तुम्हारे आने के बाद मेरी आदतें बदल गईं,
अब ख़ुशी किसी वजह की मोहताज नहीं रहती,
तुम्हारा ख़याल ही काफ़ी होता है,
दिन को ख़ास बनाने के लिए।
तुमसे बात हो जाए तो लगता है,
आज का दिन सही जगह पहुँचा है,
वरना कई दिन यूँ भी गुज़र जाते हैं,
जिनमें सब कुछ होकर भी कुछ नहीं होता।
इस वैलेंटाइन सप्ताह बस इतना एहसास है,
कि तुम्हारा साथ किसी जश्न से कम नहीं,
कुछ लोग ख़ुशियाँ मनाते हैं,
और कुछ लोग ख़ुशी बनकर मिल जाते हैं।
तुम्हारे साथ रहते हुए कभी दिखावा नहीं करना पड़ता,
तुम मेरी बातों के पीछे छिपी ख़ामोशी भी समझ लेते हो,
शायद यही वजह है,
कि तुम्हारे पास होना सुकून जैसा लगता है।
मोहब्बत का सबसे सुंदर रूप शायद यही है,
कि किसी के सामने अपने जैसा रहा जा सके,
और वह फिर भी मुस्कुराकर कहे,
तुम ऐसे ही अच्छे लगते हो।
तुम्हारा नाम सुनते ही जो मुस्कान आती है,
उसका कोई कारण नहीं होता,
कुछ रिश्ते वजह से नहीं,
अहमियत से ख़ास बनते हैं।
वैलेंटाइन सप्ताह में लोग इज़हार करते हैं,
मैं तो हर दिन तुम्हें चुनता हूँ,
क्योंकि प्रेम किसी तारीख़ का नहीं,
एक निर्णय का नाम है।
तुम्हारे साथ भविष्य की कल्पना करना अच्छा लगता है,
क्योंकि उसमें दौलत से ज़्यादा अपनापन दिखता है,
और यही सपना सबसे अमीर लगता है।
तुम्हारी मौजूदगी ने सिखाया,
कि प्यार हमेशा शोर नहीं करता,
कभी-कभी वह बस यह पूछता है,
"आज तुम ठीक हो ना?"
तुम्हारे साथ बिताए हुए पल,
किसी कहानी जैसे नहीं लगते,
वे इतने सच्चे होते हैं,
कि याद आते ही दिल भर जाता है।
तुमसे मिलने से पहले दिन कटते थे,
अब दिन याद बनते हैं,
फ़र्क बस इतना है,
कि अब उनमें तुम शामिल हो।
तुम्हारी हँसी मेरे लिए कोई आवाज़ नहीं,
एक ऐसा एहसास है,
जो सबसे मुश्किल दिन को भी
हल्का कर देता है।
अगर प्रेम को किसी एक बात में समेटना हो,
तो मैं तुम्हारा साथ कहूँगा,
क्योंकि उसमें भरोसा भी है,
और घर जैसा अपनापन भी।
तुम्हारे बिना भी दुनिया चलती रहेगी,
मगर तुम्हारे साथ दुनिया बेहतर लगती है,
और यही बात तुम्हें सबसे ख़ास बनाती है।
जब तुम अपनी योजनाओं में मेरा ज़िक्र करते हो,
तो लगता है मैं सिर्फ़ पसंद नहीं,
तुम्हारी ज़िंदगी का हिस्सा हूँ।
तुम्हारे साथ होने पर
मुझे ख़ुद को साबित नहीं करना पड़ता,
तुम्हारा विश्वास ही
मेरी सबसे बड़ी पहचान बन जाता है।
इस वैलेंटाइन सप्ताह मेरी सबसे प्यारी ख़्वाहिश,
कोई बड़ा उपहार नहीं,
बस आने वाले वर्षों में भी
तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में रहे।
तुम्हें देखकर प्रेम नहीं हुआ था,
तुम्हें समझते-समझते हो गया,
और यही वजह है कि यह एहसास
हर दिन और गहरा होता जाता है।
तुम्हारे संदेश में लिखे साधारण शब्द भी,
मेरे लिए ख़ास हो जाते हैं,
क्योंकि उनमें तुम्हारा समय होता है,
और समय सबसे कीमती चीज़ है।
तुमसे जुड़ी छोटी-छोटी बातें,
मेरी यादों की सबसे सुरक्षित जगह पर रहती हैं,
क्योंकि दिल अक्सर वही सँभालकर रखता है,
जिसे खोना नहीं चाहता।
जब तुम कहते हो "ध्यान रखना",
तो वह एक वाक्य नहीं लगता,
उसमें पूरा अपनापन छिपा होता है।
तुम्हारे साथ चुप बैठना भी अच्छा लगता है,
क्योंकि हर रिश्ता शब्दों से नहीं चलता,
कुछ रिश्ते समझ से चलते हैं।
वैलेंटाइन सप्ताह का अर्थ मेरे लिए,
बस तुम्हारा साथ है,
बाक़ी सारी सजावट
उस एहसास के बाद आती है।
तुम मेरी ज़िंदगी की सबसे सुंदर घटना नहीं,
सबसे सुंदर निरंतरता हो,
जो हर दिन को बेहतर बनाती रहती है।
तुम्हारे साथ भविष्य की चिंता कम लगती है,
क्योंकि भरोसा डर से बड़ा हो जाता है,
जब साथ सच्चा हो।
किसी ने पूछा मोहब्बत कैसी होती है,
मैंने कहा,
जब किसी की ख़ुशी में
अपनी ख़ुशी दिखाई देने लगे।
तुम्हारे होने से मुझे यह एहसास मिला,
कि सही इंसान जीवन नहीं बदलता,
जीवन जीने का तरीका बदल देता है।
तुम्हारे लिए लिखे गए शब्द कम पड़ जाते हैं,
क्योंकि कुछ रिश्तों की अहमियत
भाषा से बड़ी होती है।
तुम्हारे साथ हर मौसम अच्छा लगता है,
क्योंकि मौसम बाहर नहीं,
अक्सर दिल के भीतर बदलते हैं।
तुम्हें देखकर जो सुकून मिलता है,
वह किसी जीत जैसा नहीं,
बल्कि घर लौट आने जैसा लगता है।
जब तुम मेरी बात पूरी होने से पहले समझ जाते हो,
तो लगता है,
दिलों की अपनी भी एक भाषा होती है।
तुम्हारे साथ रहकर जाना,
कि प्रेम सिर्फ़ चाहना नहीं,
किसी के सपनों को भी अपना मान लेना है।
इस वैलेंटाइन सप्ताह मैं तुम्हें क्या दूँ,
जब मेरी सबसे अच्छी चीज़
पहले से ही तुम हो।
तुम्हारी मौजूदगी ने मेरे दिनों को
ज़्यादा चमकदार नहीं बनाया,
बल्कि ज़्यादा अर्थपूर्ण बना दिया।
तुम्हारे साथ बिताया गया एक घंटा,
कई व्यस्त दिनों से बेहतर लगता है,
क्योंकि वहाँ समय नहीं,
अपनापन चलता है।
तुमसे जुड़कर महसूस हुआ,
कि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में आते नहीं,
धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी बन जाते हैं।
अगर प्रेम का कोई पता होता,
तो शायद वह वहाँ मिलता,
जहाँ दो लोग एक-दूसरे को बदलने नहीं,
समझने की कोशिश करते हैं।
तुम्हारे साथ हर वैलेंटाइन सप्ताह नया लगता है,
क्योंकि प्रेम दोहराया नहीं जाता,
हर बार थोड़ा और गहरा हो जाता है।
मुझे तुम्हारी सबसे सुंदर बात तुम्हारा चेहरा नहीं,
तुम्हारा स्वभाव लगता है,
क्योंकि सुंदरता ध्यान खींचती है,
और अपनापन दिल।
तुम्हारे साथ चलना अच्छा लगता है,
क्योंकि मंज़िल से ज़्यादा भरोसा
उस हाथ पर होता है
जो रास्ते भर साथ रहता है।
जब भी अपने आने वाले दिनों की कल्पना करता हूँ,
हर तस्वीर में तुम होती हो,
और शायद यही
मेरे प्रेम की सबसे सच्ची परिभाषा है।
तुमसे मिलने के बाद समझ आया,
साथ हमेशा बड़े वादों से नहीं बनता,
कभी-कभी किसी का हर दिन पूछ लेना भी
ज़िंदगी को ख़ूबसूरत बना देता है।
इस वैलेंटाइन सप्ताह,
मुझे किसी तोहफ़े की ख़्वाहिश नहीं,
बस तुम्हारा यूँ ही मेरे दिनों में बने रहना,
हर उत्सव से बढ़कर लगता है।
तुम्हारे साथ बिताई हुई साधारण-सी शामें भी,
अब मेरी सबसे प्यारी यादों में रहती हैं,
क्योंकि बात जगहों की नहीं होती,
किसके साथ वक़्त गुज़रा, उसकी होती है।
तुम्हें चाहना कोई अचानक हुआ एहसास नहीं,
यह तो धीरे-धीरे मेरे दिनों में उतरा है,
जैसे घर लौटते समय मिलने वाली सुकून की हवा,
जिसकी अहमियत हर रोज़ महसूस होती है।
इस वैलेंटाइन सप्ताह मैं बस इतना कहना चाहता हूँ,
तुम मेरे जीवन की सबसे सुंदर वजहों में से एक हो,
क्योंकि तुमने मुझे बदला नहीं,
बल्कि मुझे वैसे ही अपनाया जैसा मैं हूँ।
तुम्हारे संदेश का नाम फ़ोन पर चमकता है,
तो दिन थोड़ा आसान लगने लगता है,
शायद मोहब्बत यही होती है,
जब किसी की मौजूदगी दूर रहकर भी साथ लगे।
कई लोग ज़िंदगी में मिलते हैं,
मगर हर कोई दिल में घर नहीं बना पाता,
तुमने जगह नहीं माँगी,
फिर भी मेरी हर सोच में बस गए।
वैलेंटाइन सप्ताह का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा तुम हो,
क्योंकि फूल कुछ दिन महकते हैं,
मगर तुम्हारा साथ
मेरे हर दिन को महका देता है।
तुम्हारे साथ भविष्य के सपने देखना अच्छा लगता है,
क्योंकि उनमें शोर नहीं होता,
बस अपनापन होता है,
और एक भरोसा कि हम साथ चलेंगे।
जब तुम अपनी छोटी-छोटी बातें बताती हो,
मैं ध्यान से सुनता हूँ,
क्योंकि मोहब्बत सिर्फ़ इज़हार नहीं,
किसी की दुनिया को अहमियत देना भी है।
अगर कोई पूछे इस वैलेंटाइन सप्ताह की सबसे प्यारी बात क्या है,
तो मैं तुम्हारा नाम नहीं लूँगा,
मैं कहूँगा—
वो एहसास, जो तुम्हारे साथ होने पर दिल में उतरता है।