आपकी ख़ामोशी में जितनी मोहब्बत थी,
उतनी कई लोगों के लफ़्ज़ों में भी नहीं।
जब दुनिया समझ नहीं आई,
आपकी सीख समझ आ गई।
आपने कभी अपने दर्द नहीं बताए,
बस हमारी मुस्कुराहटें सँभालते रहे।
मेरी हर ऊँचाई के नीचे,
आपकी मेहनत की ज़मीन है।
आप साथ हों तो,
फ़िक्र भी थोड़ी कम लगती है।
आपने जो यक़ीन दिया,
वही मेरी पहचान बन गया।
बचपन की सबसे सुरक्षित जगह,
आपके पास बैठना था।
आपकी डाँट ने जितना सुधारा,
शायद तारीफ़ भी न सुधार पाती।
आपने ख़ुद को पीछे रखा,
ताकि हम आगे बढ़ सकें।
मेरे सपनों से पहले,
आपने मुझ पर भरोसा किया था।
आपकी फ़िक्र कभी पुरानी नहीं होती,
उम्र के साथ और गहरी हो जाती है।
मैंने आपसे मेहनत का मतलब नहीं,
मेहनत की इज़्ज़त करना सीखा है।
घर में आपका होना,
एक अनकहा सुकून होता है।
आपने हमें संभाला ऐसे,
कि हमें संभाले जाने का एहसास भी न हुआ।
मेरी जीत पर सबसे सच्ची ख़ुशी,
हमेशा आपकी आँखों में दिखी।
आपने रास्ता आसान नहीं बनाया,
चलना आसान बना दिया।
आज भी मुश्किल वक़्त में,
आपकी कोई बात याद आ जाती है।
आपने मोहब्बत दिखाई कम,
महसूस ज़्यादा कराई।
मेरी दुनिया का सबसे मज़बूत भरोसा,
मेरे पिता का विश्वास है।
आपने जो संस्कार दिए,
वही मेरी असली दौलत हैं।
आपकी दुआओँ का असर,
अक्सर मेरी हिम्मत बनकर लौटता है।
उम्र बढ़ी तो जाना,
पिता की चिंता भी एक इबादत होती है।
आपने कभी गिनाए नहीं,
मगर एहसान बहुत हैं आप पर।
मेरे हर सुकून के पीछे,
आपकी कोई बेचैन रात होगी।
आप पिता हैं,
इसीलिए मेरी हार में भी उम्मीद बाकी रहती है।
आपने कभी मोहब्बत कही नहीं,
मगर पूरी ज़िंदगी निभाई है।
मेरी हर जीत में कहीं न कहीं,
आपके यक़ीन की हिस्सेदारी है।
बचपन की सबसे बड़ी दौलत,
आपका साथ हुआ करता था।
आपकी डाँट में भी जो फ़िक्र थी,
वह दुनिया की किसी तारीफ़ में नहीं।
मैं बड़ा हो गया,
मगर आपका भरोसा आज भी सहारा है।
आपने ख़ुद को थकाया बहुत,
ताकि हमारा बचपन मुस्कुरा सके।
मेरे हौसले की बुनियाद में,
आपकी ख़ामोश मेहनत है।
जिस दिन पिता की फ़िक्र समझ आ जाए,
उम्र सच में बड़ी हो जाती है।
आपने रास्ते नहीं बताए सिर्फ़,
चलना भी सिखाया है।
मेरी कामयाबी का सबसे ख़ामोश हिस्सा,
मेरे पिता हैं।
आप कम बोले,
मगर ज़िंदगी भर समझाते रहे।
जब भी डरा हूँ,
आपकी सीख ने हिम्मत दी है।
आपकी मौजूदगी में,
मुश्किलें कभी उतनी बड़ी नहीं लगीं।
आपने जो भरोसा दिया,
वही मेरी सबसे बड़ी ताक़त बना।
घर का सुकून अक्सर,
पिता की बेचैनी से होकर आता है।
आपकी आँखों की रौनक,
मेरी हर उपलब्धि का सबसे बड़ा इनाम है।
मैंने दुनिया बाद में देखी,
भरोसा पहले आपसे सीखा।
आपका नाम आते ही,
दिल में एक अजीब-सा इत्मीनान उतर आता है।
मेरी परवरिश में,
आपकी मोहब्बत शब्दों से ज़्यादा शामिल है।
आपने कभी अपने लिए नहीं जिया,
और यही बात सबसे ज़्यादा याद रहती है।
मेरे हर अच्छे फ़ैसले में,
आपकी तालीम बोलती है।
आपकी थकान छुप जाती थी,
हमारी मुस्कान बची रहे इसलिए।
कुछ रिश्ते जताते नहीं,
पिता उन्हीं रिश्तों में से एक हैं।
आपने हाथ छोड़ा ज़रूर,
मगर हौसला कभी नहीं छोड़ा।
आज जो मैं हूँ,
उसमें आपका सब्र शामिल है।