माँ की दुआओँ का असर यूँ साथ चलता है,
मुश्किल रास्तों में भी मन संभलता है,
जब हिम्मत जवाब देने लगती है,
उसका भरोसा फिर से बल देता है।
माँ ने कभी बड़े वादे नहीं किए,
बस हर चिंता में मेरा नाम रखा,
आज जो सुकून से साँस लेता हूँ,
उसमें उसकी परवाह का हाथ रखा।
जब दुनिया ने सवालों में उलझाया,
माँ का विश्वास जवाब बन गया,
जिस दिन खुद पर यक़ीन कम हुआ,
उस दिन उसका भरोसा साथ बन गया।
माँ की दुआ कोई शब्द नहीं,
यह हर दिन की छुपी हुई फिक्र है,
जो बिना बताए साथ चलती है,
और हर डर के आगे ढाल बनती है।
मैंने कई सहारे देखे जीवन में,
पर सबसे सच्चा सहारा वही लगा,
जो हर रात मेरी सलामती सोचकर,
चुपचाप मेरे लिए जागता रहा।
माँ की दुआओँ की खूबी यह है,
वे शोर नहीं करतीं,
बस कठिन समय आने पर,
खामोशी से हिम्मत बन जाती हैं।
जब भी रास्ते धुंधले लगते हैं,
माँ की सीख याद आ जाती है,
और उसके विश्वास की गर्माहट,
हर उलझन आसान कर जाती है।
माँ की परवाह का कोई समय नहीं होता,
वह उम्र देखकर कम नहीं होती,
हम बड़े हो जाते हैं भले ही,
पर उसकी चिंता कभी छोटी नहीं होती।
मेरी हर मुस्कान के पीछे,
किसी न किसी दिन उसकी चिंता रही है,
मैं आज निश्चिंत दिखता हूँ,
क्योंकि उसने हमेशा फिक्र की है।
माँ की दुआओँ ने मुझे उड़ना सिखाया,
पर घमंड से बचना भी सिखाया,
उसका प्रेम सिर्फ़ सहारा नहीं,
जीवन का संतुलन भी बन पाया।
जब थककर लौटता हूँ जीवन से,
माँ की आवाज़ सुकून देती है,
कुछ रिश्ते दवा नहीं होते,
फिर भी हर दर्द कम कर देते हैं।
माँ ने कभी यह नहीं कहा,
कि वह मेरे लिए कितना सोचती है,
लेकिन उसकी हर छोटी बात,
उसकी गहरी परवाह बता देती है।
मेरे लिए सबसे कीमती चीज़,
कोई वस्तु या दौलत नहीं,
वह विश्वास है जो माँ ने,
हर परिस्थिति में मुझ पर रखा।
माँ की दुआओँ का रंग अलग होता है,
वे उम्मीद से भरी रहती हैं,
जब मैं खुद को कम समझता हूँ,
वे मुझे फिर से पूरा कर देती हैं।
कई बार मैं हार मानने वाला था,
पर उसकी उम्मीद नहीं टूटी,
शायद इसी वजह से मेरी कोशिशों की,
डोर कभी पूरी तरह नहीं छूटी।
माँ की फिक्र में कोई स्वार्थ नहीं,
बस अपनापन ही अपनापन है,
इस दुनिया में शायद यही,
सबसे सच्चा और पवित्र बंधन है।
जब मैं दूर होता हूँ,
तब भी उसका ध्यान साथ रहता है,
कुछ रिश्ते दूरी से कम नहीं होते,
माँ का प्रेम उनमें सबसे आगे रहता है।
माँ की दुआओँ को महसूस करने के लिए,
बड़े चमत्कारों की ज़रूरत नहीं,
बस मुश्किल समय में याद करो,
कितनी बार तुम संभल गए थे।
मेरी सफलताओं से पहले,
उसकी उम्मीदें चलती थीं,
मैं मंज़िल तक बाद में पहुँचा,
वह पहले से मेरे लिए प्रार्थना करती थी।
माँ की चिंता कभी बोझ नहीं लगती,
वह तो प्रेम का सबसे सच्चा रूप है,
जो हर हाल में साथ रहता है,
और जीवन को सुरक्षित महसूस कराता है।
जब मन बेचैन होता है,
माँ की बातों में ठहराव मिलता है,
उसका विश्वास ऐसा दीपक है,
जो अँधेरों में भी रास्ता दिखाता है।
माँ की दुआओँ ने मुझे यह सिखाया,
कि मज़बूत होना क्या होता है,
दूसरों का सहारा बनना भी,
उसकी सीख का ही हिस्सा होता है।
मैंने जीवन में बहुत कुछ पाया,
पर सबसे अनमोल वही रहा,
जो माँ ने बिना माँगे दिया,
अपना अटूट विश्वास और स्नेह।
माँ का प्रेम हर दिन दिखाई नहीं देता,
पर हर दिन महसूस होता है,
जैसे कोई अदृश्य छाया,
जो हर धूप में साथ चलती है।
जब भी डर मन में घर करता है,
माँ का चेहरा याद आ जाता है,
और न जाने क्यों उसी पल,
विश्वास फिर लौट आता है।
माँ की दुआओँ का मोल क्या होगा,
यह कोई हिसाब नहीं जानता,
क्योंकि उनका असर अक्सर,
शब्दों से पहले महसूस होता है।
मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत,
उसका मेरे लिए सोचना है,
इस दुनिया में इससे सुंदर,
कोई आशीर्वाद नहीं लगता है।
माँ की परवाह उम्र नहीं देखती,
न समय और न दूरी,
उसका प्रेम हर परिस्थिति में,
एक जैसा सच्चा रहता है।
जब जीवन बहुत कठिन लगता है,
माँ का विश्वास याद रखता हूँ,
फिर लगता है कि अभी भी,
सब कुछ संभव है।
माँ की दुआएँ मेरे साथ हैं,
यह विचार ही काफी है,
हर संघर्ष छोटा लगने लगता है,
जब दिल में उसका आशीर्वाद बाकी है।