जब भी किसी महत्वपूर्ण काम के लिए घर से निकलता हूँ,
तुम्हारा माथे पर हाथ रख देना
मुझे किसी जीत का भरोसा नहीं देता था,
बस यह एहसास देता था कि मैं अकेला नहीं हूँ माँ।
तुम्हारी दुआओँ ने मुझे कभी घमंडी नहीं होने दिया,
क्योंकि हर उपलब्धि के साथ
तुमने विनम्र रहना भी सिखाया,
और यही सबसे बड़ा आशीर्वाद निकला।
कई बार जीवन ने उम्मीद से कठिन प्रश्न पूछे,
पर तुम्हारे विश्वास ने
मुझमें उत्तर खोजने का धैर्य बनाए रखा माँ।
तुम्हारा आशीर्वाद किसी चमत्कार की तरह नहीं,
एक दीपक की तरह है,
जो अँधेरा मिटाता नहीं,
पर रास्ता दिखाता रहता है।
जब लोग मेरे आत्मविश्वास की बात करते हैं,
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
उन्हें क्या पता,
उसकी जड़ें तुम्हारी दुआओँ में हैं माँ।
तुमने हर बार मेरे लिए प्रार्थना की,
लेकिन कभी यह नहीं माँगा
कि रास्ते आसान हो जाएँ,
तुमने बस मुझे मज़बूत होने की दुआ दी।
मेरी सबसे बड़ी पूँजी
कोई जमा की हुई दौलत नहीं,
वह विश्वास है
जो तुम्हारे आशीर्वाद ने मेरे भीतर बोया है।
जब भी किसी मोड़ पर सही और आसान में चुनना होता है,
तुम्हारी सीख और तुम्हारी दुआ
मुझे सही दिशा की तरफ़ झुका देती है माँ।
तुम्हारे आशीर्वाद का असर
सिर्फ़ मेरी उपलब्धियों में नहीं,
मेरे व्यवहार में भी दिखता है,
जहाँ सम्मान और संवेदना अब भी बची हुई है।
कई बार गिरकर संभलने के बाद समझ आया,
हिम्मत हमेशा शोर नहीं करती,
कभी-कभी वह माँ की वह दुआ होती है
जो भीतर चुपचाप खड़ी रहती है।
तुम्हारा प्रेम मुझे सुरक्षा देता है,
और तुम्हारा आशीर्वाद संतुलन,
इसीलिए कठिन समय में भी
मैं पूरी तरह बिखर नहीं पाता माँ।
जब मैं अपने बच्चों के लिए अच्छा सोचता हूँ,
तब तुम्हारी प्रार्थनाओं की गहराई समझ आती है,
क्योंकि माँ की चिंता में
स्वार्थ का एक कण भी नहीं होता।
तुमने मेरे लिए जो शुभकामनाएँ माँगीं,
उनका हिसाब शायद कभी नहीं हो सकता,
मगर उनके सहारे तय किए गए रास्ते
मेरे जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।
हर उम्र में इंसान को किसी सहारे की ज़रूरत होती है,
बचपन में हाथ का,
और बड़े होने पर विश्वास का,
मुझे दोनों तुमसे मिले माँ।
अगर जीवन एक लंबी यात्रा है,
तो तुम्हारा आशीर्वाद उस छाया की तरह है
जो हर समय दिखाई नहीं देती,
लेकिन धूप को सहने की ताक़त देती रहती है माँ।
जब भी किसी नए रास्ते पर कदम रखता हूँ,
दिल में घबराहट तो होती है,
मगर तुम्हारे कहे हुए
"सब अच्छा होगा" से हिम्मत भी साथ चल पड़ती है माँ।
मेरी मेहनत मेरी है,
पर उसे टूटने से बचाने वाला भरोसा तुम्हारा है,
कई बार जीत से पहले
तुम्हारे आशीर्वाद ने मुझे संभाला है।
ज़िंदगी की भीड़ में जब सब कुछ उलझ जाता है,
तुम्हारी दुआएँ किसी सलाह की तरह नहीं,
एक सुकून की तरह याद आती हैं,
जो मन को फिर संतुलित कर देती हैं।
तुमने कभी बड़े-बड़े वादे नहीं किए,
बस जाते समय इतना कहा,
"अपना ध्यान रखना,"
और वही शब्द आज भी मेरे साथ चलते हैं माँ।
हर सफलता के बाद जब लोग बधाई देते हैं,
तो मुझे उन अनगिनत सुबहों का ख़याल आता है,
जब तुमने चुपचाप मेरे लिए शुभकामनाएँ माँगी होंगी।
कई मुश्किलें ऐसी थीं
जिनका हल मुझे दिखाई नहीं देता था,
मगर तुम्हारे विश्वास ने
मुझे हार मानने से बचाए रखा माँ।
तुम्हारा आशीर्वाद मुझे ऊँचा उड़ना नहीं सिखाता,
वह मुझे ज़मीन से जुड़े रहना सिखाता है,
ताकि उपलब्धियाँ सिर पर नहीं,
चरित्र में दिखाई दें।
जब कभी मन बहुत थक जाता है,
तो तुम्हारा हाल पूछना भी राहत बन जाता है,
जैसे माँ की आवाज़ में
एक अलग ही तरह की शांति बसती हो।
मेरे लिए तुम्हारी दुआओँ का अर्थ
सिर्फ़ सफलता नहीं है,
वे यह भरोसा हैं
कि कोई बिना शर्त मेरे लिए अच्छा सोचता है।
तुम्हारी चिंता कभी बोझ नहीं लगी,
क्योंकि उसमें नियंत्रण नहीं,
सिर्फ़ अपनापन था,
और वही अपनापन आशीर्वाद बनकर साथ रहा।
दुनिया ने मुझे प्रतियोगिता सिखाई,
तुम्हारे आशीर्वाद ने करुणा सिखाई,
वरना केवल आगे बढ़ जाना ही
जीत नहीं कहलाता माँ।
जब-जब मैं किसी और की मदद कर पाता हूँ,
तो लगता है तुम्हारी दुआएँ
सिर्फ़ मेरी रक्षा नहीं करतीं,
वे मुझे बेहतर इंसान भी बनाती हैं।
तुम्हारा हाथ सिर पर हो,
तो समस्याएँ छोटी नहीं हो जातीं,
लेकिन उन्हें देखने का साहस बड़ा हो जाता है,
और यही तुम्हारे आशीर्वाद की सबसे बड़ी ताक़त है माँ।
कभी-कभी सोचता हूँ,
मैंने तुम्हें क्या दिया है,
फिर याद आता है,
मैं आज जो कुछ अच्छा हूँ,
वह भी तो तुम्हारी दुआओँ की कमाई है।
जीवन में बहुत सी चीज़ें समय के साथ बदल जाती हैं,
लोग, हालात और प्राथमिकताएँ भी,
मगर एक माँ का आशीर्वाद ऐसा सहारा है,
जो उम्र बढ़ने के साथ और अधिक मूल्यवान लगता है।