Ye Zindagi Shayari
ये ज़िंदगी कभी हथेली पर ठहरी धूप जैसी लगी,
और कभी मुट्ठी भरते-भरते फिसलती रेत जैसी।
कई बरस हम बड़े होने की जल्दी में रहे,
फिर एक दिन बचपन की बेफ़िक्र दोपहरें याद आने लगीं।
ये ज़िंदगी अजीब है,
जो मिल जाता है उसकी आदत हो जाती है, जो चला जाए उसकी क़दर।
कुछ दिनों में सब कुछ होते हुए भी खालीपन था,
कुछ दिनों में कम था, मगर दिल भरा हुआ था।
मैंने देखा है, समय केवल उम्र नहीं बढ़ाता,
वह कुछ भ्रम भी धीरे-धीरे उतार देता है।
ये ज़िंदगी हर मोड़ पर नया चेहरा नहीं दिखाती,
कई बार वही चेहरा नई समझ के साथ दिखाती है।
कुछ ख़्वाब पूरे हुए तो उतनी ख़ुशी नहीं मिली,
जितनी उन्हें पाने की कोशिश में ख़ुद को जानकर मिली।
जो बातें कभी बेचैन करती थीं,
आज वही मुझे मुस्कुराकर याद आती हैं।
ये ज़िंदगी शायद इसलिए सुंदर है,
क्योंकि इसमें सब कुछ हमारे हिसाब से नहीं होता।
कई लोग सफ़र में मिले और आगे बढ़ गए,
मगर उनकी कही कुछ साधारण बातें आज भी साथ चलती हैं।
मैंने सुकून को बहुत दूर तलाशा,
वह अक्सर अपने लोगों के बीच चुपचाप बैठा मिला।
ये ज़िंदगी कभी-कभी बिना चेतावनी के बदल जाती है,
और फिर हमें अपने भीतर नई जगह बनानी पड़ती है।
कुछ इंतज़ार पूरे नहीं हुए,
मगर उन्होंने धैर्य का अर्थ समझा दिया।
हर दिन यादगार नहीं होता,
फिर भी वही साधारण दिन मिलकर पूरी कहानी बनाते हैं।
ये ज़िंदगी हमें हमेशा वह नहीं देती जो हम चाहते हैं,
लेकिन कई बार वह दे देती है जिसकी हमें ज़रूरत होती है।
कभी हार का दुख था,
आज समझ आता है कि कुछ हारें बचाने के लिए भी आती हैं।
मैंने देखा है, लोग बदलते हैं, हालात बदलते हैं,
मगर कुछ एहसास उम्र भर वैसा ही रहते हैं।
ये ज़िंदगी किसी एक रंग में नहीं रहती,
इसीलिए इसके हर मौसम का अपना महत्व है।
कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले,
और कुछ जवाबों ने नए सवाल पैदा कर दिए।
जब उम्मीद कमज़ोर पड़ती है,
तब छोटी-सी अच्छी ख़बर भी रोशनी जैसी लगती है।
ये ज़िंदगी हमें धीरे-धीरे समझदार बनाती है,
पहले घटनाओं से, फिर उनके अर्थों से।
जो पल उस वक़्त सामान्य लगे थे,
आज वही सबसे कीमती यादों में शामिल हैं।
मैंने जाना कि खुशी हमेशा शोर नहीं करती,
कई बार वह मन के शांत हो जाने में छिपी होती है।
ये ज़िंदगी अधूरी इच्छाओं और पूरी हुई उम्मीदों का संगम है,
और शायद इसी संतुलन का नाम जीना है।
अब जब इसे देखता हूँ,
तो शिकायतें कम और हैरत ज़्यादा महसूस होती है।
ये ज़िंदगी भी अजीब दस्तकार है,
हर दिन कुछ जोड़ती है, हर दिन कुछ तराशती है।
जिसे हम उस वक़्त तकलीफ़ समझते रहे,
अक्सर वही बाद में हमारी समझ बनकर लौटा।
कुछ ख़ुशियाँ इतनी छोटी थीं कि तब दिखीं नहीं,
आज याद आती हैं तो पूरा दिल रोशन कर जाती हैं।
ये ज़िंदगी कभी सवाल बनकर सामने आई,
कभी बिना जवाब दिए ही बहुत कुछ सिखा गई।
मैंने कई बार सोचा सब मेरी मर्ज़ी से होगा,
फिर हालात ने विनम्र होना सिखा दिया।
कुछ लोग आए और चले गए,
मगर जाते-जाते मेरी सोच का हिस्सा बन गए।
ये ज़िंदगी हर इच्छा पूरी नहीं करती,
लेकिन हर अधूरी इच्छा में कोई अर्थ छोड़ जाती है।
कभी जो बातें बहुत बड़ी लगती थीं,
आज वे यादों में एक हल्की मुस्कान भर हैं।
मैंने देखा है, इंसान अक्सर बड़ी ख़ुशियों के पीछे भागता है,
जबकि सुकून चाय के ठंडा होने तक की बातचीत में छिपा होता है।
ये ज़िंदगी शोर में कम,
ख़ामोश पलों में ज़्यादा समझ आती है।
कुछ दिनों ने थका दिया था,
मगर उन्हीं दिनों ने मेरी सहनशीलता भी बढ़ाई।
हर मोड़ पर जीत नहीं मिली,
लेकिन हर मोड़ ने मुझे थोड़ा और पहचान लिया।
ये ज़िंदगी किसी किताब की तरह नहीं चलती,
यह कई बार बिना अध्याय बदले कहानी बदल देती है।
कुछ रिश्ते समय के साथ हल्के पड़ गए,
कुछ यादें समय के साथ और गहरी हो गईं।
मैंने खोने का दुःख भी देखा है,
और फिर उसी खाली जगह में नई उम्मीद उगते हुए भी देखा है।
ये ज़िंदगी हमेशा निष्पक्ष नहीं लगती,
फिर भी इसके पास सिखाने के अपने तरीके हैं।
कई सपने पूरे नहीं हुए,
मगर उन्हें पाने की कोशिश ने मुझे बदल दिया।
जो बातें कभी शिकायत थीं,
आज वही मेरी परिपक्वता का हिस्सा हैं।
ये ज़िंदगी अक्सर देर से समझ आती है,
जब हम उसे बदलने की नहीं, समझने की कोशिश करते हैं।
कभी-कभी सब ठीक होने का मतलब यह नहीं होता कि सब मिल जाए,
बल्कि यह कि जो है, उसे स्वीकार कर लिया जाए।
मैंने पाया कि सुकून उपलब्धियों में कम,
मन के बोझ हल्के होने में ज़्यादा मिलता है।
ये ज़िंदगी हर दिन कोई बड़ा चमत्कार नहीं करती,
कई बार वह बस हमें एक और सुबह दे देती है।
जो लोग और लम्हे गुज़र गए,
उन्होंने जाना नहीं, बस रूप बदल लिया है।
अब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है,
हर कठिन दौर हमेशा रहने नहीं आया था।
ये ज़िंदगी शायद समझने की चीज़ कम है,
महसूस करने की चीज़ ज़्यादा है।