Heart Touching Father Shayari
जब भी मैं बेफ़िक्र होकर सोया,
किसी ने मेरी फ़िक्र में रात काटी थी,
आज समझ आया,
वह मेरे पिता थे।
आपने कभी अपने दर्द को मुद्दा नहीं बनाया,
बस हमारी परेशानियाँ हल करते रहे,
और हम देर से समझ पाए,
कि सबसे मज़बूत लोग भी थकते हैं।
मेरी हर नाकामी पर दुनिया ने सवाल किए,
आपने सिर्फ़ इतना पूछा,
"हार मान तो नहीं रहे?"
और वही सवाल मेरी ताक़त बन गया।
आपकी डाँट से बचने वाला मैं,
आज आपकी बातों में सुकून ढूँढ़ता हूँ,
वक़्त सच में,
रिश्तों का मतलब बदल देता है।
आपने मुझे कभी परफ़ेक्ट बनने को नहीं कहा,
बस अच्छा इंसान बनने को कहा,
और यही सीख,
हर कामयाबी से बड़ी निकली।
जब मेरी जेब खाली थी,
आपका भरोसा भरा हुआ था,
शायद इसी वजह से,
मैं कभी पूरी तरह हारा नहीं।
आपने हमारे कल के लिए इतना सोचा,
कि अपना आज कहीं पीछे छूट गया,
और हमें इसका एहसास,
उम्र के बहुत बाद हुआ।
मैंने आपको कभी शिकायत करते नहीं देखा,
हालाँकि वजहें बहुत रही होंगी,
शायद पिता होना,
सब्र का दूसरा नाम है।
मेरी छोटी-सी ख़ुशी पर,
आपकी बड़ी-सी मुस्कान आ जाती थी,
जैसे मेरी जीत नहीं,
आपकी दुआ क़ुबूल हुई हो।
आपने हाथ पकड़कर चलाया कम,
मगर गिरने पर संभाला हमेशा,
और यही भरोसा,
ज़िंदगी भर साथ रहा।
घर की ज़िम्मेदारियाँ उठाते हुए,
आप कब उम्र से आगे निकल गए,
हमें पता ही नहीं चला,
हम बस आपकी मौजूदगी के आदी थे।
आपकी चुप्पी में भी अपनापन था,
आपके कम शब्दों में भी परवाह थी,
कुछ रिश्ते आवाज़ से नहीं,
एहसास से पहचाने जाते हैं।
जब मैं अपने फ़ैसले ख़ुद लेने लगा,
तब समझ आया,
आप हर बात पर राय क्यों देते थे,
क्योंकि आपको मंज़िल से पहले रास्ते दिखते थे।
आपने मुझे यह नहीं सिखाया,
कि सबसे आगे कैसे निकलना है,
आपने सिखाया,
कि किसी को पीछे छोड़कर नहीं बढ़ना है।
आज भी कोई अच्छी ख़बर मिले,
तो दिल सबसे पहले आपको याद करता है,
क्योंकि मेरी हर खुशी में,
आपका हिस्सा शामिल है।
आपने हमारी कमियों पर पर्दा रखा,
और हमारी खूबियों को हौसला दिया,
शायद इसी तरह,
आत्मविश्वास जन्म लेता है।
मेरे बचपन की सबसे सुरक्षित याद,
कोई खिलौना नहीं,
बल्कि आपका साथ है,
जो हर डर को छोटा कर देता था।
आपने कभी नहीं कहा कि आपको हमसे प्यार है,
मगर हमारी हर ज़रूरत याद रखी,
और यही बात,
हज़ार इज़हारों से बड़ी लगी।
जब लोग मेरी परवरिश की तारीफ़ करते हैं,
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि उस तारीफ़ में,
आपकी पूरी ज़िंदगी शामिल है।
अगर ज़िंदगी एक किताब है,
तो उसके सबसे मज़बूत अध्याय,
आपकी सीख, आपका भरोसा,
और आपकी ख़ामोश मोहब्बत हैं।
आपने कभी अपने हिस्से की धूप का ज़िक्र नहीं किया,
बस हमारे लिए छाँव तलाशते रहे,
हम उम्र भर ख़ुद को खुशकिस्मत समझते रहे,
और उसकी वजह आप थे।
जब भी मैं किसी मुश्किल से गुज़रता हूँ,
आपकी कही कोई बात याद आ जाती है,
लगता है जैसे वक़्त बदल गया हो,
मगर आपकी रहनुमाई नहीं।
आपकी आँखों में मेरे लिए जो यक़ीन था,
वह आज भी मेरा हौसला है,
जब मैं ख़ुद पर शक करता हूँ,
तब वही भरोसा मुझे संभालता है।
आपने मुझे सिर्फ़ चलना नहीं सिखाया,
रुककर लोगों का हाथ थामना भी सिखाया,
मेरी हर अच्छाई में कहीं न कहीं,
आपकी परवरिश शामिल है।
बचपन में लगता था आप बहुत सख़्त हैं,
आज समझता हूँ कि आप बहुत फ़िक्रमंद थे,
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना था,
मोहब्बत का आपका तरीका अलग था।
आपने अपने दुखों को कभी आवाज़ नहीं दी,
ताकि हमारे चेहरे पर मुस्कान बनी रहे,
कुछ लोग सच में,
अपनों के लिए ख़ुद को भुला देते हैं।
मेरी हर जीत में आपका हिस्सा है,
भले दुनिया उसे देख न पाए,
क्योंकि मंज़िल तक पहुँचने से पहले,
आपने मुझ पर यक़ीन किया था।
जब घर लौटता हूँ,
आपका हाल पूछना भी सुकून देता है,
कुछ रिश्ते बड़े नहीं होते,
बस बहुत अपने होते हैं।
आपने कभी यह नहीं कहा कि थक गए हैं,
हालाँकि ज़िम्मेदारियों का बोझ कम नहीं था,
अब समझ आता है,
मजबूती अक्सर ख़ामोश होती है।
मैंने दुनिया से बहुत कुछ सीखा,
मगर इंसान बने रहना,
आज भी आपसे सीखी हुई बातों से सीखता हूँ।
आपकी दुआएँ शायद दिखाई नहीं देतीं,
मगर उनका असर हर मुश्किल वक़्त में महसूस होता है,
जैसे कोई दूर रहकर भी,
हर क़दम पर साथ चल रहा हो।
आपने हमें ऊँचा उड़ना सिखाया,
मगर जड़ों से जुड़े रहना भी,
यही वजह है कि आपकी सीख,
उम्र के साथ और क़ीमती लगती है।
जब मैं छोटा था,
आप हर सवाल का जवाब लगते थे,
आज बड़ा होकर समझा हूँ,
आप हर मुश्किल का हौसला थे।
आपने कभी अपने एहसान नहीं गिनाए,
और हमने कभी पूछे भी नहीं,
मगर वक़्त ने बता दिया,
कि हम आप पर कितना कर्ज़दार हैं।
अगर मोहब्बत को बिना शब्दों के समझना हो,
तो एक पिता को देखिए,
जो पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों के लिए जीता है,
और बदले में सिर्फ़ उनकी मुस्कान चाहता है।
आपने कभी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया,
मगर पूरी उम्र उसे निभाते रहे,
हम शब्दों में प्यार ढूँढ़ते रहे,
और आप ख़ामोशी में जताते रहे।
जब मैं छोटा था तो आपका हाथ पकड़ता था,
आज आपकी सीख पकड़कर चलता हूँ,
फ़ासला वक़्त ने बढ़ाया है,
सहारा आज भी वही है।
आपकी थकान कभी घर तक नहीं आई,
मगर हमारी हर ख़ुशी घर तक पहुँची,
अब समझ आता है,
आपने कितनी बातें ख़ुद तक रखीं।
मेरी हर कामयाबी पर जो मुस्कान थी,
वह सिर्फ़ खुशी नहीं थी,
उसमें बरसों का भरोसा,
और अनगिनत दुआएँ शामिल थीं।
उम्र बढ़ी तो एहसास हुआ,
आप सिर्फ़ मेरा सहारा नहीं थे,
आप वह यक़ीन थे,
जिस पर मेरा बचपन टिका था।
जब दुनिया ने मेरी कमियाँ देखीं,
आपने मेरी कोशिशें देखीं,
शायद इसी लिए मैं,
ख़ुद पर भरोसा करना सीख गया।
आपने अपने सपनों का ज़िक्र कम किया,
हमारे सपनों को पूरा ज़्यादा किया,
और हम बहुत देर बाद समझ पाए,
कि यही सबसे बड़ी मोहब्बत थी।
घर की सबसे मज़बूत चीज़ दीवारें नहीं थीं,
आपका भरोसा था,
जो हर मुश्किल वक़्त में,
हमें टूटने नहीं देता था।
आपने कभी नहीं कहा कि आप परेशान हैं,
बस हाल पूछते रहे हमारा,
और हम बड़े होकर समझ पाए,
कि सबसे ज़्यादा फ़िक्र आपको ही थी।
अगर मेरी ज़िंदगी में कोई रिश्ता,
सबसे कम बोला और सबसे ज़्यादा निभाया गया है,
तो वह मेरे पिता का है,
जिसकी मोहब्बत आज भी मेरा सुकून है।
मेरी हर ख़ुशी के पीछे आपका कोई त्याग छुपा मिला,
हर आसान रास्ते के पीछे आपका संघर्ष खड़ा मिला,
उम्र ने जब रिश्तों का असली मतलब समझाया,
तब हर जगह मुझे अपने पिता का प्यार मिला।
जब भी ज़िंदगी ने मुझसे मेरी हिम्मत माँगी,
दिल ने सबसे पहले आपका नाम लिया,
आपने हाथ भले कम थामा हो मेरा,
मगर हर मुश्किल में मुझे संभाल लिया।
बचपन में आपकी डाँट से बचता था,
आज आपकी बातों को ढूँढ़ता हूँ,
वक़्त ने सिखाया कि पिता की फ़िक्र,
अक्सर मोहब्बत का सबसे सच्चा रूप होती है।
आपने कभी अपने एहसान नहीं गिनाए,
हमने भी उन्हें देर से समझा,
मगर अब हर दुआ में सबसे पहले,
आपका नाम ही दिल से निकलता है।
घर में आपका होना कोई शोर नहीं था,
एक ख़ामोश सा सुकून था,
जो आपकी मौजूदगी में महसूस नहीं हुआ,
मगर आपकी अहमियत हमेशा दिल में रही।