पिता,
जब मैं अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो हर सही मोड़ पर
आपकी कोई न कोई सीख खड़ी मिलती है।
पिता,
आपने मुझे कभी यह नहीं कहा
कि दुनिया आसान है,
आपने मुझे इतना मज़बूत बनाया
कि मैं उससे डरूँ नहीं।
पिता,
मेरी सबसे बड़ी विरासत
कोई ज़मीन या दौलत नहीं,
आपका चरित्र है।
पिता,
जब मैं अपने शब्द का मान रखता हूँ,
तो लगता है,
आपकी परवरिश को सम्मान दे रहा हूँ।
पिता,
आपने मुझे समझाया,
कि ज़िम्मेदारी बोझ नहीं होती,
अपनेपन का प्रमाण होती है।
पिता,
मैंने आपको हमेशा आगे चलते देखा,
ताकि पीछे चलने वालों का रास्ता आसान रहे।
पिता,
जब भी जीवन मुझे परखता है,
मैं आपकी ज़िंदगी याद करता हूँ,
और हिम्मत लौट आती है।
पिता,
आपने कभी मेरी जगह लड़ाइयाँ नहीं लड़ीं,
मगर मुझे लड़ने का साहस ज़रूर दिया।
पिता,
आज लोग मेरी सोच की तारीफ़ करते हैं,
उन्हें क्या पता,
उसकी नींव आपने रखी थी।
पिता,
आपने मुझे सिखाया,
कि सच्चाई कभी आसान नहीं होती,
मगर सुकून हमेशा उसी में मिलता है।
पिता,
मेरे जीवन की हर अच्छी आदत में
आपकी कोई न कोई झलक मिल जाती है।
पिता,
जब मैं किसी मुश्किल समय में शांत रहता हूँ,
तो लगता है,
आपका धैर्य मेरे भीतर ज़िंदा है।
पिता,
आपने मुझे यह नहीं सिखाया
कि लोग क्या सुनना चाहते हैं,
आपने सिखाया
कि सच क्या कहना चाहता है।
पिता,
मैंने आपको अपने लिए कम,
हमारे लिए ज़्यादा जीते देखा है।
पिता,
जब मैं किसी ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटता,
तो उसमें आपका उदाहरण साथ चलता है।
पिता,
आपने मुझे कभी दूसरों की सफलता से नहीं तौला,
इसीलिए मैं अपनी राह पर चल पाया।
पिता,
मेरी हर उपलब्धि पर
आपकी मुस्कान की कल्पना ही
मुझे और आगे बढ़ा देती है।
पिता,
आपने मुझे यह एहसास दिया,
कि सम्मान माँगने से नहीं,
निभाने से मिलता है।
पिता,
जब मैं अपने बेटे या अपनों को समझाता हूँ,
तो कई बार आपके शब्द
मेरी आवाज़ में उतर आते हैं।
पिता,
आपने मुझे सिखाया,
कि मज़बूती का मतलब कठोर होना नहीं,
सही बने रहना है।
पिता,
मेरे जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा
आपका साथ नहीं,
आपका मुझ पर विश्वास था।
पिता,
आपने कभी बड़े सपनों से नहीं डराया,
बस उन्हें पाने की कीमत समझाई।
पिता,
मैंने आपको कभी मंचों पर नहीं देखा,
मगर मेरे जीवन के हर अध्याय में
आप मुख्य किरदार रहे हैं।
पिता,
जब लोग कहते हैं
कि मैं अपने सिद्धांतों पर अडिग हूँ,
तो दिल में आपका चेहरा उभर आता है।
पिता,
अगर मुझमें आत्मविश्वास है,
तो वह मेरी जीतों से नहीं,
आपके भरोसे से पैदा हुआ है।
पिता,
मैंने आपको कभी अपने लिए जीते नहीं देखा,
मगर मेरी हर सफलता में
आपकी ख़ुशी सबसे ज़्यादा देखी है।
पिता,
जब मैं छोटा था,
आप मेरा हाथ पकड़ते थे,
आज आपकी सीख
मेरा हाथ पकड़े हुए है।
पिता,
मेरी सबसे बड़ी पहचान
मेरा नाम नहीं,
आपके दिए हुए संस्कार हैं।
पिता,
आपने मुझे यह नहीं सिखाया
कि कैसे जीतना है,
आपने सिखाया
कि हारकर भी सम्मान कैसे बचाना है।
पिता,
जब दुनिया ने मेरी उम्र देखी,
आपने मेरी क्षमता देखी,
और यही विश्वास
मेरी ताक़त बन गया।
पिता,
मैंने मेहनत का अर्थ
किताबों में नहीं,
आपके माथे के पसीने में पढ़ा है।
पिता,
आपकी डाँट में भी
एक भरोसा छुपा होता था,
कि मैं बेहतर बन सकता हूँ।
पिता,
जब मैं अपने परिवार के लिए सोचता हूँ,
तो आपकी चिंताओं की गहराई
और अच्छी तरह समझ आता है।
पिता,
आपने मुझे कभी दूसरों से बड़ा बनने को नहीं कहा,
बस ख़ुद से बेहतर बनने को कहा।
पिता,
मेरे जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा
आपके शब्द नहीं,
आपका व्यवहार रहा है।
पिता,
जब लोग मेरी ईमानदारी की बात करते हैं,
तो लगता है,
आपकी परवरिश का सम्मान हो रहा है।
पिता,
आपने मुझे गिरने से नहीं रोका,
मगर हर गिरावट से सीखना सिखाया।
पिता,
आज जो मुझमें धैर्य है,
उसकी जड़ें
आपकी ज़िंदगी में हैं।
पिता,
आपने मुझे कभी आसान रास्तों का लालच नहीं दिया,
सही रास्तों का साहस दिया।
पिता,
मेरी हर उपलब्धि के पीछे
आपकी मेहनत नहीं,
आपका विश्वास खड़ा है।
पिता,
जब भी मैं किसी का सम्मान करता हूँ,
तो महसूस होता है,
मैं आपकी शिक्षा को जी रहा हूँ।
पिता,
मैंने आपको कभी हार की शिकायत करते नहीं देखा,
शायद इसी वजह से
मुश्किलें मुझे डरा नहीं पातीं।
पिता,
आपने मुझे यह समझाया,
कि आदमी की असली ऊँचाई
उसके चरित्र से मापी जाती है।
पिता,
मेरे बचपन की सबसे मज़बूत याद
आपकी मौजूदगी है,
जो हर डर को छोटा कर देती थी।
पिता,
जब मैं अपने फ़ैसलों पर अडिग रहता हूँ,
तो उसमें आपकी हिम्मत शामिल होती है।
पिता,
आपने मुझे केवल बड़ा नहीं किया,
मुझे ज़िम्मेदार बनाया।
पिता,
मैंने दुनिया में बहुत लोगों को सफल देखा,
मगर सम्मान कमाते हुए
सबसे पहले आपको देखा।
पिता,
आपकी ख़ामोशी में भी
कई सीखें छुपी थीं,
जिन्हें उम्र के साथ समझ पाया।
पिता,
अगर आज मैं अपने वादे निभाता हूँ,
तो इसलिए कि
मैंने आपको निभाते हुए देखा है।
पिता,
एक बेटे के लिए सबसे बड़ा गर्व
यह नहीं कि वह कितना आगे बढ़ा,
बल्कि यह है कि
वह अपने पिता के संस्कारों पर खरा उतरा।