,
उसी से ख़ुद को मज़बूत बनाया है।
धोखे ने मेरा भरोसा नहीं छीना,
बस उसे सही जगह खर्च करना सिखाया।
मैं अब पहले जैसा नहीं हूँ,
लेकिन पहले से ज़्यादा स्पष्ट हूँ।
धोखा एक घटना थी,
मैंने उसे अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
मैंने खोया बहुत कुछ था,
मगर ख़ुद को बचाकर रख लिया।
धोखे के बाद सबसे बड़ी जीत यह थी,
कि मैंने कड़वाहट को दिल में जगह नहीं दी।
मैंने हर टूटन से एक सबक लिया,
और हर सबक ने मुझे बेहतर बनाया।
धोखा देने वाला चला गया,
मगर आत्मसम्मान मेरे साथ रहा।
मैंने पीछे मुड़कर जवाब नहीं ढूँढ़े,
आगे बढ़कर सुकून ढूँढ़ लिया।
धोखे ने सिखाया कि भरोसा क़ीमती है,
इसीलिए अब उसे समझदारी से देता हूँ।
मैंने दर्द को कहानी का अंत नहीं बनने दिया,
उसे नया अध्याय बना दिया।
धोखे के बाद भी मुस्कुराना आसान नहीं था,
लेकिन वहीं से मेरी मज़बूती शुरू हुई।
मैं अब लोगों को बदलने की कोशिश नहीं करता,
बस अपनी सीमाएँ स्पष्ट रखता हूँ।
धोखा मुझे कमज़ोर करने आया था,
मगर मुझे और परिपक्व बना गया।
मैंने उस अनुभव को भुलाया नहीं,
बस उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
धोखे का सबसे बड़ा जवाब बदला नहीं,
बेहतर जीवन है।
मैंने भरोसे की क़ीमत समझी है,
क्योंकि उसे टूटते हुए देखा है।
धोखे ने मेरी सोच को गहरा किया,
और मेरी उम्मीदों को संतुलित।
मैंने दर्द को सम्मान दिया,
क्योंकि उसी ने मुझे पहचान दी।
धोखा मिलने के बाद मैं बंद नहीं हुआ,
बस थोड़ा समझदार हो गया।
मैंने अपने घावों को छुपाया नहीं,
उन्हें भरने का समय दिया।
धोखे ने यह सिखाया कि हर रिश्ता स्थायी नहीं,
लेकिन आत्मसम्मान हमेशा साथ रह सकता है।
मैंने अतीत को सज़ा नहीं दी,
बस उससे सीख लेकर आगे बढ़ गया।
धोखा एक कठिन शिक्षक था,
मगर उसके सबक बहुत क़ीमती निकले।
मेरी सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि मैं संभल गया,
बल्कि यह है कि मैं अब भी अच्छे दिल से जी रहा हूँ।