कुछ दर्द ऐसे होते हैं,
जो आँसुओं से नहीं, ख़ामोशियों से बहते हैं।
ज़िंदगी ने हर चाहत पूरी नहीं की,
शायद इसलिए कुछ दुआएँ आज भी ज़िंदा हैं।
कई बार दिल उदास लोगों से नहीं,
उदास यादों से भर जाता है।
वक़्त ने छीन लिया बहुत कुछ,
मगर भूलने की आदत फिर भी न दे सका।
कुछ शामें बिना वजह भारी लगती हैं,
जैसे दिल किसी पुरानी बात को याद कर रहा हो।
ज़िंदगी में सबसे गहरी चोट वहीं लगती है,
जहाँ सबसे ज़्यादा भरोसा रखा गया हो।
हम मुस्कुरा तो लेते हैं,
मगर हर मुस्कान सुकून की गवाही नहीं होती।
कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते,
बस बातों से निकलकर यादों में चले जाते हैं।
दिल को तोड़ने वाले हमेशा लोग नहीं होते,
कभी-कभी हालात भी यह काम कर जाते हैं।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी बेबसी यह है,
कुछ चीज़ें चाहकर भी बदली नहीं जा सकतीं।
कुछ ख़्वाब इतने अपने होते हैं,
कि उनके अधूरे रह जाने का दुख उम्र भर रहता है।
हमने ख़ुद को मज़बूत तो बना लिया,
मगर पहले जैसी मासूमियत खो बैठे।
कभी-कभी थकान जिस्म में नहीं,
उम्मीदों में उतर आती है।
ज़िंदगी ने सिखाया कि हर खोई चीज़ वापस नहीं मिलती,
और हर मिली चीज़ हमेशा नहीं रहती।
कुछ लोग दिल से कभी नहीं जाते,
बस ज़िंदगी से चले जाते हैं।
उदासी की भी अपनी एक ज़ुबान होती है,
जो अक्सर ख़ामोशी में सुनाई देती है।
वक़्त गुज़र जाता है,
मगर कुछ लम्हे वहीं ठहरे रह जाते हैं।
हमने कई बार हँसकर टाल दिया,
जो बातें अंदर ही अंदर तोड़ रही थीं।
कुछ दर्दों का कोई इलाज नहीं होता,
सिर्फ़ उनके साथ जीना सीखना पड़ता है।
ज़िंदगी का सबसे कठिन सबक यह है,
कि हर अपना हमेशा अपना नहीं रहता।
कुछ यादें इतनी ख़ूबसूरत होती हैं,
कि उन्हें याद करके भी दिल भर आता है।
हमने जिन चीज़ों को बचाने की कोशिश की,
कई बार वही सबसे पहले बिछड़ गईं।
दिल की वीरानी का शोर कोई नहीं सुनता,
क्योंकि यह आवाज़ बाहर नहीं आती।
कुछ कहानियाँ मुकम्मल नहीं होतीं,
फिर भी उम्र भर याद रहती हैं।
आख़िर में दर्द कम नहीं होता,
बस उसे छुपाने का हुनर आ जाता है।
ज़िंदगी ने कुछ ज़ख़्म ऐसे भी दिए,
जिनका दर्द कम हुआ, मगर असर बाकी रहा।
बहुत सी ख़ुशियाँ दरवाज़े तक आईं,
मगर शायद मेरा घर ढूँढ़ते-ढूँढ़ते थक गईं।
तन्हाई का दुख यह नहीं कि कोई साथ नहीं,
दुख यह है कि कभी बहुत लोग साथ थे।
वक़्त ने आहिस्ता-आहिस्ता सब बदल दिया,
और हम हर बदलाव को मामूली समझते रहे।
कुछ ख़्वाब आँखों से नहीं टूटते,
वो दिल में अधूरे रहकर उम्र भर साथ चलते हैं।
ज़िंदगी की सबसे ख़ामोश अज़ीयत यह है,
कि इंसान हँसता रहे और दिल थकता रहे।
कुछ यादें बोझ नहीं होतीं,
मगर उन्हें उतारे बिना भी जिया नहीं जाता।
हमने बहुत कुछ खोकर यह जाना,
कि हर नुकसान चीज़ों का नहीं होता।
वक़्त गुज़रता रहा और हम सँभलते रहे,
मगर कुछ खाली जगहें कभी भर न सकीं।
ज़िंदगी अक्सर वहाँ ख़ामोश हो जाती है,
जहाँ दिल को सबसे ज़्यादा जवाब चाहिए होते हैं।
कुछ लोग बिछड़कर भी नहीं जाते,
वो यादों की शक्ल में दिल के मुक़ीम रहते हैं।
बड़ी उम्र के साथ बड़ी ख़ुशियाँ नहीं मिलतीं,
कभी-कभी सिर्फ़ बड़ी समझ मिलती है।
जो दुख किसी से कहे न जा सकें,
वही इंसान को अंदर से बदल देते हैं।
ज़िंदगी ने हर बार रुलाया नहीं,
कभी-कभी सिर्फ़ ख़ामोश कर दिया।
कुछ हसरतें ऐसी भी होती हैं,
जिन्हें पूरा करने से ज़्यादा भुलाना मुश्किल होता है।
दिल को सबसे ज़्यादा वही लम्हे याद रहते हैं,
जिनमें ख़ुशी कम और अपनापन ज़्यादा था।
वक़्त के साथ ज़ख़्म भर तो जाते हैं,
मगर कुछ कहानियाँ अधूरी ही अच्छी लगती हैं।
ज़िंदगी की थकान सफ़र से नहीं होती,
कभी-कभी उम्मीदों के टूटने से होती है।
हमने मुस्कुराते चेहरों में उदासी देखी है,
तब जाकर ख़ामोश लोगों को समझा है।
आख़िर में यही समझ आया,
ज़िंदगी आसान नहीं हुई, हम बस उसे जीना सीख गए।