Heart-touching Sad Shayari for broken hearts
वो जो कभी मेरी पूरी कायनात हुआ करते थे, आज मेरे लिए बस एक धुंधली सी तस्वीर बनकर रह गए हैं।
तुमने तो बस एक दरवाज़ा बंद किया था, पर तुमने तो पूरी उम्र का रास्ता ही मुझसे छीन लिया।
अब तो किसी से शिकायत करने का भी मन नहीं करता, जब खुद का दिल ही अपनी बात नहीं सुनता।
मैंने खुद को समेटने की लाख कोशिश की, पर हर दफा तुम्हारी याद एक तूफान बनकर बिखर जाती है।
वो जो कहते थे कि हम एक-दूसरे का अक्स हैं, आज वो अक्स भी खुद को मुझसे अलग कर चुका है।
मेरी बातों में अब वो पहले वाली सादगी नहीं रही, अब तो बस लफ्जों में एक अनकहा सा बोझ होता है।
वो जो मुझे समझते थे, उन्हें ही अब मुझ तक पहुँचने का रास्ता नहीं मिलता, मैंने दीवारें इतनी ऊँची बना ली हैं।
नींद तो अब बस एक पलक झपकने जैसी है, बाकी वक्त तो तुम्हारे दिए उन सवालों के जवाब ढूँढने में बीतता है।
हम दोनों के बीच अब सब कुछ वैसा ही है, बस वो जो बीच का रिश्ता था, वो राख हो चुका है।
महफिल में लोग मुझसे मेरी मुस्कुराहट का राज पूछते हैं, मैं खामोश रहकर बस अपनी तन्हाई को और गहरा कर लेता हूँ।
वो जो कल तक मेरी हर सांस में शामिल था, आज मेरी खामोशी को भी पहचान नहीं पाता।
इतनी तो जगह भी नहीं छोड़ी उसने मेरे भीतर, कि मैं अपनी तन्हाई को कहीं और बिठा सकूँ।
शाम ढलते ही ये कमरा गवाह बन जाता है, कि कैसे मैं खुद को यादों के टुकड़े देकर बहलाता हूँ।
तुमसे दूर होकर भी कहाँ दूर हो पाया हूँ, खुद की ही परछाई में अब तुम्हारा अक्स ढूंढता हूँ।
अब तो आईने से भी नज़रें चुराने लगा हूँ, कहीं वो मेरी आँखों में छिपे उस सन्नाटे को न पढ़ ले।
अजीब इत्तेफाक है, वो याद भी आता है और जख्म भी देता है, जैसे कोई पुरानी किताब जिसे पढ़ना अब मुमकिन न हो।
मैंने कोशिश तो बहुत की कि एक नया कल लिखूँ, पर मेरे हर पन्ने पर आज भी तुम्हारा ही नाम दर्ज है।
भीड़ तो आज भी मेरे साथ चलती है हर कदम पर, बस उस भीड़ में तुम्हारा हाथ न होने की कमी खलती है।
तुम तो चल दिए अपना हिस्सा लेकर जिंदगी का, मैं यहाँ उन टुकड़ों को जोड़कर एक ढोंग जी रहा हूँ।
रातें तो बस एक बहाना हैं, असली तकलीफ तो वो है जो दिन भर अंदर ही अंदर दफन रहती है।
वो जो कभी मेरी रूह में उतर जाया करते थे, आज मेरी रूह उनसे ही एक फासला बनाना चाहती है।
तुम्हारे जाने के बाद ये घर अब घर नहीं लगता, यहाँ हर कोने में तुम्हारी चुप्पी की गूँज सुनाई देती है।
कितना कुछ था जो लफ्जों में कहना बाकी था, पर अब वो सब एहसास बस मेरी नींदों का हिस्सा बन गए हैं।
मैं तो अब खुद से भी गुफ्तगू नहीं कर पाता, तुमने जो मुझे मेरा ही नहीं छोड़ा।
उसे भूलना इतना भी आसान न था जितना सोचा था, वो मेरी हर आदत में इस तरह बसा है जैसे कि मैं खुद।
वो मुस्कुराहटें अब बस एक मुखौटा बनकर रह गई हैं, जिसे पहनकर मैं दुनिया को अपने ठीक होने का यकीन दिलाता हूँ।
आज भी जब रास्ते में वो जगह आती है, मेरे पैर खुद-ब-खुद थम जाते हैं, जैसे अब भी तुम्हारा इंतज़ार हो।
मोहब्बत खत्म होने का मतलब ये नहीं कि यादें मर जाएं, मतलब ये है कि अब उन यादों के साथ जीना एक सजा है।
तुमने तो कह दिया कि अब खुश रहना, पर क्या कभी सोचा है कि मेरी खुशी तो तुम्हारे नाम पर ही खत्म हुई थी।
आज फिर एक पुराना खत हाथ लगा है, लिखा तो मैंने था, पर लगता है जैसे किसी और का दर्द पढ़ रहा हूँ।
Bikhre huye tukdon ko sametne ki koshish mein, Maine khud ko hi kahi kho diya hai.
Ab toh wo purani galiyaan bhi anjaan lagti hain, Jaha kabhi hum tumhara naam lekar ruk jate the.
Tumhare jaane ke baad ek ajeeb sa sannata hai, Jaise kisi ghar mein lights toh ho par koi rehta na ho.
Log puchte hain kya hua hai tumhein, Main bas halka sa muskura kar keh deta hoon, kuch nahi.
Waqt toh badal gaya hai par ye yaadein wahin khadi hain, Jahan humne ek dusre ka haath chhod diya tha.
Tumhari chhod di hui nishaniyon ko samet kar rakha hai, Jaise koi musafir apne adhure safar ki kahani chupa kar rakhta hai.
Raat ke sannate mein aksar tumhara zikr hota hai, Par ab us zikr mein pehle jaisa sukoon nahi milta.
Humne toh unhe apna khuda maan liya tha, Par khuda ko toh kisi aur ki ibadat manzoor thi.
Ab dil dhadakta toh hai par aawaz nahi aati, Shayad ab isme pehle jaisi koi baat nahi bachi.
Khamoshiyon mein bhi tumhara naam gungunata hoon, Jaise koi shakhs adhoore khat ko baar baar padhta hai.
Tumhari tasveer aaj bhi wahi rakhi hai, Bas farq itna hai ki ab main use dekh kar rota nahi.
Zindagi phir se chal padi hai, lekin kuch kadam ruk gaye hain, Wahi kadam jo kabhi tumhare saath chalne ki zid karte the.
Dard tab hota hai jab wo insaan anjaan ban jaye, Jo kabhi hamari har khushi ki wajah hua karta tha.
Maine tumhare lautne ki ummeed toh chhod di hai, Par aaj bhi tumhare naam ka intezar dil mein kaid hai.
Wo jo kehte the ki hum kabhi alag nahi honge, Aaj unhone hi hamare hone ka ehsaas mita diya.
Akelepan ka asli matlab tab samajh mein aata hai, Jab sabke beech hokar bhi tumhari kami khal rahi ho.
Ab toh khud se hi baat karne mein darr lagta hai, Kahi zabaan par phir se tumhara naam na aa jaye.
Mohabbat toh aaj bhi utni hi hai unse, Par ab use jatane ki koi wajah nahi bachi.
Tumhare diye huye zakhm ab bhar toh gaye hain, Par unke nishan ab bhi aaina dekhne par dikhte hain.
Mujhe ab kisi ki shikayat nahi hai tumse, Shayad ab main khud ko hi maaf karna seekh raha hoon.