रात की शांति में बस इतनी-सी दुआ है,
मेरे अपनों के हिस्से में कोई अनकहा दर्द भारी न हो।
जिसे जो चिंता आज भीतर लिए बैठा है,
ईश्वर उसे संभालने का धैर्य और सुकून दे।
आज किसी अपने की नींद किसी फिक्र की वजह से न टूटे,
मन को हर बात का जवाब इसी रात ढूँढ़ना न पड़े।
जो हमारे बस में नहीं,
उसे ईश्वर के हवाले करके दिल को थोड़ा आराम मिले।
दुआ है घर के हर चेहरे पर सुकून बना रहे,
रिश्तों में ऐसी नरमी रहे कि बात कहने में डर न लगे।
कोई दुख छिपाना पड़े तो भी,
किसी अपने की मौजूदगी उसे अकेला न रहने दे।
ईश्वर उन लोगों की हिफाज़त करे,
जो सबका ख्याल रखते-रखते खुद को भूल जाते हैं।
आज रात उन्हें भी थोड़ा चैन मिले,
और कोई उन्हें बिना पूछे भी अपना समझकर संभाल ले।
जिनसे दूरी है, उनके लिए भी दिल यही कहता है,
जहाँ हों, सुरक्षित हों और मन से शांत हों।
दूरी हमारी पहुँच रोक सकती है,
अपनों के लिए की गई दुआ को नहीं।
आज रात किसी पुराने दुख को इतना अधिकार न मिले,
कि वह आने वाले कल की जगह भी घेर ले।
जो बीत गया उसे स्वीकार करने की ताकत मिले,
और जो सामने है उसे समझदारी से देखने का धैर्य मिले।
मेरी दुआ में सिर्फ खुशहाल दिनों की माँग नहीं,
कठिन दिनों में सही लोगों का साथ भी शामिल है।
हर परिस्थिति बदल जाए, यह जरूरी नहीं,
पर उसे सँभालने का हौसला अपनों के भीतर बना रहे।
ईश्वर उन रिश्तों को महफूज़ रखे,
जिनमें बिना कहे भी एक-दूसरे की फिक्र समझ आती है।
बातचीत में सच्चाई रहे,
और नाराज़गी के बाद भी लौटने की जगह बनी रहे।
आज की रात मन को अपने आप से लड़ना न पड़े,
थोड़ी शांति मिले, थोड़ी राहत मिले।
हर उत्तर आज न मिले तो भी ठीक,
बस भीतर उम्मीद का एक छोटा-सा दीपक बचा रहे।
इस रात की आखिरी दुआ यही है,
मेरे अपने स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और सुकून में रहें।
जिंदगी हर मोड़ पर आसान हो, ऐसा वादा नहीं,
बस ईश्वर की रहमत में उन्हें हर मोड़ पर संभलने की ताकत मिलती रहे।
रात की खामोशी में आज फिर अपनों के लिए हाथ उठे,
माँगा कुछ बड़ा नहीं, बस सबकी सलामती माँगी।
जिन चेहरों से घर की रौनक बनी रहती है,
उनके हिस्से में सुकून और चैन की रात माँगी।
ईश्वर उन थके हुए मनों पर अपनी रहमत रखे,
जो दिनभर अपनी परेशानियाँ कह नहीं पाए।
उनके भीतर इतना भरोसा बना रहे,
कि हर मुश्किल को अकेले सहना जरूरी न लगे।
आज किसी अपने की चिंता नींद से बड़ी न हो,
किसी के मन में कोई डर देर तक ठहरा न रहे।
जो बातें हमारे बस से बाहर हैं,
उन्हें ईश्वर के हवाले करके मन को आराम मिले।
दुआ है अपनों की सेहत बनी रहे,
उनके कदम सही दिशा में बढ़ते रहें।
हर फैसला मनचाहा हो, यह जरूरी नहीं,
पर गलत मोड़ पर भी समझ उन्हें संभालती रहे।
जिनसे दूर हूँ, उनके लिए आज भी यही ख्याल है,
रात कैसी बीत रही होगी, मन चुपचाप पूछता है।
फासले चाहे जितने हों,
अपनों की सलामती दिल के सबसे करीब रहती है।
ईश्वर उन रिश्तों की हिफाज़त करे,
जहाँ शब्द कम हों फिर भी भरोसा गहरा हो।
नाराज़गी आए तो बात करने की गुंजाइश रहे,
और प्रेम किसी छोटी बात से कम न हो।
आज रात हर थका हुआ मन थोड़ा ठहर सके,
हर बेचैन दिल को अपनी जगह मिल सके।
जो खो गया उसे स्वीकार करने की शक्ति मिले,
और जो पास है उसकी कद्र करने का एहसास बना रहे।
मेरी दुआ में सिर्फ खुशियों का नाम नहीं,
सुख के साथ दुख सँभालने की ताकत भी है।
क्योंकि जीवन हमेशा आसान रहे, यह जरूरी नहीं,
बस कठिन दिनों में मन अकेला न पड़े।
रात के इस शांत पहर में एक ही भरोसा है,
जो हमारे हाथ में नहीं, उसे ईश्वर पर छोड़ सकते हैं।
अपनों के लिए भलाई माँगते हुए,
मन भी धीरे-धीरे अपनी बेचैनी से मुक्त हो सकता है।
आज की रात सबके लिए रहमत वाली हो,
घर में सुकून और रिश्तों में मोहब्बत बनी रहे।
सुबह कैसी होगी, यह हम नहीं जानते,
पर दुआ है कि जब आए, हर अपना उसे थोड़े हल्के मन से देख सके।
रात की शांति में आज बस इतनी दुआ है,
जिन अपनों का ख्याल दिल से जाता नहीं, उनकी सलामती बनी रहे।
दिनभर की थकान उनसे दूर हो,
और मन को बिना किसी वजह के थोड़ा चैन मिले।
ईश्वर उनके उन दुखों को भी समझे,
जिन्हें वे मुस्कुराकर सबसे छिपा लेते हैं।
हर परेशानी तुरंत खत्म हो, यह नहीं माँगता,
बस उसे सँभालने का धैर्य उनके भीतर बना रहे।
आज रात किसी अपने का मन डर में न रहे,
जो बातें कल की चिंता हैं, वे आज की नींद न छीनें।
जो हमारे हाथ में नहीं,
उसे ईश्वर के भरोसे छोड़ने की शांति मिल जाए।
मेरी दुआ में बड़ी खुशियों से पहले,
अपनों की सेहत और मन की शांति है।
घर में प्रेम बना रहे,
और किसी अपने को अपने दर्द के साथ अकेला न बैठना पड़े।
जिन्होंने आज सबको संभाला,
रात उन्हें भी बिना किसी जिम्मेदारी के कुछ पल दे।
उनके मन को आराम मिले,
और सुबह उठें तो खुद को थोड़ा हल्का महसूस करें।
कभी-कभी दुआ किसी इच्छा के लिए नहीं होती,
बस किसी अपने की भलाई के लिए होती है।
आज भी ऐसी ही एक दुआ है,
तुम जहाँ भी हो, सुरक्षित रहो और सुकून में रहो।
ईश्वर उन रिश्तों की हिफाज़त करे,
जिन्हें समय और दूरी भी कमजोर नहीं कर पाए।
बातें कम हों तो भी अपनापन बना रहे,
और जरूरत पड़ने पर दिल एक-दूसरे तक पहुँच सके।
आज जिनके मन में कोई अधूरा सवाल है,
उन्हें हर जवाब इसी रात न मिले तो भी चले।
बस भरोसा बना रहे,
कि अनिश्चितता के बीच भी मन को संभालना संभव है।
रात के इस सुकून भरे समय में,
अपनों के लिए कोई बड़ी माँग नहीं रखता।
बस उनके हिस्से में स्वास्थ्य, सम्मान और शांति रहे,
और कठिन दिनों में उन्हें सही लोगों का साथ मिलता रहे।
इस रात की दुआ बहुत सरल है,
ईश्वर मेरे अपनों को सुरक्षित रखे और उनके मन को सुकून दे।
जिंदगी हर इच्छा के मुताबिक चले, यह जरूरी नहीं,
पर उन्हें हर मोड़ पर खुद को संभालने की ताकत और उम्मीद मिलती रहे।
रात की खामोशी में आज फिर यही दुआ निकली,
जिन्हें अपना मानता हूँ, उनकी सलामती बनी रहे।
दिन ने जिन्हें थका दिया है,
उनके मन को रात थोड़ी राहत देती रहे।
ईश्वर उन दिलों पर रहमत बनाए रखे,
जो दिनभर अपनी परेशानियाँ छिपाकर मुस्कुराते रहे।
हर चिंता का हल आज ही मिले, यह जरूरी नहीं,
बस उसे सहने की हिम्मत और भीतर का सुकून बना रहे।
आज रात किसी अपने के हिस्से में डर न आए,
नींद से पहले मन किसी चिंता में उलझा न रहे।
जो बातें हमारे बस से बाहर हैं,
उन्हें ईश्वर की मर्जी पर छोड़ने का भरोसा रहे।
मेरी दुआ में दौलत से पहले सलामती है,
कामयाबी से पहले मन का चैन है।
अपनों के चेहरे यूँ ही मुस्कुराते रहें,
और रिश्तों में प्रेम का एहसास बना रहे।
जिसका मन आज चुप है,
ईश्वर उसकी खामोशी भी समझे।
जिसकी आँखों में थकान है,
उसे बिना कहे थोड़ा सुकून मिले।
रात के इस शांत पहर में बस इतना माँगता हूँ,
मेरे अपनों पर किसी मुश्किल का बोझ अकेला न पड़े।
अगर राह कठिन हो,
तो उन्हें सही फैसला और उसे निभाने का साहस मिले।
कुछ दुआएँ पूरी होने के लिए नहीं,
दिल को भरोसा देने के लिए भी होती हैं।
आज की दुआ बस इतनी है,
जिन्हें चाहूँ, वे जहाँ रहें, सुरक्षित और सुकून में रहें।
ईश्वर हर उस मन को राहत दे,
जो अपनी चिंता किसी से कह नहीं पाया।
हर टूटे हुए भरोसे को नहीं तो,
कम से कम खुद पर भरोसा करने की ताकत जरूर मिले।
आज रात किसी की नींद बेचैनी से न टूटे,
किसी घर में अपनों की चिंता भारी न हो।
हर दिल को अपनी जगह शांति मिले,
और सुबह तक उम्मीद का एक छोटा-सा एहसास बचा रहे।
रात खत्म होने से पहले बस यही प्रार्थना है,
अपनों की सेहत, सुकून और मुस्कान सुरक्षित रहे।
हम हर परिस्थिति को बदल नहीं सकते,
पर ईश्वर से उनके लिए भलाई माँगना कभी बंद न हो।
रात की इस खामोशी में बस इतनी दुआ है,
जिन्हें अपना कहते हैं, उनकी सलामती बनी रहे।
दिनभर की थकान उनके मन से उतर जाए,
और रात उन्हें वह सुकून दे जो शब्दों से नहीं मिलता।
जिस चिंता को कह नहीं पाए,
उसे ईश्वर अपने रहम में जगह दे।
जो बात हमारे हाथ में नहीं,
उसे स्वीकार करने का सब्र और भरोसा दे।
आज रात अपनों पर ऐसी रहमत रहे,
कि मन को बिना वजह किसी डर से लड़ना न पड़े।
स्वास्थ्य उनका साथ दे,
और हर मुश्किल में भीतर से संभलने की ताकत मिले।
ईश्वर से किसी बड़ी खुशी की माँग नहीं,
बस अपनों के चेहरे पर सुकून बना रहे।
रिश्तों में मोहब्बत कम न हो,
और किसी अपने को अपने दुख में अकेला न रहना पड़े।
रात जब सब कुछ शांत हो जाए,
तब मेरी दुआ बस अपनों की भलाई तक रहे।
उनकी राह आसान हो, ऐसा दावा नहीं,
पर हर कठिन मोड़ पर उन्हें सही समझ और हिम्मत जरूर मिले।
जिनके मन में आज बहुत कुछ चल रहा है,
उन्हें रात थोड़ी राहत दे।
हर सवाल का जवाब अभी मिलना जरूरी नहीं,
बस भरोसा रहे कि हर बात को अकेले उठाना जरूरी नहीं।
ईश्वर हमारे अपनों की हिफाज़त करे,
उनके घर में चैन और रिश्तों में नरमी बनाए रखे।
जिस दिल में कोई दर्द छिपा है,
उसे अपनी बात कहने का सुरक्षित सहारा मिले।
आज रात अपनी सारी चिंताएँ ईश्वर को सौंप दें,
जो हमारे बस में था, हमने अपनी तरफ से किया।
अब मन को थोड़ा शांत होने दें,
और आने वाले दिन के लिए उम्मीद बचाकर रखें।
किसी अपने के लिए की गई सच्ची दुआ,
हमेशा किसी बड़ी माँग से शुरू नहीं होती।
कभी बस इतना कहना होता है—
जहाँ भी हो, सुरक्षित रहो और मन से सुकून में रहो।
इस रात मेरी सबसे शांत प्रार्थना यही है,
हर अपना स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे और प्रसन्न रहे।
जिंदगी हर मोड़ पर आसान हो, यह जरूरी नहीं,
पर ईश्वर की रहमत में दिल को ठहरने की जगह मिलती रहे।