जब मैं छोटी थी,
तो लगता था आप बस मेरे पिता हैं,
बड़े होकर समझ आया,
आप मेरी हिम्मत, मेरा भरोसा और मेरी सबसे मज़बूत नींव भी हैं।
आपने कभी बड़े-बड़े वादे नहीं किए,
बस हर मुश्किल वक़्त में साथ खड़े रहे,
और कई बार साथ होना,
किसी भी वादे से बड़ा होता है।
मेरे बचपन की सबसे सुरक्षित जगह
कोई कमरा नहीं था,
वह आपके पास बैठकर
बिना डरे सब कुछ कह पाना था।
जब मैंने पहली बार हार देखी,
दुनिया ने सलाह दी,
आपने बस इतना कहा,
"एक हार से इंसान छोटा नहीं हो जाता।"
आपने मुझे समझाया कि
आत्मविश्वास शोर से नहीं आता,
वह इस यक़ीन से आता है
कि चाहे कुछ भी हो,
घर में कोई तुम पर विश्वास करता है।
मेरी हर छोटी सफलता पर
आप जिस तरह खुश होते थे,
उसे देखकर लगता था,
जैसे मेरी ख़ुशी का एक हिस्सा
आपके दिल में भी रहता है।
बचपन में जब मैं सो जाती थी,
तो शायद मुझे नहीं पता था,
कि मेरी निश्चिंत नींद के पीछे
आपकी अनगिनत चिंताएँ जागती थीं।
मैंने आपको कभी अपनी परेशानियों का
ढिंढोरा पीटते नहीं देखा,
तभी तो सीखा,
मज़बूती का मतलब चुपचाप ज़िम्मेदारी निभाना भी होता है।
आपने मुझे यह नहीं सिखाया
कि लोग क्या कहेंगे,
आपने यह सिखाया
कि सही क्या है।
जब मैं घर से दूर होती हूँ,
तब समझ आता है,
कुछ लोग दूरी से दूर नहीं होते,
वे आदतों और दुआओँ में साथ रहते हैं।
आपने मेरे सपनों को कभी हल्का नहीं समझा,
चाहे वे कितने ही छोटे क्यों न हों,
क्योंकि आपके लिए
मेरी खुशी हमेशा महत्वपूर्ण रही।
आपकी उँगली पकड़कर चलने वाली बच्ची
अब अपने फैसले ख़ुद लेती है,
पर हर बड़े निर्णय में
आपकी सीख अब भी शामिल रहती है।
मैंने कई लोगों को सफल देखा है,
पर सबसे सम्मानित हमेशा वही लगे,
जो आपकी तरह विनम्र रहे।
जब कभी मैं ख़ुद पर शक करने लगती हूँ,
तो आपकी कही हुई कोई पुरानी बात
मन में फिर से रोशनी कर देती है।
आपने मुझे दुनिया से डरना नहीं,
उसे समझना सिखाया,
और यही सीख आज भी
हर नए अनुभव में साथ चलती है।
मेरे जीवन की कई अच्छी आदतों का श्रेय
मुझे नहीं जाता,
वे आपकी परवरिश का असर हैं।
कुछ रिश्ते रोज़ जताए नहीं जाते,
फिर भी सबसे गहरे होते हैं,
पिता और बेटी का रिश्ता भी
उन्हीं में से एक है।
जब लोग कहते हैं कि
मैं समझदार हो गई हूँ,
तो मुझे आपकी बातें याद आती हैं,
जो कभी साधारण लगती थीं,
पर समय के साथ अर्थ बन गईं।
आपने मुझे सिर्फ़ सुरक्षा नहीं दी,
ज़िम्मेदारी भी दी,
ताकि मैं जीवन को
आत्मविश्वास के साथ जी सकूँ।
मेरी सबसे बड़ी ताक़त यह नहीं
कि मैं कितनी सक्षम हूँ,
बल्कि यह है कि
मैं ऐसे पिता की बेटी हूँ
जिन्होंने मुझे कभी टूटने नहीं दिया।
आपकी मौजूदगी ने मुझे यह भरोसा दिया
कि दुनिया चाहे जैसी भी हो,
कुछ रिश्ते हमेशा अपने रहते हैं।
बचपन की तस्वीरों में
मैं मुस्कुरा रही होती हूँ,
पर आज समझती हूँ,
उन मुस्कानों के पीछे
आपकी मेहनत भी शामिल थी।
आपने मेरे लिए जो किया,
उसका हिसाब शब्दों में नहीं हो सकता,
क्योंकि कुछ प्रेम
कर्तव्यों के रूप में दिखाई देते हैं।
जब मैं अपनी उपलब्धियों को देखती हूँ,
तो उनमें आपका अक्स दिखाई देता है,
क्योंकि आपने सिर्फ़ रास्ता नहीं दिखाया,
चलना भी सिखाया।
अगर कभी ज़िंदगी मुझे
एक दिन फिर से बचपन में भेज दे,
तो मैं खिलौनों से नहीं,
आपके साथ बिताए समय से खेलना चाहूँगी।
मेरे लिए पिता होना
सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं,
एक ऐसा एहसास है,
जो उम्र बढ़ने के साथ
और अधिक अनमोल होता जाता है।
जब मैं छोटी थी,
तो हर सवाल का जवाब आप थे,
आज बड़ी हो गई हूँ,
फिर भी ज़िंदगी के सबसे कठिन सवालों में
सबसे पहले आपकी ही याद आती है।
आपने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया
कि दुनिया कितनी कठिन हो सकती है,
क्योंकि जब तक मैं आपके साथ थी,
हर मुश्किल मुझ तक पहुँचने से पहले आपसे टकराती थी।
मेरी हर उपलब्धि पर लोग मुझे बधाई देते हैं,
पर मैं जानती हूँ,
उसमें मेरी मेहनत जितनी है,
उतना ही आपका विश्वास भी शामिल है।
बचपन में आपके कंधों पर बैठकर
दुनिया बड़ी सुंदर लगती थी,
आज समझती हूँ,
दुनिया नहीं,
आपका साथ सुंदर था।
जब भी मैं किसी नई राह पर कदम रखती हूँ,
डर थोड़ा कम होता है,
क्योंकि मन के किसी कोने में
आपकी कही बातें अब भी साथ चलती हैं।
आपने मुझे कभी कमज़ोर समझकर नहीं संभाला,
बल्कि मज़बूत बनने का भरोसा दिया,
यही वजह है कि आज चुनौतियाँ देखकर
मैं पीछे नहीं हटती।
मेरे लिए सबसे अनमोल यादें
महँगे उपहारों की नहीं हैं,
वे शामें हैं,
जब आपके साथ बैठकर
बिना किसी वजह के बातें किया करती थी।
आपकी डाँट भी अजीब थी,
उसमें नाराज़गी से ज़्यादा चिंता होती थी,
और आपकी ख़ामोशी में भी
मेरे लिए दुआएँ छिपी होती थीं।
मैं जहाँ भी चली जाऊँ,
जिस शहर में भी रहूँ,
एक सुकून हमेशा मेरे साथ रहता है,
कि इस दुनिया में एक घर ऐसा है
जहाँ मेरा इंतज़ार बिना शर्त होता है।
जब लोग मेरी हिम्मत की तारीफ़ करते हैं,
तो मुझे आपकी याद आती है,
क्योंकि साहस मैंने किसी किताब से नहीं,
आपको देखकर सीखा है।
आपने मेरे लिए रास्ते आसान नहीं किए,
पर मुझे इतना सक्षम बनाया
कि कठिन रास्तों से डरना छोड़ दिया।
मेरे बचपन की सबसे प्यारी तस्वीरों में
अक्सर आप साथ होते हैं,
और मेरी सबसे प्यारी यादों में भी।
कभी-कभी लगता है,
मैंने आपको ठीक से धन्यवाद ही नहीं कहा,
उन अनगिनत बातों के लिए,
जो आपने बिना बताए मेरे लिए कीं।
आपके साथ होने का एहसास
किसी सुरक्षा कवच जैसा है,
जिसे देखा नहीं जा सकता,
पर जिसकी मौजूदगी हर पल महसूस होती है।
अगर मेरी ज़िंदगी एक कहानी है,
तो उसके सबसे मज़बूत अध्यायों में
आपका नाम लिखा हुआ है,
क्योंकि आपने सिर्फ़ मेरा हाथ नहीं थामा,
मेरा आत्मविश्वास भी बनाया।
समय के साथ बहुत कुछ बदल गया,
पर एक बात आज भी वैसी ही है,
जब मन थक जाता है,
तो सबसे पहले पिता की आवाज़ याद आती है।
जब भी कोई पूछता है कि
तुम्हें सबसे ज़्यादा भरोसा किस पर है,
मेरे मन में सबसे पहले आपका चेहरा आता है,
क्योंकि मैंने बचपन से देखा है,
आपका साथ कभी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहा।
मेरी छोटी-सी चोट पर जो सबसे ज़्यादा बेचैन हो जाते थे,
वही मुझे बड़ी परेशानियों में मज़बूत रहने की सीख भी देते थे,
आपने फ़िक्र और हिम्मत,
दोनों का मतलब एक साथ समझाया।
बचपन में मैं आपका हाथ पकड़कर चलती थी,
आज आपकी सीख पकड़कर चलती हूँ,
समय बदला है,
पर मेरा सहारा नहीं।
आपने कभी मेरी उड़ान से डरकर
मेरे पंख नहीं बाँधे,
बल्कि हर बार यही कहा,
"जाओ, दुनिया