मैंने तुम्हें खोने के बाद
ये नहीं सीखा कि प्रेम ग़लत था,
मैंने सीखा कि
ख़ुद को खो देना ग़लत था।
तुम्हारे जाने से दर्द हुआ,
मगर उस दर्द ने
मुझे मेरी अपनी अहमियत भी याद दिलाई।
पहले मैं रिश्ता बचाने में लगा था,
अब अपनी शांति बचाने लगा हूँ।
जो इंसान मेरी ख़ामोशी तक न समझ सके,
उसे मेरे शब्द समझाने की ज़िम्मेदारी भी मेरी नहीं।
मैंने तुम्हें जाने दिया,
क्योंकि कुछ लोगों को रोकना
अपने सम्मान को रोकने जैसा होता है।
तुम्हारे बाद
मैंने आईने में ख़ुद को देखा,
और पहली बार
अपने लिए भी महसूस किया।
अब मुझे किसी के साथ रहने से पहले
अपने साथ ठीक रहना ज़रूरी लगता है।
मैं टूटा था,
लेकिन टूटकर भी
अपनी क़ीमत कम नहीं होने दी।
कुछ रिश्ते हमें
मंज़िल नहीं देते,
लेकिन रास्ता ज़रूर दिखा जाते हैं।
तुम्हारी याद आज भी है,
मगर अब वो मेरी कमजोरी नहीं,
मेरे अनुभव का हिस्सा है।
मैंने इंतज़ार करना छोड़ दिया,
क्योंकि जो लोग रुकना चाहते हैं,
उन्हें मनाना नहीं पड़ता।
पहले मैं हर कमी
अपने भीतर ढूँढ़ता था,
अब समझता हूँ
कि हर रिश्ता सिर्फ़ एक इंसान की वजह से नहीं टूटता।
मैंने ख़ुद को फिर से बनाया है,
उन टुकड़ों से
जो कभी तुम्हारे जाने पर बिखर गए थे।
अब अगर कोई मेरा साथ चाहे,
तो मेरी मौजूदगी की क़द्र करके चाहे,
मेरी उपलब्धता देखकर नहीं।
तुम्हारे बाद मैंने जाना
कि आत्मसम्मान और मोहब्बत
एक-दूसरे के दुश्मन नहीं,
साथ चलने वाले साथी हैं।
मैं आज भी नरम दिल हूँ,
बस अब हर किसी को
अपने दिल तक पहुँच नहीं देता।
जो रिश्ता मुझे
हर दिन थका दे,
उससे दूर होना हार नहीं होती।
मैंने दर्द को बहाना नहीं बनाया,
उसे सीढ़ी बना लिया।
अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो अफ़सोस कम
और सीख ज़्यादा दिखाई देती है।
तुम्हारे जाने ने
मुझे अकेला ज़रूर किया,
लेकिन ख़ुद से मिलवा भी दिया।
पहले मैं किसी के साथ
पूरा होना चाहता था,
अब मैं ख़ुद पूरा होकर
किसी का साथ चाहता हूँ।
मैंने तुम्हें दोष देना छोड़ दिया,
क्योंकि मेरा भविष्य
मेरी नाराज़गी से बड़ा है।
अब मेरी ख़ुशी
किसी के आने-जाने पर नहीं,
मेरी अपनी समझ पर टिकी है।
कुछ लोग छोड़कर चले जाते हैं,
और उसी दिन हमें
अपनी असली ताक़त का पता चलता है।
मैं आज भी प्रेम पर यक़ीन रखता हूँ,
बस अब उसमें
अपनी इज़्ज़त को भी शामिल रखता हूँ।
और शायद परिपक्वता का
सबसे सुंदर रूप यही है—
दिल में किसी के लिए कड़वाहट न हो,
लेकिन ख़ुद के लिए
समझौता भी न हो।
मैंने तुम्हें खोया है,
लेकिन उसके बाद
ख़ुद को पाना शुरू किया है।
तुम्हारे जाने का दुख अपनी जगह है,
मगर अब मेरी पूरी ज़िंदगी
उस दुख के इर्द-गिर्द नहीं घूमती।
पहले मैं हर बात पर
तुम्हारा इंतज़ार करता था,
अब मैं अपने फ़ैसलों का इंतज़ार करता हूँ।
जिस रिश्ते में
मुझे बार-बार अपनी अहमियत बतानी पड़े,
वहाँ चुपचाप चले जाना बेहतर है।
मैंने तुम्हें रोकने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि प्रेम में आग्रह हो सकता है,
मगर आत्मसम्मान की क़ीमत पर नहीं।
तुम्हारे बाद समझ आया
कि अकेले रहना
ग़लत साथ में रहने से बेहतर है।
मैं आज भी भावुक हूँ,
बस अब अपनी भावनाओं का
ग़ुलाम नहीं हूँ।
तुम्हारे जाने से
मेरी कहानी ख़त्म नहीं हुई,
बस उसका एक अध्याय पूरा हुआ।
मैंने दर्द को छुपाया नहीं,
उसे समझा,
और वहीं से मज़बूत होना सीखा।
अब मुझे किसी के लौटने से ज़्यादा
अपने आगे बढ़ने की फ़िक्र है।
जो इंसान मेरी मौजूदगी की क़दर न करे,
उसकी कमी में ख़ुद को खोना
मुझे मंज़ूर नहीं।
तुम्हारे बाद मैंने
अपने सपनों को फिर से उठाया,
जो रिश्ते की भीड़ में कहीं छूट गए थे।
मैंने नफ़रत को जगह नहीं दी,
क्योंकि वह भी
दिल का बहुत महँगा हिस्सा घेर लेती है।
अब अगर कोई मेरे जीवन में आए,
तो मेरे साथ चले,
मुझे बदलने नहीं।
तुम्हें खोकर
मैंने सीखा कि
हर बिछड़न बदकिस्मती नहीं होती।
पहले मैं लोगों को बचाने में लगा था,
अब अपनी शांति बचाता हूँ।
मैंने ख़ुद को चुना,
और यह फ़ैसला
किसी भी रिश्ते से ज़्यादा कठिन था।
तुम्हारी याद आती है,
मगर अब वह मुझे रोकती नहीं,
सिर्फ़ मेरी यात्रा याद दिलाती है।
कुछ रिश्ते टूटते नहीं,
वे हमें हमारी असली क़ीमत सिखाकर चले जाते हैं।
मैं आज भी वही इंसान हूँ,
बस अब अपने लिए भी
उतना ही खड़ा रहता हूँ
जितना दूसरों के लिए खड़ा रहता था।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने जाना कि
मज़बूत लोग वो नहीं होते
जिन्हें दर्द नहीं होता,
बल्कि वो होते हैं
जो दर्द के बावजूद आगे बढ़ते हैं।
अब मैं किसी को खोने से नहीं डरता,
ख़ुद को खोने से डरता हूँ।
जिस दिन मैंने
अपनी ख़ामोशी को कमज़ोरी समझना छोड़ा,
उसी दिन मेरी ताक़त शुरू हुई।
मैंने तुम्हें माफ़ किया,
ख़ुद को भी,
क्योंकि आगे बढ़ने के लिए
दोनों ज़रूरी थे।
अब मेरी ख़ुशी
किसी एक इंसान पर निर्भर नहीं,
मेरी अपनी मेहनत और समझ पर है।
और शायद आत्मसम्मान का
सबसे सच्चा रूप यही है—
दिल में मोहब्बत बाकी रहे,
मगर अपने लिए सम्मान
उससे भी ज़्यादा बाकी रहे।
जिस दिन समझ आया
कि किसी को रोकने से
रिश्ते नहीं बचते,
उसी दिन मैंने ख़ुद को चुन लिया।
तुम्हारे जाने का दुख है,
मगर अपने खो जाने का नहीं,
मैंने मोहब्बत की थी,
अपनी पहचान नहीं छोड़ी थी।
अब तुम्हारी कमी से ज़्यादा
अपनी क़ीमत समझ आने लगी है।
मैंने तुम्हें जाने दिया,
क्योंकि जो साथ रहने के लिए मनाना पड़े,
वो साथ नहीं कहलाता।
तुम्हारे बाद मैं टूटा ज़रूर,
मगर बिखरा नहीं,
मैंने अपने दर्द को
अपनी ताक़त बना लिया।
कुछ रिश्ते बच जाते हैं,
कुछ सबक़ बन जाते हैं,
तुम शायद मेरा सबसे बड़ा सबक़ थे।
अब मैं किसी के लौटने की दुआ नहीं करता,
मैं बस इतना चाहता हूँ
कि ख़ुद से कभी दूर न हो जाऊँ।
तुम्हें खोने के बाद
मैंने जाना कि
आत्मसम्मान भी प्रेम जितना ज़रूरी होता है।
मैंने इंतज़ार करना छोड़ दिया,
क्योंकि ज़िंदगी उन लोगों के लिए नहीं रुकती
जो जाने का फ़ैसला कर चुके हों।
तुम्हारे जाने से
मेरी दुनिया छोटी नहीं हुई,
बस उसमें कुछ लोगों की जगह बदल गई।
पहले मैं रिश्ते बचाने में लगा था,
अब ख़ुद को बचाने लगा हूँ।
तुम्हारे बिना जीना मुश्किल था,
लेकिन अपने बिना जीना उससे भी मुश्किल होता।
मैं आज भी तुम्हारे बारे में
बुरा नहीं सोचता,
क्योंकि मेरी शख़्सियत
मेरे दर्द से बड़ी है।
कुछ दरवाज़े मैंने ख़ुद बंद किए,
क्योंकि हर खुला दरवाज़ा
घर तक नहीं ले जाता।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद पर काम करना शुरू किया,
और पाया कि
मैं किसी के जाने से कम नहीं हो जाता।
अब अगर कोई मेरा साथ चाहे,
तो मेरी क़ीमत समझकर चाहे,
खाली जगह भरने के लिए नहीं।
मैंने मोहब्बत हारी है,
ख़ुद को नहीं।
जो रिश्ता मुझे हर दिन
अपनी अहमियत साबित करने पर मजबूर करे,
उससे दूर होना ही बेहतर है।
अब मैं पीछे मुड़कर नहीं देखता,
क्योंकि मेरी मंज़िल
मेरे अतीत में नहीं है।
तुम्हारा न होना दुख देता है,
लेकिन अपना होना
मुझे संभाल लेता है।
मैं बदल गया हूँ,
कड़वा नहीं हुआ,
बस अब ख़ुद को भूलकर
किसी को चाहना नहीं आता।
कुछ लोग छोड़कर चले जाते हैं,
और उसी दिन हमें
अपनी ताक़त का पता चलता है।
अब मैं रिश्तों में
सिर्फ़ प्रेम नहीं ढूँढ़ता,
सम्मान भी ढूँढ़ता हूँ।
तुम्हारे जाने ने
मुझे कमज़ोर नहीं किया,
बस मेरी आँखें खोल दीं।
और शायद आगे बढ़ने का
सबसे सुंदर तरीका यही है—
किसी के लिए दिल में नफ़रत न रखना,
लेकिन ख़ुद को फिर कभी
आख़िरी पायदान पर न रखना।