तुम्हारे जाने के बाद
सबसे पहले ख़ामोशी बदली थी,
पहले वही ख़ामोशी सुकून देती थी,
अब वही बहुत कुछ याद दिलाने लगी।
कभी जो रास्ते तुम्हारे साथ जुड़े थे,
आज भी उनसे गुज़रता हूँ,
फ़र्क़ बस इतना है कि
अब वहाँ यादें चलती हैं, हम नहीं।
तुम्हारी कमी हर वक़्त महसूस नहीं होती,
मगर कुछ पल ऐसे आते हैं
जब दिल अनजाने में तुम्हारा नाम सोच लेता है,
और फिर ख़ुद ही चुप हो जाता है।
हम दोनों ने शायद मोहब्बत की थी,
मगर हर मोहब्बत का अंजाम
साथ रहना नहीं होता,
ये बात समझने में बहुत समय लगा।
पहले मैं तुम्हारे लौटने की उम्मीद रखता था,
अब तुम्हारी ख़ुशी की दुआ रखता हूँ,
दर्द कम नहीं हुआ,
बस उसका रूप बदल गया है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
अब किसी अधूरे अफ़साने जैसे लगते हैं,
जिनका अंत पसंद नहीं आया,
मगर शुरुआत आज भी प्यारी लगती है।
सबसे मुश्किल काम
तुम्हें भूलना नहीं था,
सबसे मुश्किल काम ये था
कि तुम्हारे बिना भी जीवन चलता है,
इसे स्वीकार करना।
कभी-कभी सोचता हूँ,
क्या तुम्हें भी वो दिन याद आते होंगे,
फिर ख़ुद को रोक लेता हूँ,
क्योंकि कुछ जवाब जानकर भी
दिल को राहत नहीं मिलती।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को कई बार समेटा है,
क्योंकि कुछ लोग जब जाते हैं,
तो अपने साथ हमारा एक हिस्सा भी ले जाते हैं।
अब तुम्हारी याद दुख से ज़्यादा
एक खाली जगह जैसी लगती है,
जिसे भरने की कोशिश नहीं करता,
बस उसके साथ जीना सीख लिया है।
हमारी आख़िरी बातचीत से ज़्यादा
मुझे वो पहली सहजता याद है,
जब बिना किसी डर के
हम एक-दूसरे के अपने हुआ करते थे।
तुम्हारी ख़ामोशी ने
मुझे एक सच्चाई सिखाई,
कि हर रिश्ता शब्दों से नहीं टूटता,
कभी-कभी कम होते एहसास
ज़्यादा तेज़ी से दूर ले जाते हैं।
पहले हर ख़ुशी अधूरी लगती थी,
क्योंकि उसे तुम्हारे साथ बाँटना चाहता था,
अब ख़ुशियाँ पूरी तो लगती हैं,
मगर उनमें एक पुराना नाम नहीं होता।
मुझे अफ़सोस तुम्हारे जाने का नहीं,
अफ़सोस उस दूरी का है
जो रहते-रहते इतनी बढ़ गई
कि लौटना संभव नहीं रहा।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा
कि किसी को बहुत चाहना
और किसी के बिना जी पाना,
दोनों एक साथ सच हो सकते हैं।
कुछ यादें ऐसी होती हैं
जो मिटती नहीं,
वो बस हमारे भीतर
एक शांत कोने में बैठ जाती हैं।
आज भी जब कोई पूछता है
कि क्या मैं तुम्हें भूल गया हूँ,
तो मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि कुछ लोग भूलने के लिए नहीं,
समझने के लिए मिलते हैं।
तुम्हारे साथ जो था,
वो अब नहीं है,
लेकिन जो मैंने उससे सीखा,
वो आज भी मेरे साथ है।
कभी लगता है
मैं तुम्हें नहीं,
उस भरोसे को याद करता हूँ
जो तुम्हारे साथ होने पर महसूस होता था।
और शायद यही सबसे सच्ची बात है—
मोहब्बत ख़त्म हो जाए या नहीं,
कुछ लोग दिल से नहीं जाते,
बस उनकी जगह यादों में बदल जाती है।
तुम्हारे जाने के बाद
सबसे पहले ख़ामोशी बदली थी,
पहले वही ख़ामोशी सुकून देती थी,
अब वही बहुत कुछ याद दिलाने लगी।
कभी जो रास्ते तुम्हारे साथ जुड़े थे,
आज भी उनसे गुज़रता हूँ,
फ़र्क़ बस इतना है कि
अब वहाँ यादें चलती हैं, हम नहीं।
तुम्हारी कमी हर वक़्त महसूस नहीं होती,
मगर कुछ पल ऐसे आते हैं
जब दिल अनजाने में तुम्हारा नाम सोच लेता है,
और फिर ख़ुद ही चुप हो जाता है।
हम दोनों ने शायद मोहब्बत की थी,
मगर हर मोहब्बत का अंजाम
साथ रहना नहीं होता,
ये बात समझने में बहुत समय लगा।
पहले मैं तुम्हारे लौटने की उम्मीद रखता था,
अब तुम्हारी ख़ुशी की दुआ रखता हूँ,
दर्द कम नहीं हुआ,
बस उसका रूप बदल गया है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
अब किसी अधूरे अफ़साने जैसे लगते हैं,
जिनका अंत पसंद नहीं आया,
मगर शुरुआत आज भी प्यारी लगती है।
सबसे मुश्किल काम
तुम्हें भूलना नहीं था,
सबसे मुश्किल काम ये था
कि तुम्हारे बिना भी जीवन चलता है,
इसे स्वीकार करना।
कभी-कभी सोचता हूँ,
क्या तुम्हें भी वो दिन याद आते होंगे,
फिर ख़ुद को रोक लेता हूँ,
क्योंकि कुछ जवाब जानकर भी
दिल को राहत नहीं मिलती।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को कई बार समेटा है,
क्योंकि कुछ लोग जब जाते हैं,
तो अपने साथ हमारा एक हिस्सा भी ले जाते हैं।
अब तुम्हारी याद दुख से ज़्यादा
एक खाली जगह जैसी लगती है,
जिसे भरने की कोशिश नहीं करता,
बस उसके साथ जीना सीख लिया है।
हमारी आख़िरी बातचीत से ज़्यादा
मुझे वो पहली सहजता याद है,
जब बिना किसी डर के
हम एक-दूसरे के अपने हुआ करते थे।
तुम्हारी ख़ामोशी ने
मुझे एक सच्चाई सिखाई,
कि हर रिश्ता शब्दों से नहीं टूटता,
कभी-कभी कम होते एहसास
ज़्यादा तेज़ी से दूर ले जाते हैं।
पहले हर ख़ुशी अधूरी लगती थी,
क्योंकि उसे तुम्हारे साथ बाँटना चाहता था,
अब ख़ुशियाँ पूरी तो लगती हैं,
मगर उनमें एक पुराना नाम नहीं होता।
मुझे अफ़सोस तुम्हारे जाने का नहीं,
अफ़सोस उस दूरी का है
जो रहते-रहते इतनी बढ़ गई
कि लौटना संभव नहीं रहा।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा
कि किसी को बहुत चाहना
और किसी के बिना जी पाना,
दोनों एक साथ सच हो सकते हैं।
कुछ यादें ऐसी होती हैं
जो मिटती नहीं,
वो बस हमारे भीतर
एक शांत कोने में बैठ जाती हैं।
आज भी जब कोई पूछता है
कि क्या मैं तुम्हें भूल गया हूँ,
तो मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि कुछ लोग भूलने के लिए नहीं,
समझने के लिए मिलते हैं।
तुम्हारे साथ जो था,
वो अब नहीं है,
लेकिन जो मैंने उससे सीखा,
वो आज भी मेरे साथ है।
कभी लगता है
मैं तुम्हें नहीं,
उस भरोसे को याद करता हूँ
जो तुम्हारे साथ होने पर महसूस होता था।
और शायद यही सबसे सच्ची बात है—
मोहब्बत ख़त्म हो जाए या नहीं,
कुछ लोग दिल से नहीं जाते,
बस उनकी जगह यादों में बदल जाती है।
कुछ रिश्ते ख़त्म होने के बाद भी
पूरी तरह ख़त्म नहीं होते,
वो हमारी आदतों, सोच और यादों में
धीरे-धीरे जीते रहते हैं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने सबसे पहले तुम्हें नहीं खोया,
मैंने वो जगह खोई
जहाँ बिना सोचे अपनी हर बात कह दिया करता था।
पहले दिन की शुरुआत तुम्हारे ख़याल से होती थी,
अब दिन तो गुज़र जाते हैं,
मगर कुछ शामें अब भी
तुम्हारी कमी का पता दे जाती हैं।
हमारा बिछड़ना किसी एक वजह से नहीं हुआ,
बहुत-सी छोटी बातें थीं
जिन्हें हम नज़रअंदाज़ करते रहे,
और वही एक दिन दूरी बन गईं।
तुम्हें याद करते हुए
अब शिकायतें नहीं आतीं,
बस कभी-कभी ये सोच आता है
कि हम थोड़ा और संभल सकते थे।
सबसे ज़्यादा दर्द तब हुआ
जब तुम्हारी याद कम होने लगी,
क्योंकि तब समझ आया
कि वक़्त सचमुच किसी को दूर ले जा सकता है।
तुम्हारे साथ रहते हुए
भविष्य आसान लगता था,
तुम्हारे जाने के बाद
मुझे अकेले सपने देखना सीखना पड़ा।
मैंने बहुत कोशिश की
कि तुम्हें ग़लत साबित कर सकूँ,
मगर आख़िर में समझ आया,
रिश्ते टूटने के बाद
सही और ग़लत का हिसाब अधूरा ही रहता है।
अब भी जब कोई ख़ुशी मिलती है,
तो एक पल के लिए मन मुड़कर देखता है,
जैसे किसी पुराने साथी को
ये ख़बर सुनानी हो।
तुम्हारे जाने का दुख
तुम्हारे न होने से कम,
और तुम्हारे पहले जैसा न रहने से ज़्यादा था।
कुछ बातें कभी कही नहीं गईं,
कुछ सवाल कभी पूछे नहीं गए,
और शायद हमारी कहानी
इन्हीं ख़ामोशियों में खो गई।
मैंने तुम्हें भुलाने की नहीं,
तुम्हारी याद के साथ जीने की कोशिश की,
क्योंकि कुछ लोग यादों से नहीं जाते,
बस उनसे जुड़ा दर्द बदल जाता है।
पहले मुझे लगता था
मोहब्बत सब कुछ बचा लेती है,
फिर ज़िंदगी ने सिखाया
कि मोहब्बत के साथ समझ और धैर्य भी चाहिए।
तुम्हारी कमी अब शोर नहीं करती,
वो बस कभी-कभी
दिल के किसी कोने में बैठकर
पुराने दिनों का हाल पूछ लेती है।
हम दोनों एक-दूसरे से दूर हुए,
लेकिन शायद सबसे पहले
हम अपनी अनकही बातों से दूर हुए थे।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा
कि किसी के जाने पर
अपनी पहचान नहीं खोनी चाहिए,
क्योंकि अंत में ख़ुद का साथ ही सबसे लंबा होता है।
कभी-कभी मैं पुरानी बातों पर मुस्कुरा देता हूँ,
और उसी मुस्कान में
थोड़ी-सी उदासी भी छिपी होती है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए लम्हे
अब भी मेरे सबसे सच्चे लम्हों में हैं,
इसीलिए उनका खोना
आज भी थोड़ा भारी लगता है।
मैंने तुम्हें रोकने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि जो रिश्ता सिर्फ़ मनाने से बचे,
वो देर-सवेर फिर टूट ही जाता है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ये जाना कि
हर खालीपन को भरना ज़रूरी नहीं,
कुछ खाली जगहें हमें बहुत कुछ सिखाती हैं।
आज भी जब किसी को
अपनों की बात करते सुनता हूँ,
तो तुम्हारी याद नहीं,
तुम्हारा अपनापन याद आता है।
मुझे तुम्हारी आवाज़ से ज़्यादा
तुम्हारा यक़ीन याद आता है,
वो एहसास कि कोई है
जो मेरे साथ खड़ा है।
अब अगर कभी मुलाक़ात हो जाए,
तो शायद हम अजनबियों की तरह बात करें,
मगर दिल के किसी हिस्से में
एक पुराना परिचय ज़रूर रहेगा।
तुम्हारे बाद मैं पहले जैसा नहीं रहा,
मगर शायद बुरा भी नहीं हुआ,
दर्द ने मुझे तोड़ा कम,
समझदार ज़्यादा बनाया।
कुछ रिश्ते साथ नहीं रहते,
लेकिन उनके जाने के बाद
हम जो इंसान बनते हैं,
वो हमेशा उनके असर में रहता है।
आज भी तुम्हारी याद आती है,
मगर तुम्हें वापस पाने की चाह में नहीं,
बस उस दौर को महसूस करने के लिए
जब ज़िंदगी में तुम्हारा होना शामिल था।
कभी-कभी तुम्हारी याद किसी तस्वीर से नहीं आती,
बस यूँ ही किसी साधारण-सी शाम में आ बैठती है,
और फिर पूरा दिन नहीं,
पूरा एक दौर याद आने लगता है।
तुम्हारे जाने का दुख इस बात का नहीं था
कि तुम मेरे साथ नहीं रहे,
दुख इस बात का था कि
जिसे मैं अपना सबसे क़रीबी मानता था,
वो धीरे-धीरे मुझसे सबसे दूर हो गया।
पहले जब कोई बात परेशान करती थी,
तो तुम्हें बताकर मन हल्का हो जाता था,
अब वही बातें भीतर रह जाती हैं,
और शायद इसी को बड़ा होना कहते हैं।
हमारी कहानी में कमी मोहब्बत की नहीं थी,
कमी शायद उस वक़्त की थी
जब हमें एक-दूसरे को समझना चाहिए था,
और हम बस एक-दूसरे को खो रहे थे।
तुम्हारे बाद मैंने जाना,
किसी की मौजूदगी कितनी बड़ी चीज़ होती है,
ये अक्सर उसके चले जाने के बाद ही समझ आता है।
अब भी जब कोई मेरी पसंद की बात करता है,
तो एक पल को तुम्हारा ख़याल आ जाता है,
क्योंकि कभी तुम उन गिने-चुने लोगों में थे
जो मुझे बिना समझाए समझ लेते थे।
सबसे ज़्यादा दर्द बिछड़ने से नहीं हुआ,
दर्द उस बदलाव से हुआ
जिसने हमें अजनबी बना दिया,
जबकि कभी हम एक-दूसरे की दुनिया हुआ करते थे।
तुम्हारी याद अब मुझे रुलाती नहीं,
मगर कुछ देर के लिए चुप ज़रूर कर देती है,
जैसे मन किसी पुराने कमरे में जाकर
थोड़ी देर बैठ आया हो।
मैंने बहुत कोशिश की
कि तुम्हें एक ग़लती मानकर भूल जाऊँ,
मगर सच ये है कि
जो रिश्ता सच्चा रहा हो,
उसे ग़लती नहीं कहा जा सकता।
कुछ लोग छोड़कर चले जाते हैं,
लेकिन उनकी कही हुई छोटी-छोटी बातें
सालों तक हमारे भीतर ज़िंदा रहती हैं,
तुम भी शायद उन्हीं में से हो।
हम दोनों ने एक-दूसरे को खोया है,
फ़र्क़ बस इतना है,
मैंने तुम्हें खोने के बाद भी
तुम्हारी जगह खाली रखी थी।
कभी सोचता हूँ,
अगर आख़िरी दिनों में हम थोड़ा और ईमानदार होते,
तो शायद अंत वही रहता,
मगर दर्द थोड़ा कम होता।
तुम्हारे साथ बिताया हुआ समय
आज भी मेरी सबसे सुंदर यादों में है,
और शायद यही वजह है
कि उसका खोना आज भी थोड़ा दुख देता है।
अब मुझे तुम्हारे लौटने का इंतज़ार नहीं,
लेकिन ये सच है कि
कुछ रिश्ते ख़त्म होने के बाद भी
दिल से पूरी तरह नहीं जाते।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने लोगों से कम और ख़ुद से ज़्यादा बातें कीं,
और वहीं कहीं मुझे अपना खोया हुआ हिस्सा मिला।
पहले मुझे लगता था
कि मोहब्बत का मतलब साथ रहना है,
फिर तुम गए,
और मैंने जाना कि
कभी-कभी मोहब्बत का आख़िरी रूप स्वीकार करना होता है।
आज भी किसी भीड़ में
जब कोई तुम्हारी तरह हँसता है,
तो एक पल के लिए मन ठहर जाता है,
फिर याद आता है
कि कुछ आवाज़ें सिर्फ़ यादों में लौटती हैं।
तुम्हारे बाद मैंने ख़ुश रहना सीख लिया,
लेकिन ये मत समझना
कि तुम्हारी कमी कभी थी ही नहीं,
कुछ कमी कभी जाती नहीं,
बस जीना उसके साथ सीख लिया जाता है।
मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं
कि कहानी पूरी नहीं हुई,
अफ़सोस इस बात का है
कि हम दोनों उसके सबसे सुंदर हिस्से में बिछड़ गए।
अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो दर्द और शुक्रिया दोनों महसूस होते हैं,
क्योंकि तुमने मुझे दुख भी दिया,
और ख़ुद को समझने की वजह भी।
कुछ यादें ऐसी होती हैं
जिन्हें भुलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए,
क्योंकि उनमें सिर्फ़ दर्द नहीं,
हमारी ज़िंदगी का एक सच्चा हिस्सा भी होता है।
तुम्हारी ख़ामोशी ने
मुझे जितना सिखाया,
शायद तुम्हारे शब्द भी उतना नहीं सिखा पाए थे।
कभी-कभी लगता है
मैं तुम्हें नहीं,
उस इंसान को याद करता हूँ
जो तुम्हारे साथ रहते हुए मैं बन गया था।
तुम्हारे जाने के बाद
ज़िंदगी ने चलना नहीं छोड़ा,
मगर कुछ दूरीयाँ ऐसी रह गईं
जिन्हें समय भी पूरी तरह तय नहीं कर पाया।
अब तुम्हारा नाम सुनकर
दिल नहीं टूटता,
बस एक हल्की-सी उदासी गुज़रती है,
जैसे कोई अपना शहर
बहुत पीछे छूट गया हो।
और सच कहूँ,
आज भी अगर हमारी कहानी याद आती है,
तो सबसे पहले दर्द नहीं आता,
सबसे पहले वो मोहब्बत याद आती है
जो कभी सचमुच थी।