ज़िंदगी ने कभी अपने इरादे पहले से नहीं बताए,
बस हर मोड़ पर एक नया अनुभव रख दिया।
कुछ रास्ते मैंने सोच-समझकर चुने थे,
कुछ रास्तों ने मुझे चुन लिया।
मैंने देखा है, उम्र केवल सालों से नहीं बढ़ती,
कुछ एहसास एक दिन में भी बहुत बड़ा कर देते हैं।
ज़िंदगी की किताब में सबसे कीमती पन्ने वही निकले,
जिन्हें लिखते वक़्त साधारण समझा था।
कई बार जो नहीं मिला, उसका अफ़सोस रहा,
फिर जो मिला उसे समझने में बरस लग गए।
मैंने ख़ुशी को शोर में ढूँढ़ा था,
वह अक्सर मन की शांति में बैठी मिली।
ज़िंदगी का एक अजीब उसूल है,
यह पहले इम्तिहान लेती है, अर्थ बाद में समझाती है।
कुछ लोग केवल कुछ समय के लिए आए,
मगर उनकी मौजूदगी लंबे समय तक साथ रही।
मैंने जाना कि मज़बूत होना हमेशा लड़ना नहीं होता,
कई बार स्वीकार कर लेना भी ताक़त होती है।
ज़िंदगी ने हर इच्छा पूरी नहीं की,
मगर हर अधूरी इच्छा से कुछ नया सिखाया।
कभी एक छोटी-सी बात पूरे दिन को रोशन कर गई,
कभी बड़ी उपलब्धि भी मन को छू नहीं पाई।
मैंने समय से शिकायत करना कम कर दिया,
अब उसके दिए हुए अर्थ समझने की कोशिश करता हूँ।
कुछ दिनों में बहुत लोग साथ थे,
कुछ दिनों में केवल मैं और मेरी सोच।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी हैरत यही लगी,
जिसे अंत समझा था, वह कई बार शुरुआत निकला।
मैंने पाया कि सुकून कहीं पहुँचने में नहीं,
अपने भीतर कम उलझने में है।
हर हार अपने साथ उदासी नहीं लाई,
कुछ हारें ज़रूरी विनम्रता भी दे गईं।
ज़िंदगी ने कभी एक रंग में रहना नहीं सीखा,
इसीलिए इसके हर मौसम की अपनी कहानी है।
जो बातें कभी बहुत भारी लगती थीं,
आज वे बस यादों का हिस्सा हैं।
मैंने देखा है, इंसान को बदलने के लिए हमेशा तूफ़ान नहीं चाहिए,
कभी एक सच्ची बातचीत भी काफ़ी होती है।
ज़िंदगी अक्सर धीरे-धीरे समझ आती है,
ठीक वैसे जैसे सुबह की रोशनी धीरे-धीरे कमरे में भरती है।
कुछ सपने पूरे हुए, कुछ अधूरे रह गए,
मगर दोनों ने मुझे कुछ न कुछ दिया।
मैंने अब हर मोड़ पर जल्दबाज़ी करना छोड़ दिया है,
कुछ जवाब समय के साथ ही अच्छे लगते हैं।
ज़िंदगी ने सिखाया कि क़दर केवल लोगों की नहीं,
लम्हों की भी करनी चाहिए।
कभी पीछे देखता हूँ तो शुक्रिया महसूस होता है,
उन दिनों के लिए भी जो आसान नहीं थे।
और अब यही समझ बची है,
ज़िंदगी को पूरी तरह समझना शायद संभव नहीं,
मगर उसे पूरे दिल से महसूस करना हमेशा संभव है।
ज़िंदगी ने कभी सब कुछ एक साथ नहीं दिया,
मगर जो दिया, उसके पीछे कोई वजह ज़रूर रखी।
कुछ साल यूँ ही समझने में गुज़र गए,
कि हर कमी बदक़िस्मती नहीं होती।
मैंने कई बार ख़ुशी को दूर तलाशा,
वह अक्सर किसी पुराने लम्हे की याद में बैठी मिली।
ज़िंदगी की सबसे सच्ची बात शायद यही है,
यह किसी की योजना के मुताबिक़ नहीं चलती।
कुछ लोग आए और कहानी बदल गए,
कुछ लोग गए और नज़रिया बदल गए।
मैंने देखा है, इंसान सबसे ज़्यादा तब बढ़ता है,
जब हालात उसे उसकी सुविधा से बाहर ले जाते हैं।
हर दिन कोई बड़ी घटना नहीं होती,
फिर भी हर दिन हमें थोड़ा-थोड़ा बदल देता है।
ज़िंदगी कभी सवाल पूछती है,
कभी बिना कुछ कहे जवाब समझा देती है।
कुछ अधूरे सपनों का भी शुक्रिया है,
उन्होंने नए रास्तों की ओर देखने की आदत दी।
मैंने समय को रोकने की बहुत कोशिश की,
फिर जाना कि कुछ चीज़ें बस महसूस की जाती हैं।
ज़िंदगी में जो मिला, वह हमेशा चाहा हुआ नहीं था,
मगर जो सीखा, वह हमेशा काम आया।
कभी एक छोटी-सी सफलता हौसला बन गई,
कभी एक असफलता पूरी सोच बदल गई।
मैंने पाया कि सुकून हासिल करने की चीज़ कम है,
समझने की चीज़ ज़्यादा है।
कुछ दिनों का बोझ उस वक़्त भारी लगा,
आज वही दिन मेरी मज़बूती की वजह हैं।
ज़िंदगी हर मोड़ पर नया इंसान नहीं बनाती,
कई बार वह हमें हमारे असली रूप से मिलवाती है।
जो बातें कभी शिकायत थीं,
समय के साथ वही अनुभव बन गईं।
मैंने देखा है, लोग बदलते हैं, रिश्ते बदलते हैं,
मगर कुछ एहसास उम्र भर साथ चलते हैं।
हर इच्छा पूरी हो जाए, ऐसा नहीं होता,
फिर भी जीवन अधूरा नहीं हो जाता।
ज़िंदगी की ख़ूबसूरती शायद इसी में है,
कि यह निश्चित कम और संभावनाओं से भरी ज़्यादा है।
कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है,
जिन बातों से डरता था, उनसे बहुत कुछ सीखा।
मैंने अब हर उत्तर जानने की ज़िद छोड़ दी है,
कुछ रहस्य भी जीवन को रोचक बनाए रखते हैं।
कुछ लम्हे इतने साधारण थे कि ध्यान नहीं गया,
आज वही यादों में सबसे चमकीले दिखाई देते हैं।
ज़िंदगी ने मुझे जीत से ज़्यादा धैर्य सिखाया,
और धैर्य ने कई मुश्किल दिनों को आसान किया।
अब समझ आता है कि बढ़ना हमेशा आगे बढ़ना नहीं होता,
कभी-कभी बदल जाना भी विकास होता है।
आख़िर में यही महसूस हुआ,
ज़िंदगी को समझने से ज़्यादा, उसे दिल से जीना ज़रूरी है।