कितनी बार जीवन ने अपने हिसाब बदलने चाहे,
पर हमने हर मोड़ पर "हम" को "मैं" से आगे रखा।
शायद यही वजह है कि आज भी इस रिश्ते में
नई बातों से ज़्यादा पुराना भरोसा चमकता है।
वर्षगाँठ सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं लगती,
यह उन छोटे-छोटे दिनों का सम्मान है,
जब बिना कुछ कहे तुमने मेरा मन समझा,
और बिना किसी वादे के साथ निभाया।
यादों की अलमारी में सबसे कीमती वही पल हैं,
जो किसी तस्वीर में कैद नहीं हुए।
जब थकान ज़्यादा थी और शब्द कम,
फिर भी तुम्हारा साथ पूरे दिन का सुकून बन गया।
तुम्हारे साथ रहते हुए समझ आया,
रिश्ते बड़े मौकों से नहीं, रोज़मर्रा की परवाह से मज़बूत होते हैं।
एक-दूसरे के लिए समय निकालना,
दरअसल प्रेम का सबसे सच्चा रूप होता है।
इस वर्षगाँठ पर कोई बड़ी दुआ नहीं माँगता,
बस इतना चाहता हूँ कि आने वाले वर्षों में भी
हम यूँ ही एक-दूसरे की आदत बने रहें,
और हर नया दिन साथ होने की वजह देता रहे।
सालों की गिनती से ज़्यादा कीमती वह साथ रहा,
जब किसी ने नहीं समझा, तब भी तुम्हारा विश्वास रहा।
घर की साधारण-सी बातों में कितनी यादें बस गईं,
एक ही मेज़ पर रखी चाय में जाने कितनी शामें हँस गईं।
तुमने सिर्फ़ खुशियाँ नहीं, मुश्किल दिनों का हाथ भी थामा,
इसीलिए यह रिश्ता वक़्त से नहीं, निभाए गए पलों से है जाना।
इस वर्षगाँठ पर बस इतना कहना है,
जो सफ़र पीछे छूट गया वह भी ख़ूबसूरत है,
और जो रास्ता अभी साथ चलना है,
उस पर तुम्हारा होना ही सबसे बड़ी राहत है।
हर साल हमें नया नहीं बनाता,
मगर साथ चलना हमें थोड़ा और समझदार ज़रूर कर देता है,
तुम्हारे संग गुज़रा हर दौर यही सिखा गया,
कि अच्छा रिश्ता जीतने से नहीं, निभाने से बनता है।
कभी सफ़र लंबा लगा, कभी दिन कठिन भी आए,
मगर सुकून यह रहा कि हर परेशानी में हम एक ही तरफ़ खड़े पाए,
यही बात इस रिश्ते को ख़ास बनाती है,
कि हालात बदले, मगर साथ नहीं बदला।
वर्षगाँठ पर जब पीछे मुड़कर देखते हैं,
तो बड़ी उपलब्धियाँ नहीं, छोटे पल याद आते हैं,
बिना वजह की हँसी, देर रात की बातें,
और वह अपनापन जो हर दिन को घर बना देता है।
तुम्हारे साथ जीवन किसी कहानी जैसा नहीं,
बल्कि एक सच्ची किताब जैसा लगा,
जिसमें हर अध्याय ने कुछ सिखाया,
और हर पन्ने ने साथ की अहमियत बढ़ाई।
न कोई शोर था, न बड़े दावे,
फिर भी यह रिश्ता इतना गहरा हो गया,
शायद इसलिए कि हमने प्रेम को शब्दों से नहीं,
व्यवहार से सँभालकर रखा।
इस वर्षगाँठ पर दिल से शुक्रिया,
उन दिनों के लिए भी जो आसान नहीं थे,
क्योंकि उन्हीं दिनों में सबसे ज़्यादा महसूस हुआ,
कि तुम्हारा साथ मेरी सबसे बड़ी ताक़त है।
वक़्त ने चेहरे पर कुछ नए निशान दिए होंगे,
मगर रिश्ते में एक नई चमक भी जोड़ दी,
अब प्रेम सिर्फ़ एहसास नहीं लगता,
यह भरोसे की सबसे सुंदर आदत बन गया है।
तुम्हारे साथ बिताए वर्षों की सबसे प्यारी बात यह है,
कि अब ख़ामोशी भी अजनबी नहीं लगती,
कई बार बिना कुछ कहे ही
पूरा दिन एक-दूसरे का हाल समझ लेते हैं।
हर वर्षगाँठ यह याद दिलाती है,
कि प्रेम केवल शुरुआत की धड़कन नहीं होता,
वह वर्षों बाद भी किसी के लिए
दरवाज़ा खुला रखने की परवाह में जीवित रहता है।
आने वाले साल क्या लेकर आएँगे, यह कौन जानता है,
मगर इतना यक़ीन है कि सफ़र आसान लगेगा,
क्योंकि मंज़िल से पहले अगर साथ अच्छा हो,
तो रास्ते भी मुस्कुराने लगते हैं।