ज़िंदगी में जब तक तजुर्बे आशियाना बनाते हैं,
मासूमियत का एक बड़ा हिस्सा हम गँवा बैठते हैं।
जो क़ीमत चुकाई है हमने समझदार होने की,
उतने में तो बचपन के कई शहर ख़रीदे जा सकते थे।
वक़्त गवाह है, तराशने वाले ही अक्सर ज़ख़्म गहरा देते हैं,
पत्थर को क्या मालूम कि छेनी का दर्द क्या होता है।
तुम जो हार से डर कर ठहर गए हो मुसाफ़िर,
सोचो, बिना टूटे तो मिट्टी का घड़ा भी वजूद नहीं पाता।
हम उम्र भर दूसरों के चेहरों की धूल साफ़ करते रहे,
आइना साफ़ था, बस निगाह पर ज़रा सा गुबार था।
ख़ुद से मिलने की मोहलत ही न मिली कभी,
हम दुनिया को समझाने में पूरी ज़िंदगी गँवा बैठे।
ग़म इस बात का नहीं कि रास्ता बहुत लंबा था,
मलाल तो ये है कि हमसफ़र ही वक़्त से पहले थक गया।
अब तन्हाई से शिकायत कैसी ऐ दिल,
जब परछाई भी उजाला हटने पर साथ छोड़ देती है।
ज़िंदगी की हक़ीक़त बस इतनी सी है जनाब,
कि यहाँ खोने के बाद ही चीज़ों की क़ीमत समझ आती है।
साँसें चलती रहती हैं और वजूद ख़ाली हो जाता है,
इंसान तब नहीं मरता जब उसकी रूह निकलती है,
वो तो तब मरता है जब उसके अंदर का ख़्वाब मर जाता है।
सुकून बाज़ार में बिकता तो हर अमीर ख़रीद लेता,
ये तो वो दौलत है जो सिर्फ़ सब्र की ज़मीन पर उगती है।
महल खामोश पड़े हैं और झोपड़ी में हँसी गूँज रही है,
वक़्त ने आज फिर अमीर और ग़रीब का फ़र्क़ मिटा दिया।
जब तक दिल और दिमाग़ की जंग चलती रहेगी,
इंसान अपने ही अंदर एक अदालत लगाता रहेगा।
फ़ैसला किसी के भी हक़ में हो, नुक़सान रूह का ही होता है,
जीत कर भी कोई यहाँ मुकम्मल कहाँ हो पाता है।
बचपन में जहाँ ज़रा सी चोट पर सारा घर सर पे उठा लेते थे,
आज बड़े हुए तो गहरे ज़ख़्मों पर भी मुस्कुराना सीख लिया।
ज़िम्मेदारियों के बोझ ने लहज़े की शराफ़त क्या बदली,
ज़माने ने समझ लिया कि हममें अब वो जज़्बात ही नहीं रहे।
ग़लतियाँ भी सफ़र का एक ख़ूबसूरत हिस्सा हैं,
जो नहीं गिरे, उन्होंने कभी चलने की कोशिश ही नहीं की।
कामयाबी तो बस एक मंज़िल है जो कुछ पल को ठहरती है,
परछाइयों से लड़कर जो निखरता है, वही तो असली मुसाफ़िर है।
भीड़ में सब अपने होने का दावा करते हैं,
पर हक़ीक़त का पता तो सिर्फ़ अंधेरे में चलता है।
जब हर हाथ पीछे खिंच जाता है और साए भी रुख़ मोड़ लेते हैं,
तब समझ आता है कि ख़ुद की उँगली पकड़ कर चलना कितना ज़रूरी है।
हमने खामोशी की ताक़त को उस दिन जाना,
जब लफ़्ज़ कम पड़ गए और जज़्बात समंदर हो गए।
चिल्लाने से तो सिर्फ़ दीवारें गूँजती हैं मेरे दोस्त,
दिल तक तो सिर्फ़ वही आवाज़ पहुँचती है जो रूह से निकलती है।
तक़दीर के लिखे पर शिकवा करना बेकार है,
कश्ती को लहरों से नहीं, मल्लाह के हौसले से रास्ता मिलता है।
जो तूफ़ान में भी दीये को महफ़ूज़ रखने का हुनर जानता है,
उसकी रौशनी को कोई बुझा दे, ये मुमकिन नहीं होता।
बदलते हुए लोगों को देख कर हैरान मत होना,
वक़्त का पहिया है, यहाँ मौसम भी वफ़ादार नहीं होते।
जो कल तक तुम्हारी धड़कन का सबब हुआ करते थे,
आज उनके पास तुम्हारी ख़ैरियत पूछने की फ़ुरसत नहीं।
ज़िंदगी के इम्तिहान का कोई तय निसाब नहीं होता,
यहाँ हर दिन एक नया पर्चा सामने आता है।
किताबों के रटे हुए जवाब यहाँ धरे रह जाते हैं,
और तजुर्बे का एक सफ़ा पूरी तक़दीर बदल देता है।
अंधेरे से डर कर जो घर में बैठ गए,
उन्होंने सुबह की पहली रौशनी का नूर खो दिया।
चमकने के लिए सूरज को भी रोज़ जलना पड़ता है,
तुम बिना तपे ही हीरा बनने की ख़्वाहिश रखते हो।
ये जो चेहरे पर उदासी का पहरा है,
इसके पीछे का दर्द ज़माने से बहुत गहरा है।
दिखावे की हँसी तो सब बाँट लेते हैं यहाँ,
कोई वो आँसू भी पढ़े जो आँखों में ही ठहरा है।
मौत से डर नहीं लगता, डर तो अधूरी ज़िंदगी से लगता है,
कि कहीं सफ़र ख़त्म न हो जाए और हम जीना ही भूल जाएँ।
साँसों का गिन-गिन कर चलना ही तो ज़िंदगी नहीं है,
ज़िंदगी तो वो है जो हर लम्हे को मुकम्मल कर जाए।
अपनों की महफ़िल में भी जब अजनबी सा अहसास होने लगे,
तो समझ लेना कि तुम अपने वजूद के बहुत पास आ गए हो।
बाहर की तलाश जब थक कर दम तोड़ देती है,
तब अंदर की तन्हाई से एक नए रिश्ते का आग़ाज़ होता है।
छोटी-छोटी ख़ुशियों को समेटना सीख लो,
बड़ी कामयाबियों के इंतज़ार में उम्र छोटी पड़ जाती है।
चाय की एक चुस्की, राह में मिला एक पुराना दोस्त,
ज़िंदगी का असल सुकूँ तो इन्हीं बिखरे लम्हों में है।
मंज़िल मिल भी गई तो क्या हासिल होगा,
सफ़र की ये धूल ही तो पैर का ज़ेवर थी।
जब पीछे मुड़कर देखोगे एक दिन ऐ मुसाफ़िर,
तो याद मंज़िल नहीं, वो तन्हा रास्ते ही आएँगे।
ज़िंदगी की किताब का हर पन्ना पलट कर देखा है मैंने,
यहाँ मुस्कुराने की कीमत, आँसुओं से भी ज़्यादा भारी है।
तजुर्बा कहता है कि खामोशी ही सबसे महँगा लिबास है,
वरना लफ़्ज़ों के बाज़ार में तो जज़्बात नीलाम हो जाते हैं।
एक मुकम्मल, गश-ओ-फितरत और ज़िन्दगी के गहरे फलसफों से भरा पोस्ट। हर सेक्शन में शब्दों की बंदिश नहीं है, बल्कि सीधे दिल पर असर करने वाले ख्यालात को तरजीह दी गई है।
दौड़ते-भागते रास्तों से जब भी थक कर बैठता हूँ,
तो ये ज़िंदगी अपने पुराने उधारी के हिसाब ले बैठती है।
सोचा था कमाऊँगा तो सुकूँ से बैठ कर खाऊँगा एक दिन,
मगर कमाने की चाहत में सुकूँ ही कहीं पीछे छूट गया।
ज़िंदगी कभी आसान नहीं होती, इसे आसान बनाना पड़ता है,
कुछ सब्र करके, कुछ बर्दाश्त करके और बहुत कुछ नज़रअंदाज़ करके।
एक उम्र वो थी कि जादू में भी यक़ीन था,
एक उम्र ये है कि हक़ीक़त पर भी शक होता है।
उलझनों से भरी इस राह में बस इतना ही सीखा है,
कि जो साथ है वही ख़ास है, बाकी सब इतिहास है।
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अपनी मर्ज़ी से भी दो गाम न चलने पाए,
ज़िंदगी ने जहाँ चाहा हमें मोड़ा है बहुत।
हम तो समझे थे कि हम खुद ही सफर तय करेंगे,
रास्ते में मिले पत्थरों ने हमें तोड़ा है बहुत।
बड़ी अजीब सी बंदिश है इस ज़िन्दगी की राहों में,
न रो कर भूला जा रहा है और न हंस कर जीया जा रहा है।
ज़िंदगी ज़िद की तरह है, जो माँगो वो आसानी से देती नहीं,
और जो बिना माँगे मिल जाए, उसकी हमें कभी क़दर नहीं होती।
वक्त का पहिया चलता रहता है अपनी ही रफ्तार से,
हम खामाखाह ही कल की फिक्र में आज को गंवा देते हैं।
ज़िंदगी को करीब से देखा तो एक बात समझ आई,
कि यहाँ खुद के अलावा कोई भी अपना सगा नहीं होता।
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तन्हाई की दीवारों से अब डर नहीं लगता मुझे,
इस महफ़िल के झूठे अपनों ने बहुत ज़ख्म दिए हैं।
जो कहते थे कि तुम्हारे बिना साँस भी थम जाएगी,
आज वो किसी और की बाहों में ज़िन्दगी मना रहे हैं।
दफ़्न कर दिया है मैंने अपनी ही ख्वाहिशों को अंदर,
अब कोई पूछे भी तो कह देता हूँ कि मुझे कुछ नहीं चाहिए।
एक अजीब सी बेदिली छाई है आज-कल रूह पर,
अब कोई दिल भी दुखाए तो बुरा नहीं लगता।
वो जो हमारे रोने पर पूरी दुनिया सिर पर उठा लेते थे,
आज उन्हें हमारे जनाज़े की भी खबर नहीं है।
हम तो आईना थे, टूट कर भी सच ही दिखाते रहे,
मगर पत्थरों की इस नगरी में कद्र सिर्फ चेहरों की थी।
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ज़िंदगी के तराज़ू में जब भी खुशियों को तोला मैंने,
गम का पलड़ा हमेशा उम्मीद से ज़्यादा भारी निकला।
रास्ते कहाँ ख़त्म होते हैं इस मुसाफ़िर की ज़िंदगी में,
एक मंज़िल आती है तो दूसरा सफ़र शुरू हो जाता है।
ज़िंदगी से बस इतनी सी गुज़ारिश है मेरी,
कि दोबारा जब भी मिलना, कम से कम अजनबी बनकर मत मिलना।
कुछ ख्वाब अधूरे ही अच्छे लगते हैं,
पूरे हो जाएं तो अपनी अहमियत खो देते हैं।
ज़िंदगी की इस शतरंज में चालें बहुत सोची समझी थीं,
मगर मात वहाँ मिली जहाँ वफ़ा की उम्मीद सबसे ज़्यादा थी।
zindagi shayari on life in english
Chupa kar dard hoton par hansi rkhni padti hai,
Ye zindagi hai sahab, yahan har rasm nibhani padti hai.
Waqt ne badal diya hume is qadar ki ab,
Kisi ke badalne se bhi ab farq nahi padta.
Zindagi ki raahon mein aise bhi mod aate hain,
Jahan dil to hansta hai par aankhein ro padti hain.
Kuch shikayatein bani rahein to hi behtar hai,
Suna hai baatein saaf hone se rishte khatm ho jaate hain.
Zindagi ne ek hi sabak sikhaya hai mujhe,
Apne dum par jeena seekho, sahare toot hi jaate hain.
2 line zindagi shayari in hindi
चेहरे पर मुस्कान और दिल में समंदर रखते हैं,
हम वो मुसाफ़िर हैं जो आँखों में मंज़िल रखते हैं।
ज़िंदगी में बस इतना ही तजुर्बा कमाया है,
जिसने जितना दर्द छुपाया, उसने उतना ही मुस्कुराया है।
वक्त की मार से गुज़र रहे हैं साहब,
वरना हमारी भी महफ़िल में कभी हुकूमत हुआ करती थी।
कश्ती भी बदल जाएगी और तूफ़ान भी थम जाएगा,
अगर हौसला दिल में है तो हर रास्ता बन जाएगा।
ज़िंदगी ने दिए हैं ज़ख्म इतने कि अब दर्द नहीं होता,
कोई कितना भी आज़माए, अब ये दिल नहीं रोता।
zindagi shayari in hindi 2 line
ख्वाहिशें कम हों तो ज़िंदगी का सफ़र आसान हो जाता है,
वरना यहाँ हर मोड़ पर इंसान परेशान हो जाता है।
वक्त के फैसले कभी गलत नहीं होते,
बस उन्हें समझने में हमें थोड़ी देर लग जाती है।
जिन्हें हम अपनी ज़िंदगी का खुदा मान बैठे थे,
वो वक्त आने पर पत्थर के बुत साबित हुए।
ज़िंदगी की हक़ीक़त बस इतनी सी है,
कि इंसान यहाँ खिलौना है और वक्त मदारी।
खो देने के बाद ही समझ आती है कीमत किसी की,
पास रहने पर तो लोग कमियाँ ही ढूँढ़ते हैं।
driver ki zindagi shayari
स्टेयरिंग पर हाथ और आँखों में लंबी राहें होती हैं,
एक ड्राइवर की ज़िंदगी में आराम की कहाँ रातें होती हैं।
घर पर बूढ़ी माँ और भूखे बच्चे राह देखते हैं उसकी,
और वो मीलों दूर, सड़कों पर अपनी ज़िंदगी काटता है।
मंज़िलों की चाह में हम घर से बहुत दूर निकल आए,
सड़क ही हमारा बिस्तर बन गई और गाड़ी ही हमारा घर।
नींद आँखों में होती है पर सोना मना होता है,
साहब, एक ड्राइवर की ज़िंदगी में हर पल इम्तिहान होता है।
दूसरों को उनकी मंज़िल पर पहुँचाना ही हमारा धर्म है,
चाहे हमारी खुद की ज़िंदगी का कोई ठिकाना न हो।
काले डामर के रास्तों पर ही हमारी जवानी ढल गई,
अपनों से मिलने की चाहत बस फोन की घंटी में सिमट गई।
sad zindagi shayari in hindi
दिल के ज़ख्मों को छुपाना भी एक कला है,
यहाँ रोने वालों को लोग कमज़ोर समझ लेते हैं।
हमने तो वफ़ा की हर हद पार कर दी थी उनके लिए,
पर उन्हें हमारी खामोशी में भी बेवफ़ाई ही नज़र आई।
सोचा था बैठेंगे किसी दिन आराम से उनके साथ,
पर वक़्त ने हमें इस कदर मसरूफ़ कर दिया कि वो भी रूठ गए।
ज़िंदगी की राहों में ऐसे भी मुकाम आते हैं,
जहाँ अपने ही अपनों को पहचानने से इनकार करते हैं।
रात की तन्हाई में जब उठते हैं दर्द के बवंडर,
तो समझ आता है कि हम कितने अकेले हैं इस दुनिया के अंदर।
zindagi shayari in hindi in english
Zindagi ka falasfa bhi kitna ajeeb hai,
Jo mil na saka wahi dil ke sabse kareeb hai.
Waqt ke sath sab badal jata hai yahan,
Log bhi, rishte bhi aur khud ka saaya bhi.
Zindagi ki kitaab ke kuch panne aise bhi hote hain,
Jise hum chah kar bhi kabhi padh nahi paate.
zindagi shayari hindi in english
Khamoshi se jeena seekh liya hai ab humne,
Kyunki bolne se rishte aur ulajh jaate hain.
Zindagi ne thoda sa rula kya diya,
Apno ne to sath chhodna hi behtar samjha.
Kuch adhure khwab hi zindagi ko jeene ki wajah dete hain,
Jo pure ho jayein unme phir wo baat kahan rehti hai.
chhoti si zindagi shayari in hindi
छोटी सी ज़िंदगी है, किस-किस से गिला करें,
चार दिन की साँसें हैं, चलो हंस कर विदा करें।
नफ़रतों के बाज़ार में मोहब्बत का छोटा सा दीया जलाएं,
जो रूठे हैं हमसे, उन्हें गले से लगाकर मनाएं।
इस छोटी सी ज़िंदगी में गुरूर किस बात का करना,
आज मिट्टी के ऊपर हैं, कल मिट्टी के नीचे ही है सोना।
न जाने कौन सी साँस आखिरी हो जाए इस सफर की,
चलो आज ही हर गिला-शिकवा भुला कर गले मिल लें।
zindagi shayari 2 line in hindi
कमाना पड़ता है यहाँ मुस्कुराने का हुनर भी,
रोने के लिए तो सिर्फ एक याद ही काफी होती है।
वक्त ने छीन ली हमसे हमारी मासूमियत,
वरना हम भी कभी बेफिक्र होकर हंसा करते थे।
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झुकना मंज़ूर नहीं मुझे इस ज़माने के आगे,
चाहे ज़िंदगी मेरी राहों में कितने भी काँटे बिछा दे।
हम अपनी शर्तों पर जीते हैं साहब,
किसी की मेहरबानी पर पलना हमारी फितरत में नहीं।
ज़िंदगी अगर खेल है तो हम इसके सबसे माहिर खिलाड़ी हैं,
जो हमारी हार का इंतज़ार कर रहे हैं, उनकी सोच ही बेचारी है।
पीठ पीछे कौन क्या बोलता है, इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता,
सामने किसी की बोलने की औकात नहीं, बस इतना ही काफी है।
zindagi shayari hindi 2 line
उम्र गुज़र गई दूसरों को खुश करने में,
जब खुद की बारी आई तो वक्त ही खत्म हो गया।
ज़िंदगी की अदालत में जब भी इंसाफ माँगा मैंने,
तारीख पर तारीख मिली पर सुकूँ कभी न मिला।
zindagi shayari in hindi english
Kuch panne zindagi ke hamesha ke liye band hi acche hain,
Kyunki unhe kholne se purane zakhm phir se hare ho jaate hain.
Zindagi ki daud mein jo thak kar baith jaate hain,
Wahi aksar raaste ki khubsurti ka maza le paate hain.