दोस्ती का रिश्ता दिलों में बसता है,
इसीलिए वक़्त का असर उस पर कम होता है।
तेरी रफ़ाक़त ने यह सिखाया,
कि सच्चे लोग ज़िंदगी को आसान नहीं, मगर खूबसूरत बना देते हैं।
कुछ दोस्त दुआओँ की तरह होते हैं,
दिखाई नहीं देते, मगर असर छोड़ जाते हैं।
जब दुनिया समझने से पहले बोलती है,
एक दोस्त सुनने को अहमियत देता है।
तेरी दोस्ती का करम यह रहा,
कि तन्हाई भी कभी बोझ नहीं लगी।
रिश्तों की भीड़ में वही अज़ीज़ ठहरा,
जिसने हर हाल में अपना होने का एहसास दिया।
दोस्ती की ख़ामोशियाँ भी बोलती हैं,
बस उन्हें समझने वाला दिल चाहिए।
कुछ लोग वक़्त के साथ याद बन जाते हैं,
अच्छे दोस्त यादों की वजह बन जाते हैं।
तेरी फ़िक्र का अंदाज़ निराला है,
बिना पूछे भी हाल जान लेता है।
रफ़ाक़त की असल शान यही है,
कि उसमें दिखावे की नहीं, सच्चाई की जगह होती है।
जब सफ़र थकाने लगे,
दोस्त की याद भी हौसला दे जाती है।
कुछ रिश्ते सिर्फ़ नाम तक रहते हैं,
दोस्ती दिल तक पहुँच जाती है।
तेरा साथ किसी जवाब जैसा नहीं,
एक इत्मीनान जैसा लगता है।
दोस्ती का मौसम बड़ा ख़ास होता है,
यह हर दौर में अपनापन बनाए रखता है।
जब हालात सख़्त हो जाएँ,
सच्चे दोस्त नरमी बनकर साथ रहते हैं।
कुछ लोग मिलकर भूल जाते हैं,
कुछ दोस्त बिछड़कर भी याद रहते हैं।
तेरी रफ़ाक़त का सबसे बड़ा एहसान,
यह है कि मैंने ख़ुद पर यक़ीन करना सीखा।
दोस्ती में लफ़्ज़ कम भी पड़ जाएँ,
तो एहसास रिश्ता निभा लेते हैं।
कुछ दोस्त ज़िंदगी के पन्नों पर नहीं,
दिल की तहों में लिखे जाते हैं।
जब दुनिया उम्मीदें तोड़ती है,
एक दोस्त भरोसा जोड़ देता है।
रफ़ाक़त अगर ख़ुलूस से भरी हो,
तो छोटी मुलाक़ातें भी उम्र भर याद रहती हैं।
तेरी दोस्ती की क़द्र इसलिए है,
क्योंकि उसमें मतलब नहीं, मोहब्बत-ए-दिल है।
कुछ लोग नज़रों से दूर हो जाते हैं,
मगर अच्छे दोस्त एहसासों से दूर नहीं होते।
दोस्ती वह रिश्ता है,
जो शिकायत से नहीं, समझ से चलता है।
हर इंसान को कोई ऐसा दोस्त मिले,
जिसके साथ ख़ामोशी भी सुकून लगे।
दोस्ती की रवायत में यही सबसे हसीन बात है,
कोई अपना बन जाए तो रिश्ता उम्र से बड़ा हो जाता है।
तेरे साथ गुज़रे लम्हों की गर्माहट आज भी है,
कुछ दोस्त बिछड़कर भी दिल से नहीं जाते।
रफ़ाक़त का हक़ अदा करना आसान नहीं,
कुछ लोग पूरी उम्र में भी दोस्त नहीं बन पाते।
जब लफ़्ज़ थक जाते हैं,
तब दोस्त की समझ बात पूरी कर देती है।
तेरी दोस्ती ने मुझे यह एहसास दिया,
कि हर रिश्ता ख़ून से नहीं, ख़ुलूस से बनता है।
वक़्त की धूप बहुत तेज़ थी,
मगर दोस्ती का साया हमेशा साथ रहा।
कुछ लोग ज़िंदगी में शोर लेकर आते हैं,
अच्छे दोस्त सुकून लेकर आते हैं।
दोस्ती की असल पहचान यही है,
कि फ़ासले बढ़ जाएँ, मगर फ़िक्र कम न हो।
तेरे होने का एहसास ही काफी है,
हर मुलाक़ात ज़रूरी नहीं होती।
जब दुनिया ने मेरी कमज़ोरियाँ देखीं,
एक दोस्त ने मेरी कोशिशें देखीं।
रफ़ाक़त का रिश्ता बड़ा नाज़ुक भी है,
और सच्चा हो तो सबसे मज़बूत भी।
कुछ दोस्त किताबों की तरह होते हैं,
जितना पढ़ो, उतना नया सुकून मिलता है।
तेरी याद किसी आवाज़ की मोहताज नहीं,
दोस्ती दिल में ख़ामोशी से ज़िंदा रहती है।
जब हालात बदलते गए,
तेरी नीयत का अपनापन नहीं बदला।
दोस्ती का सफ़र मंज़िल नहीं माँगता,
बस साथ निभाने वाले क़दम माँगता है।
कुछ लोग वक़्त के साथ बदल जाते हैं,
सच्चे दोस्त वक़्त के साथ और समझदार हो जाते हैं।
तेरी रफ़ाक़त ने यह यक़ीन दिया,
कि दुनिया में भरोसा अब भी ज़िंदा है।
दोस्ती का सबसे ख़ूबसूरत रंग,
एक-दूसरे की ख़ामोशी समझ लेना है।
जब दिल बोझिल हो जाए,
दोस्त की एक बात भी राहत बन जाती है।
कुछ रिश्तों में शर्तें होती हैं,
दोस्ती में सिर्फ़ ख़ुलूस होता है।
तेरे साथ की यादें ऐसी हैं,
जो उदास दिनों में भी मुस्कुरा देती हैं।
दोस्ती का एहतराम इसलिए भी है,
कि यह मतलब से नहीं, मोहब्बत-ए-इंसानियत से चलती है।
हर किसी को अपना कहना आसान है,
हर किसी को दोस्त कहना नहीं।
तेरी दोस्ती मेरी ज़िंदगी का वह हिस्सा है,
जिसे वक़्त भी कम नहीं कर सका।
रफ़ाक़त अगर सच्ची हो,
तो बरसों बाद की मुलाक़ात भी अधूरी नहीं लगती।
तेरी रफ़ाक़त का असर आज भी बाक़ी है,
दिल के सुकून में तेरा हिस्सा आज भी बाक़ी है।
कुछ रिश्ते लफ़्ज़ों के मोहताज नहीं होते,
दोस्ती उन्हीं ख़ामोश एहसासों का नाम है।
तेरा होना किसी नेमत से कम नहीं,
हर मुश्किल में तेरा यक़ीन मेरे साथ रहा।
रफ़्ता-रफ़्ता उम्र गुज़रती रही,
मगर दोस्ती का अपनापन वैसा ही रहा।
जब हालात ने सवाल बहुत किए,
एक दोस्त का भरोसा जवाब बन गया।
कुछ लोग मुलाक़ातों में याद रहते हैं,
कुछ दोस्त यादों में भी साथ रहते हैं।
दोस्ती का रिश्ता अजीब ख़ूबसूरत है,
जितना पुराना हो, उतना गहरा लगता है।
तेरी ख़ैरियत की फ़िक्र आज भी है,
यही तो दोस्ती की सबसे सच्ची निशानी है।
वक़्त ने फ़ासले ज़रूर बढ़ाए,
मगर दिलों की क़ुर्बत कम न कर सका।
मुझे दोस्ती की तफ़सीर लिखनी हो,
तो तेरे किरदार से शुरुआत करूँ।
कुछ लोग बातें याद रखते हैं,
अच्छे दोस्त एहसास याद रखते हैं।
रफ़ाक़त वह नहीं जो हर दिन नज़र आए,
रफ़ाक़त वह है जो हर दिन महसूस हो।
तेरी दोस्ती ने यह सिखाया,
कि अपनापन साबित नहीं, निभाया जाता है।
जब दुनिया ने जल्दबाज़ी में फ़ैसले किए,
एक दोस्त ने मुझे समझने की कोशिश की।
दोस्ती का हुस्न इसी में है,
कि यहाँ दिल को पर्दा नहीं रखना पड़ता।
कुछ यादें उम्र भर महकती रहती हैं,
उनमें अक्सर दोस्तों का ज़िक्र होता है।
तेरा साथ किसी सहारे जैसा नहीं,
एक ख़ामोश यक़ीन जैसा है।
दोस्ती में इख़्लास हो तो,
छोटी मुलाक़ातें भी बड़ी याद बन जाती हैं।
जब ख़ुद पर एतबार कम होने लगे,
दोस्त का भरोसा हौसला बन जाता है।
रिश्तों की भीड़ में सबसे अज़ीज़ वही निकला,
जो दोस्त बनकर हर हाल में अपना रहा۔