Zindagi na milegi dobara
हवा के साथ बहते-बहते मैंने पत्तों से सीखा है,
कि पेड़ से गिरना अंत नहीं, एक नए सफर की शुरुआत है।
रास्तों की धूल पैरों में लगी तो समझ आया,
मंजिल तो सिर्फ एक पड़ाव है, असली सुकून तो चलने में था।
कल की फिक्र में आज की चाय ठंडी मत होने देना,
यह जो अभी हाथ में प्याला है, यही इस वक्त का सबसे बड़ा सच है।
बचपन की उस बेपरवाह हंसी को कहीं संभाल कर रखना,
बड़े होने का मतलब यह नहीं कि हम मुस्कुराना ही भूल जाएं।
कुछ ख्वाब अधूरे रह जाएं तो मलाल मत करना,
अधूरे पन्नों के बिना जिंदगी की किताब कभी पूरी नहीं होती।
मैंने धूप से भागना छोड़ दिया है अब,
क्योंकि छांव का असली अहसास बिना तपिश के कभी नहीं मिलता।
गलतियां हुईं तो क्या, वो भी तो एक तजुर्बा थीं,
कम से कम हम वक्त के आगे हाथ बांधकर खड़े तो नहीं रहे।
आज शाम ढलते हुए मैंने खुद से एक वादा किया,
दूसरों को खुश करने की दौड़ में अब खुद को पीछे नहीं छोड़ना है।
कभी-कभी बिना किसी वजह के भी रुक जाना अच्छा होता है,
ताकि देख सकें कि पीछे छूट गई चीजें कितनी खूबसूरत थीं।
जिंदगी कोई हिसाब की किताब नहीं है जो हर पन्ने पर मुनाफा ढूंढे,
यहां कुछ घाटे भी दिल को बहुत अमीर बना जाते हैं।
जब भी लगे कि सब कुछ थम सा गया है,
गहरी सांस लेना और याद करना कि धड़कनें अभी जारी हैं।
तिजोरियां भरते-भरते उम्र निकल गई,
मगर सुकून उसी पुरानी अलमारी के खतों में मिला।
बारिश की बूंदों को सिर्फ छाते से मत रोकना,
कभी-कभी भीग जाना भी जिंदगी को छूने जैसा होता है।
दूसरों के बनाए रास्तों पर तो सब चलते हैं,
मजा तब है जब झाड़ियों को काटकर अपना एक रास्ता बनाया जाए।
मैंने उम्मीदों का बोझ अब थोड़ा कम कर दिया है,
जो मिला उसे प्रसाद समझा, जो न मिला उसे मर्जी मान लिया।
वक्त की रफ्तार से शिकायत करना बेकार है,
जब तक सांसें चल रही हैं, हर पल एक नई शुरुआत है।
खुद से मिले हुए जमाना हो गया था,
आज आईने के सामने रुका तो एक पुराना दोस्त नजर आया।
बड़ी खुशियों के चक्कर में छोटी-छोटी बातें मत भूलना,
सुबह की पहली धूप और किसी की अनकही बात में ही असल जिंदगी है।
कागजों पर लिखे हुए वादे अक्सर टूट जाते हैं,
पर जो बिना कहे निभाए जाएं, वही रिश्ते जिंदगी को संवारते हैं।
जब विदा होने का वक्त आएगा तो यह मायने नहीं रखेगा कि क्या कमाया,
बस यह याद रहेगा कि जाते-जाते कितनों के चेहरे पर मुस्कान छोड़ गए।
रास्ते में मिले पत्थरों से भी मैंने बात करके देखा है,
मंजिल की जल्दी में अक्सर हम उनके ठहरने का हुनर भूल जाते हैं।
मैने डायरी के आखिरी पन्नों को खाली ही छोड़ दिया,
हर बात को तय मान लेना जिंदगी के सरप्राइज का अपमान है।
चाय की सुस्की के बीच जो कुछ सेकंड की खामोशी आती है,
वही लम्हा है जब इंसान दुनिया से कटकर खुद के सबसे करीब होता है।
एक उम्र गुजार दी दूसरों के चश्मे से खुद को देखने में,
अब जो आईना साफ किया तो पता चला कि मैं जैसा भी हूँ, मुकम्मल हूँ।
जो चीजें मुकद्दर से नहीं मिलीं, उनके पीछे भागना छोड़ दिया,
अब तो पैरों के नीचे जो घास है, उसकी नमी को महसूस करना ही इबादत है।
कल रात ख्वाब में गुजरे हुए कल से मुलाकात हुई,
उसने मुस्कुराकर कहा कि पीछे मुड़कर मत देखना, मैं सिर्फ एक सबक था।
गले शिकवे रखने के लिए यह जिंदगी बहुत छोटी है,
हंसकर माफ कर देना ही खुद को आजाद करने का सबसे आसान रास्ता है।
मैंने अपनी रफ्तार को थोड़ा धीमा क्या किया,
हवाएं भी अब कान में आकर रुकने का सलीका सिखाने लगी हैं।
बचपन की वो कागज़ की कश्ती भले ही पानी में डूब गई थी,
पर समंदर पार करने का हौसला हमें उसी डूबने से मिला था।
किताबों के बीच दबे उस सूखे गुलाब को देखकर अहसास हुआ,
कि कुछ यादें वक्त के बीतने के बाद भी अपनी महक नहीं खोतीं।
भीड़ का हिस्सा बनकर चलना बहुत आसान था,
पर अकेले खड़े होकर धूप का सामना करने में जो सुकून है, वो कहीं नहीं।
अपनी नाकामियों को मैंने एक कोने में सहेज कर रखा है,
यही वो सीढ़ियां हैं जिन्होंने मुझे जमीन पर पैर टिकाए रखना सिखाया।
परफेक्ट होने की चाहत में मैंने कई शामें बर्बाद कर दीं,
अब समझ आया कि अधूरेपन की भी अपनी एक अलग ही खूबसूरती होती है।
जब भी मन उदास हो, खुली खिड़की के पास जाकर बैठ जाना,
बाहर उड़ती हुई चिड़िया तुम्हें बिना कुछ कहे जीने का मकसद दे जाएगी।
तिजोरी में रखे सोने की चमक भी फीकी लगने लगती है,
जब कोई बच्चा बिना किसी मतलब के आपकी उंगली थाम लेता है।
मैंने अपनी ख्वाहिशों की फेहरिस्त को छोटा कर लिया है,
अब बस हर सुबह आंखें खुलने पर खुदा का शुक्रिया अदा करता हूँ।
जो लोग चले गए, उनके जाने का मातम कब तक मनाएं,
जो अभी साथ बैठे हैं, क्यों न उनके हिस्से की धूप को खुलकर जी लें।
रास्तों की खूबसूरती सिर्फ उनके सीधे होने में नहीं होती,
वो जो मोड़ों पर अचानक दिखने वाले नजारे हैं, वही तो असली रोमांच हैं।
पछतावे का बोझ पीठ पर लादकर चलना बंद कर दिया है मैंने,
जो हो गया वो एक पन्ना था, जो आगे है वो पूरी किताब है।
आखिरी वक्त में जब पीछे मुड़कर देखूं तो बस यही मलाल न हो,
कि जब जिंदगी पुकार रही थी, तब मैं दुनिया के हिसाब-किताब में मसरूफ था।
Zindagi na milegi dobara Englh shayari
Purani galtiyon ke darr se maine chalna nahi chhoda,
Ghutne par laga zakhm to sirf ek nishaan hai, rukne ka bahaana nahi.
Logon ki bheed mein aksar mashwaray milte hain, humsafar nahi,
Isliye maine ab akele chal kar raaston se dosti karna seekh liya hai.
Ek muddat baad aaj dhoop mein khada hua to samajh aaya,
AC ke kamre mein sukoon tha, par zindagi is tapti hui zameen par hai.
Bachpan ka wo khilona jo kabhi toot gaya tha, aaj yaad aaya,
Tab rote the uske liye, aaj samajh aaya ki har tootna zindagi ka ant nahi hota.
Maine khwahishon ki potli ko zameen par rakh diya hai,
Kyunki kandhe par bojh lekar safar ka maza nahi liya jaa sakta.
Har baat ka jawab dena ab zaroori nahi lagta mujhe,
Kuch baatein waqt par chhod dena hi zindagi ko aasaan banana hai.
Kamayabi ki unchahi par pahunch kar jab neeche dekha,
To sabse haseen wahi chhota sa ghar tha jahan se safar shuru kiya tha.
Subah ki pehli kiran jab chehre par padti hai,
To lagta hai ki pichli raat ka andhera sirf ek bura khwab tha.
Maine parindo se seekha hai har shaam ko laut aana,
Duniya chahe kitni bhi badi ho, apna thikana hi sabse sukoon-deh hota hai.
Ek umr guzar gayi sahi aur galat ke faisle karne mein,
Ab lagta hai jo pal jaisa bhi tha, use bas jee lena chahiye tha.
Baarish mein sirf chhat ke neeche khade rehna hi kaafi nahi,
Kabhi-kabhi hathon ko phaila kar un bundo ko rokna bhi ek alag ehsaas hai.
Kagaz ke phoolon mein rang to bahut haseen hote hain,
Magar asli mehak ke liye kaanto ke beech khilna padta hai.
Log kehte hain ki waqt badal jata hai sab kuch,
Par sach to ye hai ki badalna humein khud padta hai waqt ke sath.
Maine har us raste ko mita diya hai apni yaadon se,
Jo mujhe guzre hue kal ki taraf waapas lekar jaata tha.
Kisi ki muskurahat ki wajah banna sabse badi daulat hai,
Baaki sab to yahin reh jayega, bas yehi ek kamai sath chalegi.
Waqt ki raftaar se darna maine ab chhod diya hai,
Har ek dhalte hue din ko main ek naye kal ka aagaaz maanta hoon.
Aaina dekh kar aaj khud se ek sawaal pucha maine,
Kya sach mein main wahi hoon jo banna chahta tha, ya duniya ne badal diya.
Adhoori baaton ko dil mein daba kar rakhna chhod diya,
Jo kehna hai aaj keh do, kya pata kal kehne ka mauka mile na mile.
Maine apni zindagi ka rukh us taraf mod liya hai,
Jahan dikhawe ki bheed nahi, bas thoda sa sukoon aur sachai ho.
Aakhiri safar par nikalne se pehle bas itna chahta hoon,
Ki jab log mujhe yaad karein, to unke chehre par ek haseen muskaan ho.