तुम्हारी पसंद की हर वो चीज़ मैंने अपनी मेज़ पर सजा ली है,
ताकि जब भी तुम आओ, तुम्हें लगे कि तुम कहीं गई ही नहीं थीं।
हमारे बीच का फासला बस नक़्शे पर दिखाई देता है,
वरना हम तो एक ही वक़्त में एक ही जैसा सवेरा देखते हैं।
कभी-कभी तुम्हें फोन पर सुनने के बाद,
मुझे अपने कमरे में तुम्हारी मौजूदगी का एहसास होता है।
वो जो हमने भविष्य के लिए पते ढूँढे थे,
उनका इंतज़ार मुझे आज भी अपनी नींदों में आता है।
हमारी बातचीत के बीच का वो छोटा सा वक़्फ़ा,
जैसे तुम मेरे पास बैठकर खामोश हो गई हो।
तुमसे जुड़ी हर छोटी खबर मेरे लिए त्यौहार है,
जैसे बरसों बाद घर का कोई दरवाज़ा खुला हो।
दूरी ने तो बस हमारे सब्र की परीक्षा ली है,
प्यार तो वो है जो हर दिन खुद को फिर से चुनता है।
तुम्हारे शहर की धूप जब मेरे शहर में ढलती है,
मुझे लगता है जैसे तुमने मुझे अपना कोई संदेश भेजा है।
मैंने तुम्हारी आवाज़ को अपने फोन की गैलरी में नहीं,
बल्कि अपने सुकून में सहेज कर रखा है।
जब हम दोनों साथ में नहीं होते,
तब भी मैं हर फैसला लेने से पहले तुमसे मशवरा करता हूँ।
वो वक़्त गुज़र जाए तो अच्छा है,
पर वो पल ठहर जाए जब हम पहली बार साथ होंगे।
दूरी के इस सफर में अगर कुछ सबसे प्यारा है,
तो वो है तुम्हारा हर बार ये कहना कि मैं तुम्हारा हूँ।
तुमसे मिलना किसी मंज़िल पाने जैसा है,
जिसके लिए मैंने अपनी हर एक सांस को समर्पित किया है।
अगली बार जब तुम मिलोगी, तो पूछूँगा नहीं कि कहाँ थीं,
बस उन लम्हों को अपनी आँखों में समेट लूँगा जो हम साथ न बिता सके।
मेरे फोन के नोटिफिकेशन में तुम्हारी एक दस्तक,
सारे काम छोड़कर मुझे बस मुस्कुराने पर मजबूर कर देती है।
तुम जो कहती हो कि हम बहुत दूर हैं एक दूसरे से,
मुझे लगता है हम एक ही धड़कन को दो अलग रास्तों से जी रहे हैं।
हमारी बातचीत के बीच का वो ठहराव भी मुझे प्यारा लगता है,
जैसे तुम मेरे पास बैठकर खामोशी बाँट रही हो।
किसी भीड़ वाली जगह पर जब भी मैं अकेला होता हूँ,
तभी सबसे ज़्यादा मुझे तुम्हारी कमी महसूस होती है।
तुम्हारी भेजी हुई एक ऑडियो क्लिप को,
मैं तब तक सुनता हूँ जब तक तुम्हारी आवाज़ मेरे आसपास न गूँजने लगे।
दूरी ने हमें वो धैर्य सिखाया है,
जो शायद पास रहने वालों को कभी नसीब नहीं होता।
हमारा रिश्ता तो उस धागे जैसा है,
जो जितना खिंचता है, उतना ही मजबूत होता जाता है।
तुम्हारे शहर का मौसम जब भी मेरी तरफ बढ़ता है,
मुझे लगता है जैसे तुमने कोई संदेश भेजा हो।
वो एक आखिरी वादा कि हम फिर मिलेंगे,
उसी एक वादे के सहारे मैं अपना पूरा दिन गुज़ार देता हूँ।
तुम्हारे शहर की हवा जब यहाँ तक आती होगी,
तो वो ज़रूर मेरे घर से टकराकर गुज़रती होगी।
तुमने जो बातें अनकही छोड़ दी थीं फोन पर,
मैं आज भी उन्हें तसल्ली से अकेले में सोचता हूँ।
मेरे दिन का सबसे कीमती हिस्सा वो वक़्त है,
जब हम दोनों बिना कुछ कहे भी साथ होते हैं।
तुम्हारी हँसी की गूँज मेरी दीवारों में बसी है,
जैसे तुम अभी बस इसी कमरे से बाहर गई हो।
नक्शे पर दो बिंदुओं के बीच की दूरी ही तो है,
वरना हम तो एक ही ज़मीन और आसमान का हिस्सा हैं।
अजीब सुकून है तुम्हारी उन बातों में,
जिन्हें सुनकर लगता है कि तुम दूर होकर भी यहीं हो।
वो जो हमने भविष्य के लिए घर चुना था ना,
उसकी हर खिड़की से अब मैं बस तुम्हें ही देखता हूँ।
तुम्हारी आवाज़ कानों में पड़ते ही,
मेरे दिन की सारी थकान ओझल हो जाती है।
किताबों के पन्नों में तुम्हारी महक तलाशता हूँ,
तुम पास नहीं, पर तुम्हारी मौजूदगी हर जगह है।
हमारा मिलना भले ही अभी मुमकिन नहीं,
मगर हमारी सोचें एक ही वक़्त पर एक जैसा सफर तय करती हैं।
अगली बार जब हम मिलेंगे,
तो मैं सिर्फ तुम्हें देखना चाहता हूँ, बिना किसी शब्द के।
मेरे फोन की स्क्रीन पर तुम्हारा नाम चमकते ही,
कमरे में मानो रोशनी का कोई नया कोना खिल उठता है।
दूरी तो महज एक गिनती है कैलेंडर के पन्नों की,
हमारा जुड़ाव तो उन अनकहे वादों से बना है जो सिर्फ हम जानते हैं।
कॉफी का पहला घूँट लेते ही ख्याल आता है,
अगर तुम साथ होतीं तो ये पल कितना और ठहर जाता।
तुम्हारे आने की आहट के इंतजार में,
मैंने अपने घर का कोना-कोना तुम्हारी पसंद के अनुसार सजा रखा है।
हम एक ही आसमान के नीचे अलग शहरों में हैं,
यही सोचकर तो रातें थोड़ी आसान हो जाती हैं।
तुम्हारी भेजी हुई एक पुरानी तस्वीर देखकर,
ऐसा लगता है जैसे तुमने आज फिर से मुझे छुआ हो।
जल्दबाजी नहीं है मुझे किसी भी मंज़िल की,
बस तुम्हारी आँखों में देखकर अपनी सारी कहानी सुनानी है।
दूरी ने हमें कमज़ोर नहीं,
बल्कि एक दूसरे के शब्दों की कीमत पहचानना सिखाया है।
तुम जो भी काम करती हो,
वह मेरे लिए किसी खबर से कम नहीं होता, जिसे मैं दिन भर सहेजता हूँ।
एक घर का सपना बुनते हैं हम दोनों,
जहाँ खिड़की के पास रखी कुर्सी पर सिर्फ तुम और मैं हों।
तुमसे हुई छोटी सी बहस भी अब प्यारी लगने लगी है,
क्योंकि वो भी हमें एक दूसरे के करीब ले आती है।
जब दुनिया थक जाती है,
तब तुम्हारी बातें ही मेरी ऊर्जा का एकमात्र स्रोत होती हैं।
दूरी की चुभन का इलाज सिर्फ तुम्हारी मुस्कान है,
जो वीडियो कॉल के छोटे से फ्रेम में भी जान डाल देती है।
समय भले ही हमें मिलने में देर कर रहा हो,
पर हमारा विश्वास उस समय से कहीं ज़्यादा बड़ा है।
तुम्हारी परवाह करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा है,
जैसे सांस लेना जरूरी है, वैसे ही तुम्हारा हाल पूछना।
वो दिन सबसे सुनहरा होगा,
जब मुझे तुम्हें फोन पर नहीं, अपने सामने देखना होगा।