भाई का अंदाज़ भी सादा है और इरादा भी साफ़,
हम किसी का हक़ नहीं छीनते,
मगर अपने आत्मसम्मान पर
किसी का हक़ भी नहीं होने देते।
मैंने ऊँची आवाज़ से नहीं,
मुश्किल वक़्त में निभाए साथ से पहचान बनाई है,
भाई की क़ीमत अक्सर
संकट के दिनों में समझ आती है।
हर किसी को प्रभावित करना मेरा लक्ष्य नहीं,
बस अपने लोगों का भरोसा बनाए रखना है,
क्योंकि भाई की सबसे बड़ी जीत
अपने घर वालों की मुस्कान होती है।
हमने वक़्त के साथ बदलना सीखा है,
लेकिन अपने लोगों के लिए खड़े रहना नहीं छोड़ा,
भाई की वफ़ादारी
हालात देखकर रंग नहीं बदलती।
भाई हूँ,
इसलिए ज़िम्मेदारियाँ देखकर पीछे नहीं हटता,
जो बोझ अपनों को झुकाए,
उसे अपने कंधों पर उठा लेना आदत है।
मुझे भीड़ में सबसे आगे खड़े होने का शौक़ नहीं,
मगर जब बात परिवार की हो,
तो सबसे आगे खड़ा मिलूँगा,
यह मेरी फ़ितरत है।
हमारी ख़ामोशी में भी यक़ीन बसता है,
क्योंकि हम वादे कम करते हैं,
और निभाने में कभी कमी नहीं छोड़ते,
यही भाई होने की असली पहचान है।
भाई का रुतबा दिखावे से नहीं बढ़ता,
वो बढ़ता है उस भरोसे से,
जो लोग उसकी गैरमौजूदगी में भी
उसके नाम पर कर लेते हैं।
मैंने सफलता से पहले सब्र सीखा,
और जीत से पहले संघर्ष,
शायद इसी वजह से
मुश्किलें आज भी मुझे देखकर रास्ता बदल लेती हैं।
भाई होना सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं,
एक ज़िम्मेदारी है जो उम्र भर चलती है,
और मुझे इस बात पर गर्व है
कि मैं अपने लोगों का सहारा कहलाता हूँ।
भाई का कद दौलत से नहीं नापा जाता,
वो तो इस बात से पहचाना जाता है,
कि उसके रहते घर वाले कितने बेफ़िक्र सोते हैं।
मैंने रिश्तों को कभी ज़रूरत नहीं बनाया,
वो मेरी पहचान हैं,
और भाई की पहचान बदल जाए,
इतने सस्ते हालात अभी बने नहीं।
भाई हूँ, इसलिए सिर झुकाना जानता हूँ,
मगर सिर्फ़ बड़ों के सम्मान में,
बाक़ी हालात चाहे जैसे हों,
आत्मसम्मान कभी गिरवी नहीं रखता।
हमारी जीत की आवाज़ कम होती है,
क्योंकि हमें जश्न से ज़्यादा सफ़र पर भरोसा है,
भाई वो होता है,
जो मंज़िल मिलने पर भी विनम्र रहे।
घर की खुशियों में मुस्कुराना आसान है,
भाई की असली परीक्षा तो तब होती है,
जब पूरे घर का हौसला उसके चेहरे से जुड़ा हो।
मैंने कभी आगे निकलने की जल्दी नहीं की,
बस इतना किया कि पीछे कोई अपना न छूटे,
भाई होने का मतलब साथ लेकर चलना भी होता है।
जो लोग सिर्फ़ अपने लिए जीते हैं,
उन्हें शायद भाई होने का मतलब न पता हो,
हमारी हर मेहनत में
किसी अपने का सपना भी शामिल होता है।
भाई का वादा मौसम जैसा नहीं होता,
जो हर दिन बदल जाए,
एक बार साथ कह दिया,
तो फिर दूरी भी उसे कम नहीं कर सकती।
मुझे पहचान दिलाने के लिए नाम काफ़ी नहीं,
मेरे कर्म ही मेरा परिचय हैं,
और भाई की सबसे बड़ी शान
उसका निभाया हुआ फ़र्ज़ होता है।
हमने मुश्किलों से डरना नहीं सीखा,
क्योंकि बचपन से ज़िम्मेदारियाँ देखी हैं,
भाई का हौसला किताबों से नहीं,
जीवन के अनुभवों से बनता है।
मेरे हिस्से की खुशियाँ कम भी हों,
तो शिकायत नहीं करता,
भाई कई बार अपने सपनों से पहले
घर की ज़रूरतें रखता है।
मैं लोगों को प्रभावित करने नहीं निकला,
बस इतना चाहता हूँ कि
मेरे अपने मुझ पर गर्व कर सकें,
बाक़ी दुनिया का क्या है।
भाई की ताक़त उसकी मुट्ठी में नहीं,
उसके इरादों में होती है,
जो ठान ले,
उसे हालात भी देर तक रोक नहीं पाते।
हमारी परवरिश ने सिखाया है,
कि सम्मान देना भी ताक़त है,
इसलिए भाई होकर भी हम
अहंकार नहीं, संस्कार साथ रखते हैं।
जो अपने परिवार के लिए खड़ा रहता है,
उसे अलग से बहादुर कहलाने की ज़रूरत नहीं,
उसका हर दिन ही उसकी बहादुरी का सबूत होता है।
भाई का स्वभाव नदी जैसा होना चाहिए,
शांत भी, मज़बूत भी,
और ज़रूरत पड़ने पर
चट्टानों का रास्ता बदल देने वाला भी।
मैंने कभी लोगों की तालियों पर भरोसा नहीं किया,
वो बदल जाती हैं,
लेकिन घर वालों की दुआएँ
हर मोड़ पर साथ चलती हैं।
भाई की असली पहचान यह नहीं
कि उसके कितने साथी हैं,
बल्कि यह है कि कितने लोग
उस पर आँख बंद करके भरोसा करते हैं।
कुछ लोग ऊँचाई देखकर प्रभावित होते हैं,
हमने गहराई कमाने की कोशिश की है,
क्योंकि भाई का सम्मान
उसके चरित्र से पैदा होता है।
हम वो नहीं जो हर बात पर ख़ुद को साबित करें,
हम बस अपना रास्ता ईमानदारी से चलते हैं,
और जब लोग भरोसा करने लगें,
समझो भाई होने का फ़र्ज़ निभ गया।
भाई हूँ, इसलिए हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं समझता,
मेरा वक़्त और मेरा किरदार,
दोनों सिर्फ़ क़ाबिल लोगों के लिए होते हैं।
रिश्तों को निभाना कमज़ोरी नहीं होती,
यह हर किसी के बस की बात भी नहीं,
भाई वही कहलाता है,
जो अपने हिस्से की धूप में भी अपनों को छाँव देता है।
मेरी पहचान भीड़ से नहीं बनी,
ज़िम्मेदारियों ने मुझे पहचाना है,
भाई होने का फ़ख्र इसलिए है,
क्योंकि मैंने भरोसा कमाया है, माँगा नहीं।
जब घर पर मुश्किल दस्तक देती है,
तो मैं बहाने नहीं ढूँढ़ता,
भाई हूँ,
मैं रास्ता ढूँढ़ने वालों में से हूँ।
ऊँचे सपने देखता हूँ,
पर पैर आज भी संस्कारों में टिके हैं,
भाई की असली ताक़त यही है,
कि उड़ान बड़ी हो और ज़मीन न छूटे।
मुझे हर लड़ाई जीतनी नहीं,
बस अपने लोगों का विश्वास बचाए रखना है,
क्योंकि भाई की सबसे बड़ी कमाई
उसके अपनों का भरोसा होता है।
हमने सम्मान के लिए कभी शोर नहीं मचाया,
बस अपने काम को बोलने दिया,
आज जो लोग क़दर करते हैं,
वो शब्दों से नहीं, व्यवहार से प्रभावित हैं।
भाई का कंधा सिर्फ़ सहारा नहीं होता,
कई घरों की उम्मीद भी होता है,
इसलिए हम थककर भी मुस्कुराते हैं,
ताकि अपने हौसला न हारें।
कुछ लोग हालात देखकर बदल जाते हैं,
हमने हालात बदलने की आदत रखी है,
भाई का वादा एक बार हो जाए,
तो फिर मुश्किलें भी उसे रोक नहीं पातीं।
मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी समझने वाले,
मेरे सब्र का हिसाब नहीं जानते,
भाई जब बोलता कम है,
तो अक्सर निभाता ज़्यादा है।
भाई हूँ, इसलिए ऊँची आवाज़ से नहीं,
मुश्किल वक़्त में साथ खड़े होकर पहचाना जाता हूँ,
इज़्ज़त माँगने की आदत नहीं,
मैं उसे अपने किरदार से कमाना जानता हूँ।
घर की दीवारों पर मेरा नाम नहीं लिखा,
पर ज़िम्मेदारियों में मेरा हिस्सा सबसे पहले मिलता है,
भाई होने का मतलब सिर्फ़ रिश्ता नहीं,
कई बार पूरे परिवार का हौसला बनकर जीना होता है।
मेरी ताक़त शोर नहीं करती,
वो माँ की चिंता कम करती है,
और अपने लोगों के सिर से फ़िक्र का बोझ
चुपचाप अपने कंधों पर रख लेती है।
भाई का रुतबा कपड़ों या दिखावे से नहीं बनता,
वो तो मुश्किल दिनों में निभाए गए वादों से बनता है,
लोग पहचान से सलाम करते होंगे,
मुझे तो मेरे व्यवहार ने पहचान दिलाई है।
जो अपने लोगों के लिए ढाल बन जाए,
उसे अपनी बहादुरी साबित नहीं करनी पड़ती,
भाई वही है जिसकी मौजूदगी भर से
घर वालों को सुकून मिलने लगे।
हमने जीत का घमंड नहीं सीखा,
बस हार के बाद फिर खड़े होना सीखा है,
भाई हैं जनाब,
हमारी पहचान हमारी ज़ुबान से नहीं,
हमारे निभाए हुए फ़र्ज़ से होती है।
मुझे मशहूर होने का शौक़ नहीं,
बस इतना चाहता हूँ कि मेरे अपने निश्चिंत रहें,
क्योंकि भाई की असली ताक़त यह नहीं कि लोग उससे डरें,
बल्कि यह है कि उसके रहते अपनों को डर न लगे।
कुछ लोग भीड़ में पहचान बनाते हैं,
हमने ज़िम्मेदारियों में अपना कद बनाया है,
भाई होने का गर्व इसलिए है,
क्योंकि हमने रिश्तों को बोझ नहीं, अपना सम्मान माना है।
मैं हर बात पर आगे बढ़कर बोलूँ,
ज़रूरी नहीं,
पर जब परिवार की बात आए,
तो पीछे हटना मेरी फ़ितरत में नहीं।
भाई का अंदाज़ अलग होता है,
वो हर जीत का श्रेय नहीं लेता,
लेकिन जब घर पर मुश्किल आती है,
तो सबसे पहले ख़ुद को आगे रख देता है।
हमारी अकड़ किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं,
अपनी क़ीमत याद रखने के लिए है,
क्योंकि भाई वो नहीं जो सिर्फ़ साथ चले,
भाई वो है जो हालात के ख़िलाफ़ भी साथ खड़ा रहे।