Dushman Shayari
मेरे खिलाफ़ खड़े लोगों ने एक बात कभी नहीं समझी, मैं दबाव में टूटता नहीं, और निखरता हूँ।
जो लोग मेरी नाकामी की ख़बर सुनना चाहते थे, उन्हें मेरी नई उपलब्धियों की आदत डालनी पड़ी।
मैंने अपने विरोधियों को दुश्मन नहीं माना, बस उन्हें अपने सफ़र का एक पड़ाव समझा।
कई लोग मेरी जगह चाहते हैं, मगर मेरी मेहनत वाला रास्ता नहीं।
मेरी जीत का शोर कम है, क्योंकि उसे शब्द नहीं, परिणाम बताते हैं।
मैंने किसी से आगे निकलने की जल्दी नहीं की, बस रुकने से हमेशा इंकार किया।
जो मेरी सीमाएँ तय कर रहे थे, मैं उसी वक़्त उन्हें पार करने में लगा था।
मुझ पर उँगली उठाने वालों को, अक्सर अपनी मुट्ठी खाली ही मिली।
कुछ लोग मेरी आलोचना में उम्र लगा रहे हैं, और मैं अपने निर्माण में।
मैंने हर ताने को याद नहीं रखा, बस उससे मिली सीख संभालकर रखी।
जिन्हें लगता था मैं ज़्यादा दूर नहीं जाऊँगा, अब वही मेरी दूरी नाप नहीं पाते।
मैंने सम्मान माँगा नहीं, अपने व्यवहार और संघर्ष से कमाया है।
मेरी कहानी उन लोगों को परेशान करती है, जो बहाने चुनते हैं और मेहनत छोड़ देते हैं।
विरोधियों की सबसे बड़ी परेशानी यह है, मैं उनकी उम्मीद से ज़्यादा धैर्य रखता हूँ।
मैंने अपनी ऊर्जा साबित करने में नहीं, ख़ुद को बेहतर बनाने में लगाई।
कुछ लोग मुझे गिरते देखना चाहते थे, मगर मैं हर बार पहले से ऊँचा खड़ा मिला।
मैं आज भी वही हूँ, बस अब मेरी मेहनत का दायरा बड़ा हो गया है।
मेरे बारे में राय बदलती रहती है, मगर मेरा लक्ष्य कभी नहीं बदलता।
जो लोग मेरी राह में रुकावट बने, वक़्त ने उन्हें मेरी प्रगति का दर्शक बना दिया।
मैं जीतकर किसी को छोटा नहीं करता, बस इतना आगे बढ़ जाता हूँ कि तुलना ही छोटी पड़ जाए।
जो लोग मेरी राह में दीवारें खड़ी करते रहे, उन्हें क्या पता था मैं रास्ते नहीं, ऊँचाइयाँ चुनता हूँ।
मेरे ख़िलाफ़ बोलने वालों की कमी नहीं, मगर मेरे हक़ में खड़े नतीजे हमेशा ज़्यादा मज़बूत रहे।
मैंने किसी को जवाब देने में वक़्त नहीं गंवाया, क्योंकि मेरी तरक़्क़ी ही सबसे सटीक उत्तर थी।
कुछ लोग मेरी हार का इंतज़ार करते रहे, मैंने उसी इंतज़ार को अपनी जीत का समय बना लिया।
जो मुझे कम आँकते हैं, अक्सर वही बाद में मेरी मिसालें देते हैं।
मेरी ख़ामोशी में घमंड नहीं, यक़ीन है, हर बात साबित करने की ज़रूरत मुझे नहीं पड़ती।
विरोध करने वाले बदलते रहे, मगर मेरा इरादा हर मौसम में एक जैसा रहा।
मैंने अपनी कीमत कभी समझानी नहीं चाही, जो समझ गए वो अपने हैं, जो नहीं समझे उनका नुक़सान है।
लोग मेरी रफ़्तार पर सवाल उठाते रहे, मैं मंज़िलें जोड़ता रहा।
मुझे गिराने की कोशिश करने वालों ने, अनजाने में मेरी पकड़ और मज़बूत कर दी।
मैं भीड़ में दिखने नहीं निकला था, मैं ऐसा बनने निकला था जिसे भीड़ नज़रअंदाज़ न कर सके।
कुछ लोगों को मेरी मौजूदगी ही चुभती है, शायद इसलिए कि मैं उनकी उम्मीदों से बड़ा निकला।
मेरा नाम शोर से नहीं फैला, उस मेहनत से फैला जिसे किसी ने देखा नहीं था।
जो लोग पीछे से बातें करते हैं, अक्सर सामने आने की हिम्मत नहीं रखते।
मैंने आलोचना को अपमान नहीं समझा, उसे सुधार का सबसे सच्चा अवसर माना।
मेरे विरोधी मेरी कहानी का अंत लिखना चाहते थे, उन्हें क्या पता मैं हर अध्याय के बाद और मज़बूत होता हूँ।
मैं किसी की नकल बनकर नहीं जीता, इसीलिए तुलना करने वालों को हमेशा कठिनाई होती है।
मुझे रोकने वालों का धन्यवाद, उन्होंने मेरी ज़िद को दिशा दी है।
मेरे सफ़र की सबसे दिलचस्प बात यह है, जितना विरोध बढ़ा, उतनी ही मेरी पहचान बढ़ी।
मैंने कभी किसी का रास्ता नहीं रोका, इसलिए अपना रास्ता बनाते वक़्त मुझे डर भी नहीं लगा।
कुछ लोग मेरी सफलता से परेशान हैं, और मैं अब भी अपनी अगली मेहनत में व्यस्त हूँ।
जिन्हें मेरी उड़ान से परेशानी है, वो अब भी हवा का हिसाब लगा रहे हैं, मैंने रास्ते बदलने के बजाय ख़ुद को बदला, और लोग आज भी मेरी मंज़िल का अंदाज़ा लगा रहे हैं।
कुछ लोग मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी समझ बैठे, उन्हें क्या पता मैं जवाब नहीं, नतीजे तैयार करता हूँ, वक़्त जब मेरे पक्ष में बोलता है, तो मुझे अपनी तरफ़ से कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
मेरे विरोधियों की सबसे बड़ी भूल यही रही, उन्होंने मुझे रोकना चाहा, समझना नहीं, मैं हर रुकावट को सीढ़ी बनाता गया, और वो हर हार का कारण ढूँढ़ते रह गए।
जो मेरी कमियाँ गिनाते थे, उन्होंने कभी मेरी मेहनत नहीं गिनी, मैंने शोर मचाकर पहचान नहीं बनाई, बस लगातार बढ़ता रहा, और पहचान बनती गई।
मुझसे आगे निकलने की चाह रखना बुरी बात नहीं, मगर मुझे गिराकर जीतने की आदत महँगी पड़ती है, मैं मुक़ाबले से नहीं घबराता, क्योंकि मेरी लड़ाई किसी इंसान से नहीं, अपने अगले स्तर से होती है।
कुछ चेहरों पर मुस्कान थी, दिल में बेचैनी भी, मेरी तरक्की का असर इतना तो होना ही था, मैंने किसी से ताज नहीं छीना, बस अपने हिस्से की मेहनत पूरी ईमानदारी से की थी।
मेरे बारे में राय बनाने वालों की कमी नहीं, मगर मेरी कहानी उनकी सोच से बड़ी है, मैं वहाँ तक पहुँचा हूँ जहाँ आलोचना भी सम्मान जैसी लगती है, क्योंकि वह भी मेरी मौजूदगी का प्रमाण होती है।
दुश्मन बढ़े तो समझ आया, सफ़र सही दिशा में जा रहा है, पत्थर उसी पेड़ पर फेंके जाते हैं, जिसकी शाखाओं पर कुछ हासिल होने लगा हो।
मैंने नफ़रत को ईंधन बनाया, और तानों को अभ्यास, इसलिए आज मेरी कामयाबी में मेरे विरोधियों का भी थोड़ा योगदान है।
मेरी पहचान मेरे शब्दों से कम, मेरे सफ़र से ज़्यादा बनती है, कुछ लोग आज भी मुझे रोकने की सोचते हैं, और मैं कल से आगे निकलने की तैयारी में रहता हूँ।