कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं,
लेकिन उनसे जुड़ी आदतें बहुत देर तक रहती हैं,
मैंने तुम्हें नहीं,
सबसे पहले उन आदतों को खोया था।
तुमसे आख़िरी मुलाक़ात में
कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ था,
बस इतना महसूस हुआ
कि अब हम दोनों एक-दूसरे को समझने की जगह
समझाने लगे थे।
पहले तुम्हारे साथ भविष्य की बातें होती थीं,
फिर धीरे-धीरे वर्तमान भी कम पड़ने लगा,
और जब रिश्ते वर्तमान में साँस लेना छोड़ दें,
तो भविष्य ज़्यादा दूर नहीं टिकता।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने कई बार ख़ुद से पूछा,
क्या सच में सब ख़त्म हो गया?
फिर एक दिन जवाब मिला,
रिश्ता ख़त्म हुआ है, यादें नहीं।
सबसे मुश्किल काम तुम्हें छोड़ना नहीं था,
सबसे मुश्किल काम ये मानना था
कि जिस इंसान को मैं अपना ठिकाना समझता था,
वो भी एक दिन राहगीर निकल सकता है।
अब जब पुराने संदेश पढ़ता हूँ,
तो दुख कम होता है,
हैरानी ज़्यादा होती है
कि कभी दो लोग एक-दूसरे के लिए
इतने ज़रूरी हुआ करते थे।
तुम्हारे बाद मैंने लोगों पर भरोसा करना नहीं छोड़ा,
बस भरोसा करने से पहले
वक़्त को अपना काम करने देना सीख लिया।
हम दोनों की कहानी में
मोहब्बत कम नहीं थी,
शायद बस उसे निभाने की ताक़त
एक जैसी नहीं थी।
कभी-कभी किसी की कमी
उसकी मौजूदगी से नहीं मापी जाती,
बल्कि उन पलों से मापी जाती है
जहाँ उसका नाम अनजाने में याद आ जाए।
तुम्हारे जाने का दुख धीरे-धीरे कम हुआ,
लेकिन तुम्हारे साथ देखे गए सपनों की राख
काफ़ी समय तक भीतर पड़ी रही।
मैंने तुम्हें रोकने के बारे में भी सोचा था,
मगर फिर लगा,
जो रिश्ता मनाने से बचे,
वही सच में बचा हुआ रिश्ता होता है।
पहले मैं हर टूटन को हार समझता था,
फिर जाना,
कुछ बिछड़नें हार नहीं,
दिशा बदलने वाली घटनाएँ होती हैं।
तुमसे जुड़ी सबसे ख़ूबसूरत बात ये नहीं थी
कि तुम मेरे साथ थे,
बल्कि ये थी
कि तुम्हारे साथ मैं ख़ुद जैसा महसूस करता था।
अब अगर कभी तुम्हारा ज़िक्र आता है,
तो मैं बात बदलता नहीं,
क्योंकि कुछ यादों से भागने पर
वो और देर तक पीछा करती हैं।
एक समय था
जब तुम्हारे बिना भविष्य अधूरा लगता था,
आज भविष्य है,
बस उसमें तुम्हारा नाम नहीं है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने अकेले चाय पीना सीखा,
अकेले घूमना सीखा,
और सबसे ज़रूरी,
अकेले ख़ुश रहना भी सीखा।
रिश्ता टूटने के बाद
मैंने ये समझा कि
साथ होना और साथ निभाना,
दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
तुम्हारी याद अब अचानक नहीं आती,
वो मौसम की तरह आती है,
कुछ देर ठहरती है,
फिर चुपचाप चली जाती है।
कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर हम थोड़ा और धैर्य रखते,
तो शायद कहानी बदल जाती,
फिर समझ आता है,
जो बातें "शायद" पर टिकी हों,
वो अक्सर बचती नहीं।
तुमने मुझे दर्द दिया या सीख,
ये तय करना मुश्किल है,
क्योंकि दोनों इतने साथ आए
कि अलग-अलग पहचानना कठिन हो गया।
मैं अब भी उस इंसान का सम्मान करता हूँ
जिसे कभी मैंने पूरे दिल से चाहा था,
भले ही हमारी राहें
अब एक-दूसरे से बहुत दूर हैं।
तुम्हारे बाद मुझे एहसास हुआ
कि मोहब्बत सिर्फ़ पाने में नहीं,
कभी-कभी जाने देने में भी होती है।
हर रिश्ता उम्र भर के लिए नहीं बनता,
कुछ रिश्ते बस इतना करने आते हैं
कि हमें अपने बारे में
कुछ नई बातें पता चल जाएँ।
अब मैं तुम्हें याद करके टूटता नहीं,
बस कुछ देर के लिए ठहर जाता हूँ,
जैसे कोई पुराना रास्ता दिख जाए
जिस पर कभी रोज़ चला करता था।
सबसे बड़ी सच्चाई यही निकली,
कि हम दोनों बुरे लोग नहीं थे,
बस एक-दूसरे के लिए
आख़िर तक सही लोग नहीं रह पाए।
आज भी तुम्हारी याद में उदासी नहीं,
एक शांति-सी महसूस होती है,
क्योंकि कुछ कहानियाँ भले पूरी न हों,
उनका असर हमेशा पूरा रहता है।
कभी लगता था कि हमारा रिश्ता बहुत मज़बूत है,
फिर एक दिन एहसास हुआ,
मज़बूत रिश्ता और लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता
हमेशा एक ही बात नहीं होते।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने तुम्हें कम और ख़ुद को ज़्यादा समझना शुरू किया,
शायद हर बिछड़ना
किसी और से पहले अपने बारे में सिखाता है।
सबसे ज़्यादा दुख इस बात का नहीं था
कि तुम साथ नहीं रहे,
दुख इस बात का था कि
जिस यक़ीन पर मैंने घर बनाया था,
वो यक़ीन ही धीरे-धीरे बदल गया।
अब भी कुछ लम्हे ऐसे आते हैं
जब तुम्हारी याद अचानक चली आती है,
लेकिन पहले जैसी बेचैनी नहीं होती,
जैसे कोई पुरानी किताब मिल जाए
जिसे पढ़कर कभी बहुत कुछ महसूस हुआ था।
हम दोनों ने कोशिश की थी,
ये बात मैं आज भी मानता हूँ,
बस कभी-कभी कोशिशें भी
दो लोगों को एक रास्ते पर नहीं रख पातीं।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा,
हर अधूरी कहानी नाकामी नहीं होती,
कुछ रिश्ते अपने अंत से नहीं,
अपने असर से याद रखे जाते हैं।
पहले मुझे लगता था
तुम्हें खो दिया है,
फिर समझ आया,
कुछ लोग पूरी तरह खोते नहीं,
वो हमारी सोच का हिस्सा बन जाते हैं।
तुमसे जुड़ी यादों को मिटाने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि जो सच में जिया गया हो,
उसे मिटाना नहीं,
समझना ज़रूरी होता है।
कभी-कभी मैं उस आख़िरी दौर के बारे में सोचता हूँ,
जब हम दोनों साथ तो थे,
मगर पहले जैसे नहीं थे,
शायद रिश्ता वहीं ख़त्म होना शुरू हो गया था।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को दोष भी दिया,
तुम्हें भी समझने की कोशिश की,
और आख़िर में ये जाना
कि हर टूटन का कोई एक दोषी नहीं होता।
अब तुम्हारा नाम सुनकर
मन में शिकायत नहीं उठती,
बस एक हल्की-सी दूरी महसूस होती है,
जैसे कोई शहर
कभी अपना हुआ करता था।
मैंने तुम्हें रोकने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि प्यार अगर सिर्फ़ पकड़कर रखने का नाम होता,
तो शायद दुनिया में कोई बिछड़ता ही नहीं।
कुछ रिश्ते ख़त्म होने के बाद
नफ़रत नहीं छोड़ते,
बस एक ख़ाली जगह छोड़ जाते हैं,
जिसे भरने में नहीं,
स्वीकार करने में वक़्त लगता है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
आज भी मेरी यादों में हैं,
मगर अब मैं उन्हें पकड़कर नहीं बैठता,
क्योंकि गुज़रे हुए मौसम
वापस नहीं आते।
पहले मैं सोचता था
तुम लौट आओ,
अब सोचता हूँ
जिसे जाना था,
उसे जाने देना ही सही था।
तुम्हारी कमी ने मुझे सिखाया
कि अपना सहारा ख़ुद बनना कितना ज़रूरी है,
क्योंकि हर दर्द के बाद
कोई साथ देने वाला नहीं मिलता।
हमारी कहानी का अंत
मेरी उम्मीद जैसा नहीं था,
मगर अब मुझे उससे शिकायत नहीं,
क्योंकि हर कहानी का सुंदर होना ज़रूरी नहीं,
सच्चा होना ज़रूरी है।
कई बार इंसान व्यक्ति को नहीं,
उस एहसास को याद करता है
जो उसकी मौजूदगी से जुड़ा होता है,
मुझे शायद वही एहसास सबसे ज़्यादा याद आता है।
तुम्हारे जाने के बाद
ज़िंदगी रुक नहीं गई,
लेकिन कुछ समय तक
हर नई शुरुआत अधूरी-सी लगी थी।
अब मैं तुम्हें याद करके उदास नहीं होता,
बस ये सोचता हूँ
कि हम दोनों ने एक-दूसरे की ज़िंदगी में
एक पूरा अध्याय लिखा था।
सबसे बड़ी राहत उस दिन मिली
जब मैंने ये मान लिया
कि हर सवाल का जवाब मिलना ज़रूरी नहीं,
कुछ जवाब समय ख़ुद बन जाता है।
तुम्हें भूलना मेरा मक़सद कभी नहीं था,
बस तुम्हारी याद के साथ
सुकून से जीना सीखना था,
और शायद अब मैं सीख चुका हूँ।
आज अगर कोई पूछे
क्या अब भी मोहब्बत है,
तो मैं कहूँगा—
मोहब्बत से ज़्यादा सम्मान है,
उन दिनों के लिए
जो कभी हमारे थे।
तुम मेरे आज में नहीं हो,
लेकिन मेरे अनुभवों में हो,
और कुछ लोग
यहीं सबसे लंबे समय तक रहते हैं।
रिश्ते का ख़त्म होना
हमेशा मोहब्बत का ख़त्म होना नहीं होता,
कभी-कभी बस साथ चलने की वजहें ख़त्म हो जाती हैं।
अब पीछे मुड़कर देखता हूँ
तो दर्द भी दिखता है और सीख भी,
और शायद यही किसी बिछड़न की
सबसे ईमानदार याद होती है।