मैंने कई बार डर महसूस किया है,
मगर हर बार उसे कारण नहीं बनने दिया,
क्योंकि मंज़िल तक पहुँचने वाले लोग
अक्सर निडर नहीं, दृढ़ होते हैं।
जब रास्ते ने भरोसा माँगा,
मैंने बहानों की जगह
अपने इरादे आगे कर दिए।
अब मैं हर कठिन मोड़ पर
यह नहीं सोचता कि क्या खो सकता हूँ,
मैं यह सोचता हूँ कि क्या सीख सकता हूँ।
मैंने अपने सपनों को
सुरक्षित दूरी से देखने के बजाय
उनकी ओर चलना चुना है।
जब हालात अनिश्चित होते हैं,
मैं घबराहट को नहीं,
अपने उद्देश्य को याद करता हूँ।
अब मैं उस जीवन से संतुष्ट नहीं
जो केवल आसान हो,
मैं वह जीवन चाहता हूँ
जो मुझे और मज़बूत बनाए।
मैंने कई बार बिना आश्वासन के शुरुआत की है,
और हर शुरुआत ने
मेरे आत्मविश्वास में एक नई परत जोड़ दी।
जब डर ने कहा कि अभी समय नहीं है,
मैंने देखा कि तैयारी पूरी है या नहीं,
और फिर कदम बढ़ा दिया।
अब मैं चुनौतियों को देखकर
अपने सपनों का आकार कम नहीं करता,
मैं अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम करता हूँ।
मैंने यह समझ लिया है
कि साहस कोई भावना नहीं,
यह एक निर्णय है
जो बार-बार लेना पड़ता है।
जब परिस्थितियाँ मेरे खिलाफ़ थीं,
मैंने अपने रवैये को
अपने पक्ष में रखा।
अब मैं असफलता की संभावना से नहीं,
रुकी हुई ज़िंदगी से डरता हूँ।
मैंने अपने मन को
अनिश्चितता में भी स्थिर रहना सिखाया है,
क्योंकि हर उत्तर
पहले दिन नहीं मिलता।
जब कोई अवसर बड़ा लगता है,
मैं पीछे हटने के बजाय
ख़ुद को उसके योग्य बनाने में लग जाता हूँ।
अब मैं अपने डर का इंतज़ार नहीं करता
कि वह ख़त्म हो,
मैं उसके रहते हुए भी आगे बढ़ता हूँ।
मैंने अपने जीवन को
संदेहों की कैद से बाहर निकाला है,
और वहीं मुझे
अपनी असली ताक़त मिली।
जब रास्ते कठिन हुए,
मैंने अपने कदमों की मज़बूती बढ़ाई,
रास्ते बदलने की जल्दी नहीं की।
अब मैं हर जोखिम को
लापरवाही से नहीं,
समझदारी और साहस के साथ देखता हूँ।
मैंने अपने भीतर यह विश्वास पैदा किया है
कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो,
मैं उसका सामना करना सीख सकता हूँ।
आज मेरी सबसे बड़ी आज़ादी यह है
कि डर मौजूद होने पर भी
मेरे फैसले मेरे विश्वास लेते हैं,
मेरी आशंकाएँ नहीं।
मैंने डर को कभी दुश्मन नहीं माना,
बस उसे अपनी दिशा तय करने का अधिकार नहीं दिया।
जब रास्ता अनजान था,
मैंने गारंटी नहीं ढूँढ़ी,
मैंने अपने हौसले पर भरोसा किया।
अब मैं हर संभावना को
सिर्फ़ जोखिम की नज़र से नहीं देखता,
मैं यह भी देखता हूँ
कि उसमें मैं कितना बढ़ सकता हूँ।
मैंने कई फैसले ऐसे लिए हैं
जिनका परिणाम पहले से तय नहीं था,
मगर मेरी नीयत और मेहनत तय थी।
जब लोग सुरक्षित विकल्प चुन रहे थे,
मैंने वह रास्ता चुना
जो मुझे बेहतर इंसान बना सके।
अब मैं असफलता की संभावना से नहीं,
कोशिश न करने की संभावना से सावधान रहता हूँ।
मैंने अपने सपनों को
डर की वजह से छोटा नहीं किया,
मैंने अपनी सोच को बड़ा किया है।
जब परिस्थितियाँ कठिन होती हैं,
मैं ख़ुद को याद दिलाता हूँ
कि साहस का असली समय
यही होता है।
अब मैं हर नई चुनौती को
अपने आत्मविश्वास की परीक्षा नहीं,
अपनी क्षमता के विस्तार का अवसर मानता हूँ।
मैंने यह स्वीकार किया है
कि हर निर्णय में कुछ अनिश्चितता होगी,
मगर जीवन वहीं आगे बढ़ता है
जहाँ कदम बढ़ते हैं।
जब आलोचनाएँ मिलीं,
मैंने अपनी दिशा नहीं छोड़ी,
मैंने बस अपने कारणों को और स्पष्ट किया।
अब मुझे हर उत्तर पहले से जानना ज़रूरी नहीं लगता,
क्योंकि सीखने की क्षमता
भी एक सुरक्षा होती है।
मैंने अपने भीतर इतना भरोसा बनाया है
कि संदेह आने पर भी
मेरे कदम रुकते नहीं।
जब कोई कहता है कि रास्ता कठिन है,
मैं यह सोचता हूँ
कि शायद वहीं मेरी अगली सीख छिपी है।
अब मैं डर के कारण अवसर नहीं छोड़ता,
मैं तैयारी बढ़ाता हूँ
और फिर आगे बढ़ता हूँ।
मैंने अपने मन को
संभावित नुकसान से ज़्यादा
संभावित विकास पर ध्यान देना सिखाया है।
जब दबाव बढ़ता है,
मैं भागने की नहीं,
स्थिर रहने की कोशिश करता हूँ।
अब मैं अपनी सीमाओं को
स्थायी सच नहीं मानता,
उन्हें अगली चुनौती तक की दूरी मानता हूँ।
मैंने जीवन को सावधानी से जिया है,
मगर संकोच में नहीं,
इसीलिए हर नया मोड़
मुझे डराता कम और सिखाता ज़्यादा है।
जब परिस्थितियाँ मेरे पक्ष में नहीं होतीं,
मैं फिर भी प्रयास करता हूँ,
क्योंकि मेरा विश्वास परिणाम से पहले
मेरे प्रयास पर टिका है।
अब मैं हर बंद दरवाज़े पर नहीं रुकता,
मैं यह देखता हूँ
कि आगे कौन-सी संभावना खुल सकती है।
मैंने अपने डर को
अपने आत्मविश्वास के सामने बैठाया है,
और दोनों को साथ लेकर चलना सीख लिया है।
जब भविष्य स्पष्ट नहीं होता,
मैं वर्तमान में अपना सर्वश्रेष्ठ देता हूँ,
क्योंकि वही भविष्य की सबसे मज़बूत तैयारी है।
अब मैं बहानों की सुरक्षा से बाहर आ चुका हूँ,
क्योंकि विकास अक्सर
सुविधा की सीमा के उस पार मिलता है।
मैंने अपने निर्णयों की ज़िम्मेदारी ली है,
और उसी दिन से
मेरा साहस पहले से अधिक सच्चा हो गया।
जब दुनिया ने जोखिम देखा,
मैंने अवसर और सीख दोनों देखे,
और यही नज़रिया
मुझे आगे बढ़ाता रहा।
अब मैं परिस्थितियों के अनुकूल होने से नहीं डरता,
क्योंकि मैंने कई बार ख़ुद को
नई परिस्थितियों में सफल होते देखा है।
मैंने अपने जीवन का नियंत्रण
डर के हवाले नहीं किया,
इसीलिए मेरी दिशा
मेरे विश्वास से तय होती है।
आज मेरा साहस शोर नहीं करता,
वह बस हर चुनौती के सामने
एक कदम आगे बढ़ा देता है,
और यही मेरे जीवन का सबसे मज़बूत रवैया है।