तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को सबसे ज़्यादा
उन्हीं पलों में अकेला पाया,
जहाँ कभी तुम्हारी मौजूदगी
सबसे स्वाभाविक लगती थी।
पहले मुझे लगता था
रिश्ते एक दिन में टूटते हैं,
फिर हमारी कहानी ने सिखाया
कि कुछ रिश्ते धीरे-धीरे
अपने ही वज़न से बिखर जाते हैं।
सबसे ज़्यादा दर्द
तुम्हारे अलविदा कहने में नहीं था,
दर्द उस दिन था
जब मैंने महसूस किया
कि तुम्हारे पास रुकने की कोई वजह नहीं बची।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
आज भी याद हैं,
लेकिन अब उनकी याद
ख़ुशी से ज़्यादा ख़ामोशी छोड़ जाती है।
मैंने बहुत कोशिश की
कि तुम्हें एक बीती हुई बात मान लूँ,
मगर कुछ लोग अतीत नहीं बनते,
वो हमारे भीतर
एक एहसास बनकर रह जाते हैं।
कभी-कभी किसी साधारण-सी शाम में
तुम्हारी याद चली आती है,
और फिर पूरा दिन नहीं,
पूरा एक दौर याद आने लगता है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने जाना कि
किसी इंसान को खोना और
उसकी आदत खोना,
दो अलग-अलग दर्द हैं।
हम दोनों की कहानी में
न कोई दुश्मनी थी,
न कोई नफ़रत,
बस एक ऐसा फ़ासला था
जो हर कोशिश से बड़ा हो गया।
आज भी जब कोई ख़ुशी मिलती है,
तो एक पल के लिए मन ठहर जाता है,
क्योंकि कभी मेरी हर खुशी
सबसे पहले तुम्हारे पास जाती थी।
मैंने तुम्हें भूलने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि जो रिश्ता सच्चा रहा हो,
उसे मिटाना नहीं,
सम्मान देना चाहिए।
सबसे कठिन बात ये थी
कि मुझे तुम्हारे बिना
नए सपने देखने पड़े,
जबकि पुराने सपनों में
हर जगह तुम थे।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को मज़बूत दिखाया,
लेकिन कई रातें ऐसी थीं
जब मैं सिर्फ़ ख़ामोश रहा,
क्योंकि कुछ दर्द शब्दों में नहीं उतरते।
अब तुम्हारी याद
मुझे तोड़ती नहीं,
मगर कभी-कभी भीतर
एक पुरानी कमी को जगा देती है।
कभी सोचता हूँ,
अगर हम थोड़ा और समझ पाते,
तो शायद कहानी बच जाती,
फिर याद आता है
कि कुछ रिश्ते चाहकर भी नहीं बचते।
तुम्हारी कमी मुझे
सबसे ज़्यादा उन बातों में महसूस होती है
जो आज भी किसी को नहीं बताता,
क्योंकि कभी वो बातें
सिर्फ़ तुम्हारे लिए हुआ करती थीं।
मैंने तुम्हें खोकर सीखा
कि प्रेम सिर्फ़ पाने का नाम नहीं,
कभी-कभी खोकर भी
सम्मान बनाए रखना प्रेम है।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो दर्द से पहले अपनापन याद आता है,
क्योंकि तुम मेरे जीवन का दुख नहीं,
एक बहुत सुंदर हिस्सा भी थे।
कुछ बिछड़नें ऐसी होती हैं
जिनमें कोई ग़लत नहीं होता,
फिर भी दोनों हार जाते हैं,
क्योंकि साथ छूट जाता है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए लम्हों को
मैं मिटाना नहीं चाहता,
क्योंकि वही लम्हे
मेरी सबसे सच्ची मुस्कानों की वजह भी थे।
अब अगर कोई पूछे
क्या मैं तुम्हें याद करता हूँ,
तो जवाब होगा—
पहले जितना नहीं,
लेकिन पहले से कहीं गहराई से।
तुम्हारे जाने का दुख
समय के साथ कम नहीं हुआ,
बस उसने अपना रूप बदल लिया,
अब वो आँधी नहीं,
एक स्थायी ख़ामोशी है।
मैंने कई लोगों को
आते-जाते देखा,
लेकिन कुछ रिश्ते
तुलना से बाहर होते हैं,
तुम्हारा रिश्ता भी वैसा ही था।
तुम्हारी याद अब अचानक नहीं आती,
वो धीरे-धीरे आती है,
जैसे कोई पुराना गीत
दूर कहीं बज रहा हो।
सबसे ज़्यादा अफ़सोस
तुम्हारे जाने का नहीं,
उस भविष्य का है
जो हमने साथ सोचा था
और जो कभी आया ही नहीं।
मैं अब तुम्हें वापस नहीं चाहता,
क्योंकि जीवन आगे बढ़ चुका है,
लेकिन ये सच है
कि तुम्हें खोना
मेरे जीवन की सबसे गहरी सीखों में से एक था।
और शायद सच्चे प्रेम का सबसे दर्दनाक सच यही है—
कुछ लोग दिल में आख़िर तक रहते हैं,
लेकिन जीवन में नहीं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को सबसे ज़्यादा
उन्हीं पलों में अकेला पाया,
जहाँ कभी तुम्हारी मौजूदगी
सबसे स्वाभाविक लगती थी।
पहले मुझे लगता था
रिश्ते एक दिन में टूटते हैं,
फिर हमारी कहानी ने सिखाया
कि कुछ रिश्ते धीरे-धीरे
अपने ही वज़न से बिखर जाते हैं।
सबसे ज़्यादा दर्द
तुम्हारे अलविदा कहने में नहीं था,
दर्द उस दिन था
जब मैंने महसूस किया
कि तुम्हारे पास रुकने की कोई वजह नहीं बची।
तुम्हारे साथ बिताए हुए दिन
आज भी याद हैं,
लेकिन अब उनकी याद
ख़ुशी से ज़्यादा ख़ामोशी छोड़ जाती है।
मैंने बहुत कोशिश की
कि तुम्हें एक बीती हुई बात मान लूँ,
मगर कुछ लोग अतीत नहीं बनते,
वो हमारे भीतर
एक एहसास बनकर रह जाते हैं।
कभी-कभी किसी साधारण-सी शाम में
तुम्हारी याद चली आती है,
और फिर पूरा दिन नहीं,
पूरा एक दौर याद आने लगता है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने जाना कि
किसी इंसान को खोना और
उसकी आदत खोना,
दो अलग-अलग दर्द हैं।
हम दोनों की कहानी में
न कोई दुश्मनी थी,
न कोई नफ़रत,
बस एक ऐसा फ़ासला था
जो हर कोशिश से बड़ा हो गया।
आज भी जब कोई ख़ुशी मिलती है,
तो एक पल के लिए मन ठहर जाता है,
क्योंकि कभी मेरी हर खुशी
सबसे पहले तुम्हारे पास जाती थी।
मैंने तुम्हें भूलने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि जो रिश्ता सच्चा रहा हो,
उसे मिटाना नहीं,
सम्मान देना चाहिए।
सबसे कठिन बात ये थी
कि मुझे तुम्हारे बिना
नए सपने देखने पड़े,
जबकि पुराने सपनों में
हर जगह तुम थे।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को मज़बूत दिखाया,
लेकिन कई रातें ऐसी थीं
जब मैं सिर्फ़ ख़ामोश रहा,
क्योंकि कुछ दर्द शब्दों में नहीं उतरते।
अब तुम्हारी याद
मुझे तोड़ती नहीं,
मगर कभी-कभी भीतर
एक पुरानी कमी को जगा देती है।
कभी सोचता हूँ,
अगर हम थोड़ा और समझ पाते,
तो शायद कहानी बच जाती,
फिर याद आता है
कि कुछ रिश्ते चाहकर भी नहीं बचते।
तुम्हारी कमी मुझे
सबसे ज़्यादा उन बातों में महसूस होती है
जो आज भी किसी को नहीं बताता,
क्योंकि कभी वो बातें
सिर्फ़ तुम्हारे लिए हुआ करती थीं।
मैंने तुम्हें खोकर सीखा
कि प्रेम सिर्फ़ पाने का नाम नहीं,
कभी-कभी खोकर भी
सम्मान बनाए रखना प्रेम है।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो दर्द से पहले अपनापन याद आता है,
क्योंकि तुम मेरे जीवन का दुख नहीं,
एक बहुत सुंदर हिस्सा भी थे।
कुछ बिछड़नें ऐसी होती हैं
जिनमें कोई ग़लत नहीं होता,
फिर भी दोनों हार जाते हैं,
क्योंकि साथ छूट जाता है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए लम्हों को
मैं मिटाना नहीं चाहता,
क्योंकि वही लम्हे
मेरी सबसे सच्ची मुस्कानों की वजह भी थे।
अब अगर कोई पूछे
क्या मैं तुम्हें याद करता हूँ,
तो जवाब होगा—
पहले जितना नहीं,
लेकिन पहले से कहीं गहराई से।
तुम्हारे जाने का दुख
समय के साथ कम नहीं हुआ,
बस उसने अपना रूप बदल लिया,
अब वो आँधी नहीं,
एक स्थायी ख़ामोशी है।
मैंने कई लोगों को
आते-जाते देखा,
लेकिन कुछ रिश्ते
तुलना से बाहर होते हैं,
तुम्हारा रिश्ता भी वैसा ही था।
तुम्हारी याद अब अचानक नहीं आती,
वो धीरे-धीरे आती है,
जैसे कोई पुराना गीत
दूर कहीं बज रहा हो।
सबसे ज़्यादा अफ़सोस
तुम्हारे जाने का नहीं,
उस भविष्य का है
जो हमने साथ सोचा था
और जो कभी आया ही नहीं।
मैं अब तुम्हें वापस नहीं चाहता,
क्योंकि जीवन आगे बढ़ चुका है,
लेकिन ये सच है
कि तुम्हें खोना
मेरे जीवन की सबसे गहरी सीखों में से एक था।
और शायद सच्चे प्रेम का सबसे दर्दनाक सच यही है—
कुछ लोग दिल में आख़िर तक रहते हैं,
लेकिन जीवन में नहीं।
तुम्हारे जाने के बाद
सबसे पहले जो टूटा,
वो मेरा दिल नहीं था,
वो मेरा भरोसा था
कि कुछ रिश्ते कभी नहीं बदलते।
मैंने बहुत दिनों तक
तुम्हारे न होने को एक अस्थायी बात समझा,
जैसे तुम किसी लंबी यात्रा पर हो,
मगर धीरे-धीरे सच्चाई ने
उम्मीद का आख़िरी दरवाज़ा भी बंद कर दिया।
पहले हर दिन में
तुम्हारा कोई न कोई हिस्सा होता था,
अब दिन पूरे तो हो जाते हैं,
मगर उनमें वो अपनापन नहीं होता
जो कभी तुम्हारे होने से मिला करता था।
सबसे ज़्यादा दर्द
तुम्हारे जाने से नहीं हुआ,
दर्द इस बात से हुआ
कि तुम धीरे-धीरे मेरे जीवन से निकले,
और मैं तुम्हें रोक भी नहीं पाया।
तुम्हारे साथ बिताए हुए पल
आज भी मेरी सबसे कीमती यादों में हैं,
इसीलिए जब वो याद आते हैं,
तो मुस्कान और उदासी साथ आती हैं।
कभी-कभी किसी साधारण-सी बात पर
दिल तुम्हें ढूँढ़ने लगता है,
और फिर अचानक याद आता है
कि अब तुम्हें ढूँढ़ना
किसी जवाब तक नहीं पहुँचाता।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने लोगों के बीच रहना सीखा,
लेकिन भीतर का अकेलापन
कई बार भीड़ से भी बड़ा निकला।
हमारी कहानी में
कोई बड़ा धोखा नहीं था,
बस धीरे-धीरे कम होती कोशिशें थीं,
और शायद रिश्ते
इसी तरह ख़ामोशी में हार जाते हैं।
मैंने कई बार सोचा
कि अगर हम थोड़ा और बात करते,
थोड़ा और समझते,
तो शायद अंत कुछ और होता,
मगर "शायद" कभी जीवन नहीं बदलता।
अब तुम्हारी याद आने पर
मैं टूटता नहीं,
लेकिन कुछ देर के लिए
दिल बहुत भारी ज़रूर हो जाता है।
तुम्हारे साथ जो सपने देखे थे,
उनका बिखरना
किसी रिश्ते के टूटने से कम नहीं था,
क्योंकि उनमें मैंने अपना कल रखा था।
पहले मुझे लगता था
कि तुम्हें भूल जाना ही ठीक होना है,
फिर समझ आया,
कुछ लोगों को भुलाना नहीं,
उनकी अनुपस्थिति को स्वीकार करना पड़ता है।
तुम्हारी कमी मुझे
किसी दुख में नहीं,
किसी खुशी में ज़्यादा महसूस होती है,
जब कोई अच्छी बात होती है
और उसे बताने वाला तुम नहीं होते।
मैंने तुम्हें खोकर जाना
कि प्रेम सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं,
कभी-कभी दूर होकर भी
किसी के लिए अच्छा सोचते रहना प्रेम है।
कुछ यादें ऐसी हैं
जिन्हें मैं मिटाना भी नहीं चाहता,
क्योंकि उनमें दर्द के साथ-साथ
मेरी ज़िंदगी के सबसे सच्चे दिन भी बसे हैं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को कई बार समेटा है,
क्योंकि कुछ बिछड़नें
इंसान को बाहर से नहीं,
अंदर से बिखेरती हैं।
आज भी जब कोई
तुम्हारे जैसी कोई बात करता है,
तो एक पल के लिए
वक़्त पीछे लौटता हुआ लगता है।
मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं
कि मैंने तुमसे मोहब्बत की,
अफ़सोस सिर्फ़ इतना है
कि उसे आख़िर तक जी नहीं पाया।
तुम्हारी याद अब शोर नहीं करती,
वो बस कभी-कभी
दिल के किसी कोने में बैठकर
पुराने दिनों को छू जाती है।
मैंने तुम्हें ग़लत नहीं माना,
क्योंकि कुछ रिश्ते
ग़लत लोगों की वजह से नहीं,
ग़लत समय की वजह से भी टूट जाते हैं।
तुम्हारे बाद मैंने सीखा
कि मज़बूत होना
दर्द न महसूस करना नहीं है,
मज़बूत होना है
दर्द के साथ भी आगे बढ़ना।
कभी-कभी लगता है
मैं तुम्हें नहीं,
उस जीवन को याद करता हूँ
जिसमें तुम्हारा होना
मेरे हर दिन का हिस्सा था।
अब अगर कोई पूछे
क्या मैं पूरी तरह ठीक हूँ,
तो शायद जवाब होगा—
हाँ भी, और नहीं भी।
क्योंकि ज़िंदगी आगे बढ़ चुकी है,
मगर कुछ खाली जगहें
सिर्फ़ समय से नहीं भरतीं।
तुम्हारे जाने का दुख
अब पहले जैसा तीखा नहीं,
लेकिन उसकी गहराई आज भी वैसी ही है,
जैसे कोई पुराना घाव
जो भर चुका हो,
मगर अपनी कहानी अब भी रखता हो।
और शायद यही सच्चे बिछड़न की पहचान है—
इंसान मुस्कुराना सीख जाता है,
जीना सीख जाता है,
आगे बढ़ना भी सीख जाता है,
लेकिन कुछ लोगों की कमी
उसके भीतर हमेशा जीवित रहती है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने लोगों से कहना शुरू कर दिया
कि मैं ठीक हूँ,
मगर सच ये था कि
मैं बस अपने दर्द को समझना सीख रहा था।
पहले तुम्हारी मौजूदगी
इतनी स्वाभाविक लगती थी
कि कभी उसकी क़ीमत समझ ही नहीं पाया,
और जब तुम गए,
तब हर छोटी चीज़ तुम्हारी याद दिलाने लगी।
सबसे ज़्यादा दर्द उस दिन नहीं हुआ
जब रिश्ता ख़त्म हुआ,
दर्द तो उन दिनों में हुआ
जब धीरे-धीरे ये समझ आया
कि अब सचमुच तुम वापस नहीं आओगे।
तुम्हारे साथ बिताया हुआ समय
मेरी ज़िंदगी का सबसे दुखद हिस्सा नहीं,
सबसे सुंदर हिस्सा था,
इसीलिए उसका खोना
इतना भारी महसूस हुआ।
मैंने कई बार ख़ुद से पूछा
कि आख़िर कमी कहाँ रह गई,
फिर समझ आया,
हर टूटन किसी एक गलती की वजह से नहीं होती।
अब भी जब कोई बात
दिल को बहुत ज़्यादा छू जाती है,
तो अनजाने में तुम्हारा ख़याल आ जाता है,
जैसे आदतें यादों से ज़्यादा ज़िद्दी होती हैं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने अकेले चलना सीख लिया,
लेकिन कुछ रास्ते आज भी
तुम्हारे साथ तय किए हुए लगते हैं।
सबसे मुश्किल बात ये थी
कि मुझे तुम्हें भुलाना नहीं,
तुम्हारे बिना जीना सीखना था,
और दोनों में बहुत फ़र्क़ होता है।
कभी-कभी मुझे तुम्हारी आवाज़ नहीं,
तुम्हारा भरोसा याद आता है,
वो एहसास कि
किसी को मेरी बातों में दिलचस्पी है।
हमारा रिश्ता ख़त्म हो गया,
मगर उससे मिली सीख नहीं,
आज भी मैं लोगों को
पहले से कहीं ज़्यादा समझने की कोशिश करता हूँ।
तुम्हारी कमी अब आँधी की तरह नहीं आती,
वो एक शांत उदासी बनकर आती है,
जो कुछ देर बैठती है
और फिर चुपचाप चली जाती है।
पहले मैं सोचता था
कि मोहब्बत का मतलब साथ रहना है,
फिर तुम्हें खोकर जाना
कि मोहब्बत का मतलब सम्मान भी होता है,
यहाँ तक कि बिछड़ने के बाद भी।
तुम्हारे साथ जो भविष्य सोचा था,
उसे छोड़ना सबसे कठिन था,
क्योंकि इंसान लोगों से कम,
अपने सपनों से ज़्यादा जुड़ जाता है।
आज भी कुछ शामें ऐसी होती हैं
जब मन बहुत पीछे लौट जाता है,
और उन दिनों के दरवाज़े खोल देता है
जहाँ तुम अब भी मौजूद हो।
मैंने तुम्हें ग़लत साबित करने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि कुछ रिश्ते
दोषी ढूँढ़ने से नहीं,
स्वीकार करने से शांत होते हैं।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने जाना कि दर्द हमेशा दिखाई नहीं देता,
कई बार वो मुस्कान के पीछे,
सामान्य बातचीत के पीछे,
चुपचाप अपनी जगह बनाए रखता है।
मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं
कि मैंने तुमसे प्यार किया,
अफ़सोस सिर्फ़ इतना है
कि इतनी सच्ची भावना
इतनी छोटी कहानी में सिमट गई।
अब अगर कोई पूछे
क्या मैं तुम्हें याद करता हूँ,
तो जवाब होगा—
हर दिन नहीं,
लेकिन कुछ दिनों में बहुत ज़्यादा।
तुम्हारी याद अब मुझे रोकती नहीं,
मगर ये ज़रूर याद दिलाती है
कि कभी कोई था
जो मेरे दिनों का सबसे अहम हिस्सा था।
मैंने तुम्हें खोकर
ख़ुद को थोड़ा और समझा,
और शायद यही हर गहरे दर्द की
सबसे बड़ी विरासत होती है।
कुछ रिश्ते ख़त्म होने के बाद
नफ़रत नहीं छोड़ते,
बस एक ऐसा खालीपन छोड़ जाते हैं
जिसे भरने की कोशिश भी नहीं की जाती।
आज भी जब किसी पुराने गीत में
अपना अतीत सुनाई देता है,
तो तुम्हारा नाम नहीं,
तुम्हारा एहसास याद आता है।
तुम्हारे जाने का दुख अब भी है,
लेकिन उसमें कड़वाहट नहीं,
क्योंकि जो रिश्ता कभी सच्चा रहा हो,
उसे सिर्फ़ उसके अंत से नहीं आँका जा सकता।
मैं आगे बढ़ गया हूँ,
लेकिन इसका मतलब ये नहीं
कि तुम महत्वहीन हो गए,
कुछ लोग पीछे छूटकर भी
दिल में बराबर जगह रखते हैं।
और शायद सच्चे प्रेम का सबसे कठिन सच यही है—
कभी-कभी दो लोग
एक-दूसरे को दिल से चाहते हैं,
फिर भी साथ नहीं रह पाते।
फिर भी,
उनके जाने के बाद जो दर्द बचता है,
वो इस बात का सबूत होता है
कि मोहब्बत कभी सचमुच थी।
तुम्हारे जाने का दर्द
किसी एक दिन का नहीं था,
वो धीरे-धीरे मेरे दिनों में उतरा,
जैसे कोई घर अचानक नहीं,
ईंट-ईंट करके ख़ाली होता है।
सबसे ज़्यादा तकलीफ़
तुम्हारे न होने से नहीं हुई,
तकलीफ़ इस बात से हुई
कि मैं हर दिन तुम्हारे बिना जीता रहा,
और फिर भी तुम्हारी आदत नहीं गई।
पहले जब कोई बात मन को छूती थी,
तो तुम्हारा ख़याल आता था,
अब भी आता है,
फ़र्क़ बस इतना है कि
अब तुम्हें बता नहीं सकता।
हमारा रिश्ता ख़त्म होने के बाद
मैंने जाना कि दर्द हमेशा रोता नहीं,
कभी-कभी वो सामान्य दिखता है,
हँसता है,
लोगों से मिलता है,
और रात को चुपचाप अपने हिस्से की कमी महसूस करता है।
तुम्हारे साथ बिताए हुए लम्हे
मुझे इसलिए नहीं दुख देते
कि वो ख़त्म हो गए,
वो इसलिए दुख देते हैं
क्योंकि वो कभी मेरे सबसे सुंदर सच थे।
कई बार मैं पुराने संदेश नहीं,
पुरानी सहजता को याद करता हूँ,
वो एहसास कि
दुनिया चाहे जैसी हो,
एक इंसान है जो मेरा है।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने ख़ुद को समझाने की बहुत कोशिश की,
मगर कुछ दर्द तर्क नहीं समझते,
उन्हें सिर्फ़ समय के साथ रहना पड़ता है।
सबसे कठिन बात ये थी
कि मुझे तुम्हें नहीं,
तुमसे जुड़े भविष्य को छोड़ना पड़ा,
वो सारे छोटे-छोटे सपने
जो मैंने सच मान लिए थे।
अब जब तुम्हारी याद आती है,
तो दिल शिकायत नहीं करता,
लेकिन कहीं भीतर
एक पुराना घाव हल्का-सा जाग जाता है।
तुम्हारी कमी मुझे अकेलेपन में नहीं,
भीड़ में महसूस होती है,
जब चारों तरफ़ लोग होते हैं,
मगर वो एक इंसान नहीं होता
जिससे मैं सच में बात करना चाहता था।
मैंने तुम्हें खोने के बाद जाना
कि कुछ रिश्ते हमारे जीवन से जाते हैं,
लेकिन हमारे भीतर से नहीं जाते,
वो बस अपना रूप बदल लेते हैं।
पहले मुझे लगता था
कि दर्द का मतलब टूट जाना है,
फिर समझ आया,
दर्द का मतलब कभी-कभी
चुप रहकर भी आगे बढ़ते रहना होता है।
तुम्हारे साथ जो बातें अधूरी रह गईं,
उनका दुख आज भी है,
क्योंकि कुछ अलविदा
कभी पूरी तरह कहे ही नहीं जाते।
आज भी किसी शांत शाम में
जब मन बहुत थक जाता है,
तो सबसे पहले तुम्हारी याद आती है,
जैसे दिल अब भी
तुम्हें सुकून से जोड़कर रखता हो।
तुम्हारे जाने के बाद
मैंने लोगों को कम,
और ख़ामोशियों को ज़्यादा समझा,
क्योंकि कुछ बिछड़नें
इंसान को भीतर से बदल देती हैं।
मुझे अफ़सोस इस बात का नहीं
कि मैंने तुमसे प्यार किया,
अफ़सोस बस इतना है
कि जिस रिश्ते पर सबसे ज़्यादा भरोसा था,
उसी को खोना पड़ा।
कभी-कभी लगता है
कि मैं तुम्हें नहीं,
उस जीवन को याद करता हूँ
जिसमें तुम्हारा होना शामिल था।
तुम्हारी याद अब हर दिन नहीं आती,
लेकिन जब आती है,
तो अपने साथ
बहुत सारे मौसम वापस ले आती है।
मैंने तुम्हें भुलाने की कोशिश छोड़ दी,
क्योंकि कुछ लोग भूलने के लिए नहीं होते,
वो हमारे भीतर
एक स्थायी एहसास बन जाते हैं।
तुम्हारे जाने का दर्द कम हुआ है,
लेकिन ख़त्म नहीं,
जैसे कोई पुराना निशान
जो अब चुभता नहीं,
मगर अपनी कहानी अब भी कहता है।
सबसे बड़ी सच्चाई यही निकली—
कुछ लोग हमें छोड़कर चले जाते हैं,
लेकिन उनसे मिली मोहब्बत,
उनसे मिली चोट,
और उनसे मिली सीख
उम्र भर हमारे साथ रहती है।
और शायद इसी का नाम
सच्चे बिछड़न का दर्द है—
जब इंसान आगे तो बढ़ जाता है,
मगर दिल का एक हिस्सा
हमेशा पीछे रह जाता है।
आज भी अगर कोई पूछे
कि सबसे मुश्किल क्या था,
तो मैं कहूँगा,
तुम्हें खोना नहीं,
तुम्हारे बिना ख़ुद को फिर से बनाना।