Father Ke Liye Shayari
पिता,
जब भी मैं किसी सही निर्णय पर पहुँचता हूँ,
तो महसूस होता है,
आपकी कोई सीख अब भी
मेरे भीतर काम कर रही है।
पिता,
आपने कभी मेरे सपनों की ऊँचाई नहीं मापी,
बस मुझे इतना मज़बूत बनाया
कि मैं उन्हें पाने की कोशिश कर सकूँ।
पिता,
बचपन में आपकी उँगली पकड़कर चलता था,
आज आपकी बातों का सहारा लेकर चलता हूँ,
और दोनों ही बार
ख़ुद को सुरक्षित महसूस करता हूँ।
पिता,
आपने मेरी हर सफलता पर मुस्कुराया,
मगर मैं जानता हूँ,
उस मुस्कान के पीछे
आपकी बरसों की दुआएँ थीं।
पिता,
आपने मुझे कभी दुनिया से नहीं डराया,
आपने मुझे दुनिया का सामना करना सिखाया।
पिता,
जब लोग मेरी अच्छाइयों की तारीफ़ करते हैं,
तो मन ही मन आपका शुक्रिया अदा करता हूँ,
क्योंकि उनमें आपका अक्स दिखाई देता है।
पिता,
आपकी ख़ामोशी ने मुझे
कई किताबों से ज़्यादा सिखाया है,
क्योंकि आपने जो कहा,
उससे ज़्यादा करके दिखाया।
पिता,
मैंने आपको कभी अपने लिए रुकते नहीं देखा,
मगर मेरे लिए हमेशा रुकते देखा है।
पिता,
आपका भरोसा मेरे जीवन की वह पूँजी है,
जो हर मुश्किल वक़्त में
काम आती है।
पिता,
आज भी कोई अच्छी ख़बर मिलती है,
तो दिल सबसे पहले
आपको बताने का मन करता है।
पिता,
आपने मुझे गिरने से नहीं बचाया,
मगर हर गिरावट से सीखना सिखाया,
और यही सबसे बड़ी ताक़त बन गई।
पिता,
जब मैं ख़ुद पर शक करता हूँ,
तब आपका यक़ीन याद आता है,
और फिर मैं आगे बढ़ने लगता हूँ।
पिता,
आपने मुझे केवल जीना नहीं सिखाया,
सम्मान के साथ जीना सिखाया है।
पिता,
मेरे जीवन में बहुत लोग आए,
मगर बिना शर्त साथ निभाने का अर्थ
मैंने आपसे सीखा।
पिता,
आपने कभी अपनी अहमियत नहीं बताई,
मगर मेरी ज़िंदगी के हर महत्वपूर्ण हिस्से में
आप मौजूद रहे।
पिता,
जब मैं किसी का हाथ थामता हूँ,
किसी की मदद करता हूँ,
तो लगता है
आपकी परवरिश मुस्कुरा रही है।
पिता,
आपने मुझे यह एहसास दिया,
कि इंसान की असली पहचान
उसके चरित्र में होती है।
पिता,
मेरी हर जीत में आपका योगदान है,
क्योंकि जीतने से पहले
आपने मुझ पर विश्वास किया था।
पिता,
आपके साथ बिताए साधारण दिन,
आज सबसे असाधारण यादें लगते हैं।
पिता,
आपने कभी अपने संघर्षों को चर्चा नहीं बनाया,
मगर उन्हें हिम्मत से जीकर
हमारे लिए मिसाल बना दिया।
पिता,
जब मैं ज़िम्मेदारियों के बीच घिर जाता हूँ,
तो आपकी ज़िंदगी याद आती है,
और हौसला लौट आता है।
पिता,
आपकी मौजूदगी ने मुझे सिखाया,
कि प्रेम हमेशा शब्दों में नहीं होता,
कई बार वह निभाई गई ज़िम्मेदारियों में होता है।
पिता,
अगर मुझमें धैर्य है,
अगर मुझमें हिम्मत है,
तो उसमें आपका हिस्सा ज़रूर है।
पिता,
आपने मुझे सफलता से पहले
सच्चाई की क़ीमत समझाई,
और वही सीख सबसे अनमोल निकली।
पिता,
मेरी हर दुआ के आख़िर में
एक शुक्रिया आपका भी होता है,
क्योंकि मैं जो हूँ,
उसमें आपका बहुत बड़ा हिस्सा है।
पिता,
जब भी ज़िंदगी मुझे उलझाती है,
मैं आपकी कही हुई बातों में रास्ते ढूँढ़ता हूँ,
और हर बार कोई न कोई जवाब मिल जाता है।
पिता,
मैंने आपको कभी अपने लिए जीते नहीं देखा,
मगर मेरी हर खुशी में,
आपका पूरा दिल शामिल देखा है।
पिता,
आज जो लोग मुझ पर भरोसा करते हैं,
शायद उसकी शुरुआत उस दिन हुई थी,
जब आपने सबसे पहले मुझ पर यक़ीन किया था।
पिता,
आपने मुझे उड़ना सिखाया,
मगर इतना भी नहीं कि मैं
अपनी जड़ों को भूल जाऊँ।
पिता,
आपकी डाँट उस वक़्त समझ नहीं आई,
मगर आज वही बातें
ज़िंदगी की सबसे काम की सीख लगती हैं।
पिता,
जब मैं थक जाता हूँ,
तो आपकी ज़िंदगी याद आती है,
और मेरी शिकायतें ख़ुद-ब-ख़ुद छोटी हो जाती हैं।
पिता,
आपने कभी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया,
मगर मेरी हर चिंता से पहले
आपकी फ़िक्र पहुँच जाती थी।
पिता,
मैंने दुनिया से बहुत कुछ सीखा,
मगर इंसान बने रहना
आपसे सीखा है।
पिता,
आपकी सबसे बड़ी ख़ूबी यह नहीं थी
कि आप हर समस्या हल कर देते थे,
बल्कि यह थी कि
आप मुझे घबराने नहीं देते थे।
पिता,
जब मैं अपने जीवन की अच्छी बातों को देखता हूँ,
तो उनमें कहीं न कहीं
आपकी परवरिश दिखाई देती है।
पिता,
आपने मुझे कभी भीड़ का हिस्सा बनने को नहीं कहा,
आपने मुझे अपना चरित्र बनाने को कहा,
और वही मेरी पहचान बन गया।
पिता,
मैं बड़ा ज़रूर हो गया हूँ,
मगर आज भी कुछ परेशानियों में
दिल सबसे पहले आपको ही याद करता है।
पिता,
आपने मेरी गलतियों को देखा,
मगर मुझे मेरी गलतियों से बड़ा माना,
और यही बात मुझे सँभालती रही।
पिता,
मेरी हर उपलब्धि पर लोग मेरा नाम लेते हैं,
मगर मैं जानता हूँ,
उसमें आपका हिस्सा सबसे बड़ा है।
पिता,
आपने कभी अपने संघर्षों का ज़िक्र नहीं किया,
मगर आपकी ख़ामोशी ने
बहुत कुछ सिखा दिया।
पिता,
आपका साथ हमेशा हाथ पकड़कर नहीं मिला,
कई बार वह एक भरोसे की तरह मिला,
जो दूर रहकर भी साथ रहा।
पिता,
जब मैं अपने निर्णयों पर टिकता हूँ,
तो लगता है,
आपके संस्कार अब भी मेरे भीतर ज़िंदा हैं।
पिता,
आपने मुझे यह नहीं सिखाया
कि जीवन में कितना पाना है,
आपने यह सिखाया
कि कैसा इंसान बनना है।
पिता,
मेरे बचपन की सबसे सुरक्षित याद
कोई जगह नहीं,
आपकी मौजूदगी है।
पिता,
आपकी आवाज़ में हमेशा एक सुकून था,
जो आज भी कई मुश्किल दिनों को
आसान बना देता है।
पिता,
आपने मुझे कभी कमज़ोर महसूस नहीं होने दिया,
यहाँ तक कि तब भी,
जब मैं ख़ुद पर भरोसा खो बैठा था।
पिता,
आज जब ज़िम्मेदारियाँ बढ़ रही हैं,
तब आपकी ख़ामोश मेहनत का अर्थ
और गहराई से समझ आता है।
पिता,
आपने मुझे अपने जैसा बनने को नहीं कहा,
बस अच्छा इंसान बनने को कहा,
और यही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है।
पिता,
अगर जीवन एक लंबा सफ़र है,
तो उसमें सबसे भरोसेमंद दिशा
आपकी सीख रही है।
पिता,
शायद मैं कभी पूरी तरह शब्दों में न कह पाऊँ,
मगर मेरी हर दुआ में
आपके लिए सम्मान, प्रेम और शुक्रगुज़ारी शामिल है।