आपकी ख़ामोश निगाहों में जो फ़िक्र रहती थी,
उसे बचपन में समझ न सके,
अब जब अपने लोगों की चिंता होती है,
तो आपकी मोहब्बत पढ़ना आ गया है।
मेरे लिए जो रास्ते आसान नज़र आए,
उनमें आपकी मशक्कत शामिल थी,
मैं मंज़िलें देखता रहा,
आप सफ़र सँवारते रहे।
आपने कभी अपनी थकान का ज़िक्र नहीं किया,
मगर शाम को लौटते क़दम बता देते थे,
कि किसी ने पूरे दिन,
घर की ख़ातिर ख़ुद को खर्च किया है।
मेरी हर ख़ता पर आपने डाँटा भी,
मगर कभी मेरा हाथ नहीं छोड़ा,
यही अंदाज़-ए-मोहब्बत,
आज तक दिल को यक़ीन देता है।
आपके लहजे में हुक्म कम,
फ़िक्र ज़्यादा हुआ करती थी,
मगर यह बात समझने में,
मुझे आधी उम्र लग गई।
घर में जब भी कोई मुश्किल आई,
आप परेशान ज़रूर हुए होंगे,
मगर हमें सिर्फ़ इत्मीनान ही दिखाया,
ताकि हमारा हौसला सलामत रहे।
आपने हमें दुनिया से लड़ना नहीं सिखाया,
पहले ख़ुद से जीतना सिखाया,
और यही सबक़,
हर मोड़ पर काम आया।
मैंने अक्सर अपनी ख़्वाहिशों का ज़िक्र किया,
आपने कभी अपनी आरज़ुओं की बात नहीं की,
शायद पिता होने का मतलब,
ख़ुद से पहले औलाद को रखना होता है।
आपकी मौजूदगी में,
घर सिर्फ़ मकान नहीं लगता था,
उसमें एक अजीब-सा सुकून बसता था,
जिसे अब अल्फ़ाज़ नहीं मिलते।
मेरी छोटी-सी कामयाबी पर,
आपकी आँखों में जो रौनक होती थी,
वह किसी जश्न से कम नहीं लगती थी।
वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल गया,
मगर आपका यक़ीन नहीं बदला,
जब मैं ख़ुद पर शक करता था,
तब भी आप भरोसा रखते थे।
आपने कभी ऊँची बातें नहीं कीं,
मगर आपका किरदार,
हर नसीहत से ज़्यादा असरदार निकला।
जब मैं गिरा,
आपने मुझे उठाने की जल्दी नहीं की,
पहले संभलना सिखाया,
फिर साथ चलना।
आपकी दुआओँ का ज़िक्र लोग कम करते हैं,
मगर मेरी ज़िंदगी की कई आसानीयाँ,
शायद उन्हीं का सदक़ा हैं।
मैंने आपको अक्सर चुप देखा,
मगर कभी कमज़ोर नहीं,
क्योंकि सब्र की भी एक शान होती है,
जो सिर्फ़ बड़े दिल वालों में होती है।
आपकी उँगली छोड़ने के बाद भी,
मैं कभी अकेला नहीं हुआ,
क्योंकि आपकी तालीम,
हमेशा मेरे साथ चलती रही।
आपने हमें सिर्फ़ रिश्ते नहीं दिए,
रिश्ते निभाने का सलीक़ा भी दिया,
और यही दौलत,
उम्र भर काम आने वाली है।
आज जब कोई मुझ पर भरोसा करता है,
तो आपकी याद आती है,
क्योंकि यक़ीन देना,
मैंने आपसे सीखा है।
आपकी जेब में कितनी दौलत थी,
यह कभी मायने नहीं रखता,
आपके दिल की फ़राख़दिली ने,
हमें हमेशा मालामाल रखा।
कभी-कभी आपकी पुरानी बातें,
आज के हालात का जवाब बन जाती हैं,
और तब महसूस होता है,
कि तजुर्बा वाक़ई नेमत है।
आपने हमें यह नहीं सिखाया,
कि दुनिया में सबसे आगे कैसे निकलना है,
आपने यह सिखाया,
कि इंसान बने कैसे रहना है।
मेरे हर अच्छे फ़ैसले में,
आपकी परवरिश का हिस्सा है,
जो दिखाई नहीं देता,
मगर महसूस ज़रूर होता है।
जब लोग मेरी तारीफ़ करते हैं,
तो मुझे आपकी मेहनत याद आती है,
क्योंकि अच्छे फल के पीछे,
किसी माली की मेहनत होती है।
आपने कभी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया,
मगर मेरी हर ज़रूरत से पहले,
आपकी फ़िक्र पहुँच जाया करती थी।
अगर अदब का कोई पहला सबक़ है,
तो वह आप हैं,
अगर भरोसे की कोई पहली तस्वीर है,
तो वह भी आप हैं।
मेरे हिस्से की हर ख़ुशी को मुकम्मल करने में,
आपने कितनी आरज़ुओं को ख़ामोश रखा होगा,
हमने बस मुस्कुराहटें देखीं आपकी,
अंदर का सफ़र कभी पढ़ न सके।
अब समझ में आता है अब्बा,
आप हर बात पर फ़िक्र क्यों किया करते थे,
मोहब्बत अक्सर आवाज़ नहीं करती,
बस निगाहों में पहरा देती है।
मेरी नाकामियों पर भी आपका यक़ीन,
कभी कम नहीं हुआ,
शायद इसी भरोसे ने मुझे,
हर बार बिखरने से बचा लिया।
आपने कभी अपने एहसान नहीं गिनाए,
और हमने कभी पूछा भी नहीं,
मगर उम्र ने सिखा दिया,
कि कुछ रिश्ते कर्ज़ नहीं, करम होते हैं।
घर में जब भी अमन महसूस हुआ,
किसी ने उसका ज़िक्र नहीं किया,
क्योंकि हर सुकून के पीछे,
आपकी बेआवाज़ कोशिशें थीं।
आपकी सख़्ती से शिकायत बहुत की थी,
मगर अब मालूम हुआ,
कुछ लोग मोहब्बत जताते नहीं,
निभाते हैं।
मेरे हर ख़्वाब को पर लगते गए,
और आप ज़मीन पर खड़े रहे,
ताकि मेरी उड़ान में,
कभी भरोसे की कमी न आए।
आपके चेहरे की थकान,
हमेशा मुस्कान के पीछे छुप जाती थी,
शायद यही फ़र्ज़ की वह सूरत है,
जिसे बच्चे देर से समझते हैं।
जब दुनिया ने सवाल किए,
आपने जवाब नहीं दिए,
बस मेरे कंधे पर हाथ रखा,
और मैं फिर से मज़बूत हो गया।
आपने हमें तहज़ीब दी,
लोगों से पेश आने का सलीक़ा दिया,
वरना दौलत तो बहुतों के पास होती है,
इंसानियत हर किसी के पास नहीं होती।
आपकी दुआओँ का असर था शायद,
कि मुश्किल रास्तों पर भी,
दिल में मायूसी कम,
उम्मीद ज़्यादा रही।
मैंने आपको कभी अपने लिए माँगते नहीं देखा,
मगर हमारी हर ख़ुशी में,
आपकी ख़ामोश दुआ शामिल रही।
आप घर के सबसे कम बोलने वाले शख़्स थे,
मगर सबसे ज़्यादा आपकी ही बात चलती थी,
क्योंकि ज़िम्मेदारियाँ अक्सर,
शोर नहीं करतीं।
अब जब उम्र समझ दे रही है,
तो एहसास हो रहा है,
कि आपने हमें सिर्फ़ पाला नहीं,
हमें बेहतर इंसान भी बनाया।
आपके साथ चलते हुए,
रास्ते आसान नहीं थे,
मगर डर कम था,
क्योंकि रहनुमाई साथ थी।
आपने कभी यह नहीं कहा,
कि आपको हम पर फ़ख्र है,
मगर जब दूसरों से हमारा ज़िक्र करते थे,
आँखों की चमक सब कह देती थी।
मेरी हर जीत में,
आपकी कुर्बानी का हिस्सा है,
जो दिखाई नहीं देता,
मगर सबसे बड़ा होता है।
आपने अपने दुखों को,
घर की चौखट से बाहर ही रखा,
ताकि अंदर सिर्फ़ सुकून दाख़िल हो।
कभी-कभी सोचता हूँ,
आपने इतना सब्र कहाँ से सीखा होगा,
इतनी ज़िम्मेदारियाँ उठाकर भी,
चेहरे पर नरमी कैसे बचाए रखी।
जब पहली बार ज़िंदगी ने थकाया,
तब आपका चेहरा याद आया,
और समझ आया,
कि आप रोज़ यह सब झेलते थे।
आपका होना किसी चमत्कार जैसा नहीं था,
बल्कि उस भरोसे जैसा था,
जिसकी मौजूदगी में,
हर मुश्किल थोड़ी आसान लगती है।
हमने अक्सर आपकी कमियाँ ढूँढ़ीं,
और आपने हमेशा हमारी खूबियाँ,
शायद यही फ़र्क़ पिता और दुनिया में होता है।
आपकी आवाज़ आज भी,
कई फ़ैसलों में सुनाई देती है,
जैसे वक़्त बदल गया हो,
मगर रहनुमाई नहीं।
आपने हमें सिर ऊँचा रखना सिखाया,
मगर किसी का दिल दुखाकर नहीं,
इज़्ज़त कमाने का हुनर,
आपकी सबसे बड़ी विरासत है।
जिन दिनों मेरे पास कोई जवाब नहीं होता,
उन दिनों आपकी सीख काम आती है,
क्योंकि तजुर्बा अक्सर,
किताबों से बड़ा उस्ताद होता है।
अगर मोहब्बत को अल्फ़ाज़ की ज़रूरत न हो,
तो वह शायद पिता जैसी होती है,
कम दिखाई देती है,
मगर पूरी ज़िंदगी महसूस होती है।