कुछ लोग बिछड़ने के बाद भी,
हमारी आदतों में ज़िन्दा रहते हैं।
जिसे कभी खोने से डरता था,
आज वही सिर्फ़ यादों में मिलता है।
मैंने बहुत संभालकर रखा था उसे,
शायद इसलिए उसकी कमी इतनी गहरी है।
अब कोई शिकायत नहीं,
बस कुछ ख़ामोशियाँ जवाब माँगती हैं।
वह चला गया अपनी दुनिया में,
और मैं आज भी कुछ बातों में वहीं रुका हूँ।
कभी-कभी मन उदास नहीं होता,
बस किसी अपने की कमी महसूस करता है।
जिसे भूलने की जल्दी थी सबको,
वही नाम सबसे देर तक साथ रहा।
कुछ रिश्ते किताब की तरह होते हैं,
ख़त्म हो जाते हैं, मगर असर नहीं जाता।
मैंने मुस्कुराना नहीं छोड़ा,
बस कुछ खुशियाँ भीतर तक पहुँचना छोड़ गईं।
सब बदल गया समय के साथ,
सिवाय उस खाली जगह के जो तुम्हारे बाद बनी थी।
कुछ लोग याद नहीं आते,
वे बस कभी-कभी साँसों के बीच महसूस होते हैं।
जिस दिन उम्मीद छोड़ी,
उसी दिन इंतज़ार और गहरा हो गया।
मैंने उसे खोया कम,
अपनी कई खुशफ़हमियाँ ज़्यादा खो दीं।
अब कोई दुख नहीं देता,
पुरानी यादें ही काफ़ी हैं।
वह मेरी कहानी में आज भी है,
बस अब उसका किरदार ख़ामोश है।
कुछ कमियाँ भर नहीं पातीं,
वक़्त सिर्फ़ उनके साथ जीना सिखाता है।
मैं ठीक हूँ,
बस कुछ बातें अब भी ठीक नहीं हुईं।
जिसे सबसे ज़्यादा सुनना चाहता था,
वही सबसे पहले ख़ामोश हो गया।
कई लोग मिले रास्ते में,
मगर कुछ खाली जगहें वहीं की वहीं रहीं।
अब दर्द की शिकायत नहीं,
बस कभी-कभी मन थक जाता है।
जो रिश्ता बच नहीं सका,
उसकी याद आज भी सलामत है।
कुछ लोग दूर नहीं होते,
बस पहुँच से बाहर हो जाते हैं।
उसके बाद ज़िन्दगी चलती रही,
मगर कुछ एहसास वहीं ठहरे रहे।
सबने कहा भूल जाओ,
किसी ने यह नहीं पूछा कितना अपना था।
कभी-कभी दिल किसी इंसान को नहीं,
एक पुराने दौर को याद करता है।
जो बात कभी कह नहीं पाए,
वही सबसे ज़्यादा भीतर रहती है।
मैंने उसे जाने दिया,
मगर उसकी जगह आज तक खाली है।
कुछ उदासियाँ वजह नहीं बतातीं,
बस चुपचाप साथ चलती हैं।
वह अब मेरा नहीं,
फिर भी उसकी याद पर मेरा हक़ सा लगता है।
समय गुज़र गया,
मगर कुछ सवाल आज भी पुराने ही हैं।
जिसे हर बात बताने की आदत थी,
आज उसी का ज़िक्र भी अधूरा रह जाता है।
कभी-कभी कोई कमी इंसान की नहीं होती,
बस उसके साथ होने वाले सुकून की होती है।
हमने बिछड़कर भी मोहब्बत की इज़्ज़त रखी,
नाम कम लिया, मगर याद कभी कम नहीं हुई।
वह अब मेरी ज़िन्दगी में नहीं है,
फिर भी कई फ़ैसले उसकी याद से होकर गुज़रते हैं।
सब ठीक है कहने वालों के पास,
अक्सर बताने को सबसे ज़्यादा होता है।
कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते,
बस उन्हें जीने का वक़्त नहीं मिलता।
आज भी कुछ आवाज़ें ऐसी हैं,
जो सीधे बीते हुए सालों तक ले जाती हैं।
जिसे खोने का दुख था,
वही याद बनकर सबसे ज़्यादा साथ रहा।
भीड़ बहुत थी आसपास,
फिर भी मन किसी एक की कमी गिनता रहा।
वक़्त बदल गया, लोग बदल गए,
बस कुछ इंतज़ार आज भी पुराने हैं।
मैंने उसे भुलाया नहीं,
बस उसका नाम लेना छोड़ दिया।
कुछ लोग जाते-जाते भी,
हमारे भीतर रहने की जगह बना जाते हैं।
अब शिकायत नहीं होती,
शायद उम्मीदें पहले जैसी नहीं रहीं।
सबने मेरा हाल पूछा,
किसी ने मेरी ख़ामोशी नहीं पढ़ी।
जो बात कहनी थी, रह गई,
और वही बात उम्र भर याद रही।
कभी-कभी यादें दुख नहीं देतीं,
बस मन को थोड़ी देर के लिए खाली कर जाती हैं।
वह मिला भी पूरा नहीं,
और छूटा भी पूरी तरह नहीं।
अब किसी का इंतज़ार नहीं करता,
फिर भी दरवाज़े की आहट सुन लेता हूँ।
कुछ दर्दों की आदत पड़ जाती है,
फिर उनकी मौजूदगी भी खामोश लगती है।
जिसे अपना कहने में सुकून था,
उसे याद करने में अब ख़ामोशी है।
मैं मुस्कुरा तो देता हूँ,
मगर कुछ दिनों में दिल शामिल नहीं होता।
सब कुछ पा लेने के बाद भी,
कई लोग एक कमी के साथ जीते हैं।
तुम्हारा जाना एक दिन की बात थी,
तुम्हारी कमी हर दिन की है।
कुछ रिश्तों का दुख यही होता है,
वे गलत नहीं होते, बस पूरे नहीं होते।
अब किसी से ज़्यादा नहीं जुड़ता,
कुछ बिछड़नें उम्र भर सावधान रखती हैं।