Rulane Wali Shayari
कुछ लोग बिछड़ने के बाद याद नहीं आते,
वे हर दिन थोड़ा-थोड़ा महसूस होते हैं।
मैंने उसे जाते हुए देखा था,
मगर जो सबसे ज़्यादा टूटा,
वह मेरा यक़ीन था कि कुछ लोग हमेशा रहते हैं।
अब किसी से ज़्यादा जुड़ने से डर नहीं लगता,
बस यह मालूम है कि हर साथ स्थायी नहीं होता।
कभी-कभी पुरानी तस्वीरें नहीं,
पुराने एहसास रुला जाते हैं।
जिसे अपने हर कल में देखा था,
आज वह मेरे बीते हुए दिनों का हिस्सा है।
कुछ कमीयाँ भर नहीं पातीं,
इंसान बस उनके साथ जीना सीख लेता है।
मैंने उससे आख़िरी बार क्या कहा था,
यह याद नहीं,
मगर उसके बाद की ख़ामोशी आज भी याद है।
सब कुछ बदल गया,
बस एक आदत नहीं बदली—
अचानक किसी बात पर उसका ख़याल आ जाना।
कई बार दिल दुखता नहीं,
बस भारी रहता है,
जैसे कोई बात वर्षों से वहीं रखी हो।
कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते,
वे बस आगे नहीं बढ़ पाते।
मैंने लोगों को हँसते हुए खोया है,
इसलिए अब हर मुस्कान पर भरोसा नहीं करता।
उसकी याद कोई तूफ़ान नहीं,
एक धीमी बारिश है,
जो बिना आवाज़ के भिगो जाती है।
जो लोग कहते हैं कि समय सब ठीक कर देता है,
शायद उन्होंने कुछ चीज़ों को सिर्फ़ स्वीकार किया होता है।
मैं अब भी वही हूँ,
बस कुछ उम्मीदें रास्ते में कहीं उतर गईं।
कभी-कभी अपने ही कमरे में बैठकर लगता है,
जैसे मैं अपनी ज़िन्दगी का मेहमान हूँ।
जिसे कभी अपनी सबसे बड़ी ख़ुशी समझा था,
आज वही मेरी सबसे शांत उदासी है।
कुछ बातें कह देने से हल्की नहीं होतीं,
वे बस सुनने वाले के पास पहुँच जाती हैं।
अब मैं किसी को रोकता नहीं,
क्योंकि जाने वालों के कदम
मनाने से नहीं रुकते।
सबको लगता है मैं संभल गया,
और शायद सच भी है,
मगर कुछ घाव ठीक होकर भी निशान छोड़ जाते हैं।
मुझे उसकी कमी हर दिन नहीं महसूस होती,
लेकिन जिस दिन होती है,
पूरा दिन अधूरा लगता है।
कई बार हम किसी इंसान को नहीं,
उसके साथ वाले अपने रूप को याद करते हैं।
मैंने सीखा है कि बिछड़ना हमेशा दूरी नहीं होता,
कभी-कभी लोग पास रहकर भी छूट जाते हैं।
कुछ दर्द इतने पुराने होते हैं,
कि वे दर्द नहीं लगते,
बस व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाते हैं।
जिसे खोने के बाद सबसे ज़्यादा तलाशा,
वह इंसान नहीं,
मन की शांति थी।
अब कोई पूछे कि क्या कमी है,
तो जवाब देना मुश्किल लगता है,
क्योंकि कुछ खाली जगहों का कोई नाम नहीं होता।
कभी किसी का इंतज़ार मत देखो,
उसकी बदली हुई आदतें देखो,
वहीं सबसे ज़्यादा सच्चाई छिपी होती है।
मैंने बहुत बार खुद को समझाया,
मगर दिल को तर्क कम और एहसास ज़्यादा याद रहते हैं।
कुछ लोग किताबों में नहीं मिलते,
वे बंद पड़ी यादों के बीच रखे हुए मिलते हैं।
आज भी कुछ गीत सुनकर
आवाज़ नहीं,
एक पूरा समय याद आ जाता है।
हम अक्सर जिन लोगों को भूल चुके होने का दावा करते हैं,
उन्हीं के नाम पर सबसे लंबी ख़ामोशी होती है।
मैंने उससे मोहब्बत खोई नहीं,
बस उसे अपनी पहुँच से दूर होते देखा।
कुछ बिछड़नें ऐसी होती हैं,
जहाँ आँसू नहीं आते,
सिर्फ़ मन पहले जैसा नहीं रहता।
अब मैं कम उम्मीद रखता हूँ,
मगर जब भी रखता हूँ,
पूरे दिल से रखता हूँ।
किसी के चले जाने का दुख एक बार होता है,
मगर उसकी अनुपस्थिति कई बार महसूस होती है।
सब ठीक होने के बाद भी,
कभी-कभी मन उस चीज़ का शोक मनाता है
जो उसे कभी मिली ही नहीं।
कुछ लोग ज़िन्दगी से चले नहीं जाते,
बस उनके बाद कोई भी वैसी जगह नहीं भर पाता।
मैं आज भी ठीक हूँ,
बस कुछ पुरानी बातें हैं
जो अचानक किसी शाम लौट आती हैं
और फिर देर तक मन कहीं नहीं लगता।
जिसे सबसे ज़्यादा अपना समझा था,
वही अब मेरी यादों में रहता है,
ज़िन्दगी में नहीं।
कितना अजीब होता है,
किसी का होना भी आदत बन जाए
और उसका न होना भी।
मैंने उसे खोया नहीं था एक दिन में,
वह धीरे-धीरे मेरी हर रोज़ की बात से कम होता गया,
और एक दिन पूरी तरह याद बन गया।
कुछ दर्द रोने नहीं देते,
वे बस इंसान को पहले जैसा नहीं रहने देते।
अब किसी से यह नहीं कहता कि मैं उदास हूँ,
क्योंकि कुछ उदासियाँ समझाने से छोटी लगने लगती हैं।
कभी-कभी किसी पुराने संदेश को पढ़कर नहीं,
उस समय के अपने आप को याद करके दुख होता है।
जिस दिन वह गया,
उस दिन सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं टूटा था,
मेरे कई आने वाले दिनों की कल्पनाएँ भी चली गई थीं।
मैंने मुस्कुराना नहीं छोड़ा,
बस अब हर मुस्कान के पीछे
एक पूरी कहानी नहीं होती।
सब पूछते हैं समय ने क्या बदला,
कोई यह नहीं पूछता
कि उसने क्या-क्या अपने साथ ले लिया।
कुछ लोग इतने गहरे बस जाते हैं,
कि उनके जाने के बाद भी
दिल उन्हें अनुपस्थित नहीं मानता।
अब यादें तकलीफ़ नहीं देतीं,
मगर उनके बाद जो ख़ालीपन बचता है,
उसका कोई इलाज नहीं मिला।
कई बार मन सिर्फ़ यह चाहता है
कि कोई बिना पूछे समझ जाए,
और शायद यही सबसे मुश्किल इच्छा है।
जिसे कभी हर छोटी बात बताता था,
आज उसके बारे में भी किसी से बात नहीं करता।
वक़्त ने बहुत कुछ सिखाया,
मगर कुछ नाम आज भी सुनूँ
तो भीतर पुरानी ख़ामोशी उतर आती है।
मैंने उसे भुलाने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि कुछ रिश्ते भूलने के लिए नहीं,
सहेजकर रखने के लिए होते हैं।
सब कुछ खत्म होने के बाद भी,
कुछ एहसास समाप्त नहीं होते,
वे बस बोलना छोड़ देते हैं।
कभी-कभी सबसे ज़्यादा दर्द उस बात का नहीं होता
जो हुई,
उसका होता है जो हो सकती थी।
अब मैं कम उम्मीद करता हूँ,
क्योंकि उम्मीदें टूटती नहीं,
इंसान को भीतर से थका देती हैं।
एक उम्र लग जाती है यह समझने में
कि कुछ लोग हमारे नहीं होते,
फिर भी उनसे मोहब्बत झूठी नहीं होती।
कुछ शामें ऐसी होती हैं
जहाँ कोई याद नहीं आती,
फिर भी आँखें नम होने का कारण ढूँढ लेती हैं।
जिसे खोने का डर था,
वह चला गया,
और उसके बाद मुझे अपने भीतर का सन्नाटा मिला।
मैंने बहुत लोगों को जाते देखा है,
मगर कुछ बिछड़नें उम्र भर की कमी बन जाती हैं।
आज भी जब कोई पूछता है,
"सब ठीक है ना?"
तो सबसे मुश्किल काम
मुस्कुराकर "हाँ" कहना होता है।
कुछ रिश्तों की कब्र नहीं होती,
वे बस दिल के किसी कोने में
ज़िन्दा रहकर भी कभी वापस नहीं आते।