Father Shayari
जब मैं छोटा था, मुझे लगता था घर अपने आप चलता है, अब जिम्मेदारियों ने सिखाया है, कि हर सुकून के पीछे किसी पिता की नींद अधूरी होती है।
आपने कभी यह नहीं पूछा, कि हम आपको कितना समझते हैं, आप बस हमें समझते रहे, यही आपके प्रेम की सबसे अनोखी बात है।
आपकी जेब में कितने पैसे थे, यह याद नहीं, लेकिन आपके साथ होने पर, कभी खुद को गरीब महसूस नहीं किया।
मैंने आपको कई बार चुप देखा, लेकिन कभी उदास नहीं समझ पाया, अब जानता हूँ, कुछ चिंताएँ पिता शब्दों में नहीं बताते।
जब पहली बार किसी अपने की जिम्मेदारी उठाई, तब आपकी याद आई, क्योंकि एक परिवार को संभालना, कितना बड़ा काम है, यह तब समझ आया।
आपने कभी हमारे सपनों पर हँसी नहीं उड़ाई, चाहे वे कितने भी बड़े क्यों न हों, आपका विश्वास ही वह जगह था, जहाँ हमारे हौसले पलते रहे।
दुनिया ने मुझे बहुत कुछ सिखाया, लेकिन लोगों को पहचानना, सम्मान देना, और वचन निभाना मैंने आपसे सीखा।
आप हमेशा आगे खड़े रहे, ताकि मुश्किलें पहले आपसे टकराएँ, हम तब इसे सामान्य समझते थे, आज इसे त्याग कहते हैं।
जब भी कोई सफलता मिलती है, मुझे वह दिन याद आता है, जब आपने मेरी छोटी-सी कोशिश की भी तारीफ़ की थी, और मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया था।
आपने कभी अपने सपनों का हिसाब नहीं दिया, बस हमारे सपनों को पूरा करने में लगे रहे, और हम बड़े होकर समझ पाए, कि प्रेम कई बार त्याग का दूसरा नाम होता है।
पहले आपकी बातें लंबी लगती थीं, आज वही बातें जीवन के सबसे छोटे और सबसे सही सूत्र लगती हैं।
आपके साथ बाज़ार जाना, सिर्फ सामान खरीदना नहीं था, वह जिम्मेदारी, संयम और व्यवहार सीखने की एक कक्षा थी।
कई बार आपने हमें गिरने दिया, लेकिन टूटने नहीं दिया, यही फर्क आपको सिर्फ अभिभावक नहीं, एक सच्चा मार्गदर्शक बनाता है।
आपकी आँखों में खुशी सबसे ज्यादा तब दिखती थी, जब हम कुछ अच्छा करते थे, जैसे हमारी उपलब्धियाँ, आपके अपने सपनों का हिस्सा हों।
मैंने आपको कभी अपने लिए कुछ माँगते नहीं देखा, लेकिन हमारे लिए आपकी दुआएँ, हमेशा सबसे आगे रहीं।
जब घर में सब सो जाते थे, तब भी आप कल की चिंता में जाग रहे होते थे, और हमें लगता था, कि सब कुछ ठीक है।
आपकी उपस्थिति किसी बड़े उत्सव जैसी नहीं थी, वह रोज़ की उस रोशनी जैसी थी, जिसका महत्व अँधेरा होने पर समझ आता है।
समय के साथ आपकी चाल धीमी हुई है, मगर हमारे लिए आपकी चिंता, आज भी उतनी ही तेज़ है।
आपने हमें सिखाया, कि मजबूत होने का मतलब कठोर होना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में भी सही बने रहना है।
बचपन में मैं आपकी उँगली पकड़कर चलता था, आज आपकी सीख पकड़कर चलता हूँ, और दोनों ही बार, रास्ता आसान लगने लगता है।
आपकी डाँट में भी एक अजीब सुकून था, क्योंकि उसके पीछे यह भरोसा छिपा रहता था, कि कोई है जिसे हमारी परवाह है।
मैं जितना बड़ा होता गया, उतना ही आपके छोटे-छोटे त्याग समझ में आने लगे, और उतना ही मेरा सम्मान बढ़ता गया।
आपने कभी हमें यह महसूस नहीं होने दिया, कि जीवन कठिन है, हालाँकि कठिनाइयों का सबसे बड़ा हिस्सा, आप खुद उठाते रहे।
जब मैं अपने फैसलों में सावधानी बरतता हूँ, तो लगता है जैसे आपकी आवाज़ अब भी साथ चल रही है, रोकने के लिए नहीं, संभालने के लिए।
कुछ लोग अपनी बातों से याद रहते हैं, आप अपने कर्मों से याद रहते हैं, क्योंकि आपने जो सिखाया, उसे पहले खुद जीकर दिखाया।
अगर जीवन एक लंबी यात्रा है, तो मेरे सबसे सुरक्षित कदम वही थे, जो आपके भरोसे के सहारे उठे थे।
जब भी मैं कोई सही फैसला लेता हूँ, उसमें मेरा अनुभव कम होता है, और आपकी दी हुई सीख ज्यादा, जो वर्षों बाद भी मेरा हाथ थामे रहती है।
आपने कभी यह नहीं कहा कि आपको हम पर गर्व है, मगर जब किसी से हमारा ज़िक्र करते थे, आवाज़ में जो चमक होती थी, वह किसी भी तारीफ़ से बड़ी लगती थी।
बचपन में लगता था कि आप हर बात जानते हैं, आज समझ आया कि कई जवाब आपको भी नहीं मालूम थे, फिर भी आपने हमें कभी डरने नहीं दिया, क्योंकि आपका भरोसा हमारे लिए काफी था।
आपकी चिंता का तरीका अलग था, आप बार-बार पूछते नहीं थे, बस देर होने पर दरवाज़े की ओर देखते रहते थे, और वही इंतज़ार प्यार का सबसे सच्चा रूप था।
मैंने आपको अपनी खुशियाँ टालते देखा है, मगर कभी शिकायत करते नहीं देखा, शायद पिता होना, कई इच्छाओं को चुपचाप विदा करना भी है।
जब जीवन आसान था, मैंने आपकी मेहनत को सामान्य समझ लिया, अब मुश्किल दिनों ने सिखाया है, कि आपने कितना कुछ बिना जताए संभाला था।
आपकी सबसे बड़ी खूबी यह नहीं थी कि आप मजबूत थे, बल्कि यह थी कि कठिन समय में भी, आपने हमें डर से ज्यादा उम्मीद दी।
कई लोग सलाह देते हैं, मगर आपकी कही छोटी-सी बात भी, सालों बाद किसी मोड़ पर, पूरी दिशा बदल देती है।
आपने कभी अपने संघर्षों को कहानी नहीं बनाया, बस जिम्मेदारियाँ निभाते रहे, और हमें बहुत देर बाद समझ आया, कि चुप रहने वाले लोग भी बहुत कुछ सहते हैं।
घर में आपकी मौजूदगी, किसी उत्सव जैसी नहीं होती थी, वह उस सुकून जैसी थी, जिसकी अहमियत अक्सर उसके न होने पर समझ आती है।
जब मैं गिरा, आपने मुझे उठाया नहीं, पहले खुद खड़े होने की कोशिश करने दी, फिर पीछे से इतना सहारा दिया, कि मैं हार भी न मानूँ और निर्भर भी न बनूँ।
आपकी उँगली पकड़कर चलने की उम्र गुजर गई, मगर आज भी मुश्किल वक्त में, मन सबसे पहले आपकी ओर ही मुड़ता है।
आपने हमें सिखाया कि सम्मान, उम्र या पद से नहीं मिलता, व्यवहार से मिलता है, और यही शिक्षा जीवन भर साथ रही।
पहले लगता था कि आप बहुत रोकते-टोकते हैं, अब समझता हूँ, आप दुनिया को हमसे पहले देख चुके थे, इसलिए कुछ रास्तों से बचाना चाहते थे।
आपने कभी अपनी थकान को घर का माहौल नहीं बनने दिया, चाहे दिन कितना भी कठिन रहा हो, हमारे सामने आप हमेशा वही रहे, जिस पर भरोसा किया जा सके।
समय के साथ बहुत लोग बदल गए, पर एक चीज़ नहीं बदली, आपका विश्वास, जो हर असफलता में भी मेरे साथ खड़ा रहा।
जब मैं छोटा था, आप मुझे भविष्य के लिए तैयार कर रहे थे, और मैं सोचता था कि आप बस नियम बना रहे हैं।
आपने हमें सिर्फ आगे बढ़ना नहीं सिखाया, बल्कि पीछे मुड़कर अपने लोगों को याद रखना भी सिखाया, यही वजह है कि आपकी सीख, सिर्फ सफलता नहीं, इंसानियत भी देती है।
कभी-कभी सोचता हूँ, आपने किससे सीखा होगा इतना धैर्य, इतनी जिम्मेदारी, इतना त्याग, क्योंकि यह सब आसान तो कभी नहीं रहा होगा।
आपके पास हर समस्या का समाधान नहीं था, फिर भी आपके पास बैठने भर से, समस्याएँ थोड़ी छोटी लगने लगती थीं।
पहले मैं आपकी उम्र को बड़ा समझता था, अब आपकी जिम्मेदारियों को बड़ा समझता हूँ, और यह समझ, सम्मान को और गहरा कर देती है।
आपने हमें यह एहसास दिया, कि चाहे दुनिया कितनी भी बदल जाए, एक जगह हमेशा ऐसी रहेगी, जहाँ हमारी चिंता सबसे पहले की जाएगी।
जब लोग मेरी परवरिश की तारीफ़ करते हैं, मैं मुस्कुरा देता हूँ, क्योंकि उसके पीछे आपके वर्षों का धैर्य छिपा है, जिसे दुनिया देख नहीं पाती।
आपने कभी अपने लिए विशेष स्थान नहीं माँगा, मगर परिवार की हर याद में, आपकी मेहनत की छाप मौजूद है।
आज अगर मैं किसी का भरोसा बन पाता हूँ, तो इसलिए कि बचपन से मैंने आपको देखा है, अपनों के लिए हर परिस्थिति में खड़े रहते हुए।
कुछ लोग विरासत में जमीन छोड़ते हैं, कुछ संपत्ति, आपने हमें चरित्र दिया, और यह सबसे मूल्यवान विरासत है।