Heart Touching Miss You Maa Shayari
माँ, आज भी जब आँख अचानक भर आती है, अक्सर वजह कोई दुख नहीं, तुम्हारी याद होती है।
तुम्हारे जाने के बाद मैंने बहुत लोगों को आते-जाते देखा, पर तुम्हारी जगह कभी खाली नहीं हुई।
माँ, अब समझ आता है कि तुम्हारा बार-बार पूछना "सब ठीक है ना?" कितना बड़ा सहारा था।
जब भी कोई मेरी तारीफ़ करता है, दिल चुपचाप तुम्हें याद कर लेता है, क्योंकि मेरी अच्छाइयों में तुम्हारा हिस्सा है।
माँ, तुम्हारी याद किसी तस्वीर में क़ैद नहीं, वह मेरे व्यवहार, मेरी आदतों और मेरी सोच में रहती है।
आज भी कभी बीमार पड़ता हूँ, तो दवाइयों से पहले तुम्हारी परवाह याद आती है।
माँ, तुम्हारे बिना जीवन की सबसे बड़ी कमी तुम्हारा साथ नहीं, तुम्हारा एहसास है।
कुछ रिश्ते दूर होकर फीके पड़ जाते हैं, माँ का रिश्ता दूर होकर और गहरा हो जाता है।
माँ, तुम्हारी डाँट अब याद आती है, क्योंकि उसमें छिपी चिंता दुनिया की किसी मोहब्बत में नहीं मिली।
जब भी कोई पुरानी बात याद आती है, तुम्हारी मुस्कान सबसे पहले सामने आ जाती है।
माँ, तुम्हारे जाने के बाद मैंने मज़बूत रहना तो सीख लिया, लेकिन बेफ़िक्र रहना भूल गया।
आज भी मन कभी-कभी तुम्हारे कमरे की तरफ़ चला जाता है, जैसे तुम अभी वहीं मिल जाओगी।
माँ, तुम्हारी याद का सबसे सुंदर हिस्सा यह है कि उसमें दर्द से ज़्यादा प्यार है।
कुछ लोग उम्र भर साथ रहते हैं, और कुछ लोग जाने के बाद भी उम्र भर साथ रहते हैं।
माँ, तुम अब मेरे पास नहीं हो, लेकिन मेरी हर दुआ, हर याद और हर मुस्कान में शामिल हो।
माँ, आज भी जब बहुत थक जाता हूँ, दिल को आराम बिस्तर से नहीं, तुम्हारी याद से मिलता है।
तुम्हारे जाने के बाद घर का पता तो वही रहा, लेकिन लौटने का एहसास बदल गया।
माँ, कई बार बिना किसी वजह के तुम्हारी याद आ जाती है, शायद कुछ रिश्ते दिल में ही बसे रहते हैं।
अब कोई यह नहीं कहता "देर हो गई है, कुछ खा लो," और इसी बात में तुम्हारी कमी छिपी है।
माँ, तुम्हारी याद किसी ख़ास दिन नहीं आती, वह तो रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में मिल जाती है।
जब भी कोई मेरी फ़िक्र करता है, मैं अनायास तुम्हारी फ़िक्र को याद करने लगता हूँ।
माँ, तुम्हारे बिना जीना सीख लिया, लेकिन तुम्हें याद किए बिना कोई दिन नहीं गुज़रा।
पुरानी अलमारी, पुरानी तस्वीरें, सब अपनी जगह हैं, बस उन्हें अर्थ देने वाली तुम नहीं हो।
माँ, तुम्हारी कमी का सबसे कठिन हिस्सा यह नहीं कि तुम दूर हो, यह है कि तुमसे बातें नहीं कर सकता।
आज भी कोई अच्छी ख़बर मिलती है, तो दिल सबसे पहले तुम्हारा नाम लेता है।
माँ, तुम्हारे हाथों का स्नेह अब यादों में है, पर उसका सुकून आज भी वैसा ही है।
कुछ लोग चले जाते हैं, लेकिन उनकी मोहब्बत जीवन की आदत बनकर रह जाती है।
माँ, तुम्हारी आवाज़ अब सुनाई नहीं देती, फिर भी कई फैसले तुम्हारी बातों को याद करके लेता हूँ।
जब जीवन बहुत उलझ जाता है, तुम्हारी सादगी भरी सीखें रास्ता दिखाने लगती हैं।
माँ, तुम्हें खोने का दर्द कम नहीं हुआ, बस तुम्हें याद करने का तरीका थोड़ा शांत हो गया है।
माँ, कभी-कभी तुम्हारी याद किसी पुराने गीत की तरह आती है, जो दिल को उदास भी करता है और सुकून भी देता है।
आज भी जब मौसम बदलता है, तुम्हारी वह चिंता याद आती है कि कहीं मुझे सर्दी न लग जाए।
माँ, तुम्हारे जाने के बाद समझ आया कि कुछ लोग सिर्फ़ साथ नहीं होते, वे हमारी आदत बन जाते हैं।
जब भी कोई मुश्किल सामने खड़ी होती है, दिल अनजाने में तुम्हारे साहस को याद करने लगता है।
माँ, तुम्हारी कमी का एहसास सबसे ज़्यादा तब होता है जब कोई खुशी बाँटने का मन करता है।
तुम्हारी आवाज़ अब सुनाई नहीं देती, लेकिन तुम्हारी सीख हर दिन मेरा मार्गदर्शन करती है।
माँ, तुम्हारे हाथों का वह स्नेह आज भी मेरी सबसे सुरक्षित याद है।
कुछ खालीपन ऐसे होते हैं जो भरते नहीं, बस जीना सीख जाते हैं।
माँ, तुम्हारी याद में रोना ज़रूरी नहीं, कई बार मुस्कुराकर भी तुम्हें याद किया जाता है।
आज भी किसी भीड़ में एक अपनापन तलाशता हूँ, और मन तुम्हारे पास पहुँच जाता है।
माँ, तुम्हारी परवाह का कोई विकल्प नहीं मिला, समय ने यह बात और गहराई से समझा दी।
तुम्हारे साथ बिताए साधारण दिन अब मेरी ज़िंदगी की सबसे अनमोल यादें हैं।
माँ, तुम्हारे बिना जीवन आगे बढ़ गया, पर तुम्हारी जगह आज भी वहीं की वहीं है।
जब भी आईने में खुद को देखता हूँ, तुम्हारी कोई आदत मुस्कुराकर सामने आ जाती है।
माँ, तुम्हारी याद अब दर्द से बढ़कर है, वह मेरे जीवन का वह हिस्सा है जिसे मैं खोकर भी अपने भीतर लिए चलता हूँ।
माँ, आज भी जब मन बहुत उलझ जाता है, सबसे पहले तुम्हारी आवाज़ याद आती है, जैसे हर जवाब कभी तुम्हारे पास ही था।
तुम्हारी याद का दर्द यह नहीं कि तुम दूर हो, दर्द यह है कि अब तुम्हें पुकारकर सुन नहीं सकता।
माँ, तुम्हारे बिना भी दिन गुजर जाते हैं, लेकिन कुछ पल ऐसे आते हैं जहाँ दिल सिर्फ़ तुम्हें ढूँढ़ता है।
आज भी किसी अच्छी ख़बर पर सबसे पहले तुम्हें बताने का मन करता है, फिर याद आता है कि अब सिर्फ़ यादें सुनती हैं।
माँ, तुम्हारी कमी शोर नहीं करती, वह चुपचाप हर खुशी में एक खाली जगह छोड़ जाती है।
बचपन में जो हाथ मेरे बाल सँवारते थे, आज उनकी याद ही मेरे बिखरे मन को सँवारती है।
माँ, तुम्हारी डाँट भी याद आती है, क्योंकि उसमें छिपा हुआ अपनापन अब कहीं नहीं मिलता।
कुछ लोग जीवन से जाते हैं, और कुछ लोग जाने के बाद भी जीवन के हर हिस्से में बसे रहते हैं।
माँ, तुम्हारे बिना घर वही है, लेकिन घर जैसा एहसास तुम्हारे साथ ही चला गया।
जब भी बहुत थक जाता हूँ, दिल को तुम्हारी गोद नहीं, उसकी याद ही सहारा दे जाती है।
माँ, तुम्हारी बातें अब भी याद हैं, और अजीब बात यह है कि उम्र बढ़ने के साथ वे और सही लगती हैं।
तुम्हारी याद में सिर्फ़ उदासी नहीं, बहुत सारा प्यार और आभार भी है, जो कभी कम नहीं होता।
माँ, कई बार पुरानी तस्वीरें नहीं, पुरानी आदतें तुम्हारी याद दिला जाती हैं।
आज भी जब कोई पूछता है "सब ठीक है ना?" तो तुम्हारा अंदाज़ सबसे पहले याद आता है।
माँ, तुम कहीं नहीं हो, फिर भी मेरी हर अच्छी याद, हर अच्छे संस्कार और हर सच्ची मुस्कान में मौजूद हो।