चार दिन की ज़िंदगी में यह समझ आ गया,
कि हर सही बात साबित करना ज़रूरी नहीं होता।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब मैं पलों को गिनता नहीं,
उन्हें महसूस करने की कोशिश करता हूँ।
चार दिन की ज़िंदगी में कई चेहरे मिले,
कुछ नाम भूल गया, कुछ एहसास नहीं भूला।
चार दिन की ज़िंदगी का सबसे सुंदर हिस्सा,
किसी अपने का बिना वजह हाल पूछ लेना है।
चार दिन की ज़िंदगी में जो समय हँसते हुए बीता,
वही सबसे बड़ा लाभ निकला।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब नाराज़गी लंबी नहीं रखता,
कौन जाने किस मुलाक़ात का कौन सा आख़िरी दिन हो।
चार दिन की ज़िंदगी ने यह सिखाया,
कि हर कमी दुख नहीं, कुछ जगहें सीख के लिए भी खाली रहती हैं।
चार दिन की ज़िंदगी में मैंने देखा,
लोग शब्द नहीं, व्यवहार याद रखते हैं।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब हर खुशी को टालता नहीं,
कई अवसर लौटकर नहीं आते।
चार दिन की ज़िंदगी में सबसे कठिन काम शायद यही है,
कि इंसान जो है, उसकी क़दर कर पाए।
चार दिन की ज़िंदगी ने मुझे धीरे-धीरे समझाया,
कि सुकून पाने से पहले अपेक्षाएँ हल्की करनी पड़ती हैं।
चार दिन की ज़िंदगी में जो लोग दिल हल्का कर दें,
उनका साथ संभालकर रखना चाहिए।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब हर दिन कुछ अच्छा देख लेता हूँ,
वरना व्यस्तता सब कुछ छुपा देती है।
चार दिन की ज़िंदगी में कई इच्छाएँ बदलीं,
और उन्हीं के साथ मैं भी बदल गया।
चार दिन की ज़िंदगी का सच यह भी है,
कि कुछ बातें समय पर छोड़ देना ही बुद्धिमानी है।
चार दिन की ज़िंदगी में सबसे प्यारी यादें वही रहीं,
जिन्हें बनाते समय उनकी कीमत का अंदाज़ा भी नहीं था।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब अपने लोगों के लिए समय निकालता हूँ,
क्योंकि बाद में अक्सर समय होता है, लोग नहीं।
चार दिन की ज़िंदगी ने सिखाया,
कि हर उपलब्धि से पहले धैर्य की लंबी चुप्पी होती है।
चार दिन की ज़िंदगी में जो मिला, वह हमेशा नहीं रहा,
मगर जो सिखा गया, वह आज भी साथ है।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए मैं अब पूर्णता नहीं ढूँढ़ता,
अधूरेपन में भी सुंदरता देख लेता हूँ।
चार दिन की ज़िंदगी में सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ,
कि अब मैं तुलना से ज़्यादा संतोष को महत्व देता हूँ।
चार दिन की ज़िंदगी ने बताया,
कि खुश रहने के लिए सब कुछ होना ज़रूरी नहीं होता।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब हर शाम शुक्रगुज़ार रहता हूँ,
कि एक और दिन अनुभवों से भर गया।
चार दिन की ज़िंदगी में जो लोग साथ चलकर थकान बाँट लें,
उनसे बढ़कर कोई सहारा नहीं होता।
चार दिन की ज़िंदगी का निष्कर्ष बस इतना है,
कि इसे बड़ा बनाने से पहले, इसे सच्चा बनाना ज़रूरी है।
चार दिन की ज़िंदगी में इतना समझ आ गया,
नाराज़ रहने से ज़्यादा अच्छा, अपने लोगों के साथ बैठना है।
चार दिन की ज़िंदगी में जो पल दिल को सुकून दें,
उन्हें कल के लिए नहीं, आज के लिए जीना चाहिए।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए जल्दी में नहीं हूँ,
अब हर अच्छे लम्हे को महसूस करना चाहता हूँ।
चार दिन की ज़िंदगी में सबसे कीमती चीज़ समय नहीं,
समय के साथ बिताए गए अपने लोग होते हैं।
चार दिन की ज़िंदगी ने यह सिखाया,
कि यादें अक्सर चीज़ों से ज़्यादा टिकती हैं।
चार दिन की ज़िंदगी में बहुत कुछ पाना ज़रूरी नहीं,
कुछ लोगों का सच्चा साथ ही काफ़ी होता है।
चार दिन की ज़िंदगी का हिसाब लगाया तो पता चला,
सबसे सुंदर दिन वही थे जिनमें कोई दिखावा नहीं था।
चार दिन की ज़िंदगी में शिकायतें कम रखो,
क्योंकि खुशियाँ अक्सर साधारण दिनों में मिलती हैं।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए हर बात जीतना नहीं चाहता,
कुछ रिश्ते बचाना भी ज़रूरी लगता है।
चार दिन की ज़िंदगी में हम भविष्य सँवारते रहे,
और वर्तमान कई बार चुपचाप निकल गया।
चार दिन की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच शायद यह है,
कि जो पल अभी है, वही सबसे अधिक अपना है।
चार दिन की ज़िंदगी में मैंने देखा,
लोग सफलता नहीं, अपनापन याद रखते हैं।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब हर मुलाक़ात को हल्के में नहीं लेता,
कुछ चेहरे दोबारा नहीं मिलते।
चार दिन की ज़िंदगी में सुकून कमाने की कोशिश करो,
सिर्फ़ चीज़ें कमाने की नहीं।
चार दिन की ज़िंदगी ने समझाया,
कि हर अधूरी इच्छा दुख नहीं होती।
चार दिन की ज़िंदगी में सबसे सुंदर निवेश,
किसी अपने के लिए निकाला गया समय है।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब छोटी खुशियों को टालता नहीं,
क्योंकि बड़ी खुशियाँ हमेशा तय समय पर नहीं आतीं।
चार दिन की ज़िंदगी में बहुत कुछ बदल जाता है,
इसलिए प्यार और सम्मान जताने में देर नहीं करनी चाहिए।
चार दिन की ज़िंदगी ने यह एहसास कराया,
कि संतोष भी एक उपलब्धि होता है।
चार दिन की ज़िंदगी में कुछ सपने पूरे हुए,
और कुछ ने मुझे बेहतर इंसान बना दिया।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए हर दिन असाधारण नहीं होगा,
मगर हर दिन अर्थपूर्ण हो सकता है।
चार दिन की ज़िंदगी में जितना खुद को समझा,
उतना शायद दुनिया को समझने में नहीं समझ पाया।
चार दिन की ज़िंदगी का सौंदर्य इसी में है,
कि यह हमेशा हमारे हिसाब से नहीं चलती।
चार दिन की ज़िंदगी में जो लोग दिल से दुआ देते हैं,
वही असली दौलत बन जाते हैं।
चार दिन की ज़िंदगी है, इसलिए अब हर शाम यही सोचता हूँ,
आज का दिन सिर्फ़ गुज़रा नहीं, जिया भी गया या नहीं।