रात की ख़ामोशी जब हर तरफ़ फैल जाती है,
तो दिल अपने ही एहसासों की आवाज़ सुनने लगता है।
दिन भर की भागदौड़ अब धीरे-धीरे थम जाती है,
और मन एक अनजाने सुकून में उतर जाता है।
हर रात कुछ यादें खुद-ब-खुद लौट आती हैं,
जो दिन की रोशनी में कहीं खो जाती हैं।
अंधेरा जितना बाहर गहरा होता है,
उतना ही भीतर का सच साफ़ होने लगता है।
कभी किसी की याद बहुत हल्के से छू जाती है,
जैसे हवा बिना शोर के दिल को छू ले।
रात के इस सन्नाटे में,
दिल खुद से मिलने लगता है।
ख़ामोशी इतनी गहरी हो जाती है,
कि अपने विचार भी साफ़ सुनाई देने लगते हैं।
कुछ रिश्ते दूर होकर भी रात में पास लगते हैं,
जैसे यादें उन्हें फिर से जगा देती हों।
हर रात एक अनकहा सवाल छोड़ जाती है,
जिसका जवाब दिल चुपचाप ढूँढता रहता है।
नींद आँखों तक आती है, पर ठहरती नहीं,
जब यादें बीच में आकर बैठ जाती हैं।
यह रात सिर्फ़ आराम नहीं देती,
यह एहसासों को फिर से छू जाती है।
दिल की थकान शब्दों में नहीं आती,
बस ख़ामोशी में गहराई से बैठ जाती है।
कभी कोई मुस्कान इतनी याद आती है,
कि पूरी रात भीग-सी जाती है।
अंधेरे में भी कुछ चेहरे साथ चलते हैं,
जो हकीकत में बहुत दूर होते हैं।
हर रात बिना कहे बहुत कुछ कह जाती है,
जो दिन कभी सुन नहीं पाता।
सन्नाटा खाली नहीं होता,
उसमें दिल की धड़कनें छुपी होती हैं।
कई अधूरी बातें रात में फिर से जाग उठती हैं,
जो दिन में दब जाती हैं।
यादें रात में और भी सच्ची लगने लगती हैं,
जैसे दिल उन्हें फिर से जी रहा हो।
दिल कभी-कभी खुद से भी थक जाता है,
पर एहसास फिर भी जागते रहते हैं।
रात का हर पल यह सिखाता है,
कि ख़ामोशी भी एक गहरी ज़ुबान होती है।
अंधेरे में छुपी हुई रोशनी,
दिल के अंदर कहीं जगमगाने लगती है।
यह रात चाहे जितनी लंबी हो,
कुछ एहसास हमेशा साथ रह जाते हैं।
हर रात अपने साथ एक कहानी छोड़ जाती है,
और हम उसे ख़ामोशी से पढ़ते रहते हैं।
यह ख़ामोशी भी एक दुआ जैसी लगती है,
जो बिना शब्दों के दिल तक पहुँच जाती है।
और इस रात के अंत में बस इतना सा एहसास रहता है,
कि कुछ यादें कभी जाती नहीं, बस साथ चलती रहती हैं।
रात की ख़ामोशी जब धीरे-धीरे उतरती है,
तो दिल अपने ही एहसासों से मिलने लगता है।
दिन भर की थकान अब शब्दों से आगे बढ़ जाती है,
और मन एक अनकहे सुकून में खो जाता है।
हर रात कुछ पुरानी यादें लौट आती हैं,
जो दिन के शोर में कहीं दब जाती हैं।
अंधेरा जितना बाहर गहरा होता है,
उतना ही भीतर का सच साफ़ होने लगता है।
कभी किसी की याद बहुत हल्के से छू जाती है,
जैसे हवा बिना दस्तक के आ जाए।
रात के इस सन्नाटे में,
दिल खुद को और गहराई से समझने लगता है।
ख़ामोशी इतनी सच्ची हो जाती है,
कि अपने ही विचार साफ़ सुनाई देने लगते हैं।
कुछ रिश्ते दूर होकर भी रात में पास लगते हैं,
जैसे यादें उन्हें फिर से जगा देती हों।
हर रात एक अधूरा सवाल छोड़ जाती है,
जिसका जवाब दिल चुपचाप ढूँढता रहता है।
नींद आँखों तक आती है, पर ठहरती नहीं,
जब यादें बीच में रास्ता रोक लेती हैं।
यह रात सिर्फ आराम नहीं देती,
यह एहसासों को फिर से जीने का समय है।
दिल की थकान किसी शब्द में नहीं समाती,
बस ख़ामोशी में बैठ जाती है।
कभी कोई मुस्कान इतनी याद आती है,
कि पूरी रात भर जाती है।
अंधेरे में भी कुछ चेहरे साथ चलते हैं,
जो हकीकत में अब दूर हैं।
हर रात बिना कहे बहुत कुछ कह जाती है,
जो दिन कभी सुन नहीं पाता।
सन्नाटा खाली नहीं होता,
उसमें दिल की धड़कनें छिपी होती हैं।
कई अधूरी बातें रात में फिर से जाग उठती हैं,
जो दिन की रोशनी में खो जाती हैं।
यादें रात में और भी सच्ची लगने लगती हैं,
जैसे दिल उन्हें फिर से महसूस कर रहा हो।
दिल कभी-कभी खुद से भी थक जाता है,
पर एहसास फिर भी जागते रहते हैं।
रात का हर पल यह सिखाता है,
कि ख़ामोशी भी एक गहरी ज़ुबान होती है।
अंधेरे में छुपी हुई रोशनी,
दिल के अंदर कहीं मिल जाती है।
यह रात चाहे जितनी लंबी हो,
कुछ एहसास हमेशा साथ रह जाते हैं।
हर रात अपने साथ एक कहानी छोड़ जाती है,
और हम उसे चुपचाप जीते रहते हैं।
यह ख़ामोशी भी एक दुआ जैसी लगती है,
जो बिना शब्दों के दिल तक पहुँच जाती है।
और इस रात के अंत में बस इतना सा एहसास रहता है,
कि कुछ बातें कभी पूरी नहीं होतीं, बस महसूस होती रहती हैं।
रात की ख़ामोशी जब हर तरफ़ फैल जाती है,
तो दिल अपने ही एहसासों से बातें करने लगता है।
दिन भर की भागदौड़ अब धीरे-धीरे थम जाती है,
और मन एक अजीब-सी शांति में उतर जाता है।
हर रात कुछ यादें खुद-ब-खुद लौट आती हैं,
जो दिन की रोशनी में कहीं खो गई थीं।
अंधेरा जितना बाहर होता है,
उतना ही भीतर का सच साफ़ दिखने लगता है।
कभी किसी की याद बहुत धीरे से आती है,
जैसे हवा बिना आवाज़ के छू जाए।
रात के इस सन्नाटे में,
दिल अपने आप को और करीब से महसूस करता है।
ख़ामोशी इतनी गहरी हो जाती है,
कि अपने विचार भी साफ़ सुनाई देने लगते हैं।
कुछ रिश्ते दूर होकर भी रात में पास लगते हैं,
जैसे यादें उन्हें फिर से जगा देती हों।
हर रात एक अनकहा सवाल छोड़ जाती है,
जिसका जवाब दिल खुद में ढूँढता है।
नींद आँखों तक आकर भी रुक जाती है,
जब यादें बीच में आकर बैठ जाती हैं।
यह रात सिर्फ आराम नहीं देती,
यह एहसासों को फिर से जगा देती है।
दिल की थकान शब्दों में नहीं आती,
बस ख़ामोशी में बैठ जाती है।
कभी कोई मुस्कान इतनी याद आती है,
कि पूरा दिल भर जाता है।
अंधेरे में भी कुछ चेहरे साथ चलते हैं,
जो हकीकत में बहुत दूर होते हैं।
हर रात कुछ कहे बिना बहुत कुछ कह जाती है,
जो दिन कभी समझ नहीं पाता।
सन्नाटा खाली नहीं होता,
उसमें दिल की धड़कनें छुपी होती हैं।
कई अधूरी बातें रात में फिर से जाग उठती हैं,
जो दिन में दब जाती हैं।
यादें रात में और सच्ची लगने लगती हैं,
जैसे दिल उन्हें फिर से जी रहा हो।
दिल कभी-कभी खुद से थक जाता है,
पर एहसास थकते नहीं।
रात का हर पल यही सिखाता है,
कि ख़ामोशी भी एक गहरी ज़ुबान है।
अंधेरे में छुपी हुई रोशनी,
दिल के अंदर महसूस होने लगती है।
यह रात चाहे जितनी लंबी हो,
कुछ एहसास हमेशा साथ रह जाते हैं।
सुकून और बेचैनी दोनों साथ चलते हैं,
रात को और भी गहरा बना देते हैं।
हर रात अपनी एक कहानी छोड़ जाती है,
और हम उसे ख़ामोशी से पढ़ते रहते हैं।
यह ख़ामोशी भी एक दुआ जैसी लगती है,
जो बिना बोले दिल तक पहुँच जाती है।