मैंने अपनी कीमत लोगों की राय से नहीं आँकी,
इसीलिए आज भी आत्मविश्वास उधार नहीं लेना पड़ता।
जो लोग हर मोड़ पर बदल जाते हैं,
वे अक्सर अपनी असली पहचान खो देते हैं।
मैंने सफलता से पहले चरित्र पर काम किया,
तभी उपलब्धियाँ सिर पर नहीं चढ़ीं।
हर ठोकर ने मुझे रोका नहीं,
बस अगले कदम को थोड़ा समझदार बना दिया।
मैंने अपनी ऊर्जा बहसों में नहीं लगाई,
इसीलिए परिणामों में निवेश कर पाया।
अब मैं हर किसी को प्रभावित करने नहीं निकलता,
जो हूँ, वही बने रहना काफ़ी है।
मैंने कठिन रास्तों से शिकायत नहीं की,
उन्हीं ने मेरी क्षमता का परिचय कराया।
कुछ लोग अवसर का इंतज़ार करते हैं,
मैंने तैयारी को अपनी आदत बना लिया।
मेरी ख़ामोशी में घमंड नहीं,
बस अनावश्यक शोर से दूरी है।
मैंने हार को स्वीकार किया है,
इसीलिए जीत का मूल्य समझता हूँ।
जो आज सुकून दिखता है,
वो कल की बेचैन मेहनत का परिणाम है।
मैं वहाँ नहीं रुकता जहाँ लोग ताली बजाते हैं,
मैं वहाँ रुकता हूँ जहाँ कुछ नया सीखने को मिले।
मेरे लक्ष्य बड़े हैं,
इसलिए मेरी प्राथमिकताएँ भी स्पष्ट हैं।
मैंने समय को कभी हल्के में नहीं लिया,
वही मेरी सबसे बड़ी पूँजी निकला।
जो रास्ता आसान दिखता था, उसे छोड़ दिया,
क्योंकि मुझे मंज़िल से ज़्यादा किरदार की चिंता थी।
मैंने अपनी सीमाएँ तय की हैं,
ताकि मेरा आत्मसम्मान सुरक्षित रह सके।
हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करता हूँ,
यही मेरी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा है।
मैंने अपनी कहानी हालातों के भरोसे नहीं छोड़ी,
हर मुश्किल अध्याय में ख़ुद लिखा है।
जो लोग मुझे कम आँकते हैं,
उन्हें जवाब देने की नहीं, आगे बढ़ने की आदत है।
मेरी पहचान शब्दों से नहीं बनती,
वो मेरे लगातार निभाए गए वादों में दिखती है।
मैं अभी मंज़िल पर नहीं पहुँचा,
लेकिन रुकने का इरादा भी कभी नहीं रखा।
मैंने ज़िंदगी से एक बात सीखी है—
हर आवाज़ का जवाब देना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ लोग आपको समझेंगे, कुछ गलत समझेंगे,
लेकिन आपकी दिशा लोगों की राय से तय नहीं होनी चाहिए।
मैंने अपने हिस्से की असफलताएँ भी देखी हैं,
इसलिए आज की सफलता मुझे घमंडी नहीं बनाती।
अब मैं हर दरवाज़े पर दस्तक नहीं देता,
जो रास्ते मेरे लिए हैं, वहाँ मेरी मेहनत पहले पहुँच जाती है।
मेरी सबसे बड़ी जीत किसी और से आगे निकलना नहीं,
अपने पुराने डर से आगे निकलना है।
और शायद यही वजह है कि आज भी
मैं शोर नहीं, अपने काम पर भरोसा करता हूँ।
---
कई लोग तेज़ दौड़ते हैं,
मैंने लगातार चलना चुना है।
क्योंकि मैंने देखा है,
अक्सर वही लोग मंज़िल तक पहुँचते हैं जो थककर रुकते नहीं।
मैंने अपने सपनों को सिर्फ़ सोचा नहीं,
उनके लिए अपनी आदतें बदली हैं।
अब परिणाम आने में समय लगे तो भी घबराहट नहीं होती,
क्योंकि मुझे अपनी तैयारी पर भरोसा है।
मेरी पहचान किसी एक उपलब्धि से नहीं बनेगी,
उसे मेरी निरंतरता बनाएगी।
---
मैं बदल गया हूँ,
लेकिन लोगों को प्रभावित करने के लिए नहीं।
मैंने बस इतना सीखा है कि
हर किसी को खुश रखने की कोशिश में इंसान ख़ुद से दूर हो जाता है।
अब मैं वहाँ समय देता हूँ जहाँ सम्मान हो,
वहाँ मेहनत करता हूँ जहाँ भविष्य हो।
जो लोग मेरी ख़ामोशी को समझते हैं,
उन्हें शब्दों की ज़रूरत नहीं पड़ती।
और जो सिर्फ़ शोर सुनते हैं,
वे अक्सर असली ताकत पहचान नहीं पाते।
---
मुझे मंज़ूरी नहीं चाहिए,
मुझे प्रगति चाहिए।
मुझे पहचान नहीं चाहिए,
मुझे काबिलियत चाहिए।
मुझे भीड़ नहीं चाहिए,
मुझे सही दिशा चाहिए।
बाकी जो कुछ मिलेगा,
वो मेरी मेहनत का परिणाम होगा, किसी की कृपा नहीं।
---
मैं आज भी सीख रहा हूँ,
क्योंकि ठहर जाना मुझे हार से ज़्यादा खतरनाक लगता है।
हर कठिन दौर ने मुझे थोड़ा और मज़बूत किया है,
हर असफलता ने मुझे थोड़ा और समझदार।
इसलिए अब चुनौतियाँ देखकर घबराता नहीं,
उन्हें अपनी अगली सीढ़ी मानता हूँ।
मेरी कहानी अभी पूरी नहीं हुई,
और मैं अधूरे सपनों के साथ रुकने वालों में नहीं हूँ।