मैंने विरोध को रुकावट नहीं माना,
उसे अपनी क्षमता की परीक्षा माना है।
जो लोग मुझ पर संदेह करते थे,
उन्होंने मेरे आत्मविश्वास को और गहरा किया।
मैं हर आलोचना से नहीं टूटता,
कुछ आलोचनाएँ मुझे और निखार देती हैं।
मेरे विरोधी मेरे रास्ते में थे,
मेरे लक्ष्य के बीच नहीं।
मैंने प्रतिक्रिया देने से ज़्यादा,
प्रदर्शन करने पर ध्यान दिया है।
जो लोग मेरी सीमाएँ तय कर रहे थे,
मैं अपनी संभावनाएँ बढ़ाने में व्यस्त था।
मैंने हर चुनौती का स्वागत किया,
क्योंकि आसान रास्ते व्यक्तित्व नहीं बनाते।
मेरे लिए सबसे बड़ा उत्तर,
लगातार प्रगति है।
विरोध ने मुझे धीमा किया होगा,
लेकिन दिशा नहीं बदल पाई।
मैंने अपनी नज़र मंज़िल पर रखी,
इसलिए शोर असर नहीं कर पाया।
जो लोग मेरी राह पर सवाल उठा रहे थे,
मैं उसी राह पर आगे बढ़ रहा था।
मैंने विरोध को बहाना नहीं बनाया,
उसे प्रेरणा में बदल दिया।
मेरी ताक़त इस बात में नहीं कि कौन मेरे साथ है,
मेरी ताक़त इस बात में है कि मैं अपने साथ हूँ।
मैंने हर संदेह के बाद,
अपने प्रयासों की गुणवत्ता बढ़ा दी।
विरोध करने वालों को समझाने की कोशिश नहीं की,
समय को बोलने दिया।
मैं बहसों से पहचान नहीं बनाता,
मैं अपने कर्मों से बनाता हूँ।
जो लोग मुझे रोकना चाहते थे,
उन्होंने मेरी दृढ़ता को और मज़बूत किया।
मैंने विरोध को अपने मन तक नहीं आने दिया,
उसे सिर्फ़ अपने अनुभव का हिस्सा रहने दिया।
मेरी सबसे बड़ी बढ़त यह है,
कि मैं परिस्थितियों से नहीं, सिद्धांतों से चलता हूँ।
विरोध का अस्तित्व मुझे नहीं डराता,
क्योंकि मेरा विश्वास मेरी दिशा से बड़ा है।
विरोध करने वालों ने रास्ता कठिन किया,
मगर मेरे इरादों को और मज़बूत भी किया।
मैंने आलोचनाओं को बोझ नहीं माना,
उन्हें सुधार का अवसर बना लिया।
मेरे विरोधी मेरी गति नहीं रोक पाए,
क्योंकि मेरा ध्यान लक्ष्य पर था।
मैं जवाब देने में नहीं,
बेहतर बनने में विश्वास रखता हूँ।
कुछ लोगों ने मुझ पर संदेह किया,
और मैंने उसी को मेहनत का ईंधन बना लिया।
मैंने हर चुनौती को स्वीकार किया,
क्योंकि विकास अक्सर वहीं छिपा होता है।
विरोध से घबराने की जगह,
मैंने उससे सीखना चुना।
मेरी सबसे बड़ी ताक़त यह है,
कि मैं प्रतिक्रिया से पहले सोचता हूँ।
जो लोग रास्ते में रुकावट बने,
उन्होंने मेरी सहनशक्ति बढ़ा दी।
मैंने किसी को हराने का लक्ष्य नहीं रखा,
मैंने ख़ुद को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा।
विरोध करने वालों ने मुझे रोका नहीं,
बस मेरी तैयारी को और गंभीर बना दिया।
मैंने अपनी ऊर्जा बहसों में नहीं,
उपलब्धियों में लगाई है।
हर आलोचना ग़लत नहीं होती,
कुछ हमें नया दृष्टिकोण भी देती हैं।
मैंने विरोध को व्यक्तिगत नहीं लिया,
उसे सफ़र का हिस्सा माना।
मेरी ख़ामोशी कई बार बहस से ज़्यादा प्रभावशाली रही है।
मैंने अपने काम को उत्तर बनने दिया,
शब्दों को नहीं।
जो लोग मेरे ख़िलाफ़ खड़े थे,
उन्होंने मुझे और अनुशासित बना दिया।
मैंने विरोध को दीवार नहीं माना,
उसे अपनी मज़बूती की परीक्षा माना।
मेरी प्रगति का कारण सिर्फ़ समर्थन नहीं,
विरोध से मिली सीख भी है।
मैं किसी के विरुद्ध नहीं चल रहा,
मैं अपने उद्देश्य की ओर बढ़ रहा हूँ।
विरोध करने वाले बदल सकते हैं,
लेकिन मेरे सिद्धांत नहीं।
मैंने हर संदेह के बाद,
अपने प्रयासों को और स्पष्ट किया।
कुछ लोग प्रश्न बनकर आए,
और मैंने उन्हें उत्तर बनकर छोड़ा।
मैंने किसी को गलत साबित करने की कोशिश नहीं की,
बस अपने लक्ष्य के प्रति सच्चा रहा।
विरोध ने मुझे यह सिखाया,
कि आत्मविश्वास बाहरी स्वीकृति पर निर्भर नहीं होता।
मैंने अपने रास्ते पर ध्यान रखा,
इसलिए शोर पीछे छूट गया।
जो लोग मुझे रोकना चाहते थे,
उन्होंने मेरी निरंतरता की ताक़त देखी।
मैंने विरोध को सम्मान दिया,
क्योंकि उसने मुझे और मज़बूत बनाया।
मेरी सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि कौन क्या सोचता है,
मेरी सबसे बड़ी जीत यह है कि मैं अपने रास्ते पर बना रहता हूँ।
विरोध हमेशा रहेगा,
लेकिन मेरा ध्यान हमेशा आगे रहेगा।