Attitude Shayari for Facebook
मैंने ख़ुद को वक़्त दिया है तराशने के लिए, इसलिए आज पहचान उधार की नहीं, मेरी अपनी है।
मेरे सफ़र की ख़ास बात यह नहीं कि मैं कितना आगे हूँ, ख़ास बात यह है कि मैं रुका नहीं।
मैंने हर जीत से पहले लंबा इंतज़ार देखा है, इसलिए सफलता मेरे लिए शोर नहीं, संतोष है।
लोग अक्सर नतीजे देखते हैं, मैं आज भी अपनी मेहनत गिनता हूँ।
मैं बदलते मौसमों से नहीं घबराता, मेरी जड़ें संघर्ष में पली हैं।
मुझे ऊँचा दिखने का शौक़ नहीं, बस छोटा सोचने की आदत नहीं है।
मैंने ख़ामोशी को कमजोरी नहीं बनने दिया, उसे अपने व्यक्तित्व की ताक़त बना लिया।
मेरे सपने बड़े हैं, इसलिए मेरी आदतें भी बड़ी ज़िम्मेदारी माँगती हैं।
मैंने रास्तों की शिकायत कम की है, कदम मज़बूत करने पर ज़्यादा काम किया है।
मेरी सबसे बड़ी पहचान मेरा व्यवहार है, नाम तो बहुत लोगों के होते हैं।
मैं आज जहाँ हूँ, वहाँ तक पहुँचने में मेरे धैर्य का सबसे बड़ा हाथ है।
मैं किसी की नकल बनकर नहीं जी सकता, मेरी सोच को अपनी दिशा पसंद है।
कुछ लोग मौके का इंतज़ार करते रहे, मैंने तैयारी को ही मौका बना लिया।
मैंने ठोकरों को अपमान नहीं समझा, उन्हें आगे बढ़ने की फ़ीस मान लिया।
मेरे फैसले हमेशा आसान नहीं होते, लेकिन वे मुझे आईने में शर्मिंदा भी नहीं करते।
मैंने हार को अंत नहीं माना, इसीलिए वह मुझे रोक नहीं सकी।
जो लोग ख़ुद पर भरोसा रखते हैं, उन्हें हर मोड़ पर सहारे नहीं चाहिए होते।
मेरी मंज़िल दूर हो सकती है, लेकिन मेरा इरादा कभी कमज़ोर नहीं होता।
मैंने सम्मान माँगना छोड़ दिया, तब से लोग सम्मान देने लगे।
मेरी पहचान शब्दों से नहीं बनी, उसके पीछे वर्षों की निरंतरता खड़ी है।
मैंने वक़्त को दोष देने के बजाय, वक़्त का उपयोग करना सीखा है।
मैं वहाँ तक पहुँचना चाहता हूँ, जहाँ परिचय से पहले काम की चर्चा हो।
मेरे उसूल कभी-कभी मुझे अकेला कर देते हैं, लेकिन वे मुझे झुकने भी नहीं देते।
मैंने अपने डर को रास्ते से हटाया नहीं, उसे साथ लेकर आगे बढ़ना सीखा है।
मेरे लिए सफलता केवल मंज़िल नहीं, ख़ुद का बेहतर रूप बनना भी है।
मैं भीड़ में शामिल होने से पहले सोचता हूँ, क्योंकि पहचान अक्सर अलग चलने से बनती है।
मेरे सपनों की ऊँचाई देखकर मत चौंको, मैंने उन्हें उठाने लायक मेहनत भी की है।
मैं हर दिन कुछ नया सीखता हूँ, इसीलिए कल से बेहतर दिखता हूँ।
मैंने अपने व्यक्तित्व को दिखावे से नहीं सजाया, उसे अनुभवों से मज़बूत बनाया है।
मेरी चुप्पी में घमंड नहीं, बस बेवजह बोलने की आदत नहीं।
मैं उन रास्तों पर भी चला हूँ, जहाँ केवल विश्वास ही साथी था।
मुझे मंज़ूरी से ज़्यादा प्रगति पसंद है, क्योंकि तालियाँ रुक जाती हैं, विकास नहीं।
मैंने अपने लक्ष्य को इतना स्पष्ट रखा है, कि भटकाव भी ज़्यादा देर टिक नहीं पाता।
मेरे लिए सबसे बड़ी जीत यह है, कि मैं मुश्किल दिनों के बाद भी वैसा ही खड़ा हूँ।
मैं अपनी कहानी का मुख्य किरदार हूँ, इसलिए उसकी दिशा भी मैं ही तय करता हूँ।
मेरी पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं, मैं जहाँ खड़ा होता हूँ, वहीं से बात शुरू होती है। मैंने वक़्त से लड़कर सीखा है मुस्कुराना, इसलिए आज मेरी ख़ामोशी भी असर छोड़ती है।
मैंने हर मोड़ पर ख़ुद को परखा है, तभी आज अपने फ़ैसलों पर यक़ीन रखता हूँ। जो लोग हालात देखकर बदल जाते हैं, मैंने हालात बदलकर अपनी राह बनाई है।
मेरे बारे में राय बनाना आसान है, मुझे समझना थोड़ा मुश्किल होगा। क्योंकि मैं शब्दों से कम, अपने किरदार से ज़्यादा दिखाई देता हूँ।
मैंने मंज़िल का शोर कभी नहीं मचाया, बस सफ़र को ईमानदारी से निभाया है। आज जो पहचान दिख रही है लोगों को, वो सालों की मेहनत का नतीजा है।
हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं समझता, कुछ सवाल वक़्त ख़ुद हल कर देता है। मैं अपनी ऊर्जा बहसों में नहीं, अपने सपनों को आकार देने में लगाता हूँ।
मैंने दूसरों से बेहतर बनने की कोशिश नहीं की, बस कल वाले ख़ुद से आगे निकलता गया। शायद इसी वजह से मेरी राह अलग है, और मेरी मंज़िल भी।
मेरी सबसे बड़ी ताक़त मेरा धैर्य है, मैं जल्दी चमकने के लिए नहीं दौड़ता। जो चीज़ मेहनत से मिलती है, उसे संभालने का सलीका भी साथ आता है।
मैं भी कभी टूटा था कुछ हालातों से, मगर वहीं से मज़बूत होना सीख लिया। अब मुश्किलें डराती नहीं मुझे, क्योंकि मैंने उन्हें अपना शिक्षक बना लिया है।
मैं भीड़ का हिस्सा बन सकता था, लेकिन मैंने अपनी पहचान चुन ली। अब लोग नाम नहीं पूछते, मेरे काम से पहचान लेते हैं।
मेरे उसूल रास्ता कठिन बना सकते हैं, मगर सिर झुकाने की नौबत नहीं आने देते। मैं आसान जीत नहीं चाहता, मुझे सम्मान के साथ हासिल की हुई जीत पसंद है।
मैं वहाँ नहीं पहुँचाना चाहता जहाँ लोग मुझे देखें, मैं वहाँ पहुँचना चाहता हूँ जहाँ लोग मेरे काम को याद रखें। क्योंकि तालियाँ कुछ पल की होती हैं, लेकिन पहचान उम्र भर चलती है।
मेरी मौजूदगी साबित करने के लिए शोर नहीं चाहिए, मैंने अपने व्यक्तित्व को आवाज़ से नहीं, कर्म से बनाया है। इसलिए जो मुझे जानते हैं, उन्हें परिचय की ज़रूरत नहीं पड़ती।
मैं हर दिन नया बनने की कोशिश करता हूँ, इसीलिए पुरानी सीमाएँ पीछे छूटती जाती हैं। मेरी उड़ान दूसरों को दिखाने के लिए नहीं, अपने सपनों तक पहुँचने के लिए है।
कुछ लोग अवसर का इंतज़ार करते हैं, मैं तैयारी को अपनी आदत बना चुका हूँ। जब मौका आता है, तो मुझे पहचान नहीं बनानी पड़ती।
मेरे पास दिखावे की दौलत कम है, लेकिन आत्मसम्मान की पूँजी भरपूर है। और यक़ीन मानो, यही निवेश सबसे लंबा साथ देता है।