मेरी पहचान भीड़ से नहीं बनती,
मैं जहाँ खड़ा होता हूँ, वहीं फ़र्क़ दिखता है।
ख़ुद की नज़रों में ऊँचा रहना सीखा है,
दुनिया की राय रोज़ बदलती रहती है।
मैं कम बोलता हूँ,
क्योंकि मेरी मेहनत ज़्यादा बोलती है।
जो मेरे वजूद को हल्का समझते हैं,
वक़्त अक्सर उनकी ग़लतफ़हमी दूर कर देता है।
मैं मंज़िलों का शोर नहीं करता,
मेरे कदम ही मेरे इरादे बता देते हैं।
हर किसी को ख़ुश रखना मक़सद नहीं,
ख़ुद से नज़र मिलती रहे, इतना काफ़ी है।
मैंने ख़ुद को हालात से बड़ा बनाया है,
इसीलिए मुश्किलें छोटी लगती हैं।
मेरे उसूल रास्ता बदल सकते हैं,
मगर मेरा किरदार नहीं।
मैंने इंतज़ार करना छोड़ दिया,
अब मेहनत को ही जवाब बनने देता हूँ।
जो लोग मुझे पढ़ नहीं पाए,
उन्हें मेरी ख़ामोशी किताब लगी।
मैं अपनी जगह ख़ुद बनाता हूँ,
मुझे किसी सहारे की आदत नहीं।
मेरी सोच की उड़ान देखो,
पंखों की लंबाई से क्या होगा।
मैं हर मोड़ पर ख़ुद के साथ रहा हूँ,
इसीलिए आज भी मज़बूती से खड़ा हूँ।
मुझे पहचानने के लिए नज़र चाहिए,
नाम सुन लेना काफ़ी नहीं होता।
मैं वक़्त के साथ बदला ज़रूर हूँ,
मगर अपने मूल्यों से कभी नहीं।
मेरे लिए जीत का मतलब यही है,
कि मैं कल से बेहतर बन जाऊँ।
मैंने ख़ामोशी में बहुत कुछ कमाया है,
शोर अक्सर खाली हाथ लौटता है।
मेरे फ़ैसले मेरे हस्ताक्षर हैं,
हर कोई उन्हें दोहरा नहीं सकता।
मैं अपनी कहानी ख़ुद लिखता हूँ,
इसीलिए उसका अंदाज़ अलग है।
जहाँ सम्मान नहीं मिलता,
वहाँ मेरी मौजूदगी भी नहीं मिलती।
मैं अपनी शर्तों पर जीता हूँ,
इसीलिए हर किसी को समझ नहीं आता।
भीड़ से अलग चलने का शौक़ है,
क्योंकि पहचान रास्तों से नहीं, हौसलों से बनती है।
मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी मत समझना,
मैं फ़ैसले शोर से नहीं, सोच से करता हूँ।
जहाँ इज़्ज़त न मिले, वहाँ रुकता नहीं,
मेरे क़दम भी अपने उसूल रखते हैं।
मैं बदलते मौसमों जैसा नहीं,
जो हूँ, वही हर हाल में रहता हूँ।
ख़ुद पर यक़ीन इतना है,
कि ताली न भी मिले तो सफ़र नहीं रुकता।
मैं असर छोड़ता हूँ, आवाज़ नहीं,
इसीलिए लोग मुझे याद रखते हैं।
मेरी पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं,
किरदार ही मेरा सबसे बड़ा परिचय है।
मैंने मंज़िल से पहले ख़ुद को बनाया है,
इसीलिए रास्ते अब आसान लगते हैं।
जो बात मेरे मान के ख़िलाफ़ हो,
उस पर मेरी ख़ामोशी भी इंकार होती है।
मैं वहाँ भी सीधा खड़ा रहता हूँ,
जहाँ लोग हालात देखकर झुक जाते हैं।
मेरे उसूल महँगे हैं,
हर किसी की पसंद बनना मेरा मक़सद नहीं।
मैं ख़ुद को साबित नहीं करता,
वक़्त मेरे हिस्से की गवाही देता है।
मेरी सोच की ऊँचाई देखो,
कद तो हर कोई नाप लेता है।
मैंने सफ़र को आदत बना लिया,
अब दूरी मुझे डराती नहीं।
मेरी मौजूदगी इजाज़त नहीं माँगती,
वह ख़ुद अपनी जगह बना लेती है।
जो खोया उससे सीखा,
जो सीखा वही मेरी ताक़त बना।
मैं हर किसी जैसा दिख सकता हूँ,
मगर हर किसी जैसा हूँ नहीं।
मेरे फैसले मेरे हैं,
इसलिए उनके अंजाम से भी नहीं डरता।
मैंने ख़ुद को इतना तराशा है,
कि अब पहचान शोर नहीं, असर से बनती है।
मेरे रास्ते अलग हैं,
इसलिए मेरी मंज़िल भी अलग होगी।
मैं झुकता हूँ तहज़ीब में,
मगर अपने वजूद पर समझौता नहीं करता।
ख़ामोश रहकर भी पहचान बना ली,
हर जीत को बताना ज़रूरी नहीं होता।
मैं भीड़ में चल सकता हूँ,
मगर भीड़ का हिस्सा कभी नहीं बनता।
मेरी कीमत राय से नहीं बदलती,
मैं ख़ुद को जानता हूँ, इतना काफ़ी है।
मैंने इंतज़ार नहीं किया मौक़ों का,
तैयारी ने ही दरवाज़े खुलवा दिए।
जो मुझे समझते हैं, काफ़ी हैं,
बाकियों को समझाना मेरा काम नहीं।
मैं हर दिन बेहतर बनने निकला हूँ,
किसी से बेहतर दिखने नहीं।
मेरी सीमा मेरे उसूल तय करते हैं,
लोगों की उम्मीदें नहीं।
मैं अपने वजूद का बोझ ख़ुद उठाता हूँ,
इसीलिए मेरी चाल में यक़ीन दिखता है।