रिश्ता ख़त्म हुआ,
लेकिन ख़ुद पर मेरा विश्वास नहीं।
मैंने जाने वालों को रोकने की कोशिश नहीं की,
क्योंकि सम्मान ज़बरदस्ती से नहीं मिलता।
बिछड़ने का दर्द था,
मगर उससे उभरने का इरादा भी था।
मैंने उस रिश्ते को दिल से निभाया,
इसलिए उसके जाने का अफ़सोस नहीं, अनुभव है।
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं,
फिर भी जीवन को बहुत कुछ दे जाती हैं।
मैंने यादों को मिटाया नहीं,
बस उन पर रुकना छोड़ दिया।
अलग होने के बाद मैंने जाना,
कि सुकून भी एक नई शुरुआत हो सकता है।
मैंने अपने टूटे हुए हिस्सों को समय दिया,
और समय ने उन्हें मज़बूती में बदल दिया।
रिश्ते का अंत मेरी हार नहीं था,
बस जीवन का एक मोड़ था।
मैंने ख़ुद को दोष देना बंद किया,
तभी आगे बढ़ना शुरू हुआ।
बिछड़ने के बाद मैंने यह सीखा,
कि हर साथ हमेशा के लिए नहीं होता।
मैंने दर्द को स्वीकार किया,
लेकिन उसे अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
कुछ लोग याद रह जाते हैं,
लेकिन उनके जाने के बाद भी ज़िंदगी चलती रहती है।
मैंने अपने दिल की मरम्मत ख़ुद की है,
इसीलिए आज मैं और मज़बूत हूँ।
अलग होने के बाद सबसे बड़ी सीख यह थी,
कि ख़ुद का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
मैंने रिश्ते के अंत को सम्मान दिया,
क्योंकि हर अंत नफ़रत का कारण नहीं होता।
बिछड़ना कठिन था,
लेकिन वहीं से आत्मसम्मान और स्पष्ट हुआ।
मैंने अतीत को पकड़े रखने के बजाय,
भविष्य को गले लगाना चुना।
रिश्ते चले गए,
मगर उनसे मिली समझ मेरे साथ रही।
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि मैं भूल गया,
बल्कि यह है कि मैं मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गया।
अलग होना आसान नहीं था,
मगर ख़ुद को खो देना उससे भी कठिन था।
मैंने उस रिश्ते को सम्मान दिया,
और उसके अंत को भी।
बिछड़ने के बाद समझ आया,
कि आत्मसम्मान भी मोहब्बत जितना ज़रूरी होता है।
मैं टूटा ज़रूर था,
लेकिन मैंने ख़ुद को फिर से जोड़ लिया।
कुछ रिश्ते हमेशा साथ नहीं रहते,
लेकिन हमेशा कुछ सिखाकर जाते हैं।
मैंने यादों से लड़ाई नहीं की,
बस उन्हें उनकी जगह दे दी।
अलग होने का दर्द था,
मगर उससे निकलने का साहस भी था।
मैंने उस कहानी को ख़त्म नहीं माना,
बस उसका अध्याय पूरा माना है।
बिछड़ने के बाद मैंने यह सीखा,
कि आगे बढ़ना भूलना नहीं होता।
मैंने अपने घावों को समय दिया,
और समय ने उन्हें ताक़त में बदल दिया।
रिश्ता ख़त्म हुआ था,
मेरी पहचान नहीं।
मैंने शिकायतों को पकड़कर नहीं रखा,
क्योंकि मुझे आगे चलना था।
कुछ लोग सफ़र में साथ चलते हैं,
कुछ लोग सफ़र का सबक बन जाते हैं।
मैंने दर्द को अपनी आदत नहीं बनने दिया।
अलग होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह था,
कि मैंने ख़ुद को और बेहतर समझा।
मैंने किसी को दोष देने में समय नहीं गंवाया,
मैंने ख़ुद को सँवारने में लगाया।
बिछड़ना अंत नहीं था,
वह एक नई शुरुआत का संकेत था।
मैंने उस रिश्ते की अच्छाइयाँ याद रखीं,
और उसकी कमियों से सीख ली।
दर्द था, लेकिन आत्मसम्मान उससे बड़ा था।
मैंने अपने दिल को बंद नहीं किया,
बस उसे और समझदार बना लिया।
कुछ रिश्ते मुकम्मल नहीं होते,
फिर भी बेकार नहीं होते।
मैंने ख़ुद को उस व्यक्ति से अलग पहचाना,
जिसके साथ कभी मेरा रिश्ता था।
बिछड़ने के बाद मैं अकेला नहीं हुआ,
मैं ख़ुद के और क़रीब हो गया।
मैंने अतीत को सम्मान दिया,
लेकिन अपना भविष्य उसके हवाले नहीं किया।
रिश्ता ख़त्म होने के बाद भी,
मैंने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी।
मैंने दर्द को कहानी का शीर्षक नहीं बनने दिया।
बिछड़ने ने मुझे कमज़ोर नहीं किया,
उसने मुझे भावनात्मक रूप से परिपक्व बनाया।
मैंने पीछे मुड़कर सवाल कम किए,
आगे देखकर संभावनाएँ ज़्यादा देखीं।
मेरी सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि मैं संभल गया,
मेरी सबसे बड़ी जीत यह है कि मैं मुस्कुराकर आगे बढ़ गया।
कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं,
लेकिन आत्मसम्मान और अनुभव हमेशा साथ रह जाते हैं।