तुम्हारे जाने के बाद ये कमरा अब खाली-खाली सा लगता है,
दीवारों पर टंगी घड़ी की टिक-टिक भी अब शोर मचाती है।
कॉफी का कप हाथ में लेते ही आज फिर ख्याल आया,
तुम साथ होतीं तो ये स्वाद कहीं ज्यादा मीठा होता।
मोबाइल की स्क्रीन पर तुम्हारा नाम देखते ही ठहर जाता हूँ,
सोचता हूँ कि मैसेज करूँ, पर फिर तुम्हारी मसरूफियत का ख्याल आ जाता है।
ये शामें अब वैसी नहीं रहीं जैसी कभी तुम्हारे साथ हुआ करती थीं,
अब बस खिड़की के पास बैठकर उन हवाओं को ढूँढता हूँ जो तुम तक पहुँचती हैं।
तुम्हारे जाने से वक्त की रफ़्तार जैसे थम सी गई है,
सब कुछ वैसा ही है, बस एक तुम नहीं हो, तो सब कुछ अधूरा है।
अक्सर रास्ते में चलते हुए किसी की हँसी सुनकर रुक जाता हूँ,
गलतफहमी में तुम्हारा चेहरा ढूँढता हूँ, फिर खुद पर ही मुस्कुरा देता हूँ।
नींद में भी तुम्हारा अहसास ऐसे साथ चलता है,
जैसे आँखें बंद होते ही तुम मेरी दुनिया में वापस आ जाती हो।
तुमसे दूर होकर सीखा है कि मोहब्बत सिर्फ साथ रहने में नहीं,
तुम्हारे बिना भी तुम्हें हर पल महसूस करते रहने में है।
आज भी वही गाना बजा तो जैसे तुम सामने आ खड़ी हुई,
कुछ पल के लिए तो यकीन ही नहीं हुआ कि तुम अब पास नहीं हो।
किताबें पढ़ते हुए अक्सर तुम्हारी पसंद के पन्नों पर रुक जाता हूँ,
सोचता हूँ कि तुम यहाँ होतीं तो क्या कहतीं, और फिर एक खामोश मुस्कान चेहरे पर आ जाती है।
भीड़ भरी इस जगह में भी बस तुम ही दिखाई देती हो,
शायद मेरी नज़रें अभी तक तुम्हें ही ढूँढने की आदी हैं।
तुम्हारी कही हुई वो छोटी सी बात आज फिर याद आई,
कितनी अजीब बात है कि अब उन्हीं बातों में मुझे सुकून मिलता है।
दिन भर के काम के बाद जब थकान होती है,
तब तुम्हारी आवाज़ की याद ही मेरी सबसे बड़ी राहत होती है।
फासले तो बस दो लोगों के बीच की दूरी हैं,
हमारे दिल तो आज भी एक ही धड़कन पर साथ चलते हैं।
तुमसे दूर हूँ पर ऐसा लगता है जैसे तुम यहीं कहीं हो,
कभी हवा बनकर, कभी उन यादों बनकर जो मुझे कभी तन्हा नहीं छोड़तीं।
तुम्हारे मैसेज का इंतज़ार करना भी एक अलग ही मज़ा है,
एक मीठी सी बेचैनी, जो मुझे हर पल तुम्हारा अहसास दिलाती है।
तुम हो तो सब मुकम्मल है, तुम नहीं हो तो भी सब कुछ तुम ही हो,
ये कैसी कशमकश है कि तन्हाई में भी सिर्फ तुम्हारा ही साया है।
तुम्हारी यादों की गर्माहट ही है जो इन सर्दियों की रातों में,
मेरे दिल को आज भी महफूज़ और खुश रखती है।
अगर तुम जान पातीं कि तुम्हारे बिना ये लम्हे कितने धीमे चलते हैं,
तो शायद तुम मुझे कभी खुद से इतना दूर नहीं जाने देतीं।
शायद हम फिर मिलेंगे उसी मोड़ पर जहाँ हमने बातें छोड़ी थीं,
तब तक के लिए ये यादें ही मेरी सबसे बड़ी हमसफ़र हैं।
तुमसे दूर रहने का हुनर तो नहीं आया मुझे,
बस अब ये आदत हो गई है कि हर बात में तुम्हें ढूँढता हूँ।
किताब के पन्नों में जो फूल तुमने रखा था,
आज भी उसे छूकर महसूस करता हूँ कि तुम पास ही हो।
मेरे फोन की गैलरी में तुम्हारी हँसती हुई वो तस्वीर,
जब भी सामने आती है, मेरा पूरा दिन खुशनुमा हो जाता है।
तुम्हारे साथ बिताए वो लम्हे अब भी मेरी आँखों में महफूज हैं,
जैसे कल की ही तो बात है जब हम साथ चाय पी रहे थे।
शहर की ये भीड़ कितनी भी बड़ी क्यों न हो,
मेरे दिल को बस तुम्हारे आने का ही रास्ता पता है।
नींद अब आती है तो बस तुम्हें सपनों में देखने के लिए,
वहाँ फासले नहीं होते, बस एक सुकून भरा साथ होता है।
कभी-कभी तुम्हारी महक मुझे हवाओं में महसूस होती है,
ऐसा लगता है जैसे तुम चुपके से आकर मुझे छू गई हो।
डायरी के उस आखिरी पन्ने पर मैंने तुम्हारा नाम लिखा है,
जिसे पढ़कर आज भी चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान आ जाती है।
तुम नहीं हो तो ये घर अब घर नहीं लगता,
हर कोना जैसे तुम्हारी आवाज़ का इंतज़ार कर रहा है।
हमारी बातें, वो छोटी सी बहस और फिर तुम्हारा मान जाना,
इन यादों को ही तो सहेजकर मैं अपनी तन्हाई काट रहा हूँ।
अगर तुम जान पाती कि मुझे तुम्हारी कमी कितनी अखरती है,
तो शायद तुम मुझे कभी खुद से जुदा नहीं होने देतीं।
आज भी कैफे में उस जगह बैठना पसंद है मुझे,
जहाँ बैठकर हमने पहली बार बातें शुरू की थीं।
तुम्हारी पसंद की चीजें आज भी मेरी शॉपिंग लिस्ट में होती हैं,
जैसे तुम आज भी मेरे साथ बाजार आई हो।
कभी वक्त मिले तो देखना, मेरे दिल की हर धड़कन में,
तुम्हारा नाम और सिर्फ तुम्हारी ही मौजूदगी बसी है।
तुमसे बात न हो तो पूरा दिन अधूरा सा लगता है,
जैसे किसी किताब का सबसे ज़रूरी पन्ना ही खो गया हो।
दूरियाँ तो बस जिस्मों के बीच की हैं,
रूह तो आज भी तुम्हारी रूह के पास ही रहती है।
तुम्हारी हँसी की याद ही मेरा सबसे बड़ा सहारा है,
जो मुझे मुश्किल वक्त में भी मुस्कुराने की वजह देती है।
ये शामें, ये परिंदे और ये बदलता हुआ मौसम,
सब पूछते हैं कि वो तुम्हारे पास क्यों नहीं है।
तुम्हारे मैसेज को बार-बार पढ़ने की आदत सी पड़ गई है,
जैसे उस एक मैसेज में मुझे पूरी दुनिया मिल गई हो।
तुम मेरी जिंदगी का वो हिस्सा हो जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता,
तुम पास न होकर भी मेरी हर दुआ का हिस्सा हो।
बदले हुए इस मौसम में, चाय की प्याली के साथ तुम्हारी कमी का अहसास कुछ ज़्यादा गहरा हो जाता है,
लगता है जैसे तुम सामने ही हो, बस एक हाथ की दूरी पर और मैं तुम्हें छू नहीं पा रहा।
अलमारी में रखी तुम्हारी वो पुरानी महक वाली शर्ट, आज भी मुझे तुम्हारे पास होने का वहम दे जाती है,
मैं उसे पहनकर ही सो जाता हूँ, ताकि रात भर तुम्हारी मौजूदगी का सुकून साथ रहे।
शहर की रोशनी में भी आज मुझे एक अधूरापन सा नज़र आता है,
जैसे कोई है जिसकी कमी मेरी इन आँखों को हर पल सताती है।
तुम्हारे भेजे पुराने मैसेज, जिन्हें पढ़कर आज भी वही हँसी आती है,
ऐसा लगता है जैसे तुम अभी भी मेरे पास बैठकर बातें कर रही हो।
किसी अनजान सड़क पर चलते हुए जब कोई तुम्हारी तरह मुस्कुराता है,
तो मेरा दिल बेवजह ही धड़क जाता है, इस उम्मीद में कि शायद वो तुम हो।
सूरज ढलने को है और ये खामोशी अब भारी पड़ रही है,
दिल बस ये ढूँढता है कि इस वक्त तुम क्या कर रही होगी।
तुम्हारी पसंद की वो किताब आज फिर मैंने खोली,
तुम्हारी वो बातें जो तुमने किनारे पर लिखी थीं, आज भी मेरा मन पढ़कर महक उठता है।
दूरी ने मोहब्बत को कम नहीं किया, बस उसे और ठहराव दिया है,
अब मैं तुम्हें ढूँढता नहीं, हर पल अपनी रूह में महसूस करता हूँ।
रात के सन्नाटे में जब सब सो जाते हैं, तब तुम्हारी यादों के साथ मेरी गुफ्तगू शुरू होती है,
और यकीन मानो, ये खामोश मुलाक़ात दुनिया की सबसे हसीन शाम होती है।
बहुत सा कुछ कहना था, पर अब बस ये अहसास काफी है,
कि तुम कहीं भी हो, मेरी हर दुआ का हिस्सा आज भी तुम ही हो।