तुम्हें आख़िरी बार लिखते हुए कोई शिकायत साथ नहीं है,
बस कुछ बातें हैं जिन्हें मन से उतारना बाकी है।
जो हमारे बीच था, वह मेरे लिए सच्चा था,
और जो अब नहीं है, उसे स्वीकार करना भी उसी सच्चाई का हिस्सा है।
कभी चाहा था कि तुम रुक जाओ,
अब चाहता हूँ कि तुम जहाँ रहो, वहाँ सुकून से रहो।
मेरी चाहत तुम्हें बाँध नहीं सकती,
इसलिए आज उसे तुम्हारी राह से अलग कर रहा हूँ।
हमारी कुछ बातें अधूरी रह गईं,
कुछ जवाब शायद कभी मिलेंगे भी नहीं।
फिर भी इस रिश्ते को अधूरा कहकर छोटा नहीं करूँगा,
क्योंकि हर अधूरी चीज़ बेअर्थ नहीं होती।
तुम्हारे साथ बिताए दिनों की कद्र रहेगी,
मगर अब उन्हें दोबारा जीने की कोशिश नहीं करूँगा।
यादें मेरे पास रह सकती हैं,
पर मेरी जिंदगी को आगे बढ़ने से रोकने का हक़ उन्हें नहीं होगा।
अगर कभी मेरी कमी महसूस हो,
तो उसे अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी मत समझना।
हमने जो खोया, वह अपनी जगह दुखद है,
मगर तुम्हें अपनी जिंदगी वैसे ही जीनी है जैसे तुम्हारा मन चाहे।
बहुत समय तक सोचता रहा कि आख़िरी बार क्या कहूँ,
फिर समझ आया कि विदाई को भी सच्चा होने के लिए कम शब्द चाहिए।
बस इतना जान लो,
मैं तुम्हें रोककर नहीं, समझकर जाने दे रहा हूँ।
हमारे बीच जो अच्छा था,
उसे मैं किसी अंतिम बातचीत की कड़वाहट में नहीं खोना चाहता।
कुछ यादें जैसी थीं, वैसी ही रहने दूँगा,
न उन्हें सजाऊँगा, न उनके लिए खुद को दोष दूँगा।
अब तुम्हारी खबर पाने की बेचैनी नहीं रखूँगा,
न अपनी जिंदगी की कोई बात तुम्हें साबित करने की कोशिश करूँगा।
तुम्हारा रास्ता तुम्हारा है,
और अब अपनी राह पर लौटना मेरा काम है।
शायद हम फिर कभी बात न करें,
शायद समय किसी मोड़ पर फिर सामने ला दे।
दोनों में से जो भी हो,
मैं इस बार किसी परिणाम की उम्मीद लेकर नहीं चलूँगा।
तुम मेरे जीवन से जा रहे हो,
लेकिन तुम्हारे साथ बिताया समय मिट नहीं रहा।
मैं उसे अपने अतीत में सम्मान से रख रहा हूँ,
और पहली बार बिना पीछे देखे अपने वर्तमान की ओर लौट रहा हूँ।
बहुत कुछ मन में था जो तुम्हें आख़िरी बार कहना चाहता था,
फिर लगा, कुछ बातें कहने से ज्यादा छोड़ देने में सुकून है।
तुम्हें रोकना अब मेरी इच्छा नहीं,
बस इस रिश्ते को बिना कड़वाहट के विदा करना चाहता हूँ।
हमारे बीच जो था, उसे मैं किसी गलती की तरह याद नहीं करूँगा,
क्योंकि उसमें बिताया समय मेरे लिए सचमुच मायने रखता था।
रास्ते अलग हुए तो दुख हुआ,
मगर हर अलगाव में किसी एक का दोष होना जरूरी नहीं।
कुछ सवाल आज भी मन के किसी कोने में रखे हैं,
पर अब उनके जवाब के लिए तुम्हारे दरवाज़े तक नहीं जाऊँगा।
समय ने इतना तो सिखा दिया,
हर अधूरी बात को पूरा करने के लिए लौटना जरूरी नहीं होता।
अगर कभी हमारी कोई पुरानी बात याद आए,
तो उसे बोझ मत समझना।
मैं भी उन यादों को संभालकर रखूँगा,
मगर उन्हें अपने आज पर हावी नहीं होने दूँगा।
तुम्हें जाते हुए रोक सकता था शायद,
मगर किसी को अपनी जिंदगी में रखने के लिए उसकी इच्छा जरूरी है।
इसलिए आज पहली बार,
तुम्हें जाने देना ही अपने प्रेम का सबसे ईमानदार रूप लगता है।
मेरी तरफ से अब कोई सफाई बाकी नहीं,
न तुम्हारे सामने खुद को सही साबित करने की इच्छा।
जो था, जैसा था, वह मेरा अनुभव था,
और अब उसे स्वीकार करना ही मेरे लिए पर्याप्त है।
कभी तुम्हें यह सोचकर दुख हो कि बातें अधूरी रह गईं,
तो याद रखना, हर रिश्ता अंतिम शब्दों से पूरा नहीं होता।
कुछ लोग बिना आख़िरी उत्तर दिए चले जाते हैं,
और हमें फिर भी अपने भीतर शांति की जगह बनानी पड़ती है।
तुम्हारी जिंदगी अब मेरी मौजूदगी से अलग है,
और शायद यही सच हमें स्वीकार करना होगा।
मैं तुम्हारे रास्ते में लौटकर नहीं आऊँगा,
बस मन से इतना चाहूँगा कि तुम्हारी राह तुम्हें सुकून दे।
तुम्हें भूलने का वादा नहीं करूँगा,
क्योंकि यादों पर वादे नहीं चलते।
बस इतना करूँगा,
तुम्हारी याद आएगी तो पीछे नहीं लौटूँगा।
यह विदाई किसी गुस्से का परिणाम नहीं,
न तुम्हें कुछ महसूस कराने की कोशिश है।
बस अब अपने मन को यह अधिकार देना है,
कि वह तुम्हें सम्मान से विदा करके अपनी जिंदगी में वापस लौट सके।
कहने को बहुत कुछ बचा है,
मगर अब हर बात कह देना जरूरी नहीं लगता।
जो हमारे बीच सच्चा था, वह बिना सफाई के भी सच्चा रहेगा,
और जो खत्म हो गया, उसे शब्दों से फिर जीवित नहीं करना चाहता।
कभी तुम्हें रोक लेने का मन था,
आज बस इतना चाहता हूँ कि तुम अपने फैसले में सहज रहो।
मेरी चाहत अपनी जगह थी,
पर तुम्हारी इच्छा के आगे उसे ठहराना मुझे ठीक नहीं लगता।
हमारी आख़िरी बातचीत में बहुत कुछ अधूरा रह गया,
कुछ बातें मैं कह नहीं पाया, कुछ तुमने शायद सुनी नहीं।
अब उन शब्दों को लेकर कोई शिकायत नहीं,
हर अधूरापन जवाब माँगता रहे, यह भी जरूरी नहीं।
तुम्हारे साथ बिताया समय मेरे लिए महत्वपूर्ण था,
इसलिए उसका अंत भी कड़वाहट से नहीं करना चाहता।
जो अच्छा मिला, उसे याद रखूँगा,
और जो दुख मिला, उससे आगे जीना सीखूँगा।
कभी तुम्हारा नाम किसी बातचीत में आ जाए,
तो मन में पहले जैसी हलचल शायद न हो।
शायद यही संकेत होगा,
कि याद अब घाव नहीं रही, बस बीते हुए समय की पहचान है।
मैंने बहुत देर तक सोचा कि आख़िरी संदेश कैसा होना चाहिए,
फिर समझ आया कि सच्ची विदाई में बड़े शब्दों की जरूरत नहीं।
बस इतना कहना काफी है,
मैं तुम्हें रोक नहीं रहा और खुद को भी पीछे नहीं छोड़ रहा।
तुम्हारी जिंदगी में मेरी जगह अब नहीं,
यह बात स्वीकार करने में समय लगा।
अब उस जगह को वापस माँगने की इच्छा नहीं,
क्योंकि कुछ दूरियाँ सम्मान से रखी जाएँ तो मन हल्का रहता है।
हम फिर कभी बात करें या नहीं,
इसका फैसला समय पर छोड़ देता हूँ।
आज की जरूरत बस इतनी है,
कि जो रिश्ता था उसे बिना कटुता के विदा कर सकूँ।
तुम्हें लेकर मन में कोई बद्दुआ नहीं,
क्योंकि कभी तुम मेरे लिए बहुत मायने रखते थे।
अब भी तुम्हारी भलाई की इच्छा है,
बस उसमें तुम्हारे पास लौटने की अपेक्षा शामिल नहीं।
शायद आख़िरी संदेश का सबसे सच्चा अर्थ यही है,
कि मैं तुम्हें कुछ साबित करने नहीं आया।
तुम अपनी राह पर शांति से चलो,
और मैं अपनी राह पर खुद को फिर से पूरा करने निकलता हूँ।
बहुत कुछ कहना था, मगर शायद हर बात कह देना जरूरी नहीं होता,
कुछ भाव अपने भीतर समझ लेने से भी उनका बोझ कम हो जाता है।
इसलिए आज जो लिख रहा हूँ,
वह तुम्हें रोकने के लिए नहीं, खुद को विदा कहने के लिए है।
हमारे बीच जो अच्छा था, उसे मैं छोटा नहीं करूँगा,
और जो अधूरा रह गया, उसके लिए तुम्हें दोष भी नहीं दूँगा।
हमने जितना साथ जिया,
उतना ही हमारी कहानी का सच्चा हिस्सा था।
कभी मन हुआ कि आख़िरी बार पूछूँ, ऐसा क्यों हुआ,
फिर लगा, हर रिश्ते को समाप्त होने के लिए पूरा उत्तर नहीं मिलता।
कुछ सवाल हमारे साथ रहते हैं,
और समय धीरे-धीरे उन्हें स्वीकार में बदल देता है।
तुम्हारे साथ बिताए दिनों की कद्र रहेगी,
भले अब उन दिनों में लौटने का कोई रास्ता नहीं।
जो खुशी तब मिली थी,
उसे सिर्फ इसलिए झूठा नहीं कह सकता कि आज तुम मेरे साथ नहीं हो।
अगर कभी हमारी कोई पुरानी बात याद आए,
तो उसे बोझ बनाकर मत रखना।
मैं भी उन यादों को किसी शिकायत की तरह नहीं रखूँगा,
वे बस उस समय की निशानी रहेंगी जब हम एक-दूसरे के बहुत करीब थे।
आज पहली बार तुम्हें कुछ समझाने की इच्छा नहीं,
न अपनी तरफ की कहानी साबित करने की।
जो महसूस किया, वह मेरा सच था,
और उसे तुम्हारी स्वीकृति की जरूरत अब नहीं रही।
शायद यही आख़िरी बात सबसे कठिन है,
कि मन में अपनापन रहते हुए भी किसी को जाने दिया जाए।
तुम्हारी राह तुम्हारी है,
और अब अपनी राह पर लौटना मेरी जिम्मेदारी है।
मैं तुम्हारे भविष्य के लिए कोई दावा नहीं,
बस एक शांत-सी शुभकामना लेकर जा रहा हूँ।
जहाँ भी रहो,
तुम्हें ऐसे दिन मिलें जिनमें तुम्हें अपने फैसलों पर सुकून महसूस हो।
हमारी अधूरी बातचीत को अब वहीं रहने देता हूँ,
हर रुके हुए वाक्य को पूरा करना जरूरी नहीं।
कभी-कभी चुप्पी ही वह जगह होती है,
जहाँ दो लोग बिना और चोट दिए एक-दूसरे से विदा हो जाते हैं।
अगर इस रिश्ते से कुछ मेरे साथ रहेगा,
तो वह तुम्हारी कमी नहीं, उससे मिली समझ होगी।
मैंने प्रेम करना सीखा,
और अब उसी प्रेम के साथ छोड़ देना भी सीख रहा हूँ।
तो इसे कोई कठोर अंत मत समझना,
बस एक ऐसी जगह समझना जहाँ से दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ें।
तुम्हारी याद रहे तो रहे,
मगर अब मेरी जिंदगी भी अपनी पूरी जगह लेकर मेरे साथ चलेगी।
बस इतना कहना था कि जो था, मेरे लिए सच्चा था,
इसलिए उसके खत्म होने के बाद भी उसे झूठा नहीं कहूँगा।
तुम्हें रोकने के लिए नहीं लिख रहा,
बस अपने भीतर बची कुछ बातें शांत करना चाहता हूँ।
बहुत कुछ कहना था, मगर सही समय कभी मिला नहीं,
और अब शायद उन बातों का समय भी निकल चुका है।
इसलिए जो अनकहा रह गया,
उसे शिकायत नहीं, हमारी कहानी का एक अधूरा हिस्सा मानकर छोड़ रहा हूँ।
तुम्हारे साथ बिताए अच्छे दिनों के लिए शुक्रिया,
और उन दिनों के लिए भी जो हमें कुछ समझाकर गए।
हर रिश्ता मंज़िल तक पहुँचे, यह जरूरी नहीं,
कुछ रिश्ते हमें रास्ते की अहमियत समझाकर विदा होते हैं।
अगर कभी मेरा नाम तुम्हें याद आए,
तो उसे किसी अधूरे वादे की तरह मत देखना।
हमने जो महसूस किया था, वह अपनी जगह सच्चा था,
और अब उसे वहीं सम्मान से रहने देना ही बेहतर है।
मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई हिसाब बाकी नहीं,
न कोई ऐसा सवाल जिसका जवाब तुम्हें देना ही पड़े।
जो समझना था, समय ने समझा दिया,
और जो स्वीकार करना था, वह अब धीरे-धीरे मन स्वीकार कर रहा है।
कभी लगा था आख़िरी बार बात होगी तो सब आसान हो जाएगा,
पर कुछ विदाइयाँ शब्दों से हल्की नहीं होतीं।
फिर भी आज इतना कह पा रहा हूँ,
कि तुम्हें जाने देना अब तुम्हें रोकने से ज्यादा सही लगता है।
मैं तुम्हारी जिंदगी में अपनी जगह माँगकर नहीं जाना चाहता,
न अपने जाने को तुम्हारे लिए बोझ बनाना चाहता हूँ।
बस हमारी यादों को इतना सम्मान देना,
कि उनमें बिताया समय कभी किसी पछतावे जैसा न लगे।
जो कहना था, शायद पूरा नहीं कह पाया,
पर अब हर अधूरी बात को पूरा करना भी जरूरी नहीं।
कुछ शब्द दिल में रहकर भी अपना काम कर देते हैं,
वे हमें बताते हैं कि हमने कभी किसी रिश्ते को पूरी सच्चाई से जिया था।
आज के बाद अगर रास्ते अलग रहें,
तो इसे हार मत समझना, न मैं समझूँगा।
कुछ दूरियाँ रिश्ते की अहमियत कम नहीं करतीं,
वे बस यह स्वीकार करना सिखाती हैं कि अब आगे अलग चलना है।
मैं तुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा लेकर नहीं जा रहा,
बस तुम्हारे लिए मन में बुरा कुछ भी नहीं रख रहा।
तुम्हारी जिंदगी तुम्हारी रहे,
और मेरी शांति अब मेरी—शायद यही हमारी सबसे शांत विदाई है।
यहाँ कोई शिकायत खत्म नहीं हुई,
बस शिकायत रखने की जरूरत खत्म हो गई है।
तुम मेरे जीवन का एक अध्याय थे,
और आज पहली बार उसे बंद करते हुए भी उसके अच्छे पन्नों के लिए मन में कृतज्ञता है।