पिता,
आपने कभी अपने संघर्षों को शब्द नहीं दिए,
मगर आपकी ख़ामोशी ने
मुझे मेहनत का असली अर्थ समझा दिया।
पिता,
जब मैं अपने जीवन की सबसे बड़ी नेमतें गिनता हूँ,
तो आपका नाम किसी सूची में नहीं आता,
क्योंकि आप पूरी सूची की वजह हैं।
पिता,
आपकी एक साधारण-सी सलाह,
कई बार मेरी सबसे बड़ी उलझन सुलझा देती है,
और तब महसूस होता है,
अनुभव की कोई जगह नहीं ले सकता।
पिता,
मैंने आपको कभी अपने लिए जीते नहीं देखा,
मगर मेरी हर खुशी में
आपको मुस्कुराते देखा है।
पिता,
आपने मुझे यह एहसास दिया,
कि भरोसा दिया नहीं जाता,
कमाया जाता है।
पिता,
जब मैं अपने डर से लड़ता हूँ,
तो आपके संघर्ष याद आते हैं,
और मेरा साहस बढ़ जाता है।
पिता,
आपने मेरे लिए रास्ते आसान नहीं किए,
मगर मुझे इतना मज़बूत बनाया
कि कठिन रास्तों से डर न लगे।
पिता,
आपकी मौजूदगी हमेशा
एक ऐसे सुकून की तरह रही,
जिसे शब्दों में नहीं,
सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है।
पिता,
बचपन में आपकी डाँट समझ नहीं आई,
आज वही बातें
मेरी सबसे बड़ी सीख हैं।
पिता,
आपने मुझे कभी दूसरों जैसा बनने को नहीं कहा,
आपने मुझे मेरा बेहतर रूप बनने की प्रेरणा दी।
पिता,
मेरी हर अच्छी आदत के पीछे
आपकी कोई न कोई सीख छुपी है,
जिसे मैंने देर से पहचाना।
पिता,
जब मैं जीवन की भागदौड़ में थक जाता हूँ,
तो आपका धैर्य याद आता है,
और फिर शिकायतें कम हो जाती हैं।
पिता,
आपने मुझे केवल सफलता का महत्व नहीं बताया,
सम्मान के साथ सफलता का महत्व सिखाया।
पिता,
आज भी कोई अच्छी खबर मिलती है,
तो दिल सबसे पहले
आपके चेहरे की मुस्कान सोचता है।
पिता,
आपने कभी अपने दर्द का बोझ हम पर नहीं रखा,
मगर हमारी परेशानियाँ
हमेशा अपने कंधों पर उठा लीं।
पिता,
मैंने आपको कई बार चुप देखा,
मगर कभी कमज़ोर नहीं देखा,
और वहीं से हिम्मत सीखी।
पिता,
आपकी परवरिश की खूबी यह थी,
कि उसने मुझे आत्मविश्वास दिया,
अहंकार नहीं।
पिता,
जब मैं किसी मुश्किल फ़ैसले के सामने होता हूँ,
तो अक्सर सोचता हूँ,
आप क्या करते,
और रास्ता साफ़ होने लगता है।
पिता,
आपने मुझे सिखाया,
कि इंसान की असली पहचान
उसके चरित्र में होती है।
पिता,
मेरे बचपन की सबसे बड़ी दौलत
कोई खिलौना नहीं थी,
आपका साथ था।
पिता,
आपने मेरी कमियों से ज़्यादा
मेरी संभावनाएँ देखीं,
और यही बात
मेरे आत्मविश्वास की नींव बनी।
पिता,
समय के साथ बहुत कुछ बदला,
मगर आपका मुझ पर भरोसा
कभी नहीं बदला।
पिता,
आपकी ज़िंदगी ने मुझे यह समझाया,
कि ज़िम्मेदारी बोझ नहीं,
प्रेम का दूसरा नाम है।
पिता,
अगर आज मैं लोगों का सम्मान करता हूँ,
तो इसलिए कि मैंने आपको
हर इंसान का सम्मान करते देखा है।
पिता,
मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि कोई पद नहीं,
बल्कि यह है कि लोग कहें—
तुम्हारी परवरिश बहुत अच्छी हुई है।
पिता,
आपने कभी अपने हिस्से की परेशानियाँ नहीं गिनाईं,
मगर हमारी हर मुस्कान में
आपकी मेहनत का हिस्सा शामिल रहा।
पिता,
जब मैं छोटा था,
आपका हाथ पकड़कर चलता था,
आज आपकी सीख पकड़कर चलता हूँ,
और रास्ते अब भी आसान लगते हैं।
पिता,
आपकी सबसे बड़ी ख़ूबी यह नहीं थी
कि आप हर समस्या हल कर देते थे,
बल्कि यह थी कि
आप मुझे घबराने नहीं देते थे।
पिता,
मैंने आपको अक्सर चुप देखा,
मगर कभी उदास नहीं दिखने दिया,
शायद यही प्रेम का वह रूप है
जो ख़ुद से पहले अपनों को रखता है।
पिता,
आज जब मैं ज़िम्मेदारियों से घिरता हूँ,
तब आपकी ज़िंदगी और बड़ी लगने लगती है,
क्योंकि आपने यह सब
बिना शिकायत निभाया था।
पिता,
आपकी डाँट से बचने वाला मैं,
आज आपकी बातों में सुकून ढूँढ़ता हूँ,
वक़्त सच में
समझ बढ़ा देता है।
पिता,
मेरी हर उपलब्धि में
आपका नाम लिखा है,
भले दुनिया उसे पढ़ न पाए।
पिता,
आपने मुझे यह नहीं सिखाया
कि सबसे आगे कैसे निकलना है,
आपने यह सिखाया
कि सही रास्ते पर कैसे टिके रहना है।
पिता,
जब भी जीवन कठिन लगता है,
आपका संघर्ष याद आता है,
और फिर हिम्मत लौट आती है।
पिता,
आपने मुझे अपने जैसा बनने को नहीं कहा,
बस अच्छा इंसान बनने को कहा,
और वही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है।
पिता,
मेरे बचपन की सबसे सुरक्षित याद
कोई जगह नहीं,
आपकी मौजूदगी है।
पिता,
आपका भरोसा हमेशा
मेरी क्षमताओं से बड़ा रहा,
और शायद इसी वजह से
मैं आगे बढ़ता गया।
पिता,
आपने कभी अपनी अहमियत नहीं बताई,
मगर मेरी ज़िंदगी का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा
आपके बिना पूरा नहीं होता।
पिता,
जब मैं लोगों के साथ सम्मान से पेश आता हूँ,
तो लगता है,
आपकी परवरिश अब भी
मेरे भीतर साँस ले रही है।
पिता,
आपकी ख़ामोशी ने मुझे
ज़िम्मेदारी का अर्थ समझाया,
और आपके कर्मों ने
चरित्र का महत्व।
पिता,
मैंने दुनिया को बाद में समझा,
आपको पहले देखा,
शायद इसी वजह से
सही और ग़लत पहचान पाया।
पिता,
आपकी फ़िक्र कभी सवाल नहीं बनती थी,
वह हर ज़रूरत से पहले
मेरे पास पहुँच जाती थी।
पिता,
जब लोग मेरी मज़बूती की बात करते हैं,
मुझे आपका धैर्य याद आता है,
जो मेरे भीतर कहीं बस गया है।
पिता,
आपने मेरी गलतियों को देखा,
मगर मुझे उनसे छोटा नहीं होने दिया,
और यही बात
मुझे हमेशा सँभालती रही।
पिता,
कुछ रिश्ते उम्र के साथ बदल जाते हैं,
मगर आपका स्थान
हर साल और गहरा होता जाता है।
पिता,
आपने कभी बड़े सपनों की बातें नहीं कीं,
मगर मेरे सपनों को छोटा भी नहीं होने दिया।
पिता,
मेरे जीवन का सबसे बड़ा आत्मविश्वास
मेरी प्रतिभा नहीं,
आपका मुझ पर किया गया विश्वास है।
पिता,
आज जो लोग मेरे व्यवहार की तारीफ़ करते हैं,
उन्हें क्या पता,
उसमें आपकी पूरी परवरिश शामिल है।
पिता,
आपने मुझे केवल जीवन नहीं दिया,
जीवन को सही ढंग से जीने की समझ भी दी।
पिता,
अगर मेरी ज़िंदगी की कहानी में
सबसे प्रभावशाली किरदार किसी का है,
तो वह आप हैं,
जिन्होंने बिना शोर किए मुझे गढ़ा है।