हर सुबह उम्र से एक पन्ना कम हो जाता है,
इसलिए आज की मुस्कान उधार मत रखो।
लोग याद नहीं रखते तुमने क्या कमाया,
उन्हें बस याद रहता है तुमने कैसा एहसास दिया।
समय की चाल दिखाई नहीं देती,
बस एक दिन पुरानी तस्वीरें अपना परिचय देने लगती हैं।
जो पल अपनों के साथ हँसकर बिताए गए,
वही उम्र के सबसे सुरक्षित निवेश हैं।
जीवन की लंबाई किसी के हाथ में नहीं,
पर उसकी गर्माहट हमारे व्यवहार में ज़रूर होती है।
कुछ रिश्ते घड़ी से नहीं, मौजूदगी से चलते हैं,
वर्ना साथ रहकर भी लोग दूर हो जाते हैं।
दिन बीतने का दुख नहीं होता,
दुख तब होता है जब उन्हें जीया न गया हो।
हर विदाई सिखा जाती है,
मुलाक़ातें कभी साधारण नहीं होतीं।
उम्र बढ़ती नहीं दिखती,
बस पसंदीदा लोग धीरे-धीरे यादों में बसने लगते हैं।
जो बात आज कह सकते हो, कह दो,
ख़ामोशियाँ अक्सर देर से समझी जाती हैं।
ज़िंदगी ने सबसे बड़ा सबक यही दिया,
हर चीज़ संभाली जा सकती है, वक़्त नहीं।
कई मंज़िलें पाने के बाद समझ आया,
सुकून अक्सर रास्ते के लोगों में था।
कल की तैयारी ज़रूरी है,
पर उसके लिए आज को गिरवी रखना नहीं।
हर शाम एक छोटा सा हिसाब माँगती है,
आज तुमने जीया ज़्यादा या टाला ज़्यादा?
कुछ यादें उम्र से लंबी होती हैं,
इसीलिए छोटे पल भी अनमोल होते हैं।
जीवन धीरे-धीरे नहीं गुज़रता,
हम ही एक दिन अचानक महसूस करते हैं।
अमीर वह नहीं जिसके पास बहुत कुछ है,
अमीर वह है जिसके पास याद करने लायक़ पल हैं।
समय कभी शोर नहीं करता,
फिर भी सबसे गहरे बदलाव वही लाता है।
हर मुलाक़ात को आख़िरी समझकर नहीं,
पर अनमोल समझकर ज़रूर जीना चाहिए।
उम्र का सबसे सुंदर हिस्सा वह है,
जहाँ शिकायतें कम और कृतज्ञता ज़्यादा हो जाए।
जो लोग दिल में जगह बना लेते हैं,
वे दूरी में भी साथ चलते हैं।
ज़िंदगी की रफ़्तार कम नहीं होती,
बस हम देर से उसकी आहट सुनते हैं।
कुछ ख़ुशियाँ तस्वीरों में नहीं आतीं,
वे बस बरसों बाद मुस्कान बनकर लौटती हैं।
अंत में सामान नहीं, किस्से बचते हैं,
इसलिए जीवन को संग्रह नहीं, अनुभव बनाओ।
जब जाने का समय आए,
तो अफ़सोस कम और शुक्रिया ज़्यादा होना चाहिए।
उम्र ने जितना सिखाया, किताबों में कहाँ था,
सबसे कीमती वक़्त वही निकला जो अपनों के दरमियान था।
कुछ तस्वीरें धुंधली हुईं, कुछ चेहरे बदल गए,
मगर जो पल दिल में बस गए, वही उम्र भर साथ चले।
दिन तो हर हाल में गुज़र जाते हैं,
फ़र्क बस इतना है कि कुछ याद बनते हैं, कुछ हिसाब।
जीवन की थाली में बहुत कुछ परोसा गया,
आख़िर में स्वाद उन लम्हों का रहा जो बाँटकर खाए गए।
किसी मंज़िल ने उतनी ख़ुशी नहीं दी,
जितनी रास्ते में मिले कुछ सच्चे लोगों ने दी।
समय चुपचाप अपना काम करता रहा,
हम कल की सोचते रहे, आज गुज़रता रहा।
घर बड़ा होने से सुकून नहीं बढ़ता,
कभी-कभी एक अपना हाल पूछ ले, वही काफ़ी होता है।
जो कहना है, आज कह दो,
रिश्तों की गर्माहट इंतज़ार में अक्सर ठंडी पड़ जाती है।
सफ़र इतना भी लंबा नहीं कि नाराज़गी संभाल कर रखी जाए,
और इतना भी छोटा नहीं कि मोहब्बत जताई न जाए।
अंत में कोई यह नहीं गिनता कि कितना पाया,
दिल बस यह पूछता है कि कितना जीया।
वक़्त मुट्ठी की रेत नहीं, उससे भी नाज़ुक है,
हाथ खाली तब नहीं होते जब यादें साथ रह जाती हैं।
हर शाम यह एहसास दे जाती है,
एक दिन कम हुआ नहीं, एक कहानी और जुड़ गई।
जीवन की ख़ूबसूरती इसकी स्थिरता में नहीं,
इसके गुज़र जाने के बावजूद मुस्कुराहट छोड़ जाने में है।
बहुत कुछ अधूरा रहेगा, यही इसका सच है,
फिर भी हर दिन को पूरा जी लेना ही सबसे बड़ी समझ है।
जब पीछे मुड़कर देखो, तो अफ़सोस नहीं, अपनापन दिखे,
यही कमाई है जो समय भी हमसे छीन नहीं पाता।