तुम्हारे बाद मैंने
बहुत कुछ भूलना सीखा,
मगर तुम्हारा असर
कभी भूल नहीं पाया।
हिज्र का दर्द
हर वक़्त महसूस नहीं होता,
मगर कुछ ख़ामोश लम्हे
उसे फिर ज़िंदा कर देते हैं।
तुम्हारे साथ जो रिश्ता था,
वो सिर्फ़ मोहब्बत नहीं था,
वो मेरी रोज़मर्रा की ख़ुशियों का हिस्सा था।
आज भी किसी बात पर
दिल अचानक मुस्कुरा देता है,
फिर याद आता है
कि कभी ये मुस्कुराहट
तुम्हारे साथ बाँटी जाती थी।
सबसे मुश्किल बात
तुम्हारे बिना रहना नहीं थी,
सबसे मुश्किल बात
तुम्हारे बिना ख़ुद को नया बनाना थी।
तुम्हारी याद
अब किसी शिकायत की तरह नहीं,
एक अमानत की तरह रहती है।
हम दोनों के बीच
जो क़ुर्बत थी,
उसकी कमी आज भी
कई रिश्तों के बीच महसूस होती है।
मैंने तुम्हें खोकर जाना
कि कुछ लोग
दिल के इतने क़रीब होते हैं
कि दूरी भी उन्हें दूर नहीं कर पाती।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
अब भी मेरी रूह को
एक अजीब-सा सुकून देते हैं,
भले ही उनके बाद उदासी आ जाए।
कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर हम फिर मिलें,
तो शायद कोई शिकायत न हो,
सिर्फ़ एक लंबी ख़ामोशी हो।
तुम्हारी गैरमौजूदगी ने
मुझे ये सिखाया
कि इंसान बहुत कुछ सह सकता है,
मगर कुछ कमी हमेशा रहती है।
मुझे तुम्हारी आवाज़ याद नहीं,
मगर तुम्हारा एहसास
आज भी वैसा ही याद है।
हमारा बिछड़ना
एक घटना नहीं था,
वो धीरे-धीरे दिल में उतरता हुआ सच था।
तुम्हारे बाद
मैंने मोहब्बत को नए नज़रिए से देखा,
अब मैं उसे पाने से ज़्यादा
समझने लगा हूँ।
कुछ रिश्ते
टूटकर भी बुरे नहीं लगते,
क्योंकि उनमें बिताया गया वक़्त
बहुत ख़ूबसूरत होता है।
तुम्हारा ज़िक्र आते ही
दिल उदास नहीं होता,
बस थोड़ा नरम पड़ जाता है।
हिज्र की सबसे बड़ी सज़ा
तन्हाई नहीं,
यादों का साथ है।
आज भी कोई पुराना गीत
या कोई भूली हुई जगह
तुम्हारे क़दमों की आहट ले आती है।
मैंने तुम्हें भुलाने की कोशिश छोड़ी,
क्योंकि कुछ लोग
भुलाए नहीं जाते,
बस स्वीकार किए जाते हैं।
तुम मेरी ज़िंदगी का
वो हिस्सा हो
जिसे मैं बदलना भी चाहूँ,
तो नहीं बदल सकता।
वक़्त ने बहुत कुछ बदल दिया,
मगर तुम्हारी याद की तहज़ीब
अब भी वैसी ही है।
कभी लगता है
मोहब्बत का सबसे सच्चा रूप
बिछड़ने के बाद समझ आता है।
तुम्हारे लिए अब
कोई सवाल नहीं बचा,
सिर्फ़ एक दुआ बची है।
और शायद जुदाई का
सबसे ख़ामोश सच यही है—
इंसान आगे बढ़ जाता है,
मगर कुछ नाम
दिल की ज़ुबान से कभी नहीं उतरते।
क्योंकि कुछ मोहब्बतें
मुकम्मल नहीं होतीं,
फिर भी पूरी उम्र
दिल को मुकम्मल महसूस कराती रहती हैं।
तुम्हारे बाद दिल ने
कई चेहरों को देखा,
मगर जिस अपनायत से
तुम्हारा नाम लिया करता था,
वैसी आवाज़ फिर कभी नहीं मिली।
हिज्र की तकलीफ़
सिर्फ़ जुदाई नहीं होती,
कभी-कभी वो उन ख़्वाबों का मातम भी होती है
जो साथ देखे गए थे।
तुम्हारी याद अब
मेरे दिनों को रोकती नहीं,
मगर कुछ लम्हों को
बहुत भारी ज़रूर कर देती है।
कभी जो फ़ासला
कुछ घंटों का भी मुश्किल लगता था,
आज वही फ़ासला
पूरी ज़िंदगी बन चुका है।
तुम्हारे साथ गुज़रा हुआ वक़्त
अब भी मेरी रूह में बसा है,
जैसे किसी पुराने घर में
मोहब्बत की महक रह जाती है।
मैंने तुम्हें भुलाने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि कुछ लोग
याद रखने के लिए ही मिलते हैं।
सबसे गहरा दुख
तुम्हारे जाने का नहीं,
इस बात का है कि
हम दोनों कभी एक-दूसरे का सुकून थे।
तुम्हारी ख़ामोशी ने
जो सवाल छोड़े थे,
वक़्त ने उनके जवाब तो नहीं दिए,
मगर उन्हें स्वीकार करना सिखा दिया।
आज भी कोई बात
दिल को छू जाए,
तो पहला ख़याल तुम्हारा आता है,
और आख़िरी भी।
तुम्हारे बाद मैंने जाना
कि मोहब्बत सिर्फ़ मिलने का नाम नहीं,
कभी-कभी ख़ामोशी से याद करने का नाम भी है।
हमारी कहानी अधूरी रही,
मगर उसमें महसूस की गई मोहब्बत
पूरी थी।
तुम्हारी याद
अब अश्क़ नहीं लाती,
बस दिल को कुछ देर के लिए
माज़ी में ले जाती है।
कभी-कभी लगता है
कि मैं तुम्हें नहीं,
अपने उस हिस्से को ढूँढ़ता हूँ
जो तुम्हारे साथ था।
मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं
कि तुम मेरी नहीं रहीं,
अफ़सोस इस बात का है
कि हम वैसे नहीं रहे
जैसे कभी हुआ करते थे।
तुम्हारे साथ जो बातें
अधूरी रह गई थीं,
वो आज भी
दिल की तहों में महफ़ूज़ हैं।
हिज्र की सबसे अजीब बात ये है
कि इंसान आगे बढ़ जाता है,
मगर कुछ एहसास
वहीं ठहरे रहते हैं।
तुम्हारा ज़िक्र अब
दिल को बेचैन नहीं करता,
लेकिन एक ख़ामोश मुस्कान
ज़रूर दे जाता है।
मैंने तुम्हें खोकर
ख़ुद को समझा,
और यही इस दर्द की
सबसे बड़ी सीख रही।
कुछ रिश्ते
मंज़िल तक नहीं पहुँचते,
मगर पूरी उम्र साथ चलते हैं
यादों की शक्ल में।
तुम्हारे बाद भी
ज़िंदगी ने बहुत कुछ दिया,
मगर तुम्हारी जगह
कभी किसी ने नहीं ली।
आज भी जब
किसी पुरानी शाम की याद आती है,
तो उसमें तुम्हारी हँसी
सबसे साफ़ सुनाई देती है।
मोहब्बत ख़त्म नहीं हुई,
बस उसका पता बदल गया है—
अब वो रिश्ते में नहीं,
यादों में रहती है।
तुम अब मेरे क़रीब नहीं,
मगर मेरी दुआओँ से दूर भी नहीं।
और शायद सच्ची मोहब्बत की
सबसे ख़ूबसूरत निशानी यही है—
बिछड़ जाने के बाद भी
दिल में इज़्ज़त बाकी रहे।
क्योंकि कुछ लोग
हमारे नहीं रहते,
मगर हमारे होने का हिस्सा
हमेशा बने रहते हैं।
तुम्हारे बाद ज़िंदगी तो चलती रही,
मगर कुछ लम्हे ऐसे हैं
जो अब भी तुम्हारे नाम से शुरू होते हैं।
हिज्र का सबसे गहरा दुख
तुम्हारे दूर चले जाने का नहीं,
उस क़ुर्बत का है
जो कभी मेरी दुनिया हुआ करती थी।
तुम्हारी याद अब
बेचैनी नहीं देती,
मगर दिल के किसी गोशे में
एक ख़ामोश उदासी छोड़ जाती है।
कभी जो बातें
तुम्हें सुनाए बग़ैर अधूरी लगती थीं,
आज वही बातें
मेरे अंदर ही रह जाती हैं।
तुमसे बिछड़कर जाना
कि कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते,
बस उनकी शक्ल बदल जाती है,
मोहब्बत से याद तक।
तुम्हारे साथ गुज़रा हुआ वक़्त
मेरे लिए सिर्फ़ माज़ी नहीं,
एक ऐसी दौलत है
जिसे खोकर उसकी क़ीमत समझ आई।
आज भी किसी ख़ुशनुमा पल में
बेख़याली में तुम्हारा ख़याल आ जाता है,
फिर याद आता है
कि अब तुम्हारा और मेरा
सिर्फ़ अतीत का रिश्ता है।
सबसे मुश्किल बात
तुम्हें भुलाना नहीं थी,
तुम्हारे बिना जीना सीखना था।
तुम्हारी कमी
हर रोज़ महसूस नहीं होती,
मगर कुछ शामें ऐसी होती हैं
जब दिल तुम्हारी तरफ़ लौट जाता है।
मैंने तुम्हें खोकर
मोहब्बत से शिकायत नहीं की,
क्योंकि जो एहसास तुमने दिया,
वो दर्द से कहीं ज़्यादा क़ीमती था।
हमारे दरमियान जो ख़ामोशी आई,
वो किसी झगड़े से ज़्यादा भारी थी।
कभी-कभी लगता है
मैं तुम्हें नहीं,
अपने उस दौर को याद करता हूँ
जब तुम्हारे होने से
हर चीज़ आसान लगती थी।
तुम्हारी याद किसी ज़ख़्म की तरह नहीं,
एक पुराने ख़त की तरह है,
जिसे पढ़ते वक़्त
मुस्कुराहट भी आती है और कसक भी।
मुझे अफ़सोस हमारे जुदा होने का है,
मगर हमारी मोहब्बत का नहीं,
क्योंकि वो मेरी ज़िंदगी की
सबसे सच्ची दास्तानों में से एक थी।
अब मैं तुम्हें पाने की ख़्वाहिश नहीं रखता,
मगर तुम्हें इज़्ज़त से याद करना
आज भी नहीं छोड़ा।
कुछ अहसास
वक़्त के साथ कम नहीं होते,
बस उनका शोर ख़ामोश हो जाता है।
तुम्हारे बाद मैंने जाना
कि दिल का टूटना
हमेशा ख़त्म होना नहीं होता,
कभी-कभी वहीं से
इंसान थोड़ा और गहरा हो जाता है।
आज भी अगर
तुम्हारा ज़िक्र कहीं आ जाए,
तो दिल परेशान नहीं होता,
बस कुछ देर के लिए
माज़ी की राहों पर चलने लगता है।
तुम अब मेरी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं,
मगर मेरी यादों की तहज़ीब में
आज भी शामिल हो।
कुछ लोग बिछड़कर भी
दिल से नहीं जाते,
वो बस मुलाक़ातों से यादों तक का सफ़र तय कर लेते हैं।
और शायद हिज्र का
सबसे ख़ूबसूरत और सबसे दर्दनाक सच यही है—
मोहब्बत कभी-कभी मुकम्मल नहीं होती,
मगर उसकी गर्माहट
उम्र भर साथ रहती है।