Father Shayari in Hindi
आप देर रात तक जागते रहे,
और हमें लगता रहा कि सब सामान्य है,
अब समझ आता है,
घर की शांति के लिए आपने कितनी चिंताएँ अकेले उठाई थीं।
जब जेब में पैसे कम होते होंगे,
तब भी हमारे सपनों की सूची छोटी नहीं होने दी,
आपने अभाव को अपनी समस्या बनाया,
हमारी नहीं।
आपसे गले लगने की आदत कम थी,
मगर भरोसा इतना था,
कि दुनिया के किसी भी मोड़ पर,
आपका साथ सोचकर हिम्मत आ जाती थी।
आपने कभी अपनी तकलीफ़ों को महत्व नहीं दिया,
लेकिन हमारी छोटी-सी परेशानी पर भी बेचैन हो जाते थे,
शायद पिता का दिल,
अपनी नहीं, बच्चों की धड़कनों से जुड़ा होता है।
बचपन में आपकी उँगली पकड़कर चलता था,
आज आपकी सीख पकड़कर चलता हूँ,
फासले बदल गए हैं,
सहारा नहीं।
आपने हमें जीतना सिखाया,
मगर किसी को गिराकर नहीं,
आपकी यही बात आज भी,
हर सफलता को सम्मान देती है।
कई बार आपने "देख लेंगे" कहा,
और सच में सब संभाल लिया,
तब वह एक साधारण वाक्य लगता था,
आज वह आपके साहस की पहचान लगता है।
आपकी थाली में आख़िरी रोटी कैसे पहुँचती थी,
इस पर कभी ध्यान नहीं गया,
मगर अब समझ आता है,
पिता अक्सर अपनी भूख से पहले परिवार को रखते हैं।
जब घर में कोई समस्या आती थी,
हम घबरा जाते थे,
और आप चुप हो जाते थे,
क्योंकि समाधान अक्सर शोर नहीं करता।
आपने हमें कभी अमीर बनने की जल्दी नहीं सिखाई,
बस ईमानदार रहने की सीख दी,
और यही शिक्षा,
हर उपलब्धि से बड़ी निकली।
मैंने आपको कई बार टूटते हुए नहीं देखा,
अब समझता हूँ,
आप टूटे होंगे, मगर हमारे सामने नहीं।
आपकी पुरानी घड़ी,
पुराना बटुआ,
पुरानी आदतें,
आज भी जिम्मेदारी का अर्थ समझाती हैं।
हमारी गलतियों पर आपने नाराज़गी दिखाई,
लेकिन लोगों के सामने हमेशा हमारा पक्ष लिया,
तब समझ नहीं आया,
वह डाँट नहीं, संरक्षण था।
जब मैं छोटा था,
आप मेरे लिए रास्ता चुनते थे,
आज मैं बड़ा हूँ,
फिर भी मुश्किल मोड़ों पर आपकी राय ढूँढ़ता हूँ।
आपने कभी यह नहीं पूछा कि बदले में क्या मिलेगा,
बस देते रहे,
और हमें वर्षों बाद समझ आया,
निस्वार्थ होना कैसा दिखता है।
बचपन में लगता था कि आप बहुत सख्त हैं,
समय ने बताया,
आप सिर्फ हमें मजबूत बनाना चाहते थे।
जब पहली कमाई हाथ में आई,
सबसे पहले आपका चेहरा याद आया,
क्योंकि मेहनत की कीमत,
मैंने आपसे ही सीखी थी।
घर की हर ज़रूरत आपको याद रहती थी,
मगर अपनी जरूरतें अक्सर टल जाती थीं,
आपका जीवन जैसे कहता था,
"पहले परिवार।"
आपने कभी बड़े सपनों की बातें नहीं कीं,
बस हमारे सपनों के लिए रास्ते बनाते रहे,
और यही आपको सबसे बड़ा बनाता है।
कई रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं,
मगर पिता का भरोसा,
उम्र बढ़ने के साथ और गहरा होता जाता है।
आपने हमें सिखाया कि सम्मान माँगा नहीं जाता,
कमाया जाता है,
और यह सीख,
किताबों से कहीं अधिक मूल्यवान निकली।
जब मैं छोटा था,
आप मेरे आगे चलते थे,
अब समझता हूँ,
आप हर खतरे को पहले खुद देखना चाहते थे।
आपके चेहरे की झुर्रियाँ,
उम्र की नहीं लगतीं,
वे उन वर्षों की कहानी लगती हैं,
जो आपने हमारे लिए जिए हैं।
घर लौटने पर आपका "आ गए?"
पूरे दिन का सबसे साधारण सवाल था,
लेकिन उसमें जितनी चिंता होती थी,
उतनी शायद किसी लंबे संवाद में भी नहीं।
समय ने बहुत कुछ बदल दिया,
मगर एक बात नहीं बदली,
आज भी कोई बड़ी खुशी मिले,
तो सबसे पहले आपको बताने का मन करता है।
बचपन में जब भी किसी बात से डर लगता था,
मैं दरवाज़े की ओर नहीं, आपको ढूँढ़ता था,
अब समझ आया कि घर की दीवारें नहीं,
आपकी मौजूदगी मुझे सुरक्षित रखती थी।
आपने कभी बैठकर अपने संघर्ष नहीं गिनाए,
बस हर मुश्किल के बाद घर वैसे ही चलता रहा,
हम समझते रहे सब कुछ अपने आप हो जाता है,
जबकि हर सुविधा के पीछे आपका एक और त्याग था।
कई बार आपकी डाँट उस वक्त बुरी लगी,
मगर उम्र ने धीरे-धीरे उसका मतलब समझाया,
आप मुझे रोक नहीं रहे थे,
बस उन रास्तों से बचा रहे थे जिन्हें आप पहले भुगत चुके थे।
जब भी मैं हारकर लौटा,
आपने बड़े भाषण नहीं दिए,
बस इतना कहा, "फिर से कोशिश कर",
और वही चार शब्द कई बार मेरी जीत बन गए।
आपने कभी नहीं कहा कि आप थक गए हैं,
हालाँकि चेहरे पर दिनभर की मेहनत लिखी होती थी,
घर पहुँचते ही फिर मुस्कुरा देते थे,
शायद पिता होने की यही सबसे कठिन जिम्मेदारी है।
बचपन में लगता था कि आपको सब कुछ आता है,
फिर बड़ा होकर जाना कि आप भी सीख रहे थे,
फर्क सिर्फ इतना था,
आप अपनी घबराहट हम पर कभी आने नहीं देते थे।
मेरी छोटी-सी खुशी के लिए,
आपने कितनी बड़ी इच्छाएँ टाल दी होंगी,
उस समय समझ नहीं पाया,
आज जिम्मेदारियाँ आईं तो आपका कद और बड़ा लगने लगा।
घर में कई चीज़ें बिना शोर के होती रहीं,
फीस भरना, जरूरतें पूरी करना, चिंता करना,
तब महसूस नहीं हुआ,
क्योंकि आप हर परेशानी को हम तक आने ही नहीं देते थे।
आपने हमें उड़ना सिखाया,
लेकिन कभी अपने हाथ हटाए नहीं,
ताकि अगर गिर भी जाएँ,
तो भरोसा बना रहे कि कोई संभालने वाला है।
आज भी किसी कठिन फैसले से पहले,
मन में आपका चेहरा आ जाता है,
क्योंकि आपने सिर्फ बातें नहीं सिखाईं,
जीवन जीने का तरीका सिखाया है।
आपकी जेब कितनी भरी थी,
यह कभी याद नहीं रहा,
मगर आपकी वजह से मन कितना निडर था,
यह बात उम्र भर याद रहेगी।
कई बार आपने अपनी पसंद छोड़ी होगी,
ताकि हमारी पसंद पूरी हो सके,
हम खुशियों में व्यस्त रहे,
और आपका त्याग आदत बनकर छिपता रहा।
आपकी खामोशी में भी चिंता सुनाई देती थी,
हाल पूछने का तरीका अलग था आपका,
शब्द कम होते थे,
मगर अपनापन हमेशा पूरा होता था।
जब पहली बार घर से दूर गया,
तब समझ आया कि पिता का होना क्या होता है,
कुछ नंबर सिर्फ संपर्क नहीं होते,
मुश्किल समय का सबसे बड़ा भरोसा होते हैं।
आपने हमें मजबूत बनने को कहा,
लेकिन खुद कभी कठोर नहीं बने,
आपकी सख्ती के भीतर भी,
हमारी भलाई की गर्माहट रहती थी।
अब जब आईने में खुद को देखता हूँ,
तो आपकी कुछ आदतें दिखाई देती हैं,
और सच कहूँ,
यह समानता मुझे गर्व देती है।
हर परिवार की कहानी में,
एक ऐसा किरदार होता है जो सबसे कम बोलता है,
लेकिन सबसे ज्यादा जिम्मेदारियाँ उठाता है,
हमारे घर में वह आप थे।
आपने कभी अपने लिए तालियाँ नहीं माँगीं,
बस चाहते रहे कि हम आगे बढ़ें,
शायद इसी वजह से,
आपका योगदान शब्दों से बड़ा लगता है।
जब लोग मेरी सफलता की बात करते हैं,
मुझे आपके वे दिन याद आते हैं,
जब आपने मेरी क्षमता पर भरोसा रखा था,
यहाँ तक कि तब भी जब मैं खुद पर नहीं रख पाया था।
उम्र बढ़ने के साथ एक एहसास और गहरा हुआ,
आप सिर्फ मेरे पिता नहीं थे,
मेरे पहले शिक्षक,
पहले संरक्षक और पहले प्रेरणास्रोत भी थे।
कुछ रिश्ते रोज़ "प्यार" नहीं कहते,
फिर भी सबसे ज्यादा प्यार वही करते हैं,
पिता का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है,
जहाँ भावना शब्दों से ज्यादा कर्मों में रहती है।
आज समझ आता है कि आपकी चिंताएँ क्यों थीं,
क्यों हर छोटी बात पर सावधान करते थे,
आप भरोसा कम नहीं करते थे,
बस हमें सुरक्षित देखना चाहते थे।
जब भी जीवन उलझता है,
आपकी कही कोई पुरानी बात याद आ जाती है,
और हैरानी होती है,
कि अनुभव कितनी दूर तक साथ चलता है।
घर में आपकी मौजूदगी का एहसास,
अक्सर तब सबसे ज्यादा होता है,
जब आप कुछ दिनों के लिए भी दूर चले जाएँ,
और घर का सुकून अधूरा लगे।
आपने हमें सिर्फ जीना नहीं सिखाया,
दूसरों का सम्मान करना भी सिखाया,
आपकी सबसे बड़ी विरासत शायद संपत्ति नहीं,
संस्कार हैं।
काश हर पिता से एक बार खुलकर कहा जा सके,
कि हम आपकी मेहनत देखते हैं,
भले देर से समझें,
लेकिन आपका महत्व कभी कम नहीं होता।