सुबह की पहली हल्की रोशनी में भी,
तुम्हारा ख़याल सबसे पहले जाग जाता है।
आँख खुलते ही जो सुकून मिलता है,
वो तुम्हारे होने का एहसास होता है।
सुबह की हवा आज कुछ अलग-सी लगती है,
जैसे उसने तुम्हें याद कर लिया हो।
हर नया सवेरा तुम्हारा नाम धीरे से कहता है,
और दिल उसे मुस्कुराकर सुन लेता है।
नींद के टूटते ही जो खामोशी मिलती है,
उसमें भी तुम्हारी मौजूदगी महसूस होती है।
सुबह की रोशनी भी अब तुम्हारे बिना अधूरी लगती है,
जैसे कुछ सबसे अहम छूट गया हो।
जागते ही जो पहला ख़याल आता है,
वो बस तुम्हारा चेहरा बन जाता है।
हर सुबह तुम्हें याद करने का एक नया तरीका दे जाती है,
और दिल उसे अपना लेता है।
सुबह की ख़ामोशी में भी अब गर्माहट है,
जो तुम्हारी यादों से आती है।
आँख खुलते ही एक हल्की मुस्कान आ जाती है,
क्योंकि तुम ख़यालों में पहले से होते हो।
सुबह का उजाला तुम्हारे बिना भी रोशन है,
लेकिन तुम्हारे साथ और भी खूबसूरत लगता है।
हर नया दिन तुम्हें और करीब महसूस कराता है,
भले हकीकत में दूरी बनी रहे।
सुबह की हवा में एक मीठी-सी बेचैनी है,
जो सिर्फ तुम्हारी याद से जुड़ी है।
जागते ही दिल का पहला सफ़र तुम्हारी ओर होता है,
बिना किसी कदम के।
सुबह की हर किरण तुम्हें छूती हुई लगती है,
जैसे तुम पास ही कहीं हो।
आँख खुलते ही जो एहसास ठहर जाता है,
वो तुम्हारे बिना अधूरा-सा होता है।
सुबह की चुप्पी अब अकेली नहीं लगती,
उसमें तुम्हारी यादों की आवाज़ है।
हर सवेरा तुम्हें फिर से महसूस कराता है,
जैसे तुम हर शुरुआत का हिस्सा हो।
सुबह का हर पल तुम्हें और याद दिलाता है,
कि तुम सिर्फ ख्याल नहीं, आदत हो।
नींद से जागते ही जो दिल मुस्कुराता है,
वो तुम्हें सोचने की वजह है।
सुबह की हवा में तुम्हारा नाम घुला रहता है,
जिसे सिर्फ दिल समझ पाता है।
हर नया सवेरा यह सिखाता है,
कि प्यार सुबह से भी पहले जाग जाता है।
सुबह की रोशनी भी तुम्हें याद दिलाती है,
कि तुम हर दिन की सबसे खूबसूरत शुरुआत हो।
आँख खुलते ही जो दुनिया बदलती है,
वो तुम्हारे एहसास से बदलती है।
हर सुबह बस एक ही एहसास छोड़ जाती है,
कि तुम हो तो हर सुबह अपनी लगती है।
सुबह की पहली रोशनी से पहले ही,
तुम्हारा ख़याल दिल को जगा देता है।
आँख खुलते ही जो सुकून मिलता है,
वो तुम्हारी यादों की नर्मी होती है।
सुबह की हवा आज थोड़ी खास लगती है,
जैसे उसमें तुम्हारा एहसास शामिल हो।
हर नया सवेरा तुम्हारा नाम लेकर आता है,
और दिल को धीरे से मुस्कुराना सिखा देता है।
नींद टूटते ही जो पहला एहसास होता है,
वो बस तुम्हारी मौजूदगी जैसा लगता है।
सुबह की ख़ामोशी भी अब खाली नहीं रहती,
उसमें तुम्हारी यादें बसने लगी हैं।
हर सुबह जैसे तुम्हें महसूस करने का एक नया बहाना हो,
बिना मिले भी तुम्हारे करीब होने जैसा।
जागते ही दिल की दुनिया बदल जाती है,
जब उसमें तुम्हारा ख़याल उतर आता है।
सुबह की रोशनी आज कुछ ज़्यादा नरम है,
शायद उसने तुम्हारी याद को छू लिया हो।
हर सवेरा तुम्हें और करीब ले आता है,
भले दूरी बस नाम की ही क्यों न हो।
सुबह का हर पल तुम्हारे एहसास से भर जाता है,
जैसे तुम हवा में घुल गए हो।
आँख खुलते ही जो हल्की-सी मुस्कान आती है,
वो तुम्हारे सोचने की आदत है।
सुबह का उजाला भी अधूरा नहीं लगता,
जब उसमें तुम्हारी याद साथ चलती है।
हर नया दिन तुम्हें और याद करने का मौका देता है,
और दिल उसे खूबसूरती से जी लेता है।
सुबह की चुप्पी में भी अब एक आवाज़ है,
जो तुम्हारे होने का एहसास कराती है।
जागते ही दिल बस एक ही बात कहता है,
कि तुम आज भी सबसे खास हो।
सुबह की हर सांस में तुम्हारी खुशबू सी है,
जो दिल को शांत कर देती है।
हर सवेरा तुम्हारी यादों को ताज़ा कर देता है,
और दिन को मुलायम बना देता है।
सुबह की पहली किरण भी जैसे तुमसे जुड़ी हो,
जो दिल तक रोशनी पहुँचा देती है।
नींद खुलते ही जो एहसास ठहर जाता है,
वो सिर्फ तुम्हारे होने की आदत है।
सुबह का हर लम्हा तुम्हें महसूस कराता है,
कि तुम सिर्फ याद नहीं, सुकून हो।
हर नया सवेरा दिल को यह समझाता है,
कि तुम्हारी याद ही मेरी सुबह है।
सुबह की हवा आज कुछ कहना चाहती है,
शायद तुम्हारा नाम ही उसकी बात है।
आँख खुलते ही दुनिया बदल जाती है,
जब दिल में तुम पहली जगह ले लेते हो।
हर सुबह तुम्हारी याद के साथ शुरू होती है,
और उसी एहसास पर ख़त्म भी।
सुबह की पहली किरण से पहले ही,
तुम्हारा ख़याल दिल में उतर आता है।
नींद खुलते ही जो एहसास जागता है,
वो बस तुम्हारी मौजूदगी का होता है।
सुबह की हवा भी आज कुछ अलग लगती है,
जैसे उसमें तुम्हारी यादें घुल गई हों।
आँख खुलते ही जो सुकून मिलता है,
वो तुम्हें याद करने से ही पूरा होता है।
हर नया सवेरा तुम्हारा नाम लेकर आता है,
और दिल को धीरे से मुस्कुरा जाता है।
सुबह की ख़ामोशी में भी एक आवाज़ है,
जो सिर्फ तुम्हारी मौजूदगी जैसी लगती है।
जागते ही जो पहला ख़याल आता है,
वो किसी दुआ जैसा तुम्हारा चेहरा होता है।
सुबह की रोशनी आज थोड़ी और नरम लगती है,
शायद उसने तुम्हारी याद छू ली हो।
हर सुबह जैसे तुम्हें फिर से महसूस करने का बहाना है,
भले तुम पास न भी हो।
नींद टूटते ही जो एहसास ठहरता है,
वो तुम्हारे होने की आदत बन चुका है।
सुबह का उजाला आज अधूरा नहीं लगता,
क्योंकि उसमें तुम्हारी याद पूरी कर देती है।
हर सवेरा दिल से एक ही बात कहता है,
कि तुम सिर्फ याद नहीं, सुकून हो।
सुबह की पहली सांस में भी तुम्हारा नाम छुपा है,
जैसे हवा भी तुम्हें जानती हो।
जागते ही जो हल्की-सी मुस्कान आती है,
वो तुम्हें सोचने का असर है।
सुबह की चुप्पी भी अब खाली नहीं लगती,
उसमें तुम्हारी यादों की गर्माहट है।
हर नया दिन तुम्हें और करीब महसूस कराता है,
भले दूरी बनी रहे।
सुबह का हर पल तुम्हारी याद से रंग जाता है,
जैसे समय भी तुम्हें साथ रखता हो।
नींद से जागकर जो सुकून मिलता है,
वो तुम्हारी यादों का एहसास होता है।
सुबह की हवा में आज एक अपनापन है,
शायद तुम कहीं दूर मुस्कुरा रहे हो।
हर सवेरा बस यही कहता है,
कि दिन की शुरुआत भी तुमसे ही होती है।
सुबह का उजाला भी तुम्हारे बिना पूरा नहीं लगता,
जैसे कुछ अधूरा रह गया हो।
जागते ही दिल का पहला हाल यही होता है,
कि तुम आज भी सबसे करीब हो।
सुबह की हर धड़कन में एक नाम बसता है,
जो बिना कहे भी महसूस होता है।
हर नया सवेरा तुम्हारी याद को ताज़ा कर देता है,
और दिन को खूबसूरत बना देता है।
सुबह का हर लम्हा तुम्हें महसूस कराने लगता है,
कि तुम मेरे हर दिन की सबसे प्यारी शुरुआत हो।