आपने कभी नहीं पूछा,
कि मैं आपको कितना चाहता हूँ,
शायद इसलिए कि आपको यक़ीन था,
मोहब्बत बताई नहीं, निभाई जाती है।
जब मैं छोटा था,
आपकी उँगली पकड़कर चलता था,
आज आपकी सीख पकड़कर चलता हूँ,
और दोनों ही बार गिरने से बच जाता हूँ।
आपकी जेब से ज़्यादा,
मुझे आपका भरोसा अमीर बनाता रहा।
मैंने आपको कई बार चुप देखा,
मगर कभी हार मानते नहीं देखा,
शायद पिता टूटते भी हैं,
तो बच्चों से छुपकर।
मेरी हर ज़िद के पीछे,
आपकी कोई कुर्बानी छुपी थी,
जो मुझे तब दिखाई नहीं दी।
जब भी घर लौटता हूँ,
आपका "आ गए?" सुनकर लगता है,
दुनिया चाहे जैसी हो,
एक जगह मेरी आज भी वैसी ही है।
आपने मुझे जीतने से पहले,
हार को सहना सिखाया,
और यही सीख सबसे काम आई।
आपकी थकान का कोई ज़िक्र नहीं हुआ,
मगर हमारी हर ज़रूरत पूरी होती रही।
उम्र ने एक बात सिखाई,
पिता की फ़िक्र कभी बूढ़ी नहीं होती।
आपने मेरी गलतियों को देखा,
मगर मुझे गलत नहीं माना।
जब लोग मेरी तारीफ़ करते हैं,
दिल चुपके से आपका नाम लेता है।
आपकी आँखों में कभी सपने कम नहीं थे,
बस उनमें हमारा भविष्य ज़्यादा था।
मैंने बचपन में खिलौने माँगे थे,
आपने मुझे हौसला दे दिया।
आपने कभी यह नहीं कहा,
कि आपको डर लगता है,
ताकि मैं निडर रह सकूँ।
आपके होने से जो सुकून मिलता है,
उसका कोई दूसरा नाम नहीं।
मैंने दुनिया के कई चेहरे देखे,
मगर सबसे सच्चा चेहरा हमेशा आपका लगा।
आपने मुझे चलना नहीं,
संभलकर चलना सिखाया।
मेरी हर सफलता के पीछे,
आपकी कोई अनदेखी रात जागी होगी।
आप कम बोले,
इसलिए शायद आपकी हर बात याद रह गई।
जब मैं खुद पिता जैसा सोचने लगा,
तब आपकी मोहब्बत समझ में आने लगी।
आपने कभी अपना दर्द आगे नहीं रखा,
हमारी मुस्कुराहट हमेशा पहले रखी।
मेरे पास शब्द कम पड़ जाते हैं,
जब बात आपके एहसानों की होती है।
आपने मुझे सिर्फ़ बड़ा नहीं किया,
बेहतर इंसान भी बनाया।
आपका यक़ीन आज भी,
मेरे डर से बड़ा है।
कुछ रिश्ते उम्र के साथ और खूबसूरत हो जाते हैं,
पिता उन्हीं रिश्तों में से एक हैं।
अगर मोहब्बत का सबसे ख़ामोश रूप देखना हो,
तो एक पिता को अपने बच्चों के लिए जीते हुए देखिए।
जब भी ज़िंदगी ने मुझे थकाया,
आपकी याद ने हिम्मत दे दी,
शायद पिता दूर होकर भी,
कभी दूर नहीं होते।
आपने कभी नहीं कहा कि आप परेशान हैं,
बस मुस्कुराकर हाल पूछते रहे,
और हम बहुत देर बाद समझ पाए,
कि सबसे ज़्यादा फ़िक्र आपको ही होती थी।
मेरी हर ख़ुशी के पीछे,
आपकी कोई अधूरी ख़्वाहिश होगी,
जिसे आपने बिना शिकायत,
चुपचाप अलविदा कहा होगा।
बचपन में लगता था,
आप हर बात पर रोकते हैं,
आज समझ आया,
आप हर दर्द से बचाते थे।
आपने मेरे लिए क्या किया,
यह गिनना मुमकिन नहीं,
क्योंकि कुछ एहसान,
ज़िंदगी से भी बड़े होते हैं।
जब मैं पहली बार टूटा,
तब आपकी कही एक बात याद आई,
और उसी ने मुझे,
फिर से खड़ा कर दिया।
आपकी डाँट उस वक़्त बुरी लगती थी,
मगर आज वही यादें,
सबसे ज़्यादा सुकून देती हैं।
मैंने आपको कभी अपने लिए जीते नहीं देखा,
मगर हमें जी भरकर जीते देखा है।
आपकी आँखों में मेरे लिए जो यक़ीन था,
मैं आज तक उसके क़ाबिल बनने की कोशिश कर रहा हूँ।
जब दुनिया ने मेरी कमियाँ गिनाईं,
आपने मेरी खूबियों पर भरोसा रखा,
और वही भरोसा,
मेरी पहचान बन गया।
उम्र बढ़ी तो जाना,
पिता की मोहब्बत दिखाई नहीं देती,
बस पूरी ज़िंदगी महसूस होती रहती है।
आपकी थकान से ज़्यादा,
आपको हमारी थकान की चिंता रहती थी,
यही बात आज भी दिल को छू जाती है।
मेरी हर कामयाबी पर,
आपकी ख़ुशी देखकर लगता था,
जैसे यह सपना मेरा नहीं,
हम दोनों का था।
कुछ लोग हाथ पकड़ते हैं,
कुछ हौसला देते हैं,
आपने दोनों किए।
आज जब आईने में ख़ुद को देखता हूँ,
तो आपकी कुछ आदतें नज़र आती हैं,
और यह समानता,
दिल को अजीब-सा सुकून देती है।
आपने कभी मोहब्बत के बड़े दावे नहीं किए,
बस हर मुश्किल वक़्त में साथ खड़े रहे,
और वही सबसे बड़ा इज़हार था।
जब घर में सब बेफ़िक्र सोते थे,
तब शायद आप जाग रहे होते थे,
ताकि कल हम मुस्कुरा सकें।
मेरी हर जीत पर ताली बजाने वाले बहुत मिले,
मगर मुझ पर यक़ीन सबसे पहले आपने किया था।
आज भी कोई मुश्किल आती है,
तो दिल कहता है,
काश एक बार पिता से बात हो जाए,
सब आसान लगने लगेगा।
आपने मुझे उड़ना सिखाया,
मगर इतना भी नहीं उड़ने दिया,
कि मैं अपने लोगों को भूल जाऊँ।
मैंने ज़िंदगी से बहुत कुछ सीखा,
मगर लोगों के साथ इंसान बनकर रहना,
आपसे सीखा।
आपकी ख़ामोशी में जो मोहब्बत थी,
उसे समझने में मुझे सालों लग गए,
और अब हर याद पर दिल भर आता है।
कभी-कभी सोचता हूँ,
क्या आपने भी किसी से सहारा चाहा होगा,
या हमेशा हमारी ही मज़बूती बने रहे।
आपने अपने हिस्से की परेशानियाँ,
हमारे हिस्से की मुस्कुराहटों में बदल दीं,
और हमें बहुत देर बाद यह बात समझ आई।
अगर मेरी ज़िंदगी में कोई रिश्ता,
सबसे कम बोला और सबसे ज़्यादा निभाया गया है,
तो वह मेरे पिता का है।