तेरी आँखों की गहराई में, मेरी रूह खो गई है।
तेरी नजर की रौशनी से, मेरा वजूद जगमगा उठा।
तेरे लम्स की गर्माहट ने, दिल की सर्द रातें गला दीं।
तेरी खामोशी की लहर में, मेरा आशियाना डूब गया।
तेरी मुस्कान की महक में, मेरी सांसें बेसुध हो गईं।
तेरी याद की बारिश से, सूखा दिल फिर हरा हुआ।
तेरी आँखों के समंदर में, मैं बेखुद सा तैरता हूं।
तेरी ख़ामोशी की भाषा ने, मेरी रूह को समझ लिया।
तेरे इशारे की नजाकत से, दिल की हर तार छनक उठी।
तेरी सांसों की खुशबू में, मेरा वजूद महक उठा।
तेरी रातों की चांदनी में, मेरी उदासी पिघल गई।
तेरे नाम की धुन पर, मेरा हर पल नाच उठा।
तेरी हंसी की झलक ने, मेरे अंधेरे को तोड़ दिया।
तेरी नजर की मस्ती में, मैं बार-बार गँवा बैठा।
तेरे स्पर्श की नरमी से, रूह की हर परत खिल उठी।
तेरी दूरियों की आग में, मेरा आशियाना जल उठा।
तेरी आँखों की स्याही ने, मेरी कहानी रंग दी।
तेरी ख़ामोशी के साए में, दिल का हर राज़ खुल गया।
तेरी मुस्कान की रौशनी, मेरी हर रात को सुहानी करे।
तेरे बिना ये जहां, बेरंग सा सूना पड़ा है।
तेरी यादों की लहरों ने, दिल को किनारा भुला दिया।
तेरी सांसों की लय पर, मेरी रूह ताल मिलाती है।
तेरी नजर की नशाखोरी, मुझे हर बार कैद कर ले।
तेरे इश्क की आंधी में, मेरा वजूद महफूज रहा।
तेरी उंगलियों की छुअन से, मेरी रगों में जादू दौड़ा।
तेरी ख़ामोशी ने सिखाया, प्यार की सबसे गहरी बात।
तेरी मुस्कान के जादू ने, मेरी हर पीड़ा मिटा दी।
तेरे साथ की चाहत में, समय भी ठहर सा गया।
तेरी आँखों के राज़ ने, मेरी आत्मा को छू लिया।
तेरी याद की महफिल में, दिल हर बार नया हुआ।
तेरे लम्स की यादों से, रातें भी गुलज़ार हो गईं।
तेरी दूरियों के बावजूद, तू मेरे वजूद में बसा।
तेरी हंसी की धुन ने, मेरी उदासी को चुरा लिया।
तेरी ख़ामोशी की गहराई, मेरी रूह को बुलाती है।
तेरी सांसों की गर्मी ने, मेरे सपनों को जगा दिया।
तेरे बिना ये चांदनी भी, बेरंग सी लगती है।
तेरी नजर की बारिश में, मैं भीगता चला गया।
तेरे नाम की महक से, मेरा हर लम्हा महका।
तेरी आँखों के आशियाने में, मैंने अपना जहां पाया।
तेरी मुस्कान की रौशनी, मेरी हर अंधेरी राह रोशन करे।
तुम्हारी आँख के काजल में खोई रहती है,
हमारी रूह सुलगती फ़िज़ा में सोई रहती है।
तेरी निगाह के लम्स ने यूँ छुआ दिल को,
कि बेरंग ज़िन्दगी का हर पन्ना निखर गया जैसे।
तुम्हारे ख़्वाब का साया जो दिल पे ठहरा है,
तसव्वुर में हमारे अब सिर्फ़ पहरा है।
मोहब्बत की हवाओं ने जो रुख़ बदला है जानां,
धड़कन की ज़मीं पे इश्क़ का दरिया बहा है जानां।
सुकून मिलता है तेरी आहट के आने से,
जैसे नूर उतर आया हो इस वीरान आशियाने से।
जज़्बात की वादी में तुम इस तरह शामिल हो,
जैसे किसी मुसाफ़िर की तुम ही आख़िरी मंज़िल हो।
वजूद मेरा बिखर जाता अगर तुम न मिलते,
इस बंजर सफ़र में वफ़ा के गुल न खिलते।
तेरी रौशनी ने मिटाया है अंधेरा दिल का,
अहसास गहरा हुआ है अब हर इक महफ़िल का।
धड़कन की ज़बां तुम समझ लेते हो पल में,
इक तुम ही तो ज़िंदा हो मेरे आज और कल में।
तसव्वुर में जो आते हो तुम दबे पाँव अक्सर,
महक उठती है रूह मेरी जैसे भीगा हो मंज़र।
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में कट जाए ये उमर,
इश्क़ की राह में अब न हो कोई ख़ौफ़-ए-सफ़र।
नूर बनके जो तुम चमके हो मेरी तक़दीर में,
रंग मोहब्बत के भर गए हर एक तस्वीर में।
तुम्हारी नज़रों की गुफ़्तगू जो समझी है मैंने,
दुनिया की हर एक बंदिश फिर अमान्य की है मैंने।
फ़िज़ा में घुल रही है तुम्हारी सांसों की सरगम,
तुम्हारे पास होने से हर दर्द हो गया कम।
लम्स का वो अहसास जो दिल को छू गया,
मैं अपना सब कुछ तुम्हारी चाहत में गँवा बैठा।
आशियाना वफ़ा का हमने दिल में सजाया है,
तेरी सादगी को अपनी धड़कन में बसाया है।
ख़्वाबों की दहलीज़ पे तुम ठहर गए आकर,
सुकून-ए-क़ल्ब मिला है तुमको अपना बनाकर।
मोहब्बत के सफ़र में हमसफ़र तुम मिले जब से,
शायरी की महफ़िल सजने लगी है तब से।
निगाहों से बयां होती है दास्तां-ए-दिल,
तुम पास हो तो आसान लगती है हर मुश्किल।
ज़िंदा रहने की तमन्ना अब और बढ़ गई है,
जब से तेरी चाहत मेरे वजूद से जुड़ गई है।
रौशनी बनके तुम आए हो मेरी बेरंग रात में,
एक अजब सा नशा है तुम्हारी हर बात में।
जज़्बात का समंदर उमड़ता है सीने में,
तेरे बग़ैर अब कोई मज़ा नहीं जीने में।
अहसास-ए-मोहब्बत ने यूँ संवारा है हमको,
तेरी वफ़ा ने बख़्शा है नया किनारा हमको।
नूर-ए-इश्क़ से रोशन है दिल का जहाँ सारा,
तुम ही हो मेरी कश्ती तुम ही हो किनारा।
धड़कन को मिल गई है रफ़्तार तुम्हारी बदौलत,
मेरे लिए तो बस तुम ही हो मेरी पूरी दौलत।
फ़िज़ा की हर करवट में तेरा ही नाम लिखा है,
इस दीवाने दिल ने बस तुझसे ही इश्क़ सीखा है।
तसव्वुर का हसीं लम्हा थम जाता है वहीं,
जहाँ तुम मुस्कुराकर कहते हो कि कोई और नहीं।
रूह की गहराइयों में तुम उतर गए इस क़दर,
कि अब अपने ही वजूद की नहीं है हमें ख़बर।
लम्स की वो छुअन जो रूह को मचल दे,
दुआ है कि वक़्त अपनी ये चाल बदल दे।
आशियाना-ए-दिल में सिर्फ़ तुम्हारी हुकूमत है,
सच तो ये है कि मुझे बस तुम्हारी ज़रूरत है।