Adhure Pyar Ki Shayari
तुम्हें भूलने का सवाल ही नहीं था,
तुम कोई याद नहीं थे,
तुम मेरी कई आदतों का हिस्सा थे।
जिस दिन समझ आया कि हम कभी एक नहीं होंगे,
उसी दिन मोहब्बत और गहरी हो गई।
हमारे बीच दूरी किलोमीटरों की नहीं थी,
बस कुछ ऐसे फ़ैसलों की थी,
जिन्हें बदलना किसी के बस में नहीं था।
तुम्हारे जाने के बाद ज़िन्दगी रुकी नहीं,
बस उसमें वह व्यक्ति नहीं रहा,
जिसे हर बात का मतलब समझाना नहीं पड़ता था।
कभी-कभी किसी भीड़ भरी जगह में भी,
एक कमी साथ चलती है,
जैसे किसी का होना अब भी तय हो।
तुमसे जुड़ी सबसे खूबसूरत बात यह है,
कि बिछड़ने के बाद भी तुम्हारी याद में कड़वाहट नहीं आई।
हम दोनों ने बहुत कुछ संभाल लिया,
बस एक-दूसरे को संभालकर नहीं रख पाए।
कुछ सपने टूटे नहीं,
बस उनके साथ जुड़ा एक नाम अधूरा रह गया।
तुम्हारी जगह खाली नहीं है,
वहाँ अब भी तुम्हारी ही याद बैठी है।
मैंने आगे बढ़ना सीख लिया,
मगर कुछ रास्तों पर आज भी तुम्हारे साथ चलने की कल्पना करता हूँ।
किसी और से मोहब्बत हो भी जाए,
तो भी तुम्हारे हिस्से की जगह अलग ही रहेगी,
क्योंकि कुछ रिश्ते तुलना से बाहर होते हैं।
हमारी कहानी का दुख बिछड़ना नहीं,
बल्कि यह था कि हम दोनों एक-दूसरे को चाहते थे।
तुम्हें पाने की कोशिश से ज़्यादा,
तुम्हें खोने के बाद खुद को समझाना मुश्किल था।
कभी सोचा था तुम्हारे साथ उम्र गुज़रेगी,
अब बस कभी-कभी तुम्हारी याद के साथ शाम गुज़र जाती है।
सब कुछ कह दिया था हमने,
फिर भी सबसे ज़रूरी बात अधूरी रह गई।
तुम्हारे जाने के बाद महसूस हुआ,
कुछ लोग घर नहीं होते,
फिर भी उनसे बिछड़कर उजड़ जाने जैसा लगता है।
मैंने तुम्हें कभी वापस माँगा नहीं,
क्योंकि मोहब्बत में ज़िद से ज़्यादा इज़्ज़त ज़रूरी लगी।
अजीब है न,
जो रिश्ता कभी पूरा नहीं हुआ,
उसी ने सबसे ज़्यादा यादें दे दीं।
तुम्हारा नाम अब कम लिया जाता है,
लेकिन तुम्हारा असर आज भी कई बातों में दिख जाता है।
कुछ लोग ज़िन्दगी में इसलिए नहीं आते कि साथ रहें,
वे आते हैं ताकि हमें किसी एहसास की गहराई समझा सकें।
हम दोनों एक-दूसरे की कहानी में थे,
बस आख़िरी अध्याय में साथ नहीं थे।
तुम्हारी याद अब दर्द नहीं देती,
लेकिन जब आती है,
तो दिल कुछ देर के लिए चुप ज़रूर हो जाता है।
जो वादे पूरे नहीं हुए,
उनका अफ़सोस कम है,
अफ़सोस उस भरोसे का है जो सच्चा था।
कभी-कभी लगता है,
हमारा मिलना ही शायद बिछड़ने की प्रस्तावना था।
तुमसे बिछड़कर यह सीखा,
कि हर मोहब्बत का मंज़िल तक पहुँचना ज़रूरी नहीं होता।
आज भी किसी पुराने रास्ते से गुज़रता हूँ,
तो कदम नहीं रुकते,
मगर यादें कुछ देर ठहर जाती हैं।
कभी-कभी किसी मोड़ पर पहुँचकर लगता है,
अगर उस दिन हम थोड़ी देर और रुक जाते,
तो शायद कहानी का अंत कुछ और होता।
तुम मेरी ज़िन्दगी से गए ज़रूर,
मगर कुछ फैसले आज भी तुम्हें ध्यान में रखकर ही लेता हूँ।
मोहब्बत पूरी नहीं हुई,
लेकिन इतनी सच्ची थी कि अधूरी होकर भी साथ चलती रही।
तुम्हारे बाद किसी से शिकायत नहीं रही,
बस हर अच्छी ख़बर पर एक नाम याद आता है,
जिसे सबसे पहले बताना चाहता था।
हम मिले भी सही वक़्त पर नहीं,
और बिछड़े भी अपनी मर्ज़ी से नहीं।
कुछ लोग बिछड़ने के बाद अजनबी हो जाते हैं,
तुम बिछड़कर भी मेरी यादों की सबसे परिचित आवाज़ रहे।
अब तुम्हें पाने की चाह नहीं,
लेकिन तुम्हारे होने की आदत अब भी पूरी तरह गई नहीं।
हमारे बीच जो नहीं हो सका,
उसी ने शायद उसे इतना यादगार बना दिया।
तुम्हारी जगह किसी ने नहीं ली,
क्योंकि बात किसी इंसान की नहीं,
एक एहसास की थी।
कई बरस बीत गए,
मगर कुछ तारीख़ें आज भी कैलेंडर नहीं,
सीधे दिल में आती हैं।
सबने पूछा क्या खोया,
किसी ने ये नहीं पूछा कि क्या अधूरा रह गया।
तुमसे जुड़ी सबसे मुश्किल बात तुम्हारा जाना नहीं था,
बल्कि उसके बाद भी तुम्हें अपने भीतर ज़िन्दा रखना था।
कभी तुम्हें सोचकर उदास नहीं होता,
बस एक अजीब सी कमी महसूस होती है,
जिसका कोई नाम नहीं।
हम दोनों ने एक-दूसरे को छोड़ा नहीं था,
बस हालात हमसे ज़्यादा मज़बूत निकले।
कुछ ख़त कभी लिखे ही नहीं गए,
और कुछ जवाब कभी आए ही नहीं,
शायद हमारी कहानी इन्हीं के बीच कहीं रह गई।
तुम्हारी याद किसी तूफ़ान जैसी नहीं,
एक धीमी सी खुशबू जैसी है,
जो अचानक किसी दिन साथ चलने लगती है।
जो बातें तुम्हारे साथ जीनी थीं,
अब उन्हें सिर्फ़ कल्पना में पूरा करता हूँ।
अधूरी मोहब्बत की सबसे बड़ी सज़ा यही है,
वह ख़त्म नहीं होती,
बस धीरे-धीरे ख़ामोश हो जाती है।
मैंने तुम्हें खोया नहीं,
तुम बस उस हिस्से में रह गए,
जहाँ ज़िन्दगी दोबारा लौटकर नहीं जाती।
कुछ रिश्ते साथ नहीं रहते,
फिर भी उम्र भर साथ महसूस होते हैं।
आज भी जब किसी को अपना कहते सुनता हूँ,
तो एक पल के लिए याद आता है,
कि कभी मैंने भी तुम्हें उसी यक़ीन से पुकारा था।
कुछ रिश्ते नाम तक नहीं पहुँचते,
बस आदत बनकर ज़िन्दगी में रह जाते हैं।
आज भी किसी बात पर मुस्कुराता हूँ,
तो याद आता है कि कभी ये मुस्कान तुम्हारे हिस्से की हुआ करती थी।
हम अलग हुए तो कोई शोर नहीं हुआ,
बस कुछ बातें थीं जो हमेशा के लिए अधूरी रह गईं।
तुम्हें खोने का दुख शायद उतना नहीं,
जितना उस भविष्य का है जिसे हम दोनों ने कभी मिलकर सोचा था।
कभी-कभी लगता है मोहब्बत खत्म नहीं हुई,
बस उसे जीने का मौका नहीं मिला।
तुमसे आख़िरी मुलाक़ात के बाद भी,
मैंने कई बार तुम्हें अपनी रोज़मर्रा की बातों में शामिल किया,
फिर याद आया कि अब उन बातों का कोई पता नहीं जहाँ उन्हें भेज सकूँ।
हमारी कहानी में कोई गलत नहीं था,
बस वक़्त ने दोनों के लिए अलग-अलग रास्ते चुन रखे थे।
अजीब बात है,
तुम्हारे जाने के बाद भी तुम्हारी कमी वैसी ही रही,
जैसे घर बदल जाने पर भी कोई पुराना दरवाज़ा याद आता रहे।
मैंने तुम्हें भुलाने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि कुछ लोग याद नहीं किए जाते,
वे बस भीतर एक जगह लेकर हमेशा साथ रहते हैं।
अब तुम्हारा ज़िक्र दर्द से नहीं होता,
लेकिन जब भी होता है,
दिल के किसी कोने में एक खाली कुर्सी नज़र आ ही जाती है।