कुछ साल पहले का मैं
आज के मुझे पहचान तो लेता,
मगर शायद समझ नहीं पाता
कि इतने बदलाव कब हो गए।
ज़िंदगी ने हमेशा स्पष्ट संकेत नहीं दिए,
कई बार धुंध के बीच चलते-चलते
रास्ते अपने आप बनते गए।
कभी जिन बातों पर ज़िद थी,
आज उन पर मुस्कुरा देता हूँ,
शायद सफ़र का असर
हमारी सोच पर सबसे पहले पड़ता है।
कुछ लोग हमारे साथ
बहुत दूर तक नहीं चले,
फिर भी उनकी मौजूदगी
पूरे सफ़र में महसूस होती रही।
अब हर मोड़ पर उत्तर नहीं ढूँढता,
कुछ अनुभवों को
बस महसूस कर लेना भी काफ़ी लगता है।
ज़िंदगी का एक हिस्सा
सपनों को पाने में बीता,
और दूसरा यह समझने में
कि कौन-से सपने सच में अपने थे।
कई रास्ते चुने,
कई छोड़ दिए,
और आज लगता है
दोनों निर्णय ज़रूरी थे।
बचपन में समय बहुत विशाल लगता था,
अब वही समय
मुट्ठी से फिसलती रेत जैसा महसूस होता है।
कुछ यादें ऐसी हैं
जिन्हें दोहराना नहीं चाहता,
मगर उन्हें मिटाना भी नहीं चाहता,
क्योंकि उन्होंने बहुत कुछ सिखाया है।
जितना दुनिया को समझा,
उतना महसूस हुआ
कि खुद को समझना
सबसे लंबा सफ़र है।
कुछ ठहरावों ने
मुझे धीमा नहीं किया,
उन्होंने मुझे देखने की नई दृष्टि दी।
अब हर देरी बुरी नहीं लगती,
क्योंकि कई अच्छी चीज़ें
अपने समय पर ही अर्थपूर्ण लगती हैं।
ज़िंदगी ने कई बार
योजना बदल दी,
मगर हर बदलाव के साथ
कोई नया अनुभव भी जोड़ दिया।
कुछ रिश्ते साथ नहीं रहे,
मगर उनसे मिली गर्माहट
आज भी यादों में सुरक्षित है।
पहले मैं आगे क्या होगा
इसकी चिंता करता था,
अब यह भी देखता हूँ
कि अभी क्या सुंदर है।
कई बार पीछे छूट जाना
हार नहीं होता,
वह सिर्फ़ अलग दिशा चुनना होता है।
समय ने चेहरे से पहले
नज़रिए बदले हैं,
और शायद यही सबसे गहरा परिवर्तन है।
कुछ दिनों का महत्व
उस समय समझ नहीं आया,
मगर आज वे पूरे दौर जैसे लगते हैं।
ज़िंदगी का सफ़र
सिर्फ़ उपलब्धियों की सूची नहीं,
यह उन भावनाओं का संग्रह भी है
जो हमने रास्ते में महसूस कीं।
अब समझता हूँ
कि हर मुलाक़ात स्थायी नहीं होती,
मगर हर मुलाक़ात बेअसर भी नहीं होती।
कुछ सपनों ने मंज़िल दी,
कुछ ने दिशा,
और दोनों के लिए आभारी हूँ।
कई बार सबसे सुंदर पल
वही निकले,
जिनकी कोई योजना नहीं बनाई गई थी।
जितना आगे बढ़ा,
उतना जाना
कि जीवन को नियंत्रित करने से ज़्यादा
उसे स्वीकार करना ज़रूरी है।
कुछ कहानियाँ अधूरी रहीं,
मगर अधूरापन हमेशा कमी नहीं होता,
कभी-कभी वही याद बन जाता है।
और शायद यही जीवन यात्रा की परिपक्वता है—
पीछे देखकर अफ़सोस से ज़्यादा,
समझ और कृतज्ञता महसूस होना।
कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो समझ आता है कि
मैं सिर्फ़ वर्षों से नहीं,
अनुभवों से बड़ा हुआ हूँ।
ज़िंदगी का सफ़र अजीब रहा,
जिन चीज़ों के लिए कभी बेचैन था,
आज वे याद भी मुश्किल से आती हैं।
कुछ लोग साथ चलते-चलते
जीवन का हिस्सा बन गए,
और कुछ बिछड़कर भी
कहानियों का हिस्सा बने रहे।
पहले जल्दी पहुँचने की फ़िक्र थी,
अब यह देखने में दिलचस्पी है
कि रास्ते ने मुझे कितना बदला।
कई मोड़ ऐसे आए
जहाँ दिशा चुननी थी,
और बाद में समझ आया
कि हर निर्णय ने एक नया मैं बनाया।
समय सिर्फ़ कैलेंडर नहीं बदलता,
वह हमारी पसंद,
प्राथमिकताएँ और सोच भी बदल देता है।
कुछ सपने पूरे हुए,
कुछ रास्ते में छूट गए,
मगर दोनों ने मुझे
बराबर कुछ सिखाया।
बचपन में जो दूर लगता था,
वह अचानक वर्तमान बन गया,
और कई वर्तमान
चुपचाप यादों में बदल गए।
ज़िंदगी की सबसे दिलचस्प बात
शायद यही है,
कि इसे आगे जीते हैं
और पीछे मुड़कर समझते हैं।
कुछ दिनों में बहुत कुछ हुआ,
कुछ साल यूँ ही निकल गए,
मगर हर दौर ने
अपनी कोई छाप छोड़ दी।
अब हर बदलाव से घबराहट नहीं होती,
क्योंकि जो मैं पहले था,
वह भी हमेशा वैसा नहीं रहा।
कई लोगों ने साथ चलकर
मेरा सफ़र आसान किया,
और कई लोगों ने दूर जाकर
मुझे मज़बूत किया।
पहले लगता था
खुशी किसी ख़ास मुकाम पर मिलेगी,
अब समझ आया,
वह कई बार रास्ते के छोटे विरामों में थी।
ज़िंदगी ने मुझे
हर सवाल का जवाब नहीं दिया,
मगर बेहतर सवाल पूछना सिखा दिया।
कुछ यादें तस्वीरों में हैं,
कुछ आदतों में,
और कुछ अब भी
दिल के किसी शांत कोने में रहती हैं।
जितना आगे बढ़ा,
उतना महसूस हुआ
कि सीखना कभी ख़त्म नहीं होता।
कई बार जिन बातों को हार समझा,
वही बाद में
दिशा बदलने का कारण बनीं।
अब पीछे छूटे लोगों के लिए
मन में शिकायत कम,
कृतज्ञता ज़्यादा है।
हर उम्र ने कुछ लिया,
मगर हर उम्र ने
कुछ नया देखने की नज़र भी दी।
ज़िंदगी का सफ़र
हमेशा सीधा नहीं होता,
मगर शायद इसी वजह से
यादगार बनता है।
कुछ ठहराव मजबूरी थे,
कुछ ज़रूरी,
और दोनों ने अपनी-अपनी सीख दी।
जब पुराने दिनों को याद करता हूँ,
तो घटनाएँ कम,
उनसे जुड़े एहसास ज़्यादा याद आते हैं।
अब समझ आया है
कि हर उपलब्धि का मूल्य
उस तक पहुँचने की कहानी से बढ़ता है।
कई बार जीवन ने
योजना के अनुसार साथ नहीं दिया,
मगर अनुभव के रूप में
खाली हाथ भी नहीं लौटाया।
और शायद इस सफ़र की सबसे सुंदर बात यही है—
हम मंज़िलों से कम,
रास्ते में मिले लोगों,
सीखी गई बातों
और बदले हुए अपने स्वरूप से ज़्यादा बनते हैं।