माँ ने मुझे गिरकर उठना सिखाया,
पापा ने उठकर आगे बढ़ना,
इसीलिए मुश्किलें आईं भी बहुत,
पर रुकना कभी नहीं सीखा।
जब जेब खाली होती थी,
तब भी मेरी ज़रूरतें पूरी हो जाती थीं,
आज समझ आता है,
माँ-पापा अपनी इच्छाएँ टाल दिया करते थे।
माँ को मेरी छोटी-सी तकलीफ़ भी दिख जाती थी,
पापा को मेरे बड़े-बड़े डर समझ आ जाते थे,
एक मेरी भावनाएँ पढ़ लेता था,
दूसरा मेरी परेशानियाँ।
बचपन में लगता था,
घर अपने आप चलता है,
बड़े होकर पता चला,
घर माँ के स्नेह और पापा की मेहनत से चलता है।
माँ ने हमेशा मुझे अच्छे इंसान बनने को कहा,
पापा ने हमेशा सही रास्ते पर चलने को,
उनकी सीख आज भी,
हर फ़ैसले में मेरे साथ चलती है।
जब भी कोई सफलता मिलती है,
लोग मेरी मेहनत देखते हैं,
पर मुझे उन रातों की याद आती है,
जब माँ-पापा मेरी चिंता में जागते थे।
माँ ने मेरी हर बात धैर्य से सुनी,
पापा ने हर उलझन का रास्ता दिखाया,
मैं कभी अकेला नहीं था,
क्योंकि दोनों हमेशा मेरे साथ थे।
दुनिया में बहुत लोग मिलते हैं,
कुछ साथ निभाते हैं, कुछ नहीं,
पर माँ-पापा का रिश्ता ऐसा होता है,
जो बिना शर्त हर मोड़ पर खड़ा रहता है।
माँ की मुस्कान घर को रोशन करती थी,
पापा की मौजूदगी सुरक्षित महसूस कराती थी,
दोनों के साथ होने से,
हर चिंता छोटी लगती थी।
मैं जब भी किसी मुश्किल से निकलता हूँ,
तो महसूस होता है,
मेरी हिम्मत में पापा का विश्वास है,
और मेरी किस्मत में माँ की दुआ।
माँ ने कभी यह नहीं बताया,
कि उसने मेरे लिए क्या छोड़ा,
पापा ने कभी यह नहीं गिनाया,
कि उन्होंने मेरे लिए क्या किया।
आज जो लोग मेरे व्यवहार की तारीफ़ करते हैं,
उन्हें क्या पता,
मेरे संस्कार किसी किताब से नहीं,
माँ-पापा की ज़िंदगी से आए हैं।
माँ का प्यार मुझे नरम बनाता रहा,
पापा की सीख मुझे मज़बूत बनाती रही,
इन्हीं दोनों के बीच,
मेरा पूरा व्यक्तित्व बना।
कुछ लोग सफलता को मंज़िल मानते हैं,
मैं उसे माँ-पापा की मेहनत का परिणाम मानता हूँ,
क्योंकि मेरी उड़ान से पहले,
उन्होंने मेरे लिए आसमान तैयार किया था।
यदि कभी जीवन मुझे फिर से चुनने का अवसर दे,
तो मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहूँगा,
बस यही माँगूँगा,
कि हर जन्म में वही माँ और वही पापा मिलें।
माँ की उँगली पकड़कर चलना सीखा था,
पापा की बातों से संभलना सीखा,
एक ने कदमों को दिशा दी,
दूसरे ने इरादों को मज़बूत किया।
जब भी मैं घर लौटता हूँ,
माँ आज भी वही सवाल पूछती है,
"थक गए हो क्या?"
और उसी पल सारी थकान सच में उतर जाती है।
पापा ज़्यादा बातें नहीं करते,
पर उनकी खामोशी में भी परवाह होती है,
वह पूछते कम हैं,
मगर सोचते सबसे ज़्यादा हैं।
माँ ने मुझे प्यार का अर्थ समझाया,
पापा ने ज़िम्मेदारी का,
इन दोनों के बिना,
ज़िंदगी का कोई सबक पूरा नहीं होता।
मैंने कई लोगों को अपने लिए बदलते देखा,
पर माँ-पापा को हमेशा अपने बच्चों के लिए झुकते देखा,
शायद यही निस्वार्थ प्रेम की सबसे सच्ची पहचान है।
जब मैं छोटा था,
मुझे लगता था कि माँ-पापा सब कर सकते हैं,
आज बड़ा होकर समझा हूँ,
वे भी थकते थे, बस हमें महसूस नहीं होने देते थे।
माँ की दुआ और पापा की मेहनत,
दो ऐसी चीज़ें हैं जिनका कर्ज़ कभी चुकाया नहीं जा सकता,
क्योंकि ये दोनों बिना किसी उम्मीद के मिलती हैं।
मेरी हर अच्छी आदत के पीछे,
कहीं न कहीं उनका ही असर है,
उन्होंने सिर्फ़ मुझे बड़ा नहीं किया,
मुझे इंसान भी बनाया।
वक़्त बदल गया, उम्र बदल गई,
ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ गईं,
लेकिन माँ-पापा की नज़र में,
मैं आज भी वही बच्चा हूँ जिसकी उन्हें फ़िक्र रहती है।
अगर जीवन की सबसे बड़ी नेमत पूछी जाए,
तो मैं किसी दौलत का नाम नहीं लूँगा,
मैं बस इतना कहूँगा,
मुझे माँ-पापा का साथ मिला, यही मेरी सबसे बड़ी ख़ुशनसीबी है।
माँ की आदत थी मेरी पसंद याद रखना,
पापा की आदत थी मेरी ज़रूरत समझ लेना,
मैंने तब इन बातों पर ध्यान नहीं दिया,
अब समझ आता है, यही तो प्रेम था।
जब जेब में सपने ज़्यादा और हौसले कम थे,
पापा ने यक़ीन देकर रास्ता दिखाया,
जब मन हार मानने लगा था,
माँ ने मुस्कुराकर फिर से संभाला।
माँ ने सिखाया कि लोगों का दर्द समझना,
पापा ने सिखाया कि अपने दर्द से लड़ना,
इन दोनों सीखों ने मिलकर,
मुझे जीवन जीना सिखाया।
कभी माँ मेरे लिए जागती रही,
कभी पापा मेरी चिंता छिपाते रहे,
मैं चैन से सोता रहा,
और वे मेरे कल के लिए सोचते रहे।
मेरे बचपन की सबसे बड़ी दौलत,
कोई खिलौना या चीज़ नहीं थी,
वह माँ की गोद और पापा का कंधा था,
जहाँ हर डर छोटा लगने लगता था।
माँ ने घर में अपनापन बोया,
पापा ने उस अपनापन को सुरक्षित रखा,
दोनों ने मिलकर ऐसा संसार बनाया,
जहाँ लौटने का मन हमेशा करता है।
जब दुनिया ने मेरी कमियाँ गिनाईं,
माँ ने मेरी अच्छाइयाँ याद दिलाईं,
जब मैं खुद पर शक करने लगा,
पापा ने मेरा विश्वास लौटा दिया।
माँ की रसोई में सिर्फ़ खाना नहीं बनता था,
उसमें मेरी पसंद, मेरी खुशी और उसका स्नेह भी पकता था,
और पापा की मेहनत में सिर्फ़ ज़िम्मेदारी नहीं,
हम सबके सपनों का भविष्य छिपा होता था।
आज भी कोई सफलता मिलती है,
तो सबसे पहले उनका चेहरा याद आता है,
क्योंकि मंज़िल भले मैंने पाई हो,
रास्ता उन्होंने बनाया था।
माँ ने कभी अपने हिस्से की खुशियाँ नहीं गिनाईं,
पापा ने कभी अपनी थकान का हिसाब नहीं रखा,
और हम बड़े होते रहे,
उनके प्रेम को सामान्य समझते रहे।
घर से दूर रहकर समझ आया,
कि माँ की आवाज़ और पापा की सलाह,
सिर्फ़ बातें नहीं थीं,
वे जीवन को आसान बनाने वाले सहारे थे।
माँ की डाँट में छिपी चिंता,
और पापा की सख़्ती में छिपा प्रेम,
उम्र बढ़ने के साथ समझ आता है,
कि दोनों का हर रूप हमारे लिए था।
मेरे व्यक्तित्व की जो भी अच्छी बातें हैं,
वे किसी किताब से नहीं आईं,
वे माँ-पापा को देखकर सीखी गई आदतें हैं,
जो आज भी मेरा मार्गदर्शन करती हैं।
कुछ रिश्ते समय के साथ बदल जाते हैं,
कुछ दूरियों में कमज़ोर पड़ जाते हैं,
लेकिन माँ-पापा का स्नेह ऐसा है,
जो हर परिस्थिति में अडिग रहता है।
यदि जीवन की पूरी कहानी एक वाक्य में लिखनी हो,
तो मैं बस इतना लिखूँगा,
"मेरे पास माँ की दुआएँ थीं और पापा का विश्वास,
इसलिए मैं हर मुश्किल से गुज़र गया।"
माँ ने मेरे आँसुओं की वजह बिना पूछे समझ ली,
पापा ने मेरी खामोशी में छिपी चिंता पढ़ ली,
मैं आज जो भी हूँ, उनकी परवरिश का असर हूँ,
वरना इस दुनिया ने तो मुझे कई बार बदलने की कोशिश की थी।
जब बचपन में डर लगता था,
तो माँ का हाथ थाम लेना काफी होता था,
और जब रास्ते मुश्किल लगते थे,
तो पापा का भरोसा हिम्मत बन जाता था।
माँ ने हर छोटी खुशी को त्योहार की तरह मनाया,
पापा ने हर छोटी कोशिश को सराहा,
एक ने दिल को अपनापन दिया,
दूसरे ने सपनों को उड़ान दी।
मेरी गलतियों पर माँ ने समझाया,
पापा ने जीवन की सीख दी,
दोनों ने कभी मुझे पूर्ण नहीं माना,
लेकिन हमेशा बेहतर बनने की प्रेरणा दी।
घर सिर्फ दीवारों और छत से नहीं बनता,
उसमें माँ की ममता और पापा की मेहनत भी बसती है,
इसीलिए दुनिया के सबसे बड़े मकान भी,
अपने घर जैसा सुकून नहीं दे पाते।
माँ की दुआएँ अक्सर शब्दों में नहीं होतीं,
पापा का प्रेम भी हर बार दिखाई नहीं देता,
मगर जीवन के कठिन दिनों में समझ आता है,
कि इन्हीं दो लोगों ने सबसे अधिक साथ निभाया है।
मेरी हर उपलब्धि के पीछे,
उनकी अनगिनत चिंताएँ और उम्मीदें खड़ी हैं,
मैं मंच पर अकेला दिखाई देता हूँ,
पर मेरी सफलता में माँ-पापा दोनों शामिल हैं।
समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है,
लोग, रिश्ते और हालात भी,
लेकिन माँ-पापा का प्रेम ऐसा रिश्ता है,
जो उम्र बढ़ने के साथ और गहरा होता जाता है।